[संगीत] महाभारत ता श्री आप अभी तक सोए नहीं क्या तुम सो रहे हो पुत्र क्या हस्तिनापुर के भविष्य का सपना देखने वाली कोई आंख सो रही होगी आज की रात क्या यह साधारण बात है कि धृतराष्ट्र के पास ठर ने दूत भेजा है यह बात साधारण नहीं है पुत्र साधारण नहीं है कान लगाकर सुनो पुत्र और मेरे इन बूढ़े कानों को बताओ कि इस दूत के पीछे तुम्हें आने वाले प्रलय की आहट तो नहीं सुनाई दे रही ये मेरे कान बज रहे हैं या सचमुच ये आहट मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि मैं कटे हुए शवों के खेत में अकेला खड़ा हुआ हूं क्यों लग रहा है मुझे कि मैं मैं अकेला इन कटे हुए शवों के खेत में हूं [संगीत] क्यों आप अकेले नहीं है ता श्री हम सब अकेले हैं पुत्र विदर मैं तुम आचार्य द्रोण कृपाचार्य सब के सब अकेले हैं बिल्कुल अकेले और मैं यही सोच रहा था कि जो समाज अपने चिंतकों को अकेला छोड़ दे उस समाज की अब आयु कितनी होगी यह प्रश्न अत्यंत प्रासंगिक है विदुर अत्यंत प्रासंगिक यदि ऐसा नहीं है तो मैं क्यों जाग रहा हूं तुम क्यों जा जाग रहे हो तुम अपने निवास स्थान पर क्यों नहीं हो मैं तो भी अपने निवास स्थान पर पहुंचा ही नहीं ता श्री के बीच में ही महाराज ने बुलवा लिया बीच में ही बुलवा लिया पर क्यों यह बतला के लिए कि यदि य दुर स्वयं यहां आया होता तो वो उन्हें अवश्य इंद्र प्रस लौटा देते परंतु उसने अपना दूत भेजा हुआ है इसलिए उन्हें यह सोचना पड़ेगा कि वे दूध को क्या उत्तर दें सोचना पड़ेगा सोचना पड़ेगा पर इसमें सोचने का है क्या कदाचित व यह सोच रहे होंगे कि आचार्य द्रोण जो 13 वर्षों से इंद्रप्रस्थ राज को संभाल रहे हैं उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी इंद्र प्रस्थ बहुत विशाल राज्य है तात श्री बहुत विशाल राज्य क्या तुम यह कह रहे हो कि मैं कुछ नहीं कह रहा हूं ता श्री मैं कुछ नहीं कह रहा और फिर मैं कह भी क सकता हूं कुछ कहे या ना कहे आप कि आप तो जेष्ठ गुरु है मैं जेष्ठ गुरु अवश्य हूं पुत्र विदुर पर मुझे यहां जेष्ठ मानता कौन है ना कोई मुझसे कुछ पूछता है ना कोई मेरा कहा मानता है मैं अरण्य में गूंजती हुई एक ध्वनि बनकर रह गया हूं पुत्र विदुर केवल ध्वनि हे भगवन मेरे हस्तिनापुर की रक्षा कर भगवन रक्षा कर एकन अब यह कौन बताएगा कि मुकुट ठीक से सिर पर जमा है कि नहीं पहले आप इस विषय पर तो विचार कर लीजिए आरे पुत्र कि यह मुकुट आपके शीश पर रहेगा भी या नहीं क्या यह तुम क्या कह रही हो गांधारी यदि आपसे भी अपने हृदय की बात ना कहूं आर पुत्र तो किससे कहूं मैं भी दुर्योधन से प्रेम करती हूं वह हमारा जेष्ठ पुत्र है यदि उसका जन्म ठीक समय पर हो गया होता तो कदाचित मेरे पुत्रों और कुंती पुत्रों के बीच जो तनाव है इस तनाव का प्रश्न ही नहीं उठता और उसे युवराज पद पर अपना अधिकार सिद्ध नहीं करना पड़ता परंतु वह युधिष्ठिर से है तो छोटा ही और यह राज मुकुट जो आज आपके शीष पर शोभायमान है वास्तव में युधिष्ठिर के पिता पांडु का है परंतु महाराज विचित्र वीर्य का जेष्ठ पुत्र मैं हूं मैं इसलिए जो अन्याय नहीं था उसे अन्याय कहते कहते आप कब थक आरे पुत्र जो हुआ वही ठीक था और वही होना भी चाहिए था यदि आप तब राजा बन गए होते तो आज आप जैसे दुर्योधन के वश में है वैसे आप तब किसी और के वश में रहते इसलिए आर्यपुत्र एक बार राजा बनकर देखि और वह निर्णय लीजिए जो एक राजा को शोभा देता है तुम चाहते क्या हो मेरे चाहने की ना पूछिए मैं तो यह चाहती हूं कि भविष्य आपको अपने पूर्वजों के साथ बिठला में ना हिचक चाए मैं तो यह चाहती हूं कि मेरे पुत्रों को लंबी आयु मिले मैं तो यह चाहती हूं कि इतिहास मेरे पुत्रों का नाम उसी आदर से ले जिस आदर से व कुनती पुत्रों का नाम लेने वाला [संगीत] है किंतु लगता है कि मेरी इच्छाओं का कोई अर्थ नहीं तुम तु तुम ऐसा क्यों कह रही [संगीत] हो मैं रात भर जागती रही हूं आर्य पुत्र क्यों क्यों जागती रही हो मैं यह सोचती रही कि कल आप न्याय करेंगे या अन्याय कुंती पुत्रों को उनका इंद्रप्रस्त लौटाना ना भ भूलेगा ार पुत्र मैं यह तो नहीं जानती कि इंद्र प्रस्त पा लेने के पश्चात भी द्रौपदी वस्त्र हरण के उस भयानक दृश्य को वे भूल पाएंगे या नहीं किंतु हमें प्रयत्न तो करना चाहिए कि व भरत वंश के उस अपमान को भूल जाएं और मेरे पुत्रों को क्षमा करते हैं [संगीत] महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत
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