[संगीत] महाभारत प्रणाम [संगीत] वासुदेव विराजी [संगीत] वासुदेव जेष्ठ पिता श्री का स्वास्थ्य कैसा है वासुदेव पहले माता श्री के स्वास्थ्य के विषय में तो पूछ लीजिए भ्राता श्री वे जेष्ठ है प्रिय अनुज तो पितामह के विषय में पूछिए भ्राता श्री वे राजा नहीं है प्रिय अनुज किंतु वे ऐसे राजा है जिन्होंने अपने अनुज पुत्रों के अधिकारों का अपहरण किया है सभ्यता की रक्षा करना भी क्षत्रिय धर्म है अति प्रिय अनुज और जिस दिन क्षत्रिय अपने इस धर्म का पालन त्याग देंगे उस दिन धूप का रंग काला पड़ जाएगा जेष्ठ पिता श्री कैसे हैं वासुदेव स्वस्थ और चिंतित है स्वस्थ और चिंतित तो गंगापुत्र भीष्म और दोनों आचार्य श्रेष्ठ भी है किंतु महाराज की चिंता किसी और प्रकार की है और इन महापुरुषों की किसी और प्रकार की महाराज युद्ध की ओर से चिंतित हैं और यह दोनों महापुरुष युद्ध के परिणाम की ओर से अर्थात युद्ध की ठहरी गई हां पार्थ युद्ध की तो ठहर गई मैंने इस युद्ध के परिहार के सारे जतन करके देख लिए किंतु दुर्योधन युद्ध ही चाहता है इसलिए युद्ध तो [संगीत] होगा तो अब यह बताइए कि माता श्री कैसी है बुआ ने तुम पांचों भाइयों के लिए एक विशेष संदेश भेजा है सहदेव उन्होंने मुझसे यह कहा कि मैं तुम लोगों को यह कहना ना भूलूं कि क्षत्रनी इसी विशेष दिन के लिए पुत्रों को जन्म देती हैं किंतु आप उन्हें अपने साथ लाए क्यों नहीं हमारी माता श्री का हमारे शत्रुओं के शिविर में रहना उचित नहीं है युद्ध नीति तो यही कहती है वासुदेव यह युद्ध दूसरे युद्धों जैसा नहीं है यह युद्ध केवल उस चौसर के टुकड़े पर नहीं खेला जाएगा जहां बाणों से बाण और गदा से गदा टकरा रही होंगी जहां अश्व की टाप से उड़ने वाली धूल सूर्य को ढक देगी और कदाचित दिन पर रात का धोखा होने लगेगा इस युद्ध में तो लगभग हर हृदय भी एक रणभूमि है इसलिए सब अपने अपने संदर्श की खोज में [संगीत] है बुआ भी इस युद्ध में भाग ले रही हैं और उन्होंने अपनी रणभूमि चुन ली है [संगीत] वे वही रहेंगी और यदि छोटी मां कहकर दुर्योधन भी चरण स्पर्श करेगा तो वह उसे आयुष्मान होने का निष्फल आशीर्वाद देंगी प्रणाम छोटी मां मैं आपसे आशीर्वाद लेने आया हूं आयुष्यमान भवा यह क्या छोटी मां मैं आपसे विजय का आशीर्वाद लेने आया हूं क्या दीदी सेय आशीर्वाद ले चुके हो वत्स नहीं छोटी मां वे आपके आशीर्वाद देने से पहले यह आशीर्वाद कभी नहीं देंगी तो क्या अपने पिता मह से यह आशीर्वाद ले लिया पुत्र वे तो मेरी सेना के प्रधान सेनापति है छोटी मां मैं इसी को उनका आशीर्वाद समझता हूं और आचार्य द्रोण और कुलगुरु वे दोनों भी मेरी सेना के सेनापतियों में से ही हैं और विदुर से पुत्र वे मुझे यह आशीर्वाद कभी नहीं देंगे छोटी मां क्योंकि वे मेरी विजय चाहते ही नहीं महामंत्री विदुर मेरे तशी नहीं है किंतु वह हस्तिनापुर के तशी हैं और तुम्हारे भी तशी हैं तुम्हारे शुभचिंतक भी है पुत्र बड़े यदि किसी भूल पर टोके तो उनकी ओर से मन मैला नहीं करना चाहिए उनके शुभ चिंतन पर संदेह भी नहीं करना चाहिए हां यदि तुम हस्तिनापुर के विरोधी हो तो विदुर कभी तुम्हारे तशी नहीं हो सकते तो क्या तुम हस्तिनापुर के विरोधी हो दुर्योधन हस्तिनापुर तो हमारे राज्य की राजधानी है छोटी मां तो मैं भला उसका विरोधी कैसे हो सकता हूं हस्तिनापुर केवल राजधानी नहीं है वत्स हस्तिनापुर भरत वंश के अस्तित्व का केंद्र बिंदु है भरत वंश के इतिहास का मेरु दंड है यह नगरी तुम्हारी ज्येष्ठ माता है दुर्योधन उसे केवल राजधानी समझने की भूल ना करो यह नगरी कुरुवंश के माथे पर लगा हुआ तिलक है यदि यह तिलक मिट गया तो कुरु वंश के पास कुछ भी नहीं बचेगा यह नगरी तुम्हारी पहचान है दुर्योधन यह नगरी तुम्हारी पहचान है अपनी इस पहचान की केवल रक्षा ही ना करो इसका आदर करो इस नगर के द्वार पर माथा टेक कर विजय श्री का आशीर्वाद मांगो दुर्योधन तुम्हारी छोटी मां के पास तुम्हारे लिए यह आशीर्वाद नहीं है तो क्या इसका तात्पर्य मैं यह निकालूं कि आप मेरी विजय नहीं चाहती मैं तो विजय और पराजय के बीच में खड़ी हुई हूं अपनी आंखों में आंसुओं को रोके हुए पराजय चाहे जिसकी भी हो पुत्र मुझे तो रोना ही है मैं तुमसे प्रसन्न नहीं हूं किंतु मैं तुम्हारा शव भी तो नहीं देखना चाहती इसीलिए लंबी आयु का आशीर्वाद दिया था यदि युद्ध करने की ठान ही ली है तो इस आशीर्वाद के कवच को पहन लेना परंतु मैं यह नहीं जानती वत्स कि मेरे इस आशीर्वाद का कवच अर्जुन के वावान और भीम की गदा को रोक पाएगा या नहीं रोक पाएगा महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
-
[संगीत] किंतु मेरे परिवार पर से किस पर संकट आने वाला है ऋषिवर बताइए ना ऋषिवर संकट किस पर होगा यह सोचने के स्थान पर तुम्हें यह सोचना चाहि...
No comments:
Post a Comment