महाभारत [संगीत] प्रणाम प्रणाम माता श्री आरती करके तिलक लगाओ द्रोपदी तिलक आपको लगाना चाहिए माता श्री हां और क्या यह केवल तिलक थोड़ी होगा माता श्री यह तो आशीर्वाद भी होगा मेरे आशीर्वाद किसी तिलक आधीन नहीं है पुत्र अर्जुन घर में बहू आ जाने के उपरांत विशेष अधिकारों को मां और पत्नी के बीच बट जाना चाहिए पुत्र मर्यादा की कुछ रेखाएं खिंच जानी चाहिए जिन्ह सास बन जाने के पश्चात मां को पार नहीं करनी चाहिए पुत्र यही रेखाएं सुखद घरेलू जीवन की आधारशीला होती हैं आज युधिष्ठिर के माथे पर तिलक लगाना द्रौपदी का विशेष अधिकार है पुत्र जो आज्ञा माता श्री सौभाग्यवती भवा पुत्रवती भवा आरती करो पुत्री [संगीत] अब राजा हो जाने के नाते भी द्रौपदी की रक्षा करना तुम्हारा कर्तव्य है पुत्र युधिष्ठिर द्रौपदी का दायित्व तुम पर तुम्हारे भाइयों से अधिक होगा आप केवल पांचाली की बात क्यों कर रही है माता श्री क्या आप मेरे य अनुज और सारा जन समुदाय क्या मेरा दायित्व नहीं है नहीं पुत्र युधिष्ठिर मैं तुम्हारा दायित्व नहीं हूं भगवान जेश भ्राता श्री को लंबी आयु दे मैं उनका दायित्व हूं तुम पुत्रों को मैंने आज द्रौपदी को दिया अब मेरे इन पुत्रों को संभालो पांचाली परंतु मेरे सहदेव का विशेष ध्यान रखना यह आपके पुत्र है माता श्री और इन पर आपका अधिकार सदैव ही मुझसे अधिक रहेगा मैं इस परिवार और इसकी परंपरा से भली भाति परिचित भी नहीं हूं आपकी सहायता बिना मैं आपकी धरोहर को कैसे संभाल सकती हूं माता श्री पुत्र भीम अपने भ्राता श्री को राज्यसभा की ओर ले चलो जो आज्ञा माता श्री आप नहीं चलेंगे माता श्री नहीं पुत्री तुम जाओ मैंने तो राज्यसभा देखी ही नहीं जब मैं यहां पहली बार आई थी तो मेरे महाराज अपनी विजय यात्रा को निकल गए थे वहां से लौटे तो तुरंत ही विश्राम के लिए विश्राम वाटिका भेज दिए गए फिर वहीं ऋषि किंदम वाली दुर्घटना हो गई और मेरे महाराज ने वनवास ले लिया तो जो राज्यसभा मैंने महारानी होकर नहीं देखी अब उसे राजमाता होकर क्या देखूंगी तुम जाओ पुत्री आज का दिन तुम्हारा दिन है मेरा हृदय तोब केवल मेरा तपोवन है मैं वहीं बैठी बैठी तुम सबको आशीर्वाद देती रहूंगी आपने अधिकार दे पुत्र वधु को सौप वृक्ष बढ़े परिवार का दुख ना करें प्रकोप दुख ना करें प्रकोप महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महा भार
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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
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