Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण को अभिमन्यु पर गर्व क्यों था Mahabharat (महाभारत) Scene B R Chopra Pen Bhakti

[संगीत] महाभारत पुत्र अभिमन्यु प्रणाम माता श्री आयुष्मान भव क्या कहीं युद्ध पर जा रहे हो पुत्र नहीं माता श्री पर मामा श्री य कहते हैं कि जब तक मैं खडग युद्ध में कृतवर्मा जी को परास्त नहीं कर लेता तब तक फ मुझे योद्धा नहीं मानेंगे [हंसी] तुम द्वारिका के सेनापति को परास्त करोगे मेरे लाल क्यों नहीं माता श्री महारथी बनने के लिए तो महारथी को ही परास करना पड़ता है और आप यह ना भूले कि मैं अपने मामा श्री वासुदेव कृष्ण का शिष्य वे प्रतिदिन मुझसे कहते रहते हैं पुत्र अभिमन्यु इतिहास तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है किंतु वह यही नहीं बताते कि इतिहास मेरी प्रतीक्षा कहां कर रहा है यदि तुम्हारे मामा श्रीय कह रहे हैं वत्स कि इतिहास तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है तो इतिहास अवश्य ही तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा होगा परंतु अब तुम्हें यह सिद्ध करना पड़ेगा पुत्र कि तुम इतिहास की प्रतीक्षा के योग्य हो आपका आशीर्वाद चाहिए माता श्री आयुष्मान भव पुत्र आयुष्मान भव सावधान वत्स आपने तो वत्स कहक मुझे निहत्था कर दिया कृतवर्मा जी इस समय में वत्स नहीं प्रतिद्वंदी हूं प्रिय अभिमन्यु युद्ध में यह भी संभव है कि तुम्हें जिनसे युद्ध करना पड़े उन्हें तुम्हें वत्स कहने का अधिकार भी हो कभी-कभी जीवन मूल्यों की रक्षा के लिए भी युद्ध करना पड़ता है और ऐसे युद्ध में कोई किसी का नातेदार नहीं होता इसलिए खड़ग उठाओ और कृत वर्मा का सामना करो जो आज्ञा आप मुझसे बड़े हैं अपने से युद्ध करने की आज्ञा दीजिए विजय भव तुम वास्तव में अपने मामा श्री के शिष्य हो युद्ध आरंभ होने से पहले ही विजय होने का आशीर्वाद ले लिया आरंभ [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] करें [संगीत] [संगीत] या [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] अ आयुष्मान भव हे वासुदेव यह बालक तो ऐसा है जिस पर भीम और अर्जुन जैसे योद्धा भी गर्व करें वे इस पर अवश्य गर्व करेंगे कृतवर्मा इस पर तो स्वयं मुझे गर्व है यह वह योद्धा है जिसका नाम इसके शत्रु भी आदर सहित लेंगे परंतु मेरे शत्रु कौन होंगे मामा श्री कोई साधारण व्यक्ति तो तुम्हारा शत्रु हो ही नहीं सकता कोई महावीर महारथी ही तुम्हारा शत्रु होने का साहस कर सकता है महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत महा भार

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