Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण की प्रथम पूजा क्यों हुई थी Mahabharat Best Scene B R Chopra Pen Bhakti

[संगीत] महाभारत आप बड़े भाग्यवान है राजन कि आपके आमंत्रण पर भारतवर्ष का पूरा सभ्य समाज आपको बधाई दे और आपके राज्य अभिषेक में सम्मिलित होने के लिए यहां एकत्रित हुआ है मैंने अपनी लंबी जीवन यात्रा में ऋषियों का ऐसा समूह कभी नहीं देखा इनके यहां उपस्थिति ही इस बात को सिद्ध करती है कि इस राज्य में और इस राज्यसभा में सदैव ही ईश्वरी कृपा की वर्षा होती रहेगी राजन आपके सारे सगे संबंधी भी यहां आए हुए हैं तो आदरणीय अतिथियों का सत्कार कीजिए अलग अलग उनकी पूजा कीजिए जो आ परंतु पहले किसकी पूजा करूं पितामह जो सर्वश्रेष्ठ हो तो पहले महर्षि व्यास की पूजा करूं या आपकी ना ही महर्षि की और ना ही मेरी आज आप धर्म के प्रतिबिंब है राजन आपकी आंखों को तो यह देख लेना चाहिए था कि इस सभा में ही नहीं पूरे त्रिलोक में यदुवंश शिरोमणि वासुदेव श्री कृष्ण के अतिरिक्त किसी और की अग्र पूजा हो ही नहीं सकती और मैं यह इसलिए नहीं कह रहा हूं कि यह मुझे प्रिय है यह मैं इसलिए भी नहीं कह रहा हूं कि मैं इनका भक्त हूं क्या आप यह नहीं देख रहे भारतवर्ष के इन जगमगाते मुगट के बीच में य ऐसे प्रतीत हो रहे हैं मानो तारों के झुरमुट में चंद्रमा और जब चंद्रमा के दर्शन हो रहे हो तो तारों की ओर कौन देखता है जैसे अंधकार की चुनरी ओड़कर सोई हुई धरती सूर्य के शुभागमन से जाग उठती है और वायु हीन स्थान वायु का स्पर्श होते ही जीवित हो उठता है और सांस ले लगता है वैसे ही देवकी नंदन के इस राज्यसभा में होने से यह राज्यसभा जग बगा भी रही है और सांस भी ले रही है तो क्या इनके यहां होते हुए स्वयं महर्षि व्यास अग्र पूजा के लिए आगे बढ़ सकते हैं कभी नहीं कभी नहीं यह यहां है और इनके होते हुए कोई और पूजनीय हो ही नहीं सकता यदि किसी को कोई आपत्ति हो तो अवश्य बोल सकता है अपना स्थान ग्रहण कीजिए देवकी नंदन [संगीत] आइए [संगीत] जब अग्रिम पूजा के हित माने भीष्म पितामह माधव को जब अग्रिम पूजा के हित माने भीष्म पिता मह माधव को सब धन्य कहे सब धन्य हुए अरु धन्य करें मानव भव को तब निश्चित ही निश्चिंत हुए कर पूजन अर्पण चरणन को सब मान गए यह मान रहे बस केशव को बस केशव को बस केशव को बस केशव को [संगीत] नकल यह तुम किसकी अग्र पूजा कर रहे हो प्रिय शिशुपाल तुम चुप रहो और तुम यह भी मत समझना कि य राजी महारा यह महारथियों का पूरा समुदाय तुमसे डर कर तुम्हारे राजसी य में आया हुआ है अरे हम तो यह सोच कर आए थे धर्म का अर्थ तुम हम सबसे अधिक जानते हो इसलिए तु बन जाने परंतु तुमने तुमने इस गवाली की अग्र पूजा करके सारे राज समाज को अपमानित किया है शिशुपाल शिशुपाल यद एक शब्द भी मु से निकाला तो जान से मार डालूगा अर्जुन यह क्या अनुज शिशुपाल हमारे अतिथि है महाराज ठीक कह रहे हैं भीम भैया प्रिय अर्जुन अतिथ की मर्यादा का उल्लंघन ना करो तुम बोलते रहो शिशुपाल क्योंकि यह तुम्हारे ही बोलने का दिन है अरे बोलूंगा क्यों नहीं क्या मैं तुझसे डरता हूं अरे मैं तो यह भी नहीं मानता कि तू मेरे मामा वसुदेव का पुत्र है और तुझको तो यह स्थान ग्रहण करने का अधिकारी नहीं है क्योंकि यह स्थान या तो महर्षि व्यास ग्रहण करें या हस्तिनापुर नरेश धृतराष्ट्र स्वर्गीय महाराज कंस के दास नंद के पुत्र का मुख्य अतिथि के स्थान पर बैठना सारे राज समाज का घोर अपमान है शिशु और यह य पिता बन बैठे भीष्म तो स गए इनकी आजीवन बचर की प्रतिज्ञा भी ढोंग है ंग यदि यह प्रतिज्ञा ना भी करता तो भी यह वीर्य हीन य निशा है य नपुंसक ब्रह्मचारी रता श महादे की सौगं यदि यह मेरे प्रिय युधिष्ठिर के राज सुय का समारोह ना होता तो मैं तेरी जीभ काट लेता यह आपका अपमान नहीं कर रहा पिता म यह मेरा अपमान कर रहा है इसे बोलने दीजिए अरे मुझे बोलने के लिए तेरी आज्ञा नहीं चाहिए समझा इस नसक ने प्रस्ताव रखा और शापित पांडव के पुत्रों ने झर से उसे स्वीकार भी कर लिया और यह यह चक्का उस स्थान पर बैठ गया जहा बैठने का साहस कोई भी दास पुत्र नहीं कर सकता क्या य द्रुपद से बढ़कर तुम्हारा त है क्या द्रोणाचार्य कृपाचार्य से बड़ा आचार्य है क्या य दुर्योधन अवमा से बड़ा यो है नहीं तु ना राजा और ना आचार्य तो फिर नंद गाव की गायों का दूध ने वाले इसली को किस दृष्टि से तुमने पूजा की योग मान लिया आप सुन रही है ना बुआ अब मैं क्या करू शिशुपाल यदि त आप भी चुपना हुआ तो तेरी जी खीच लूगा इसे बोलने दीजिए दाऊ आप भूल गए कि मैंने बुआ को क्या वचन दे रखा है 100 अपराधों तक मैं इसे अवश्य क्षमा करूंगा तुम्हे क्षमा करना हो तो अवश्य क्षमा करो मैं नहीं कर सकता इसने पिता म भीष्म का अपमान किया है इसने बुआ कुंती का अपमान किया है इसने तुम्हारा अपमान किया है और तुम यहां खड़े मुस्कुरा रहे हो मुस्कुरा नहीं रहा दाऊ गिन रहा हूं यदि तुम्हें और कुछ कहना हो शिशुपाल तो कह डालो क्योंकि अभी तुम तीन अपराध और कर सकते हो अरे तू मुझे क्या डराता है रे मायावी और तू तू तीन अपमान की बात करता है मैं यही खड़े खड़े 300 बार तेरा अपमान करूंगा और तू तू मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा और तेरा मानी क्या है रे जो तुझे अपमानित करूं किन ये हुआ 98 तू एक तुच्छ चोर है ये हुआ 9 तूने महाराज कंस का नमक खाया और उनका ही वत कर डाला तू कृतज्ञ भी है य हुआ पूरे 100 बोल क्या कता है तू बस अब रुक जाओ शिशुपाल अरे तू तो एक बहरूपिया है जो राजाओ के वस्त्र पहनकर इस सभा में आ बैठ है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] आज मैं तुम्हारा ऋणी हो गया द्रौपदी समय आने पर एक एक धागे का ऋण उतारूंगा [संगीत] दिया खंड श्री कृष्ण ने किया खंड अभिमान आचल चीरे द्रौपदी बांध रही भगवान बांध रही [संगीत] भगवान प्रेमा चल में बंध गए दिया वचन फिर आप इस ऋण के भुगतान को जग ना सकेगा माप जग ना सकेगा माप भार महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत

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