Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब ने लक्ष्मणा का हरण कैसे किया Gautam Suryaputra Karn Ep 190 PenBhakti

[संगीत] हर शब्द अपने आप में इतना शक्तिशाली होता है यदि आप चाहे तो उन्हीं शब्दों से सिर्जन कर सकते हैं और चाहे तो नाश भी फिर चाहे सिर्जन और नाश नए संबंधों का हो या फिर नए युग का आजकल सर्वत्र सहनशीलता की कमी है बात बात पर लोग झगड़ जाते हैं विवाद पर उतारू हो जाते हैं कारण शब्दों का प्रयोग शब्दों का और वचनों का उचित प्रयोग करना सीखिए आपकी आधी समस्याएं तो वही समाप्त हो जाएंगी शब्द हमारी सबसे बड़ी पूंजी उनका सोच समझकर भली प्रकार उपयोग करना ही श्र अस्कर है जो शब्द की महिमा और शक्ति को पहचान गया वह इस सृष्टि के आनंद को भी समझ गए आप भी समझिए बताओ तुम्हारे हृदय में क्या है क्या तुम साम से प्रेम करती हो उससे विवाह करना चाहती हो बताओ लक्ष्मणा यह अंतिम अवसर है मुझे मेरा उत्तर मिल गया रुक जाओ वृष [संगीत] से सांप ने बिल्कुल ठीक कहा वृष से मैं केवल उन्हीं से विवाह करना चाहती केवल उन्हीं के साथ अपना जीवन व्यतीत करना चाहती परंतु जब वो मेरी मनोदशा समझ ही गए थे तो मुझे छोड़ के गए ही क्यों बाहर [संगीत] देखो एक दूसरे को देखने के लिए बहुत समय मिलेगा लक्ष्मण परंतु एक दूसरे के साथ जाने के लिए समय कम है शीघ्र तैयार हो [संगीत] जाओ तैयार परंतु किस लिए अब इसका निर्णय मैं लूंगा कि किसको क्या मिलेगा आपने मेरे पिता को पराजित किया था कुरु कुमार मुझे नहीं झल किया गया था मेरे साथ ब्रह्मास्त्र ये प्रतिद्वंदी के सबसे बड़े शत्रु का भय उसके समक्ष उत्पन्न कर देता [संगीत] है ब्रह्म का उपयोग करके मुझे युद्ध से वंचित किया गया और युद्ध का यह नियम है जो पराजित नहीं वो अधीन नहीं [संगीत] इसलिए यह भेट देने का मुझे अधिकार है पांचाल की यही नीति है मैं तुम्ह चुनौती देता हूं स्वीकार करो अभी अभी इसी क्ण इसी सभा में यह निर्णय हो जाएगा कि कौन किसको पराजित कर सकता है न्याया नाम अधिकार नाम रामम [संगीत] साम्राज्यम पुण्य ज योग [संगीत] मैंने तुम्हें पहले ही चेतावनी दी थी अंगराज विवाह के समारोह में कोई भी विकट परिस्थिति उत्पन्न हुई तो उसका परिणाम भी विकट ही होगा मैंने भी चेताया था मैं यहां केवल अतिथि बनकर आया हूं परंतु परिस्थिति उत्पन्न हुई तो उत्तर अवश्य मिलेगा [संगीत] ठहरो यहां कोई युद्ध नहीं होगा मत भूलो यह अभिमन्यु का विवाह है भीम अर्जुन कम से कम तुमसे मुझे यह आशा नहीं थी [संगीत] मैंने केवल केवल हस्तिनापुर का अधिकार प्रस्तुत किया है और कुछ नहीं आप ही बताइए ज पांचाल पर अब भी मेरा अधिकार नहीं है हमारा अधिकार नहीं है यदि अधिकार की बात है तो कहां है इंद्र प्रस जिस पर अज्ञातवास पूर्ण होते ही हमारा अधिकार होना चाहिए था था कैसा [संगीत] अधिकार क्या तुम्हारी स्मृति पर 13 वर्ष के समय ने धूल जमा दी है दुर्योधन क्याम स्मरण नहीं कि शर्त यह थी कि 12 वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास पूर्ण होते ही हमें फिर से हमारा छिना हुआ राज्य वापस मिलेगा और जेस युधिष्ठिर फिर से सम्राट बन जाएंगे [संगीत] मामा श्री आपने सुना विदर भीम ने क्या कहा अधिकार मेरी स्मृति पर कोई कोई धूल नहीं जमी है विकर परंतु तुम्हारी अवश्य प्रकर हो गई है क्योंकि मेरी रणा के अनुसार तुम्हारा ज्ञात वास तुम्हे पहले ही भंग कर चुका [संगीत] हूं इसीलिए मैं तुम्हें कुछ नहीं दूंगा कुछ नहीं कुछ नहीं मिलेगा तुम्हे और वैसे भी विराट युद्ध में मैं पहले ही घोषणा कर चुका [संगीत] हूं केंद्र प्रस्थ पर अब भी मेरा दुर्योधन का अधिकार है इसलिए तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा जो करना है करलो जाओ अरे कोई जाओ इस इस बड़बोले को भोजन कराओ पेट भरा ना हो ना तो प्रलाप करने लगता है जाओ भोजन करके आओ जाओ बस दुधन अब मेरा पेट तेरे न से भरेगा सावदान [संगीत] दुधन [संगीत] मैं भूल गया था योद्धा से पहले प्र सेने उसकी ठर आती [संगीत] है [संगीत] मुझे मुझे क्षमा कर दो सा मेरे कारण आपको बहुत ठस पहुंची ना तुमने सोच भी कैसे लिया मात्र तुम्हारे कह देने से सांप तुम्हें अकेला छोड़ जाएगा [संगीत] [संगीत] काका शी लक्ष्मणा अपने कक्ष में [संगीत] जाओ लक्ष्मणा आप यदि कहीं जाएगी तो केवल मेरे साथ अंतः तुमने अपने पिता के लक्षण दिखाई दिए सांप इसके विपरीत मैंने जो लक्षण दिखाए वो मेरे होने वाले ससुर आपके जेष्ठ युवराज दुर्योधन में है मौन रहो मूर्ख यह मत भूलो कि तुम किसके समक्ष खड़े हो दुशासन नाम है मेरा जो आज तुम्हें तुम्हारे दशास का दंद [संगीत] देगा श्रेयस करर यही होगा तुम इस प्रकरण से बाहर रहो कण ये राज पुत्रों का प्रकरण है तुम जैसे सूत पुत्र का नहीं ये भूमि के अधिकार की बात हो रही है रस की रास थामने की नहीं मैं केवल एक ही भूमि जानता हूं और वो है रण भूमि जिस पर प्रत्येक योद्धा का अधिकार होता है व चाहे तुम जैसा भगोड़ा राजपुत्र हो क्या मेरे जैसा स पुत्र तो ठीक है आज मैं तुम्हारे योद्धा होने का भ्रम तोड़ देता हूं देखो तो सही रत की रास थामने वाले हाथ कितनी देर तक मेरे समक्ष अस्त्र था मेंे रह सकते हैं [संगीत] [संगीत] फ जानता था मैं तू कट्टर धनुर्धर है अवसर पाते ही दूर जाकर प्रहार करेगा वीरों की भाति सामने खड़े होकर युद्ध करने का ना तुम साहस है ना ही बल [संगीत] अपने बल और साहस का परिचय उस दुर्ज योधा को दो बार दे चुका हूं मैं जिसे तुमने छल से मारा था जरास आज तुम्हे भी जरा संत का स्मरण करा [संगीत] द [संगीत] [संगीत] मेरी भतीजी से अपना हाथ दूर हटा छलिया पुत्र मैं तुझे अंतिम चेतावनी देता हूं लक्ष्मणा का हाथ छोड़ दे [संगीत] [संगीत] क [संगीत] [प्रशंसा] आ [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] आ [संगीत] सिंहा ये दानव यहां क्या कर रहा है कौन है ये वि के भग हुम राक्षसी जो लोक बरस [संगीत] पुत्र तुम दोनों अभी तक यही हो अब य से निकल पाना बिल्कुल संभव नहीं होगा यहां हर द्वार पर विराट नगर के सैनिक हैं और उनके ठीक पश्चात हस्तिनापुर की सेना अभी यहां से छिपकर जाने का कोई मार्ग नहीं है तब तो केवल एक ही मार्ग शेष है हमें सबके मध्य से [संगीत] निकलना ये कौन है जो भी हो वरदान इस समय हमारे लिए सब इसमें व्यस्त है रुको मत चलती रहो साम लक्ष्मणा अर्थात पंछी दाना चूक [संगीत] गया तुम्हारे पिता को कितना गर्व होगा सांप महान वासुदेव का महान पुत्र कितने महान प्रयोजन को लाक्षी कर रहा है बस शीघ्रता से निकलना मूर्ख ए तुम तुम ना इस सभा में आमंत्रित हो और ना ही युद्ध में तुम्हारा आवाहन किया गया है तुम हमारे मध्य आने वाले मूर्ख कौन कौन हो कौन तुम मैं महाबली वीर भीम और माता हिडिंबा का पुत्र घटोत कछ हू गंभीर [संगीत] कंहा के स्वागत है टोट कच मायावी [संगीत] घटो मेरे पिता पर शस्त्र उठाकर तूने भूल ही नहीं अपराध किया [प्रशंसा] है अब उसका दंड भुगतने के लिए तत्पर हो जाओ मैं तुम्ह क्ति नहीं पहुंचाना चाहता भीम पुत्र यह दंत मेरे और तुम्हारे पिता के मध्य आए तुम इससे दूर रहो कैसे दूर रहू अंगराज मेरी समस्या यह मेरा विशाल शरीर है जो इतना बड़ा है मैं कहीं भी चला जाऊं पर दूर नहीं रह सकता [संगीत] [संगीत]

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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