[संगीत] अपने आत्मबल और आत्मविश्वास से वंचित हो गए हनुमान परंतु मैं तुम्हें अपनी आंतरिक शक्ति जागृत करना सिखाऊंगा यह कौन सी शक्ति है जिसकी चर्चा आप कर रहे हैं भोले बाबा वो शक्ति जिसका परिचय मनुष्य को योग की साधना और उसमें दक्षता प्राप्त करने से होता है जो शक्ति स्वयं तुमसे उत्पन्न होकर तुम्हें संपूर्ण और शशक बनाती है जिससे तुम अपने जन्म का प्रयोजन सिद्ध कर पाओगे हनुमान को यह विशेष शक्ति कैसे प्राप्त होगी भोले बाबा पुत्र उसके लिए तुम्हें योग की पांचों विधाओं अर्थात ध्यान ज्ञान हट कर्म एवं राजयोग में प्रवीण बनना होगा मैं स्वयं तुम्हें ज्ञान और हट हों की शिक्षा दूंगा स्वयं देवाधि देव महादेव हनुमान के गुरु बनेंगे यह तो हनुमान का सौभाग्य है परंतु हे भक्त वत्सल क्या हनुमान यह ज्ञान अवश्य ग्रहण कर सकोगी पुत्र मैं स्वयं तुम्हारा मार्गदर्शन करूंगा तो फिर तुम्हारे लिए क्या असंभव है पुत्र सर्वप्रथम मैं तुम्हें ध्यान योग की शिक्षा दूंगा उससे तुम्हारे चित में शांति और एकाग्रता स्थापित होगी तुम्हें स्थिरता प्राप्त होगी पुत्र स्थिरता ध्यान योग द्वारा प्राप्त स्थिरता योग सिद्धि का आधार है स्थिर चित होकर ही कोई योग की अन्य विधाओं का ज्ञान प्राप्त कर सकता है परंतु भोले बाबा हनुमान समझा नहीं यह स्थिरता क्या है और उसकी क्या आवश्यकता है स्थिरता से गांधीर का विस्तार होता है पुत्र आओ मैं तुम्हें समझाता हूं कहो पुत्र इस सरोवर में तुम्हें क्या दिख रहा है भोले बाबा हमारी प्रति छाया इस शांत निश्चल जल के समान स्थिरता वो मनोदशा है पुत्र जिससे व्यक्ति समस्त भ्रांतियों से मुक्त होकर ना केवल स्पष्ट रूप से जगत का सत्य अवलोकन करने में समर्थ होता है परंतु अपने अंतर से भी परिचित हो जाता है यलो पुत्र इस कंकर को जल में गिरा दो [संगीत] देखो क्या अ भी तुम्हें अपनी प्रति छाया दिखाई दे रही है [संगीत] पुत्र नहीं भोले बाबा जल तो वही है फिर प्रति छाया क्यों नहीं दिखाई दे रही [संगीत] हनुमान वो इसीलिए बोले बाबा हनुमान ने अभी इस जल में कंकर डालकर इसकी स्थिरता को भंग कर दिया है इसमें जल तरंगे उत्पन्न होने लगी है तुम्हारी वर्तमान मानसिक अवस्था कुछ ऐसी ही है ना पुत्र अनेक वंचित विचारों की उथल पुथल से भ्रमित है तुम्हारी बुद्धि जी ध्यान योग से बुद्धि शांत होगी और विचारों की अस्पष्टता दूर होगी तुम्हारा चित्त स्थिर होगा जिससे तुम उचित निर्णय ले पाओगे पूर्ण एकाग्रता और अनुशासन से अपने उद्देश्य प्राप्ति में कार्यरत रहोगे अर्थात कार्य पूर्ति की उचित प्रक्रिया का पालन करोगे और अपनी आंतरिक शक्ति के अनुरूप सफलता प्राप्त करोगे परंतु प्रभु हनुमान वानर बालक है और वानर स्वभाव से ही चंचल होते हैं वह एक स्थान पर या एक विचार पर अधिक समय तक स्थिर नहीं रह सकते तो हनुमान ऐसे में कैसे स्थिरता प्राप्त करें यदि वानर होकर भी तुम इस ज्ञान को सिद्ध कर सके तो संभवत तुम संसार के अन्य प्राणियों के लिए भी एक उदाहरण बन जाओगे हनुमान आओ पुत्र तुम्हारी ध्यान योग की शिक्षा आरंभ करते हैं जो आज्ञ भोले [संगीत] बाबा ध्यान योग का ध्यान प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम ध्यान मुद्रा में बैठना आवश्यक है अर्थात अपने दोनों हाथों को अपने घुटनों पर इस प्रकार रखो जिससे हथेली ऊपर की ओर [संगीत] रहे अंगू और तर्जनी के अव छोर को छुओ जिससे वृत का आकार बन जाए अन्य तीनों उंगलियों एक दूसरे से सटी रहे परंतु उनका मुख बाहर की ओर होना चाहिए यह मुद्रा तुम्हारी भारी देह और अंतरात्मा के संयुक्त होने का प्र है अब उचित मुद्रा प्राप्त करने के पश्चात तुम्हें ओम शब्द का जाप करना है ओम ओम क्या है भोले बाबा इस एक शब्द में ब्रह्मांड का साह निहित है पुत्र सृष्टि की उत्पत्ति के समय श्रवण होने वाली यह प्रथम ध्वनि है पुत्र प्रथम ध्वनि हां पुत्र सर्वप्रथम संपूर्ण ब्रह्मांड में यही एक शब्द गुंजायमान था ओ [संगीत] ओ फिर ओम के अनद नाथ से ही शक्ति का दूसरा स्वरूप प्रस्तुत हुआ दिव्य [संगीत] [संगीत] प्रकाश पो प्रांत इसी विशाल प्रकाश पुंज रूपी शक्ति एवं ओम की ध्वनि से धीरे-धीरे संपूर्ण सृष्टि का जन्म हुआ कांड में ही नहीं संसार के प्रत्येक ध्वनि में ओम की ध्वनि व्याप्त है अंतरिक्ष नक्षत्रों इत्यादि की रचना हुई और पृथ्वी की उत्पत्ति हुई जिसके पश्चात उस पर चर अचर जीवन का जन्म हुआ ओम की अपार महिमा है पुत्र समस्त सृष्टि एवं जीवन की जन्म दयनी है ओम की ध्वनि इसलिए वे संपूर्ण ब्रह्मांड में सदैव गूंजती रहती है मात्र ब्रह्मांड में ही नहीं संसार के प्रत्येक ध्वनि में ओम की ध्वनि व्याप्त है अद्भुत मेघों से गिरकर पृथ्वी से टकराने वाली बूंदों ने पवन प्रवाह में पत्तों की सरसराहट पक्षियों की चह चाहट के संगीत में ओम ही ओम व्याप्त है यहां तक कि हमारे प्रत्येक श्वास में ओम की ध्वनि प्रसारित होती है [संगीत] ओ प्रभु हनुमान को भी ओम की ध्वनि का आभास सो रहा है शीघ्र ही तुम उसके अभ्यस्त हो जाओगे पुत्र और तब तुम्हें ज्ञात होगा ओम की ध्वनि का उच्चारण हमारे तन मन और आत्मा को पावन कर देता है जीव को जीवात्मा से जोड़ने का माध्यम बनती है ओम की ध्वनि प्रभु फिर तो मैं शीघ्र इसका उच्चारण प्रारंभ कर देता हूं [संगीत] ओ ओ ओ [संगीत] ओ [संगीत] ओ [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] ओ [संगीत] अपने नेत्र खोले बिना मुझे बताओ पुत्र हनुमान तुम्हें अपने समीप क्या अनुभव हो रहा है भोले बाबा हनुमान को बढ़ते ताप का आभास हो रहा है और एक तितली हनुमान के मस्तक के समीप घूम रही है वो उसकी नासिका पर बैठना चाहती है और एक गिलहरी मेरा ध्यान भंग करने का प्रयत्न कर रही है और हां वायु का प्रवाह और पत्तों की सरसराहट इतना सब अनुभव हो रहा है हनुमान को अपने नेत्र खोलो पुत्र [प्रशंसा] [संगीत] देखो ना पुत्र ना ही कोई गिलहरी और ना ही तितली यदि तुम एकाग्रता से ध्यान करोगे तो सूर्य का ताप पत्तों की सरसराहट का सेत तुम्हारे लिए मिट जाएगा अपनी रीड को सीधा कर पुनः प्रयास करो पुत्र अपने नेत्र को बंद कर अपने श्वास पर नियंत्रण प्राप्त करो पुत्र अपने मस्तक पर स्थित अपने नेत्रों के मध्य के स्थान पर अपना ध्यान केंद्रित करो पुत्र तब तुम्हारे समक्ष धवल ज्योति उत्पन्न होगी ओम के उच्चारण के साथ उस ज्योति पर अपना ध्यान केंद्रित करने का प्रयत्न कर आंतरिक स्थिरता प्राप्त करने की चेष्टा करो पुत्र [संगीत] [संगीत] और रात प्रभात आवे और जावे हनुमत बर बस ध्यान लगावे ओम निरंतर जपत हनुमंता पावे हे तू चित स्थिरता शिव शंभो जब शिवांश संगी किस विध होवे विफल बजरंगी राम काज पूर के प्रयोजन जप तब सब करी केसरी नंदन धा महाबली हनुमत की रच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान प्रतीत होता है हनुमान को ध्यान पद्धति का ज्ञान हो रहा है परंतु मुझे अभी भी संदेह कि हनुमान का चंचल चित पूर्ण स्थिरता प्राप्त कर सकेगा इस बात का निर्णय तो समय आने पर स्वता हो जाएगा [संगीत] देवराज अब दिगपाल को द्वारा हनुमान की परीक्षा का समय आ गया है जल का प्रयोग सर्वाधिक सहजता से किसी का ध्यान भंग कर सकता [संगीत] है प्रणाम [संगीत] प्रभु हनुमान मेरी कामना है पुत्र मेरी असफलता तुम्हारी सफलता प्रमाणित करे पुत्र वरुण देव सफलता और असफलता का निर्धारण मत कीजिए आप मात्र अपने कर्तव्य का निर्वाह [हंसी] [संगीत] कीजिए [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] नारायण [संगीत] नारायण प्रभु मेरे प्र को विफल कर हनुमान मेरी परीक्षा में उत्तीर्ण [संगीत] रहा प्रणाम महादेव आपका कल्याण हो वायु देव मुझे ज्ञात है आप हनुमान का ध्यान भंग करने में संकोच कर रहे हैं परंतु वायु देव क्या आपकी इच्छा नहीं है कि आपका पुत्र सर्वश्रेष्ठ प्रमाणित हो और श्रेष्ठ वही सिद्ध होता है जो कठिन परीक्षा में सफल हो अपने पुत्र के प्रति अपने स्नेह के [संगीत] कारण आप अपनी शक्ति को क्षीण मत करिएगा वायु देव अपनी पूर्ण शक्ति का प्रयोग कीजिए हनुमान पर जो आज्ञा [संगीत] महादेव या समस्त शक्तियों से वंचित हनुमान के लिए वायु देव के इस रूप से पार पाना अत्यंत कठिन होगा कि वो यदेव का सामना ना कर पाए [संगीत] आ प्रणाम महादेव ओ नम शिवाय नमो नमो नमो [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] नम एकाग्रता ही सफलता और ईश्वर की प्राप्ति का साधन है
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