Thursday, 1 January 2026

महादेव ने बेहुला का मार्गदर्शन किया Malkhan Vindhya Vighnaharta Ganesh Episode 814 Pen Bhakti

तो बताओ ईश्वर क्या है उनका स्वरूप क्या है प्रभु तो क्या वो शिव है जिसमें तुम्हारे पति और ससुर की आस्था है या शक्ति है जिनमें तुम्हारे माता-पिता का विश्वास है या फिर देवी मंसा जिनके प्रति तुम्हारी अटूट श्रद्धा है यह प्रश्न तो बहुत जटिल है उत्तर दो बहुला समय नहीं है मेरे पास मुझे देव सभा में पहुंचने के लिए विलंब हो रहा है मैं तुम्हारी चका समझ सकता हूं मि पर शिव भक्त की भक्ति की शक्ति पर विश्वास रखो मैं अपने पुत्र का हित नहीं होने दूंगी देवी मां पर अपने विश्वास को अडिग रखिएगा सदा आपका भला होगा भगवान किसी भी रूप में हो पुत्री उनका मूल तत्व तो एक ही है इसलिए उनके जिस रूप से तुम्हारी भक्ति की डोर बंधे उसी रूप की भक्ति में रम जाऊ फिर वह माता हो या प्रभु महादेव श्री हरि नारायण हो या कोई देवी देवता व निराकार भी है और साकार [संगीत] भी शिव रूप भी या देवी रूप में या फिर किसी साधु के ही रूप में शिव शक्ति नारायण अभेद विभिन्न रूपों में भी इनका तत्व एक ही है आवश्यकता अनुसार अनंत रूप है उनके कभी दुष्टों का संहार तो कभी भक्तों के कर्मों का फल देने के लिए जैसे आज आप मुझे मेरे कर्मों का फल देने के लिए प्रकट हुए हैं मेरा भविष्य मेरा सौभाग्य मेरे भावी जीवन का सुख आप पर आपके निर्णय पर निर्भर है कि मैं और मेरे पति आज आगे बढ़ सकेंगे क्या [संगीत] नहीं पुत्री तुम्ह इस कर्म का फल अवश्य मिलेगा तुमने मेरे सभी प्रश्नों के सर्वथा उचित उत्तर दिए हैं इस यात्रा में तुमने अनेक कष्ट सहे हैं तो अब मैं स्वयं तुम्हें यमलोक पार करवाकर देव सभा में ले [संगीत] जाऊंगा कोट कोटि धन्यवाद प्रभु [संगीत] आओ [संगीत] [संगीत] पुत्र अब दीदी मंसा देव सभा में जा ने के लिए अवश्य मान [संगीत] जाएंगी दीदी बिहुला की यात्रा अवश्य पूर्ण हो गई हो किंतु आगे उन्हें आपकी सहायता की आवश्यकता होगी क्योंकि उन्हें वास्तविक सफलता देव सभा में ही प्राप्त होगी और उसके लिए आपका वहां होना आवश्यक है अनुज गणेश बिना आमंत्रण और देवी पद पाए मैं वहा कैसे जाऊ एक मात्र बेहुला ही है जिसे मुझ पर विश्वास है मेरी पूजा करना तो ूर चंद्रधर मुझे देवी तक नहीं मानता मान लीजिए स्वामी मान लीजिए उन्हे देवी उन्ह देवी मानने से आपकी शिव भक्ति कम नहीं होगी हे मा मंसा देवी मुझे शक्ति प्रदान कीजिए इस मां के हृदय की आ रख लीजिए स्वामी इस मां के आर का मान रख लीजिए स्वामी उसे उसके हृदय के टुकड़े से वंचित मत कीजिए आपकी पल भर की आराधना ड़ भर की पूजा एक मां की झोली भर सकती है स्वामी कर लीजिए ना देवी मनसा की पूजा कर लीजिए मैं आज तक शिव पूजा करता रहा हूं और आगे भी करता रहूंगा मात्र शिव उतरी है वो मेरे लिए कोई देवी मंसा नहीं जिनकी मैं पूजा करूंगा कोई देवी मंसा नहीं जिनकी मैं पूजा कर और तुम चाहते मैं पुन अपना अपमान और अलना सहने के लिए देव सभा जाऊ नहीं अनज मैं कदा भी वहां नहीं [संगीत] जाऊंगी देवी हमें देव सभा के लिए देवलोक जाना होगा चंद्रधर और बला की कथा अब अपने चरम पर पहुंच चुकी है नहीं मैं उन्हें देवी रूप में स्वीकार नहीं करूंगा कदा भी [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] नहीं प्रणाम श्री [संगीत] [प्रशंसा] देव देव सभा में भाग लेना कैसे स्वीकार करेंगी दीदी मंसा [संगीत] यमदेव कौन है य और यह यहां तक कैसे पहुंचे इंद्रदेव [संगीत] वो मैं एक साधारण नारी हूं एक साधारण पत्नी जिसकी शक्ति उसके पति के प्रति उसकी निष्ठा है देवराज मैं अपने पति के प्राणों के लिए य कठिन यात्रा संपन्न कर इस असाधारण देव सभा में आई [संगीत] हूं मैं क्या करू मैं बश क् कीजिए मुझे विश्वास कि आप समस्त देवी देवताओं के दर्शन का सौभाग्य जो आज मुझे प्राप्त हुआ है मेरे सुहाग की भी रक्षा होगी मेरे पति के प्राण उन्हे वापस मिल जाएगी प्रभु अपक्षा मांगती हूं प्रभु मे प के प्राण वापस कर दे प्रभु मुझ पर अपनी कृपा करे मेरे गुहा हे देवाधि देव महादेव अपनी कृपा करे मे पति नित्य पावन मन से आपकी आराधना करते रहे हैं प्रभु क्या इन्ह यह सौभाग्य प्राप्त नहीं होना चाहिए कि व एक साथ आप सबके दर्शन का सुख प्राप्त कर [संगीत] सके हे महान महिमा वान देवी देवता मेरी गुहार सुने की रक्षा करे प्रभु पति के प्राण वापस लौटा [संगीत] दे दीदी आप वहां होंगी तभी बिहुला के साथ न्याय होगा वहां जाओ किस अधिकार से जाओ गणेश एक मां के अधिकार से मां मंसा देवी मेरी रक्षक है मेरी मार्ग दर्शक है और उन्होंने मुझे यहां यहां तक आकर खाली हाथ वापस जाने के लिए नहीं भेजा है मुझ पर आप सब कृपा करें मुझे अब आगन नहीं सुहागन बनाकर विदा कीजिए [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] देवी के अधिकार से नहीं तो एक मां के अधिकार से तो आप देव सभा में सम्मिलित हो ही सकती है दीदी जाइए दीदी जाकर अपनी भक्त अपनी संतान बिहुला की सहायता कीजिए अब शांत क्यों है मेरी वेदना को अपनी दया का कारण बना ले प्रभु मैं आप लोगों से भी मांगती हूं प्रभु इन्ह प्राण दान दे दे मेरे स्वामी आपके भक्त है और इनके पिता श्री अटूट भक्त मेरी प्रार्थना सुन इन्ह इनकी भक्ति का फल देते हे जगत माता हे पालनहार श्री हरि नारायण हे सृष्टि चेता ब्रह्म देव हे सौभाग्य की देवी माता लक्ष्मी हे सरस्वती मां हे महादेव मुझ पर कृपा करे मेरी भक्ति विफल नहीं हो सकती देवी मुझे उसका फल अवश्य मिलेगा नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागा महेश्वराय नित्या शुद्ध दिगंबराय तस्मै नकारा नमः शिवाय हे जगतपिता महादेव इस भरी देव सभा में मैं भी हू ला आपसे आपके भक्त की प्राणों की भीख मांगती हूं प्रभु भीख मांगती [संगीत] हूं आपको मां पुकारा है उन्होंने इतने कष्ट सहकर वहां पहुंची हैं किंतु यदि आप नहीं होंगी वहां तो उन्हें निराश होकर लौटना पड़ेगा आप पर उनके विश्वास का अपमान होगा यह तो नहीं चाहती है ना आप हे भोलेनाथ दया [संगीत] कीजिए मेरे प्रभु को मेरी असीम भक्ति का फल देना ही होगा मेरे पुत्र को जीवित करना ही [संगीत] होगा दया कीजिए प्रभु पुत्री बला तुम्हारे दुख का अनुमान है किंतु तुम्हारी प्रार्थना का मान रखना हमारे वश में नहीं किंतु तुम्हारी प्रार्थना का मान रखना हमारे वश में मेरे प्रभु मेरे महादेव इतने निष्ठुर नहीं बन सकते वो बहुला की प्रार्थना नहीं ठुकरा सकते मेरे पुत्र की भक्ति का फल उससे अधिक मेरी परम भक्ति का फल प्रदान करने से मना नहीं कर सकते प्रभु आप मेरी पुकार नहीं नकार सकते आपको मेरे पुत्र के प्राण लौटाने ही होंगे नहीं मैं यह नहीं कर सकता तुम्हारे पति के प्राण लौटाने का अधिकार तो एक मात्र पुत्री मंसा का ही है तुम्हारे पति के प्राण हटाने का अधिकार तो एक मात्र पुत्री मंसा का ही है तुम्हें पुत्री मंसा से ही पूछना होगा उसी के आशीर्वाद से तुम्हारे पति के प्राण लौट सकते [संगीत] [संगीत] [संगीत] हैं [संगीत] पुत्री प्रणाम बा देवी के अधिकार से नहीं तो एक मां के अधिकार से तो आप देव सभा में सम्मिलित हो ही सकती [संगीत] है [संगीत] मा मा मुझे विश्वास था कि आप मेरी सहायता के लिए निश्चिता की मां चिंता मत करो बकरी अब मैं हूं यहां चिंता कैसे ना करो मां [संगीत] मे स्वामी की दशा देखिए आपको ही मेरी चिंता दूर करनी है पति के प्राण की रक्षा कीजिए मा रक्षा [संगीत] कीजिए दीदी आपकी आपकी पुत्री आपसे कुछ मांग रही है मुझे ज्ञात है वो मुझसे क्या मांग रही है किंतु मैं चाहकर भी वो उसे नहीं दे सकती एक मां की ममता तो सदैव यही चाहती है कि उसकी हर संतान सुखी रहे मैं भी यही चाहती हूं पुत्री किंतु अभी मैं मर्यादा का उल्लंघन नहीं कर [संगीत] सकती पुत्री पक्षपात का आरोप ना लगे इसलिए मैं चाहती हूं मेरी ममता के कारण नहीं तुम्हारी योग्यता से तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होनी चाहिए आदेश कीजिए मां आप जो कहेगी मैं [संगीत] [प्रशंसा] करूंगी पुत्री तुम स्वयं को अभी भी एक सुहागन के रूप में ही देखती हो ना तो फिर सुहागन श्रृंगार वृत्य कर अपने सुहागन होने की योग्यता को प्रमाणित कर अपने सुहागन होने की योग्यता को प्रमाणित कर सुहागन होने की योग्यता प्रण कर ध [संगीत] धधध सुहागन श्रृंगार मृत वो भी मृत पति के साथ ये कैसे संभव मृत पति की देह के सामने उसकी पत्नी को सा श्रंगार करना उचित होगा उस सुहागन श्रंगार त्य करना उचित होगा पुत्री तुम भूख प्यासी रहकर इतनी लंबी और कठिन यात्रा कर यहां पहुंची हो थकी हुई हो और यह नृत्य कर सकोगी तुम श्रृंगार नृत्य पूरे एक प्रहर करना होता है वो भी बिना रुके क्या यह तुम्हारे लिए संभव [संगीत] होगा भीतर का साम कठिनाई आने पर और बढ़ जाता है मैं नृत्य अवश्य करू कर अपने पति के लिए अपने अंतिम शवास तकन श्रंगार त्य केवल पति के साथ ही किया जा सकता है जब पति ही जीवित नहीं तो तुम कैसे करो [संगीत] अवसर और सूर्योदय में एक समानता है पलक झपकते ही हम उनके सुख से वंचित हो जाते हैं संकोच मत कीजिए बेहला यदि आप स्वयं को सुहागन मानती है तो अपने विश्वास पर अटल [संगीत] रहिए [संगीत] मां जब यहां तक आने की आपने शक्ति दी है तो मेरे पति प्रेम को भी बल प्रदान कीजिए जिससे मैं पूरे प्रहर श्रृंगार के साथ सुहागन नित्य रूपी परीक्षा में उत्तीर्ण हो [संगीत] सक [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] परीक्षा कितनी भी कठिन क्यों ना हो यदि उसे गंभीरता और एकाग्रता से दिया जाए तो सफलता अवश्य प्राप्त होती है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...