[संगीत] [संगीत] रुक जाइए धरती में कंपन ये तो भूकंप आ रहा है स्वामी प्रतीत होता है कोई भयानक आत आने वाली है महाराज यह क्या हो रहा है महाराज बचाइए हां महाराज बचाइए संभल कर संभल कर सब सावधानी से पीछे खाइए ये तो पर्वत में विस्फोट हुआ है चट्टाने उड़कर कहीं भी गिर सकती है बजो चट्टान के मलवा से हनुमान एक कैसा संकट उत्पन्न हो रहा [संगीत] है ये कैसे विचित्र सी आवाज रुक जाइए पिताश्री सब अपने स्थान पर ही रहिएगा यह तो पृथ्वी धसने लगी है सब लोग सावधान रहना सतर्कता से काम लेना काल का दंड अपना कार्य कर रहा है शीघ्र ही केसरी के प्राण हर कर ले आएंगे हमारे यमदूत नियम है तो यम है कुछ भी हो जाए कोई अपना स्थान मत छोड़िएगा अब क्या होगा हनुमान आसपास से धरती धस चुकी है अब तो इसी चट्टान का आश्रय है यह कभी भी ढर सकती है हनुमान संभल के बाल को संभल के हनुमान के अंजना मालिको सभल के सब एक दूसरे का हाथ पकड़े रहे संतुलन बनाए रखो ये चट्टान भी एक छोटे से आधार पर झूल रही है कभी भी कुछ भी हो सकता है मां आपने ही मुझे सीख दी थी अंतिम शवास तक आशा को नहीं छोड़ना [संगीत] चाहिए बहुत अच्छा पुत्र विजय प्रयास करने वालों को ही मिलती है जो करना है शीघ्र करो किंतु कुछ भी हो जाए आप सब अपना स्थान मत [संगीत] छोड़िएगा मा हनुमान तुम मेरी चिंता मत करो तुम सबको रक्षित करने का प्रयास करो कि तो मैं क्या करूं मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है हे महादेव हे प्रभु आप ही रक्षा कीजिए यदि कोई अदृश्य शक्ति हनुमान के परिवार को हानि पहुंचाना चाहती है तो हनुमान ने मुझे भी मां माना है मेरे प्राण ले लो किंतु हनुमान के परिवार को इस कष्ट से मुक्त कर दो ना जाने य कैसी देवी आपन पड़ी है कोई कुछ कर भी नहीं पा रहा है हनुमान अपने स्थान पर पत्थर रखकर उड़ने का प्रयास करो कुछ तो करो हनुमान किंतु मैं क्या करूं यदि मैं यहां से हिल गया तो यह पूर्ण चट्टान असंतुलित होकर गिर सकता है काल जब कुपित होता है हनुमान तो मनुष्य को बचने का कोई मार्ग नहीं मिलता ऐसा ही होता है काल का दंड हनुमान तुमने सबके संकट का मोचन किया है तुम ही इस संकट से हम सबको बचा सकते हो तुम्हें कुछ करना ही होगा मित्र हम सबकी रक्षा तुम्हें ही करनी है कुछ करो मित्र हनुमान मैंने तुम्हें असहाय का पाठ नहीं पढ़ाया है सोचो पुत्र की तुम क्या कर सकते हो हां मां असहाय पराजय का द्वार होता है मैं कुछ करने का प्रयास करता हूं हमारा मस्तिष्क असीम शक्तियों का भंडार है आवश्यकता है तो उन्हें पहचान कर उनका प्रयोग करने मस्तिष्क के एक भाग को जल पात्र पर केंद्रित करो और दूसरे भाग को उल्का पिंडो पर इस अभ्यास से ही तुम भावी जीवन में मन को को एकाग्र करके एक साथ अनेक कार्य करने की दक्षता प्राप्त कर सकोगे मन आत्मा और बुद्धि के संतुलन को समझ पाओगे मुझे कुछ करना ही होगा सखा सब से रोकर अपना संतुलन बनाए रखिए चलो सखा कालदेव के कठिन प्रयास विफल करें हनुमत स प्रयास अडिग अचलम देव कठोर हनुमत निर्मल भाव विभोर मारुती सं बालक संग ऐसा काल खेलते खेल ये कैसा कौन कहे क्या हो परिणाम मारुति महिमा ललित लला ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान नहीं हनुमान तुमने पुनः बचा लिया उन्हें किंतु काल के हाथ बहुत लंबे हैं जिनसे मुक्ति पाना असंभव [संगीत] है पुना होगा मेरा प्रहार और तब तुम नहीं बचा पाओगे अपने पिता [संगीत] को नियम का पालन सबको करना ही होगा संकट मोचन हनुमान की जय संकट मोचन हनुमान की जय संकट मोचन हनुमान की जय संकट मोचन हनुमान की जय संकट मोचन हनुमान की जय मां पिता श्री च मित्र हमारा हनुमान हनुमान हमारे मि हनुमान की [संगीत] जय [संगीत] मा [संगीत] हनुमान ने दोनों स्वप्नों में मुझ पर संकट देखा था ध्वज भी मेरे ऊपर गिरने वाला था कहीं यह संकट मेरे कारण तो नहीं आया सब [संगीत] पर हनुमान क्या हुआ पुत्र अब तो संकट टल गया है किंतु पिताश्री यदि संकट नहीं टलता तो आप सब इस यात्रा पर मेरे कारण आए हैं मेरे सारे मित्र भी मेरे ही कारण आए हैं यदि कोई अनर्थ हो जाता तो आप सबके प्राण भी संकट में पड़ गए थे किंतु मित्र इसमें तुम्हारा क्या दोष मित्र तुमने तो हम सबके संकट हरे हैं पुत्र हनुमान स्वप्न के कारण ऐसा सोच रहे हो ना यह विचार मेरे हृदय में भी आया था किंतु भूकंप आदि तो प्राकृतिक आपदा है कभी भी आ सकती हैं इन विषयों को लेकर भयभीत नहीं होना चाहिए और यदि यह किसी विशेष कारण से हो भी रहा है तो यह संकट तीर्थ यात्रा पूर्ण होने पर ही टल पाएगा हां मां अब हमें प्रस्थान करना [संगीत] चाहिए नहीं कोई आगे नहीं जाएगा नहीं कोई आगे नहीं जाएगा आगे की यात्रा मैं पूर्ण करूंगा आप सब यहीं से वापस लौट जाए किंतु स्वामी नहीं मैं अपने कारण सबके प्राण संकट में नहीं डाल सकता मैं अकेला ही आगे जाऊंगा आप ऐसा कैसे कर सकते हैं आपको छोड़ के कोई नहीं जाएगा यदि कुछ होना ही है तो हम सबको होगा हां स्वामी आपको अकेले नहीं जाने देंगे हम बस यह मेरा निवेदन नहीं मेरा आदेश है कोई आगे नहीं जाएगा राजा हूं मैं मेरे आदेश का पालन किया [संगीत] जाए बुद्धिमान है केसरी परिवार को संकट से बचाकर आत्म त्याग को अग्रेसर होना परिवार के मुखिया का कर्तव्य है आप अपना कर्तव्य निभाए केसरी हम अपना कर्तव्य [संगीत] निभाएंगे आपने हमारा मार्ग सुगम कर दिया है नियम है तो यम है पिता श्री आपका पितृ धर्म एवं राज्य धर्म है सबकी रक्षा करना और आपने मुझे भी सीख दी थी मनुष्य को धर्म का निर्वाह प्राण प्रण से करना चाहिए फर क्या मुझे अपना पुत्र धर्म नहीं निभाना चाहिए आप पर आसन संकट देखकर हनुमान कैसे आपसे विमुख हो सकता [संगीत] है सुख दुख के कच्चे धागों के अटूट बंधन मैंने आपसे बांधे हैं स्वामी आपका सुख दुख आपका संकट मेरा भी सुख दुख और संकट है और मुझे अपने पतिव्रत धर्म का निर्वाह भी करना है महाराज प्रजा राजा का परिवार होती है आपने भी तो हमें बंधु बांधव कहा था बंधु बांधव का दायित्व हमें भी निभाना होगा पिता श्री यदि मैं संकट में होता तो आप मुझे छोड़कर चले जाते सुख दुख दोनों जीवन राग विधि सब रचते राग विराग स्वजन साथ तो सच्चा भाग्य ऐसे में वन भी है राज्य अपनों का सुख पावन धर्म स्नेह भाव ही जीवन मर्म रखते हर पल सबका ध्यान जग में श्रेष्ठ स्वजन हनुमान मुझे जो होना है हो जाए किंतु मेरे कारण यदि आप सबके प्राण संकट में आएंगे तो मुझे बहुत कष्ट होगा सुख में तो सब साथ देते हैं अपनों की पहचान दुख में ही होती है स्वामी सुख आपस में बाटने से बढ़ जाता है और दुख अपने बांट ले तो कम हो जाता है पिता श्री आपने ही तो सीख दी थी कि एकता में शक्ति होती है हम सब मिलकर इस संकट का सामना करेंगे किंतु मैं तुम में से किसी को भी संकट में नहीं डाल सकता पिता श्री हनुमान भी आपका ही पुत्र है हनुमान आपको इस संकट में छोड़कर नहीं जा सकता भले ही आप हनुमान को आज्ञा के उल्लंघन का दंड क्यों ना दे दे मेरा तो सर्वत्र तुम हो पुत्र तुम्हें दंड देने का अर्थ है स्वयं को दंड देना हम सबको साथ चलने की अनुमति दे दीजिए पिता [संगीत] श्री ठीक है हम साथ चलेंगे हर संकट का सामना हम साथ मिलकर करेंगे अब मुझे हर क्षण सतर्क रहना होगा अपने माता-पिता और परिजनों का ध्यान रखना होगा
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