Friday, 2 January 2026

युधिष्ठिर का अपमान विराट नरेश ने क्यों किया Mahabharat Best Scene B R Chopra Pen Bhakti

[संगीत] महाभारत कुमार को अकेले नहीं जाना चाहिए था तुमने जाने ही क्यों दिया उसे क्या तुम नहीं जानती थी कि क सेना के साथ किसकिस के ध्वज आएंगे भीष्म द्रोणाचार्य कृपाचार्य इनमें से किसी एक को भी इंद्र तक नहीं ललकार सकते और उस सेना के साथ तो कदाचित तीनों ही आए होंगे आप युवराज की ओर से चिंतित ना हो महाराज कुमार के विजय लौटने के शुभ समाचार की प्रतीक्षा कीजिए बनला वह हराए गी गंगापुत्र भीष्म को द्रोणाचार्य को कृपाचार्य को दुर्योधन को तुम विक्षिप्त तो नहीं हो गए हो कंक बहला कोई साधारण व्यक्ति नहीं है महाराज व क्ली नपुंसक वह तो पूरा व्यक्ति भी नहीं वो अधूरा व्यक्ति मेरे पुत्र की क्या रक्षा करेगा राज भवन के सारे दीप बुझा दिए जाएं कि हम अपने पुत्र की चिंता में हैं बधाई हो महाराज बधाई हो मैं तो मूंगे पन्ने की माला लूंगी किस बात की बधाई मूर्ख क्या समाचार लेकर आई है क्या यह समाचार कि मेरा पुत्र वीरगति को प्राप्त हुआ युवराज रण जीत करर लौट रहे हैं महाराज रणजीत कर क्या कह रही हो तुम यह ठीक ही कह रही होगी महाराज बहला जो साथ है युवराज के फिर वही ब्रह नला तुम्हें यह समाचार किसने दिया सारा नगर इस शुभ समाचार के वसंती रंग से होली खेल रहा है महाराज महाराज की जय हो सुना तुमने कुमार ने कुरु सेना सेना को पराजित कर दिया बहला तो विजय का ध्वज है ही महाराज राज भवन की ओर आने वाले मार्ग पर झंडे लगाए जाएं देवी देवताओं की मूर्तियों को फूलों की माला से सुसज्जित किया जाए मत से देश के योद्धा राज परिवार के सारे सदस्य गायक और नर्तक कुमार के स्वागत के लिए जाए और उसे सीधे मेरे पास लाए ताकि मैं अपने विजय पुत्र के माथे पर चुंबन दे सकूं उतरा से कहा जाए कि वह अपने प्रिय अनुज के स्वागत के लिए राज भवन के द्वार पर प्रतीक्षा करें सररी पां से लाओ जो आज्ञा महाराज उत्तर के आने तक हम कं के साथ चौसर खेलेंगे मादकता और द्यूत का कोई मेल नहीं है महाराज मादकता आनंद का अपना एक विशेष मद होता है महाराज तुम यही सोच रहे हो ना क्या आज तुम मुझे हरा लोगे मैं आज तुमसे हारने के लिए ही खेलना चाहता हूं कं क्योंकि युद्ध में जो तुमने मेरी सहायता की थी उसका तुमने पारितोषिक नहीं लिया आज चौसर में मेरी पराजय ही तुम्हारा पारितोषिक होगा जो आजा महाराज बैठो कंक [संगीत] मैं यह सोच सोच कर फूला नहीं समारा कं कि मेरे पुत्र ने भीष्म पितामह की सेना को पराजित कर दिया बहला जैसा सारथी हो तो विजय पर आश्चर्य नहीं करना चाहिए महाराज दुष्ट ब्राह्मण उस नपुंसक से मेरे पुत्र की तुलना करता है भीष्म द्रोणाचार्य कृपाचार्य अश्वथामा और योद्धा को व शन व क्लीव पराजित करेगा ब्रह नला से तो राजकुमार की तुलना हो ही नहीं सकती [संगीत] महाराज यह क्या कर रही हो महाराज की जय हो युवराज ने राज भवन में प्रवेश किया राजकुमारी उनकी आरती उतार रही है सुनो इसका प्रयत्न करो कि कुमार के साथ अर्जुन यहां ना आए क्योंकि तुम तो जानती हो वो मेरा बहता हु लन नहीं देख सकता वो महाराज को मार डालेगा जाओ चले जाओ [संगीत] [संगीत] उत्तरा दीदी आरती तो युवराज के विजय के पीछे पीछे राजकुमारी की गुड़ियों के लिए कुरु योद्धाओं के वस्त्र भी आए हैं सच हा बनला यह सुना कर तो तुमने मुझे बहुत प्रसन्न कर दिया धन्यवाद [संगीत] आप कैसे हैं तुम कैसी हो [संगीत] सर्री आओ पुत्र आओ आयुष्मान भव [संगीत] पिता श्री इन्हें क्या हुआ इस दुष्ट को मैंने मारा है पुत्र [संगीत] आपने मैं महाराज की ओर से क्षमा चाहता हूं मैंने तो उन्हें चोट लगने से पहले क्षमा कर दिया था युवराज किंतु यदि मेरे रक्त की एक बूंद भी इस भूमि पर टपक गई होती तो इस राज्य की सीमा रेखा मिट गई होती और मैं यह नहीं चाहता था क्योंकि इस राज्य ने मुझे तब आश्रय दिया था जब मुझे इसकी आवश्यकता थी महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत [संगीत]

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