[संगीत] महाभारत आप इतने उदास ना हो महात्मा क्योंकि जो होने जा रहा है उसे रोकना आपके वश में नहीं है किंतु आपके वश में तो है केशव नहीं महात्मा जो होने जा रहा है उसे रोकना मेरे वश में भी नहीं है क्योंकि किसी के कर्म पर तो मेरा नहीं है ना मैं समझा सकता था मैंने समझाया भी किंतु जिन्हें समझा रहा था उन्होंने अपने कान बंद कर लिए जिन्ह मार्गदर्शन करा रहा था उन्होंने अपनी आंखें बंद कर ली इसलिए हे महात्मा जो हो रहा है उसे देखिए और सहन कीजिए होनी का उत्तरदायित्व भी आप पर नहीं है सच पूछिए तो होनी का उतर दत्व दुर्योधन पर भी नहीं है उत्तरदाई हैं महाराज धृतराष्ट्र केवल महाराज धृतराष्ट्र क्योंकि वृक्ष तो वही है दुर्योधन तो केवल उस वृक्ष का एक फल है परंतु मेरा हस्तिनापुर महाराज के कर्मों का फल तो नहीं है ना केशव है कैसे नहीं महात्मा क्या द्यूत क्रीड़ा भवन में आकर हस्तिनापुर ने गंधार नरेश शकुनी का हाथ पकड़ा क्या राज सभा में आकर हस्तिना ने उस दुशासन का हाथ पकड़ा जो द्रौपदी वस्त्र हरण कर रहा था क्या उसने द्रौपदी को वेश्या कहने वाली कर्ण की उस जीभ को काटने का प्रयत्न किया यदि नहीं तो हस्तिनापुर को भी कौरवों के दुर्भाग्य में भागीदार बनना ही पड़ेगा [संगीत] प्रणाम वासुदेव प्रणाम प्रणाम महात्मा विदुर आयुष्मान प्रणाम सत्य की प्रणाम कृत वर्मा इधर से कहीं जा रहे थे और हमें देखकर रुक गए या यही आ रहे थे मैं अपने मित्र दुर्योधन की सभ्यता पर क्षमा मांगने आया हूं वासुदेव अपनी असभ्य पर मनुष्य को स्वयं अपने आप से क्षमा मांगनी चाहिए मेरा तो अपमान हुआ ही नहीं अपमान तो हुआ स्वयं दुर्योधन का अपमान हुआ हस्तिनापुर राजसभा का तो उन्हें क्षमा करने वाला भला मैं कौन फिर भी वासुदेव वास्तव में दुर्योधन की ओर से क्षमा मांगने आए हैं तो थोड़ी दूर हमारे रथ में चलिए अंगराज यदि आप मुझे अपना सारथी बनने का विशेष अधिकार दे तो अवश्य चलूंगा परंतु पहले एक चन दीजिए कि आप मेरे रथ को हकते हुए अपने प्रिय मित्र दुर्योधन के शिबिर में ले जाने का प्रयत्न नहीं करेंगे आपकी आज्ञा के बिना भला कोई आपको कहां ले जा सकता है वासुदेव सात की कृत वर्मा आप थोड़ी दूर अंगराज के रथ में आइए भारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महा भार [संगीत]
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