Wednesday, 7 January 2026

हनुमान दिव्य पंख की चोरी से व्याकुल हैं Ishant Sankat Mochan Mahabali Hanuman 282 Pen Bhakti

[संगीत] तुम्हें अपने पिता को बंदी नहीं बनाना चाहिए था पुत्र क्या करता मैं वृद्धावस्था के कारण उनकी बुद्धि काम नहीं कर रही थी मेरी बात नहीं मान रहे थे आप ही बताइए वृद्धावस्था में युवाओं की बात माननी चाहिए ना आप ही बताइए महाराज काका केसरी जी पुत्र अभी भी समय है अपने पिता के चरणों पर गिरकर उनसे क्षमा याचना कर लो मैं उनसे निवेदन करूंगा कि वे तुम्हें क्षमा कर दें क्या क्षमादान [संगीत] मुझे आपके निवेदन पर आप स्वयं को अत्यधिक महत्व दे रहे हैं महाराज केसरी [प्रशंसा] जी ओ मैं जानता हूं क्यों क्योंकि आपका पुत्र हनुमान को चमत्कार दिखा सकता है आपको मेरे पिता से अत्यंत प्रेम है ना ठीक है भैया क्या आशय है आपका रहने दो पुत्र सुग्रीव जब परिवार के बालक पद भ्रष्ट हो जाए तो बड़ों का कर्तव्य है कि उन्हें उचित मार्ग पर ले आए [संगीत] बहुत घमंड है ना तुम्हें पुत्र वाली अपनी वीरता पर तो आओ मेरे साथ द्वंद युद्ध करके अपने सामर्थ्य को सिद्ध करो मुझे पराजित करके यह क्या कहीं इस युद्ध से कुछ अनिष्ट ना हो जाए मित्र भूषण कहां हो त्र भूषण तुम लोग श्र इन् यहां से लेकर जाओ मैं इस वानर बालक को संभाल [संगीत] लूंगा मित्र भूषण तुम कहा [संगीत] हो मुझे क्षमा कर दे पिता श्री आपके प्राण रक्षा हेतु मुझे इतना बड़ा छल करने पर बाध्य होना पड़ा मुझे क्षमा कर [संगीत] दे छोड़ दो मुझे छोड़ दो छोड़ो दुष्टों छोड़ दो भयभीत हो गया वाली आपकी चुनौती से देखिए कैसे भय के कारण कंपन हो रहा है मेरे शरीर में का का केसरी आप तो पलक झपकते ही वाली से पराजित हो जाएंगे अभी उसके पश्चात शीघ्र ही उस दिव्य पंख को प्राप्त कर पराजित करेगा वाली आपके पुत्र हनुमान को [संगीत] मुझसे द्वंद युद्ध करने का दुस्साहस कर रहे हैं आप काका केसरी जी काका केसरी वाली भैया की शक्ति से अनभिज्ञ है इस युद्ध में अगर वाली भैया ने काका केसरी की आधि शक्ति ले ली तो व अनर्थ हो जाएगा मेरी छोटी सी भूल से इतना बड़ा अनर्थ हो गया मुझे मित्र भूषण को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए था भूल नहीं थी वो षड्यंत्र था वह नाग बालक स्वच्छा से गया है अन्यथा इतने प्रयासों के पश्चात हम उसे अवश्य ढूंढ लेते जब मैंने अपना संदेह व्यक्त किया था तब किसी ने मेरे ऊपर विश्वास नहीं किया तो आप ही उत्तर दीजिए यदि उस नाग बालक के यहां आने का कोई अभिप्राय नहीं था तो वह कहां चला गया अचानक मेरी शक्ति क्षण क्यों हो गई काका केसरी यहां आप बाली की शक्ति से अपने आप को बचा नहीं पाएंगे और वहां गरुण राज्य में आपका का पुत्र हनुमान मेघसर के षड्यंत्र से बच नहीं पाएगा सेनापति चित्रकेतु आपको किसी पर निराधार आरोप लगाने का कोई अधिकार नहीं है महाराज आपको तो ज्ञात है कि हमारी सुरक्षा व्यवस्था कितनी सुदृढ़ है हमारा दुर्ग अवैध है मेरी आज्ञा के बिना हमारे दुर्ग की सीमाओं को कोई नहीं लांग सकता तो वो नाग बालक कहां चला गया शांति प्रस्ताव उस नाग बालक का हमारे यहां अतिथि बनकर रहना और रात्रि के अंधकार में विलीन हो जाना एक महा षड्यंत्र का संकेत है सेनापति चित्रकेतु आप शांत रहिए आप मुझे शांत कर रहे हैं महाराज किंतु आप स्वयं विचार कीजिए वह कौन सी वस्तु है जो नाग हमसे प्राप्त करना चाहते हैं हमारे पास ऐसा क्या है जो हमें उन नागों से अधिक बलवान बनाता है हमारी विद्या हमारे वान का रहस्य है ऐसा क्या वरदान पा लिया है इसने सुग्रीव कारागृह में डाल दो इन्ह इससे पराजित होना ही एक मात्र उपाय था अपने मित्र राज से मिलने कारी सफल हुई मुझे दिव्य पंख की सुरक्षा की चिंता सता रही है सेनापति चित्रकेतु आप आम नागरिकों की भावनाओ को उत्तेजित करने का कार्य मत कीजिए हम तत्काल जाकर देखते हैं और उन पंखों का निरीक्षण करते हैं हमें प्रमाण मिल जाएगा महाराज आप तो 100 योजन की दूरी तक देख सकते हैं आप यहीं से क्यों नहीं देख लेते महाराज की दृष्टि पर्वत को नहीं भेद सकती दिव्य पंख अपने स्थान पर है या नहीं यह तो वहां जाकर ही प्रमाणित होगा प्रमाण चाहिए प्रमाण चाहिए प्रमाण चाहिए हम पवत जाएंगे जाए जाएंगे [संगीत] मुझे अपने पुत्र पर बहुत गर्व था केसरी जी अपनी तपस्या से उसने अनेकों वरदान प्राप्त किए हैं अवश्य ही किसी ने उसे कुमार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया है अन्यथा मेरा पुत्र वाली अपने पिता को बंद नहीं बना सकता बाली को मैं अपने पुत्र हनुमान के समान प्रेम करता हूं किंतु दुर्भाग्यवश वो पत भ्रष्ट हो गया है और उसे नैतिक मार्ग पर लाने का कर्तव्य भी हमारा ही है ना केसरी जी यदि ऐसा मेरे साथ किसी और ने किया होता तो मैं उसे अवश्य ही कठोर दंड देता परंतु जो पुत्र मुझे प्राणों से भी अधिक प्रिय है मैं उसे दंड कैसे दे [संगीत] पाऊंगा रिक्षा जी जब पुत्र के हृदय में कु विचार अपना स्थान बना ले तो उसे सन्मार्ग पर लाना भी हमारा ही कर्तव्य है [संगीत] उसे दंडित करके नहीं अपितु प्रेम और वात्सल्य से हमें उसे उचित मार्ग दिखाना [संगीत] होगा जिसके लिए हमें इस बंदी ग्रह से निकलना होगा नहीं केसरी जी जब तक मेरा पुत्र जिसने मुझे बंदी बनाया है वह मुझसे क्षमा मांगकर मुझे स्वयं मुक्त नहीं कर देता मैं बाहर नहीं आऊंगा अन्यथा किष्किंधा के महाराज वाली का बंदी उनकी आज्ञा के बिना कारागृह से बाहर गया तो लोग उसे अक्षम समझेंगे मैं अपने पुत्र के साथ ऐसा नहीं कर सकता कदा भी नहीं परंतु महाराज उसके विवेक को पुनः जागृत करने के लिए हमारे पास यहां से बाहर जाने के अलावा और कोई मार्ग नहीं है दुष्परसकड़ी अथवा लोभ के कारण संतान पथ भ्रष्ट हो सकती [संगीत] है सही मार्ग पर लाने के लिए किए जाने वाले बल के प्रयोग का परिणाम नकारात्मक होगा माता-पिता का कर्तव्य है कि स्वयं के विचार और व्यवहार से अपनी संतान के आदर्श बने और यदि तब भी आवश्यकता हो तो अपनी संतान का जीवन संवारने के लिए साम दाम दंड भेद सबका उपयोग करें जिसके प्रति माता-पिता का सचेत रहना अत्यंत आवश्यक [प्रशंसा] है [संगीत] यह कैसा अनर्थ है गड़ द्वार खुला हुआ है यह गरुड़ प्रहरी मृत कैसे यहां के प्रहरी भी हताहत है यह कैसे संभव है मुझे जिसकी आशंका थी वही हुआ इन प्रहर के देह पर सर्प दंश के चिन्ह और यह वस्तु नाग भूषण के शरीर का आभूषण यहां पड़ा है स्पष्ट है कि वही यहां आया था इस आभूषण को तो मैंने मित्र भूषण के शरीर पर देखा था यह यहां कैसे आया अब भी किसी के हदय में कोई संदेह है कि उस नाग बालक ने ही इस प्रहरी की हत्या की है हमें कोई संदेह नहीं है कोई हमें कोई संदेह नहीं कोई संदेह नहीं कोई कोई हमें कोई संदेह नहीं कोई मित्र भूषण कभी ऐसा नहीं कर सकता परंतु किसका षड्यंत्र है यह और भूषण कहां है सदियों से मेरा परिवार गरुड़ राज्य के गरुड़ दुर्ग की रक्षा करता आया है खग विद्या रहस्य और दिव्य पंख की रक्षा का मेरा दायित्व आज भंग हो गया मैं अगा जीवित क्यों रहूं मैं अभी अपने जीवन का अंत कर लेता हूं रुक जाइए सेना चित्रकेतु जी यह समय विलाप करने का नहीं है हमें सर्वप्रथम अंदर जाकर देखना चाहिए कि दिव्य पंख अपनी जगह है या नहीं हा हा हमें भीतर जाना चाहिए हां हां हमें भीतर जाना चाहिए हा हा हमें भीतर जाना चाहिए हा हा हमें भीतर जाना चाहिए हमें भीतर जाना [संगीत] चाहिए [संगीत] यह तो सर्वनाश हो गया दिव्य पंख अपने स्थान पर नहीं है केवल दिव्य पंखी नहीं महाराज खग विद्या मंत्र और रक्षक आचार्य भी नहीं है कहां गया फिर दिव्य पंख [संगीत] अब तो आपको मेरी बात पर विश्वास हुआ ना महाराज हनुमान के कहने पर ही हम उस नाग बालक भूषण को यहां लेकर आए थे उसी ने नाग बालक भूषण का उत्तरदायित्व लिया था जिसने हमारे साथ इतना बड़ा छल किया को उत्तर देना होगा कोही इस ना को लेक आया था हा हनुमान को उत्तर देना होगा वही इस नाथ को यहां लाया था हा हा हनुमान को उत्तर देना ही होगा वही इस नाथ को इतना कठिन कार्य वो नाग बालक अकेले कर सकता है विश्वास नहीं [संगीत] होता परंतु यह द्वार तो मेरे पंख के संकेत से खुलता है तो नाग भूषण के पास मेरा पंख कहां से आया महाराज जितने समय वो गरुड़ राज्य में रहा आपका पंख पाने के लिए वह समय पर्याप्त था कर सकता था ये भूषण का काम है कोही यह कर सकता था हां ये उसी भूषण का काम है वही ये कर सकता था नहीं महाराज जटायु जी मेरा मित्र नाग भूषण ऐसा कार्य कदा भी नहीं कर सकता यह अवश्य किसी और का षड्यंत्र है और किसी का नहीं हनुमान यह तुम्हारा ही षड्यंत्र [संगीत] है और किसी का नहीं हनुमान यह तुम्हारा ही षड्यंत्र है बालक भूषण संकट में है यह कहकर तुमने हम सबको भ्रमित कर दिया और वह नाग बालक हमारे दिव्य पंख पाने की अपनी गुप्त योजना को पूर्ण कर रहा था सेनापति चित्रकेतु देवों से अभिमंत्रित हनुमान पर संदेह करना स्वयं हम पर संदेह करना है हनुमान हमारे दिव्य पंख हमारे अनत से रोवर है उसका चोरी हो जाना हम गरुड़ के लिए संकट है हम गरुड़ पर महा संकट छाया हुआ है हनुमान हमारी दिव्य शक्ति धीरे धीरे क्ण हो जाएगी यदि अब हमें कोई बचा सकता है तो व है संकट मोचन हनुमान महाराज इस संकट की घड़ी में सारी परिस्थितियां हनुमान के विपरीत है और इसमें आपने मुझ पर विश्वास जया है आपका यह विश्वास टूटने नहीं देगा हनुमान कब होगा यह हनुमान उस दिव्य पंख के बिना हमारे उड़ने की शक्ति क्षीण होने लगेगी निर्बल होने लगेंगे शीघ्र हम सब महाराज महाराज रक्षा कीजिए [संगीत] महाराज रक्षा कीजिए [संगीत] महाराज हमारे उड़ने की शक्ति समाप्त हो चुकी है महाराज रक्षा कीजिए महाराज बहुत पीड़ा हो रही है महाराज हमें बचा लीजिए महाराज बहुत पीड़ा हो रही है हमारे पंखों में हमें बचाइए महाराज देखा महाराज मुझे जिस बात की आशंका थी वही हुआ और यह सब हनुमान की सहायता के बिना संभव नहीं था सम स्थितियों के लिए चित्रकेतु जी मुझ पर ही दोष आरोपण कर रहे हैं स्वयं को दोष मुक्त करना ही होगा

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...