Wednesday, 7 January 2026

हनुमान ने मायावी दर्पण को नष्ट किया Ishant Sankat Mochan Mahabali Hanuman 316 Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] आ प्राण बचाकर युद्ध से भाग रहे हो मर्कट परंतु वाली तुम्हें भागने नहीं [संगीत] देगा [संगीत] [संगीत] [हंसी] उत्तम अति तम रावण सर्वोत्तम अब आएगा आनंद देवताओ अब तुम्हारे ही दिए हुए शक्तियों से होगा उस मानर बालक का [संगीत] अं [संगीत] अब तो स्वयं देवता भी उतर आए तो भी इस मर्कट को नहीं बचा पाएंगे ये तो वही विप्र है जिन्हें मैंने वरदानी शक्तियों का दान दिया था [संगीत] प्रतीत होता है यह हनुमान की दी हुई शक्तियों का प्रयोग हनुमान के विरोधी करने वाले हैं अब तुम्हारा अंत निश्चित है मरक तुम अपनी ही वरदानी शक्तियों का सामना नहीं कर सकते [संगीत] ये तो घोर पापा चार बाली के साथ यह ठोंगी ऋषि भी पापा चार में आक डूब गए मेरा हनुमान शक्तिहीन है कैसे करेगा इनका सामना बस बस बस मैं और पाप नहीं कर सकता मुझे क्षमा कर दो और अपनी शक्तियां वापस ले लो मैं पापी इन दिव्य वरदानी शक्तियों के योग्य नहीं हूं दशानन से ही चल मेरी ये असरों के अन्न पर पली हुई कलुषित दे इन दिव्य शक्तियों को संभाल नहीं सकती यदि तुमने इन्ह वापस नहीं लिया तो मेरा अंत हो जाएगा इन्ह वापस ले लो हनुमान इन्हे वापस ले लो मर्ख यह क्या कर रहे हो प्रहार करो इस मर्कट पर बस मैं हनुमान से दान में प्राप्त की हुई शक्तियां पुन हनुमान को ल [संगीत] हू हनुमत असीम शक्ति के सागर विप्र ना भर पाए अपने गागर लौटते विप्र शक्तियों का भार करते अंजनी सुत का आभार वाली चित छल का भूचाल निश्छल बजरंग केस के लाल हनुमत लीला है अपरम पार सकल ना पावे इससे पा हनुमान [संगीत] तुम्हारी वरदानी शक्तिया भले ही तुम्हारे पास वापस आ गई हो मर्कट परंतु तुम मेरे कोप से नहीं बच पाओगे तुम्हारी आधी शक्तियां पुन मेरे पास वापस आ [संगीत] जाएंगी मैं सुग्रीव भैया को कुछ नहीं होने दूंगा पिता श्री का दिया हुआ वचन निभाना है मुझे मरक हमारे इस युद्ध से मुल्का पिंड नष्ट हो रहे हैं मैं ब्रह्मांड को कोई क्षति नहीं पहुंचने दूंगा [संगीत] युवराज हनुमान को स अस कर दीजिए अंजना मैंने ही हनुमान को धर्म युद्ध की शिक्षा दी है कि कभी भी अशक्त पड़े हुए योद्धा पर वार मत करना स्वामी मेरा पुत्र सदैव धर्म और सत्य का ही अनुसरण करता मुझे गर्व है अपने पुत्र पर मुरक आज तुम्हारा अंत मैं करके ही रहूंगा चाहे इसके लिए मुझे कितना भी विध्वंस करना पड़े चाहे मुझे इसके लिए सभी के प्राण भी लेने पड़े किंतु तुम्हें मैं जीवित नहीं छोडूंगा सूर्यास्त होने को है कहीं वाली भैया कोई बड़ा अनर्थ ना कर दे इसीलिए इस अंतहीन युद्ध को समाप्त करने के लिए मुझे युक्ति से कार्य करना होगा हां हनुमान तुम अदृश्य भी हो तुम अदृश्य भी हो सकते तुम अदृश्य भी हो सकते तुम अदृश्य भी हो सकते तुम अदृश्य भी हो सकते देवराज इंद्र के द्वारा प्रदान की गई [संगीत] [संगीत] सिद्धि यह कहां अदृश हो गया मर्कट य अदृश होने की शक्ति मेरे पास क्यों नहीं यह वरदानी शक्ति नहीं है वाली भैया मर्कट कहां गया ये क्या हो गया यह मर्कट कहां अदृश्य हो गया मुझे प्राप्त हुई उस मर्कट की शक्तियां वापस कैसे चली गई वाली को सामने वाले की आधि शक्ति तभी प्राप्त होती है जब सामने वाला प्रतिद्वंदी प्रत्यक्ष हो किंतु हनुमान तो अदृश्य है और हनुमान के अदृश्य होने की सिद्धि के समक्ष वाली का वरदान निरर्थक [संगीत] है यह नहीं हो सकता तो अब तुम छल युद्ध पर उतर आए हो मर्कट यदि साहस है तो सामना करो मेरा ली भैया ल सा यह तो हनुमान की सिद्धि है जिसका प्रयोग हनुमान कर रहा [संगीत] है अब अदृश होकर भी नहीं बच पाओगे तुम [संगीत] मरकज मर [संगीत] काट वाली भैया मेरी आपसे कोई शत्रुता नहीं है आप यत को यही त्याग कर सुग्रीव भैया को मुक्त कर दीजिए यह मर्कट सोच रहा है कि इसने विजय प्राप्त कर लिया महानतम बाली पर परंतु यह मायावी अस्त्र उसे बताएगा कि क्या कर सकता है महानतम बाली [संगीत] और काट तुम अपने सुगरी भैया को बचाना चाहते थे ना परंतु अब तुम ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि तुम इस मायावी दर्पण के भीतर प्रवेश ही नहीं कर सकते छोड़ दीजिए मुझे हां भैया भया छोड़ दीजिए मुझे भैया छोड़ दूंगा अवश्य छोड़ दूंगा मैं तुम्हें किंतु तब जब यह मर्कट मुझे वचन देगा कि वो इस युद्ध में अदृश्य होने वाली शक्ति का प्रयोग नहीं करेगा बोलो मर्कट देते हो चचन मैं तुम्हारे प्रिय भैया को बंद कर दो ली भैया छोड़ दीजिए सुग्रीव भैया को मैं वचन देता हूं कि मैं अपनी अदृश्य होने वाली शक्ति का प्रयोग नहीं करूंगा तो य आसुरी अस्त्र ही है मायावी दर्पण से आने जाने का [संगीत] माध्यम मायावी दर्पण को ध्वस्त कर दो मायावी अस्त्र [संगीत] अंतत हनुमान ने सुग्रीव को मुक्त करा ही लिया सत्य है केसरी जी हनुमान सबका संकट मोचक है य [संगीत] ऐसे नहीं जाने दूंगा मैं तुम्ह नहीं वाली [संगीत] भैया [संगीत] [संगीत] अब और नहीं बहुत हो [संगीत] गया नहीं हनुमान सुग्रीव भैया ये आपने क्या कर दिया आप ठीक तो है ना सुग्रीव ये कस्मत क्या हो गया हनुमान वाली भैया जैसे भी हो परंतु मैं उनसे बहुत स्नेह करता हूं मेरे नेत्रों के सामने उन्हें कुछ हो जाए यह मैं नहीं देख पाऊंगा मुझे क्षमा कर दो हनुमान सुग्रीव जैसा निर्बल मुझ महानतम को बचाए नहीं अच्छा होता मेरी मृत्यु हो जाती नहीं यह अंत नहीं है युद्ध का भिक्षा में मिला यह जीवन स्वीकार नहीं है महानतम वाली को संकट मोचन हनुमान की जय युगराज हनुमान की जय महाबली हनुमान की जय ज शरी नंदन हनुमान की जय अंजना पुत्र हनुमान [संगीत] की बंद करो यह जय जयकार वाली भैया मैं आपकी पराजय और आप पर प्रहार नहीं करना चाहता था परंतु आपने ही यत के लिए हट किया था वाली भैया अब यह क्रोध त्याग दीजिए युद्ध समाप्त हो चुका है देखिए सूर्यदेव अस्ताचल की र प्रस्थान कर चुके हैं सुग्रीव भैया भी तो मुक्त हो चुके हैं सुग्रीव भैया का प्रेम देखिए आपकी रक्षा करने के प्रयास में इनकी क्या दशा हो गई हां बाई हनुमान ठीक कह रहा है हम में से कोई भी तुम्हारा अहित नहीं चाहता है पुत्र हनुमान तुम्हारे लिए या इन सबके लिए हो गया होगा यह युद्ध समाप्त किंतु मेरे लिए यह युद्ध अभी भी समाप्त नहीं हुआ है कोई परास्त नहीं कर सकता महानतम वाली को किंतु लंकेश आपके भेजे हुए दछ असुरों कुटिल विप्र और निस्तेज मायावी अस्त्रों के कारण यह सब हुआ है क्यों किया आपने ऐसा लंकेश क्यों किया आपके कारण समस्त प्रजा के समक्ष अपमान हुआ है मेरा आपके कारण मानतम वाली हास्य का पात्र बना [संगीत] है क्यों किया आपने ऐसा लंकेश क्यों किया मता मत कर मत करिए मानतम पाली ये आपका भ्रम है ब्र आपने उस कुटिल विप्र को मेरी सहायता करने के लिए भेजा था या उस मर्कट को शक्तिया लौटाने यदि वोह कुटल बप उस समय वहां नहीं पहुंचता तो उस मर्कट का अंत कर चुका होता मैं किंतु कचोट रहा है मुझे भिक्षा में मिला हुआ जीवन ूल से चुप रहे उस प्रजा के नेत्र जिनके समक्ष हास्य का पात्र बना मैं मेरे हृदय को भेद रहा है उस मर्कट का गर्भ से उठा हुआ मुखड़ा उसकी जय जयकार निराशा किसी को भी तोड़ देती है महाराज महानतम वाले और आपने ही तो कहा था युद्ध अभी समाप्त नहीं हुआ है युद्ध तो समाप्त होगा उस मर्कट की मृत्यु के साथ ही वो मर्कट अभिशाप बन गया है हमारे लिए अभिशाप अभिशाप हां अभिशाप मर्दानी शक्तियों की काठ बन सकता है अभिशाप अभिशाप ये क्या कह रही हो विक्टा अभिशा सत्य कह रही हो शप दिलाए यदि एक बार हनुमान को शाप मिल जाए तो वो किसी भी कार्य का नहीं रह जाएगा किंतु सारे के सारे ऋषिवर उसके प्रशंसक है कौन देगा उस वानर बालक को [संगीत] श्रा रवासा मर्कट को श्राप दिलाया जा सकता है ऋषि दुर्वासा से ऋषि दुर्वासा महाराज बाली आपको ज्ञात भी है ऋषि दुर्वासा कितने असहिष्णु है क्ण आवेश भी हो जाए तो व भयानक से भयानक श्राप दे देते हैं इसीलिए उस मर्कट को शाप देने के लिए ऋषि दुर्वासा सर्वश्रेष्ठ है एक बार ऋषि दुर्वासा उस मर्कट को शप दे दे फिर उसकी वरदानी शक्तियां होते हुए भी व्यर्थ होकर रह जाएंगी किंतु महाराज बाले यदि ऋषि दुर्वासा के प्रति हमने तनिक सी भी भूल कर दी तो हमें भी भयानक से भयानक दंड मिलेगा हम संकट में पड़ जाएंगे अब इतना संकट तो उठाना ही पड़ेगा जिस प्रकार शांत ज्वालामुखी के निकट जाने का भी कोई साहस नहीं करता उसी प्रकार ऋषि दुर्व के कोप के भय से कोई मनुष्य भी उनके आश्रम के निकट जाने का तो क्या पशु पक्षी तक विचरण नहीं करते हमारे रक्ष सैनिक ऋषियों के यज्ञ भंग कि है किंतु जब वो ऋषि दुर्वासा के आश्रम के निकट पहुंचे तो सुरवा सा ऋषि यही है ना जो बड़ा हठी [संगीत] है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] आज इसका हट खंडित हो जाएगा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हो महादेव प्रलयंकारी त्रिनेत्र की भाति उगनी है ऋषि दुर्वासा की किंतु लंकेश यदि उनके साथ तनिक भी भूल हो गई तो हम सबका परिणाम भी वही हो हो जो रक्ष सैनिकों का हुआ [संगीत] [प्रशंसा] है ऐसे ही शक्तिशाली ऋषि की आवश्यकता है उस मर्कट को शक्तिहीन करने के लिए किंतु मेरी दूर दृष्टि देख रही है कि ऋषि दुर्वासा इस समय अपने आश्रम में है ही नहीं वो इस समय स्वर्ग में स्वर्ग में अच्छा है ऋषि दुर्वासा तो देवताओं को तक श्राप दे सकते हैं चाहे वह इंद्रदेव भी क्यों ना हो देखते हैं स्वर्ग में क्या हो रहा है [संगीत]

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