[संगीत] अभी युद्ध समाप्त नहीं हुआ है [संगीत] हनुमान [संगीत] या [संगीत] [प्रशंसा] किसने मेरा ध्यान भंग करने का दुस्साहस [संगीत] किया हनुमान तुमने मेरा ध्यान भंग कर कर उचित नहीं किया यह कैसी ध्वनि थी महाराज और अनायास य ध्यान भवन को क्या हो गया ये हनुमान की उदंड है पहले हनुमान ने कालचक्र को विपरीत दिशा में घुमाकर समय गति को विपरीत कर दिया फिर अनु दृत कालचक्र को बंद कर दिया इसके दुष्परिणाम दूर करने के लिए मैं स्वयं ध्यान समाधि में बैठा किंतु पुनः हनुमान ने मेरे कार्य में हस्तक्षेप किया गदा फेंक कर मेरा ध्यान भंग किया इसी गदा के प्रहार से मेरा भवन भी क्षतिग्रस्त हो [संगीत] गया शनिदेव मैं आपसे पुनः प्रार्थना करता [संगीत] हूं संसार के हित के लिए आप चंद्रदेव को अपने को दृष्टि का भाजन मत बनाइए अब तुम्हें मेरे कोफ से कोई नहीं बचा सकता शनिदेव भले ही पहले भी आपकी इस कृति ने संसार पर प्रलय की स्थिति ला दी थी किंतु अब मैं ऐसा नहीं होने दूंगा अच्छा तुम मुझे रोकोगे मैं भी देखता हूं तुम्हारी इस देह में कितनी शक्ति है शनिदेव के हट के कारण पुनः युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो रही है या हा [संगीत] [संगीत] सखा स्थान से हिले शनि देव के ग्रह को पुनः पूर्व स्थान पर लाना होगा [संगीत] सखा [संगीत] नारायण नारायण प्रतीत हो रहा है शनिदेव की मति स्वयं ही भ्रष्ट हो गई है हनुमान ने पुनः उन्हीं के ग्रह की स्थिति ठीक की थी और शनिदेव शनिदेव पुनः युद्ध के लिए उधत है इस युद्ध का पीज रोपण तो मेरे द्वारा ही हुआ है सत्य है अभिमान और अहंकार ही टकराव को जन्म देते हैं विनम्रता के जल से ही बुझाया जा सकता है किंतु मेरे अभिमान ने उस अग्नि में गृत का कार्य किया है हे देवेश्वर आप इस युद्ध को रोकते क्यों नहीं देवी क्रोध ज्ञान के द्वार को बंद कर देता है काल चक्र के मुख से बाहर आने के पश्चात शनिदेव के क्रोध का शांत ना होना इस बात का तक है कि अभी भी कुछ है जो शेष [संगीत] है हनुमान मेरी शत्रुता केवल चंद्रदेव से थी किंतु तुम्हारी मां ने उन्हें रक्षा का वचन देकर उचित नहीं किया अब ना तुम्हारी मां का व्रत पूर्ण होगा और ना ही उनका वचन बहुत समय व्यतीत हो गया है ना जाने मां की दशा कैसी होगी पूर्णिमा के चंद्रमा की प्रतीक्षा करते करते उनका कष्ट और भी अधिक बढ़ गया [संगीत] होगा महारानी जी महारानी [संगीत] जी अंजना अंजना नेत्र खोलो पुत्री केसरी जी प्रतीत होता है अंजना पुन अचेत हो गई अंजना अंजना अंजना ना जाने क्या होने वाला [संगीत] है चंद्रदेव के दर्शन तो प्रतीत होता है जैसे आज भी नहीं होने वाले हैं आज महा पूर्णिमा है यदि आज की राजचंद्र देव अतीत हो गए तो उनकी रश्मिया देवी अंजना को जीवन दे [संगीत] सकती अन्यथा नर्स की संभावना [संगीत] है मां के कष्ट को अब मुझे शीघ्र ही दूर करना होगा इस विवाद को शीघ्र समाप्त करना होगा जिससे चंद्रदेव उदित हो सके और मां का व्रत पूर्ण हो क्या सोच रहे हो हनुमान प्रतीत होता है बालक को उसकी मां की स्मृति सता रही है उचित होगा कि तुम सुमेरू वापस लौट जाओ तुम्ह देखकर तुम्हारी मां के हृदय को शांति मिलेगी [संगीत] [संगीत] सखा हनुमान ये तुम उचित नहीं कर [संगीत] रहे [संगीत] शनिदेव अंतिम बार कह रहा हूं चंद्रदेव पर से अपनी को दृष्टि का प्रभाव हटा दीजिए हनुमान तुमने मुझे बांध कर उचित नहीं किया अब चंद्रदेव ही नहीं मेरी दृष्टि का प्रकोप टूटेगा तुम्हारी मां पर तुम्हारे पूरे परिवार पर इस समस्त संसार पर मैं सबको भस्म कर दूंगा शनिदेव आप ऐसा नहीं करेंगे और सर्वप्रथम तुम्हारी मां मेरी दृष्टि के कोप की भागी होंगी बनी देव मैं आपको ऐसा कुछ नहीं करने दूंगा [संगीत] हनुमान छोड़ो मुझे मां का नाश करेंगे शनिचर हुए व्याकुल मारुती सुनकर भीषण युद्ध छिड़ा तत्काल हुए शनिचर विकट विशाल शनि के पराभव का अनुमान मातृ भक्त योधा हनुमान सखा पूछ को अस्त्र बनाकर शनि को सीखते रहे वीर ये धा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान इतना कुछ हो गया अब तो शनिदेव को अपनी हट छोड़ ही देनी चाहिए प्रतीत होता है यदि शनिदेव को अब समझाया जाए तो कदाचित वह अपनी भूल स्वीकार कर ले आप मेरी मां को अपनी कोद जी का भाजन [संगीत] बनाएंगे कहीं ये सत्य तो नहीं मेरा अमृत कलश घर तो नहीं [संगीत] गया प्रणाम लंकेश क्या हुआ लंकेश आप बहुत विचलित प्रतीत हो रहे हैं कहीं ऐसा ना हो कि लंकेश अभी ही अमृत पान करने के विचार से आए हो काल नेनी राहु कैतू तुम तीनों इसी क्षण जा और पूर्णिमा का चंद्र उदय होते ही हमें सूच करो जाओ मेरी मां को शत्रु भाव से देखने वाला मेरा भी शत्रु होगा हां क्षमा शमा हनुमान मुझे मुझे खेद है अपने किए पे शनिदेव आपके कारण मेरी मां के प्राण संकट में है शांत हो जाओ हनुमान शांत हनुमान शनिदेव को अपनी गलती का आभास हो गया इन्हें अपने बंधन से मुक्त कर दो नहीं यह दंड के पात्र है हनुमान हनुमान हनुमान हनुमान क्षमा से बड़ा कोई दान नहीं होता हनुमान मेरे स्वामी क्षमा मांग रहे हैं इन्ह मुक्त कर दो और और भूल मान लेना ही सबसे बड़ा प्रायश्चित होता है [संगीत] हनुमान मैं अंजन आपकी रक्षा का वचन देती हूं किसी भी परिस्थिति में मैं अपने वचन से पीछे नहीं [संगीत] हटू [संगीत] प्रणाम माता मुझे क्षमा कर दीजिए मैं ऐसा नहीं कर पाऊंगा जब तक शनिदेव चंद्रदेव के ऊपर से अपना प्रकोप नहीं हटा लेते और उन पर अपनी पूर्ण दृष्टि पात का हक नहीं त्याग दे तब तक मैं इन्ह नहीं छोड़ सकता हनुमान मुझे पश्चाताप है अपने किए पर अपनी दृष्टि के भयानक प्रभाव से लोगों को भय भीत देखकर मैं अहंकार से भर उठा था न्याय के देवता के अभिमान में मैं जो कुछ भी करता रहा उसी को न्याय समझता रहा मुझे पछतावा है मुझे क्षमा कर दो हनुमान क्षमा कर दो मुझे [संगीत] अपने स्वामी की ओर से मैं भी क्षमा मांगती हूं हनुमान इनके इस दोष में कहीं ना कहीं मैं भी सहभागी हूं यदि मैंने इन्हे श्राप ना दिया होता तो कदाचित इनकी दृष्टि ऐसी नहीं होती मैं चित्र रथा श आपको श्राप देती हूं अब से आप अपनी दृष्टि उठाकर जिसको भी देखेंगे उसका विनाश हो जाएगा नाश हो [संगीत] जाएगा माता आप मुझसे क्षमा मांगकर मुझे पाप का भागी मत बनाइए वो तो मैंने अपनी मां के मातृ भाव से मैं इतना क्रोधित हो गया था यदि मां का वचन पूर्ण ना हो सका तो उनके प्राण संकट में भी हो सकते हैं [संगीत] माता मैं आपको निराश नहीं करूंगा माता [संगीत] [संगीत] सखा [संगीत] स्वामी हनुमान अहंकार के कारण मेरी मति भ्रष्ट हो गई थी किंतु तुमने मेरे अहंकार को तोड़कर मेरे नेत्रों से आवरण हटा दिया मैं आभारी हूं [संगीत] तुम्हारा सारी ग म ग स रे ग स नि पनी स रे ग म [संगीत] ग
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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
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