Saturday, 3 January 2026

वीर योद्धा बर्बरीक की विशेष बात क्या थी Mahabharat Best Scene B R Chopra Pen Bhakti

[संगीत] महाभारत जाद श्री जाद श्री जाद श्री दादी श्री पर बरीक दादी श्री पर बरीक दादी श्री मेरा बरक मेरा [संगीत] पुत्र तुझे देखने के लिए तो मेरी आंखें तरस गई थी कहां से आ रहा पुत्र दादी श्री गुरु से शिक्षा लेकर आ रहा हूं और हस्तिनापुर जा रहा हूं सुना है वहां महायुद्ध की तैयारियां हो रही है पता नहीं महायुद्ध की तैयारियां हो रही है या महाविनाश की महाविनाश आप ऐसा क्यों कह रही दादी श्री युद्ध दो ऐसे पक्षों में होता है जो एक दूसरे से अनजान हो भिन्न हो जब परिवार के आपस के सदस्य ही लड़ने लगे तो युद्ध नहीं होता महाविनाश होता है कुछ भी हो दादी मां पर इस युद्ध में एक और मेरा अपना कुटुंब है मेरा अपना वंश है और उसका साथ देना मेरा दायित्व है जुक जुक जियो मेरे लाल जुक जुक जियो तुम्हारी बात सुनकर तुम जी उठी परिवार पर संकट आए तो परिवार की एकता ही उसे बचा सकती है संकट में कुटुंब के सारे सदस्यों को एक साथ ही रहना चाहिए दादी श्री इस परिवार की सदस्य तो आप भी हैं तो आप अपने परिवार के साथ क्यों नहीं [संगीत] पात्र मैंने तुम्हारे दादा श्री को वचन दिया था कि उनसे विवाह के पश्चात मैं उनके कुटुंब यह भवन में प्रवेश नहीं करूंगी दादी श्री तो क्या वचन संबंध और नातों से भी बड़ा होता है हां पुत्र वचन प्राणों से भी अधिक मूल्यवान होता है वचन का पालन धर्म का पालन होता है अब तू जा नहीं तो हस्तिनापुर पहुंचते पहुंचते तुझे बहुत रात हो जाएगी तो फिर मुझे आशीर्वाद दीजिए दादी श्री मेरा आशीर्वाद तो हर पल हर युग तेरे साथ है मेरे [संगीत] पुत्र दादी श्री दादाश्री के लिए कोई संदेश हो तो मुझे दीजिए ना मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि यह संदेश केवल उन्हीं को मिलेगा और किसी को इसकी भनक भी नहीं होगी चल नटखट दादी मां से ठिठोली करता है जा ठीक है तो जो मेरी समझ में आएगा उसे आपका संदेश बताकर मैं दादा श्री को दे दूंगा प्रणाम दादी श्री आयुष्मान [संगीत] भा विजय [संगीत] [संगीत] भा ता श्री यह वो कुरुक्षेत्र का मैदान है जहां युद्ध आरंभ होने वाला इस और हमारी सेना होगी और उस ओर क्रू सेना भ्राता श्री प्रणाम भ्राता श्री प्रणाम आओ अनुज सदेव कहो क्या समाचार लाए हो समाचार क्या होगा भ्राता श्री कौर की गज और अश्व सेना युद्ध का भरसक अभ्यास कर रही है दुर्योधन और दुशासन अपने शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए उतावले हो रहे हैं अनुज युद्ध गज और अश्विनी क्या करते उन पर सवार योद्धा क्या करते हैं शक्ति शस्त्रों में नहीं होती शस्त्र धारण करने वाले हाथों में होती है तो इसकी भी उनके पास क्या कमी है केशव नारायणी सेना मिलने के पश्चात उनकी संख्या और भी बढ़ गई है नकुल युद्ध का निर्णय संख्या नहीं करती साहस करता है अनुज साहस और यह ना भूलो कि साहस का जन्मदाता सत्य होता है और सत्य हमारे साथ है वासुदेव कृष्ण हमारे साथ है ये सब ठीक है अर्जुन किंतु युद्ध में शत्रु की शक्ति को कम समझना सबसे बड़ी भूल है और यह भी ना भूलो कि उनके साथ पितामह भीष्म गुरु द्रोण कर्ण और अश्वथामा है यह सब के सब महारथी हैं और अजय हैं सामने कौन है उसके विषय में चिंता करना व्यर्थ है मजले भैया ये युद्ध हम नहीं करना चाहते थे ये युद्ध तो हम पर थोप दिया गया है महाराज की जय हो वीर कुटो काज के पुत्र कुमार बर्बरीक आपसे मिलने आए हैं बर्बरीक मेरा पुत्र प्रणाम दादा श्री आयुष्मान भव पौत्र अच्छा हुआ तुम आ गए पौत्र कुछ दिनों से मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही थी इसीलिए तु मैं आए दादा श्री अच्छा हुआ तुम आ गए तुम्हारी माता श्री कैसी है वह सब तो कुशल मंगल से है और अगर आप पड़ोसियों की और वन में पशु पक्षियों की कुशलता जानना चाहते हैं तो वह सभी सकुशल है बस दादी मां थोड़ी चिंतित रहती है डिंबा उसे किस बात की चिंता है दादा श्री उन्हें दिन रात एक ही बात की चिंता खाई जाती है कि पता नहीं हमारे दादाश्री को भर पेट भोजन मिलता भी है नहीं अच्छा तो दादी श्री के प्यार ने तुझे इतना नटखट बना दिया है कि दादा श्री के साथ भी उपहास करने लगे चलो आओ सब लोग तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे भ्राता श्री आपका पौत्र आशीर्वाद लो आयुष्मान भाव हम सब तुमको बहुत याद करते हैं [संगीत] तुम्हारा धनुष तो बहुत अच्छा है पौत्र दादा श्री मैं आपका पौत्र हूं और मेरा धनुष आप का गांडीव विजय भावा आयुष्यमान भावा आयुष्यमान भा संकट के समय अधरों पर मुस्कान काली घटाओं में विद्युत की चमक के समान लगती है आज ऐसा लग रहा है मानो युद्ध नहीं कोई समारोह होने वाला है समारोह ही हो रहा है केशव हमारा पौत्र बर्बरीक आया [संगीत] [प्रशंसा] है आयुष्मान भव पराक्रमी भाव गुरु विजय ने तुम्हें बहुत शीघ्र अवकाश दे दिया री शि पूरी हो गई दादा श्री शिक्षा पूरी हो गई [संगीत] ब ज्ञान और शिक्षा तो आकाश के समान होती है बत कोई अपने धरातल से कितना ही ऊपर उठ जाए आकाश फिर भी उतना ही दूर दिखाई देता है ज्ञान और शिक्षा तो उसकी पूरी होती है जो यह जान ले कि वो कितना अज्ञानी और अशिक्षित रह गया है मेरा यह तात्पर्य नहीं था दादा श्री तो फिर क्या तात्पर्य था तुम्हारा दादा श्री मैं जिस उद्देश्य के साथ गुरुदेव के पास गया था वह उद्देश्य मेरा पूरा हुआ और उद्देश्य क्या था तुम्हारा वत्स अपने गुरु से वाण और सिद्धि मंत्र प्राप्त करना और आपकी दया से दोनों ही गुरुदेव ने मुझे दो दिन पश्चात ही दे दिए गुरुदेव ने ने तीन वाण और सिद्धि मंत्र देकर मुझे धनुर्विद्या में निपुण और युद्ध भूमि में अजय बना दिया दादा श्री अब मुझे कोई पराजित नहीं कर [संगीत] सकता गुरु की संगत तो सागर के समान होती है वत्स उसमें जितनी दूर और जितनी गहराई तक उतरो उतने ही मूल्यवान मोती हाथ आते हैं [संगीत] तुम्हें अपने गुरु के चरणों में कुछ दिन और ठहरना चाहिए था मन तो मेरा भी यही करता था दादा श्री किंतु जब यह सूचना मिली कि अतेना पुर में युद्ध की तैयारियां चल रही हैं तो मुझसे रहा नहीं गया और मैं यहां चला आया युद्ध में भाग लेने हां दादा श्री इन बाणों की मार और सिद्धि मंत्र के चमत्कार दिखाने का इससे अच्छा अवसर और कहां मिलेगा युद्ध में दोनों ओर से तुम्हारे अपने सगे संबंधी है व अच्छा यह बताओ कि तुम किस पक्ष की ओर से युद्ध करोगे यह सत्य है दादा श्री कि कौरव भी मेरे अपने हैं मेरे आदर के पात्र है किंतु मैं पांडवों का वंशज हूं इसलिए मेरा उनके साथ मिलकर युद्ध करना स्वाभाविक है तो तुम हमारे साथ मिलकर युद्ध करोगे अवश्य करूंगा और उस समय तक करूंगा जब तक मेरे गुरु के आदेश और मेरे वचन का उल्लंघन नहीं होता कैसा आदेश और कैसा वचन वत दादा श्री मेरे गुरु का आदेश है कि युद्ध भूमि में किसी भी शक्तिशाली के आगे दुर्बल पड़ने वाले का साथ दो और मैंने उन्हें वचन दिया कि मैं ऐसा ही करूंगा चाहे शक्तिशाली सत्य और दुर्बल असत्य की ओर ही क्यों ना हो सत्य और असत्य का ज्ञान नहीं दादा श्री और ना ही मेरे गुरु ने इस विषय में मेरा कोई मार्गदर्शन किया है अर्थात तुम बीच धारा में भी ना हो बदल सकते हो दादा श्री इसका निर्णय तो धारा का प्रवाही करेगा दूसरे शब्दों में तुम यह कहना चाहते हो व कि यदि युद्ध चलते तुम्हें आभास हो कि कौरव हमारे सामने दुर्बल पड़ रहे हैं तो तुम अपना वंश छोड़कर उनसे जा मिलोगे य हुआ तो मुझे यही करना पड़ेगा दादा श्री क्या कहा तुमने पत तुम हमारे शत्रु का साथ दोगे दादा श्री यदि वह दुर्बल पड़ने लगे तो यह कैसे हो सकता है यह तो रणनीति के बिल्कुल विरुद्ध होगा किंतु गुरु के आदेश और मेरे वचन के बिल्कुल अनुकूल होगा तुम जानते हो कि तुम क्या रहे हो इससे कहीं अच्छा होगा कि तुम युद्ध ही ना करो दादा श्री यह कैसे संभव है मेरे वंश वाले मेरे वरिष्ठ प्राण हथेली पर लेकर लड़ रहे हो और मैं खड़ा चुपचाप देखता रहूं यह कदापि नहीं हो सकता मैं आप सबके साथ मिलकर लडूंगा किंतु यदि तुम अपने वान सिद्धि मंत्र लेकर कौरो से जाम ले तो हमारा क्या होगा पत्र दादा श्री मुझे इस बात का दुख है कि मेरे पास आपके इस प्रश्न का कोई उत्तर नहीं है सिवाय इसके कि मैं वचन बधू क्या कहा पत गुरु का आदेश तुम्हारा वचन यह सब क्या लगा रखा तुमने क्या गुरु के आदेश और अपने वचन की धुन में अपने कुल का सर्वनाश करना चाहते हो क्या तुम्हारा गुरु हमसे और हमारे संबंध से भी बड़ा है बब यह तुम क्या कह रहे हो अनुज भीम आवेश में आकर यह ना भूलो कि गुरु का स्थान संसार में श्रेष्ठ है गुरु के आदेश का पालन करना सबसे बड़ा धर्म है याद है ना तुम्हें द्रुपद से तो कोई हमारी शत्रुता ना थी फिर भी गुरु के आदेश पर हमें उनसे युद्ध करना ही पड़ा था और हम उन्हें अपराधियों की भाति बांध कर लाए थे वो तो ठीक है बता शी वो ठीक है तो बरबरी का कथन भी ठीक है भाग्य के लेख को मानव की दुर्बल उंगलिया नहीं मिटा सकती अनुज बरबरी अपने गुरु के आदेश और अपने वचन का पालन करने के लिए मुक्त [संगीत] [प्रशंसा] है बर बरीक सा विश्व में कोई नहीं [संगीत] बलवान वंश बचा या वचन दुविधा में है प्राण दुविधा में है प्राण महाभारत महाभारत महा भ महा भार [संगीत] महाभारत [संगीत]

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