Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण ने पुंडलिक को उचित राह दिखाया HitanshuJinsi Vighnaharta Ganesh Episode 870 PenBhakti

[संगीत] [संगीत] पुंडलिक कूप कभी प्यासे के पास नहीं जाता भगवान भी उसी की सहाय जो यह समझे कि उसे सहायता की आवश्यकता है और वह उस सहायता को स्वीकार करने के लिए तत्पर [संगीत] रहे मुझे लगा जैसे पुंडलिक था वहां मैं उसकी मां हूं यदि वह यहां होता तो मुझे उसका आभास अवश्य होता आप विश्राम कीजिए स्वामी उचित कहा दाई जी ने पुंडलिक भाऊ का आवास उन्हें होता किंतु जो यहां थे वो भाव नहीं कोई और ही [संगीत] थे पिता के लिए उसका आदर भी मिट गया जिनकी प्रत्येक आज्ञा मानता था वह उन्हें देखने पर रोका तक नहीं पर उसका हृदय इतना कलुषित कैसे हो सकता था उसका स्वभाव जो था वो जो करता था उसमें जैसे डूब ही जाता और दुर्भाग्यवश इस बार वह काम और मोह जैसे विकारों में लीन हुआ था उनसे पूर्ण रूप से पत भ्रष्ट होकर वह अंधकार के दलदल में धंसा जा रहा था रुको देखा आ [संगीत] गया लो प्रहर आनंद लो धन लाया हूं देखती हूं क्या लाया [संगीत] है [संगीत] आइए आइए श्रीमान स्वागत है आपका पान [संगीत] लीज अब मिलेंगे चंद्र के दर्शन [संगीत] यह तो आप चंद्रकला के लिए लेकर आए होंगे प ली अपने हाथों से चंद्रकला को पहना [संगीत] दीजिए शमान खड़े मत रहिए आपकी चंद्रकला आपकी प्रतीक्षा कर रही है [संगीत] [संगीत] [संगीत] जाइए [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] अद्भुत [संगीत] [प्रशंसा] इतना आकर्षक इतना मनमोहक व्यक्तित्व [प्रशंसा] [संगीत] यह आपने क्या कर लिया तुम्हारे पुष्प जैसे पाव आहत हो जाए और पुंडलिक देखता रहे यह कैसे संभव है किंतु आप भी तो आहत हो गए ना दिखाइए दिखाइए ना पहली बार यहां आए और आते ही स्वयं को आहत कर लिया [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] लाइए तुम्हारे सौंदर्य के आगे इसकी सुंदरता का कोई इस तुच हार को धारण कर इसके मान को और बढ़ा दो [संगीत] चंद्रकला आप स्वयं क्यों नहीं पहना देते [संगीत] मुझे [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] यह उपहार नहीं यह मेरा आशीर्वाद है तुम फिर तो यह सदैव मेरे साथ रहेगा इसे कभी अपने से दूर नहीं होने दूंगा क्या हुआ रुक क्यों गए फूलों की सुगंध सखियां मेरी चांदनी सहेली है चंद्र क का असली सज्जन कौन है सचमुच बहुत बड़ी पहेली है तुम्हें निहारे बिना हम रह नहीं सकते हैं कोई और ऐब है तो बताओ इस तपती दृष्टि से मत देखो पिघल रही है [संगीत] [संगीत] चंद्रकला भाव पुंडलिक के मन में तो एक पल का भी संदेह नहीं आया वो बस यहां सभी को अनदेखा कर चले गए विश्वास नहीं होता पुंडलिक हमारे साथ भी ऐसा कर सकता है ताऊ जी पहले से ही व्याकुल है इन्ह आगात हुआ भाऊ पुंडलिक आए थे और इन्ह इस अवस्था में देखकर भी चले गए तो यह और आहत होंगे हमारा पुत्र होकर भी वह हमारे साथ पराए की तरह व्यवहार कर रहा है और दूसरी ओर तुम हो पुत्र किंतु ताऊ जी मैं पराया कहां हूं मैं भी तो आपके पुत्र के ही समान हूं ना चंद्रकला इसे पराया लगने नहीं देगी कुंडली के मन में अप ना होने का भ्रम उत्पन्न करके रहेगी किंतु मेरे द्वारा उसके धन को हड़पना सत्य [संगीत] [प्रशंसा] होगा [संगीत] [प्रशंसा] तया कर ने सही कहा था धनी तो है यह इसे निर्धन बनाने का कार्य तुम्हारा है केत की बार [संगीत] [संगीत] प्रभु गोपाला के दीपक की लो बूझ गई तो हमारी आस भी बूझ जाएगी नहीं गोपाला हमारे सौभाग्य के दीपक को मत बूझने [प्रशंसा] [प्रशंसा] दीजिए रे रे बा रे बा चिंता मत कीजिए देवी अंधेरे के चर्म के बाद ही उजाला फैलता है जहां मनुष्य के प्रयास विफल हो जाते हैं वहां प्रभु ही राह दिखाते हैं क्या हो रहा है ताऊजी उत्साह और उमंग से पूजा कर रहे हैं ताई जी भगवान बना रही हैं क्या कुछ बदल गया [संगीत] है [संगीत] मेरी हर सुबह ऐसी हो आंखें खोलू तो तुम सामने हो और तुम्हें बस यूं ही निहारता रह तुम्हारे इस अनुपम सौंदर्य में डूब जाऊ मेरी [संगीत] चंद्रकला आओ दिवाकर पूजा में मेरा साथ दो कल रात ही मुझे समझ में आया कि हम व्यर्थ चिंता में घोले जा रहे थे जब गोपाला है तो हमें किस बात की चिंता वही हमारे पुत्र को स्वयं लौटा लाएंगे इसीलिए तो आज उसके सभी प्रिय पकवान बना रही हूं मैं पुरण पोड़ी गुड़ का शिरा नार वड़ी और कड़ी चावल देखना पुत्र जैसे ही वो आएगा अपने मां के हाथों का भोजन खाकर सब कुछ भूल [संगीत] जाएगा चंद्रकला [संगीत] क्या हुआ मां तूने अभी तक विदा नहीं किया इसे मेरे हृदय की इच्छा होगी तब चला जाएगा जाना तो होगा इसे तभी त धमा मां मैंने कहा ना मैं जब जाने दूंगी तभी जाएगा [संगीत] यह वह तभी लौटेगा जब गोपाला की इच्छा होगी इसलिए मैं निरंतर प्रार्थना करूंगा कि प्रभु गोपाला हम पर शीघ्र कृपा करें और हमारे पुत्र को लौटा लाए देवी केतकी बाई ने स्वादिष्ट भोजन भेजा है आपके इन विशेष अतिथि के [संगीत] लिए तुम जाओ मैं खिला [संगीत] दूंगी [संगीत] जैसे ही वो आएगा अपने सभी प्रिय पकवान देखकर प्रसन्न हो [संगीत] जाएगा आज उसे अपने हाथों से भोजन कराऊंगा [संगीत] [संगीत] भाऊ को इनकी कोई चिंता नहीं और यह है कि उनके लिए अपना सर्वस्य निछावर कर रहे [संगीत] हैं भीतर से कितनी दुखी है ताई जी यह तो उनके हाथों से ही ज्ञात हो गया किंतु यह भी ज्ञात है मुझे भाऊ के मन में एक बार भी इनका विचार नहीं आया होगा [संगीत] [संगीत] हे प्रभु गोविंद अब से मैं आपका ध्यान रखूंगा हे गोपाला हे नंदलाला अब आपसे क्या छुपा है प्रभु आप देख रहे हैं ना कैसी ये दोनों तन्मयता से आपकी भक्ति कर रहे हैं जिससे इनके पुत्र भाऊ कुंडलिक बुराई को छोड़कर फिर से अच्छाई को अपना ले और एक और भाऊ पुंडलिक है जिन्होंने इन पर ध्यान तक नहीं [संगीत] दिया स्वादिष्ट है ना मां ने अपने हाथों से बनाया है पर इसका स्वाद तो तुम्हारे हाथों के स्पर्श से बड़ा है प्रभु ताऊ जी के साथ रहकर एक सत्य तो मैं समझ गया हूं कि आप अपने भक्तों का साथ कभी नहीं छोड़ते कृपा कीजिए प्रभु अपने भक्त पुंडलिक पर उन्हें उचित मार्ग दिखाकर सन्मार्ग पर ले आइए जिससे व अपने वृद्ध माता-पिता के पास वापस लौट आए प्रभु मानती हूं आपका भक्त पुंडलिक आपको भूल बैठा है किंतु वही दूसरी ओर आपका दूसरा भक्त आपके उसी भक्त के लिए आपकी पूजा अर्चना कर रहा है किंतु आप यह प्रार्थना क्यों स्वीकार नहीं कर रहे [संगीत] हैं क्या हुआ रुक जाओ कहीं मत जा चिंता हो गई क्या कि मैं अभी चली गई तो कहीं सदा के लिए ना चली जाऊ ऐसा कभी नहीं होगा मेरी भी तो हृदय की इच्छा है कि आप मुझ में सदैव खोए रहे कहीं ना जाए और इसमें मेरी सहायता करेगी मधरा लाती [प्रशंसा] हूं [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] प्रभु मेरे गोविंदा पदमनाभम सुरेशम विश्वाम गन सदम मे वर्णम [संगीत] [संगीत] [संगीत] सुंगम सौंदर्य का अनुभव करना है मुझे गोविंद सौंदर्य को निहारना है वो करने दीजिए मुझे [संगीत] गोविंद हे प्रभु हे गोपाला सुनिए मेरी गुहार उचित मार्ग पर ले आइए भाव कुंडलिक को हमारा पुत्र भटक गया उसका मार्गदर्शन कीजिए प्रभु उसे धर्म के भक्ति के मार्ग पर लाने की कृपा कीजिए एक मां की गुहार सुनिए [संगीत] प्रभु प्रभु प्रभु जैसे प्रत्यक्ष सामने आ क्या हुआ ऐसे विचलित क्यों हो गए आप पहले कभी मदेरा पान नहीं किया क्या नहीं कैसे बताऊ इसे जैसे स्वयं प्रभु को देखा हो मैंने मदिरा भी बन जाए अमृत समान जो चख ले मेरे हाथों से [संगीत] कृपा कीजिए प्रभु भाव कुंडलिक पर दया कीजिए हे प्रभु गोपाला आपके सिवाय और कोई नहीं जो उसे लौट आने के लिए प्रेरित कर सके [संगीत] आप अचानक से इतने भावुक कैसे हो [संगीत] गए मुझे जाना होगा जाना होगा मुझे आप क्यों जा मुझसे कोई भूल हुई है क्या मुझे जाना है जाना है मुझे मेरे गोविंद मुझे बुला रहे हैं इस प्रकार जाने का कारण तो बताइए रुक जाइए ना मैं आपको जाने नहीं [संगीत] दूंगी मुझे इस प्रकार निराश करके मत जाइए मैं तुम्हे कैसे निराश कर सकता हूं तुम्हारे साथ तो मुझे परम आनंद आता [संगीत] है आपने अपनी उपस्थिति का आभास कराया उसे उसे उचित मार्ग दिखाया तब भी वह भ्रमित क्यों है प्रभु मेरा कर्तव्य है उसे उचित दिशा दिखाना किंतु उसका चुनाव करना भक्त का दायित्व अभी वह स्वयं अपनी सहायता के लिए तैयार नहीं उसके भीतर से बदलाव की इच्छा जब तक जागृत नहीं होगी उसे दूसरों की प्रार्थना का भी लाभ नहीं होगा दूसरे किसी के लिए प्रार्थना करें उससे सहायता तो मिलती है किंतु उन संकेतों को समझना उसके लिए तो स्वयं के हृदय में भगवान की भक्ति की लौ जगानी होती है भक्त भटक भी जाए तो भी भगवान उसका साथ नहीं छोड़ते वह तो सदा संकेत देते रहते हैं किंतु कष्ट पूर्ण रूप से नहीं मिटते और उनके अनुसार चलना का दायित्व है इसका एक उदाहरण तो मैं भी हूं ना प्रभु लगता है महादेव मुझे लेकर निराश हो गे इसलिए उन्होंने आपको भेजा है मुझे भक्त मार्ग भटक सकता है भगवान नहीं वह तो सदैव अपने भक्तों की भक्ति का आनंद उठाने के लिए उनके साथ रहते हैं और भक्ति की यह अनोखी परीक्षा अब भक्त पुंडलिक को ही नहीं उसके समस्त परिवार को देनी थी ऐसे कठिन समय में भी जो भक्त भक्ति नहीं त्याग अपनी आस्था और अपने विश्वास पर अडिग रहते हैं उन्हीं की नैया पार होती है लगता है भाऊ लौट [संगीत] आए यहां तो कोई नहीं है बस ताऊजी और ताई जी भाऊ की प्रतीक्षा में चिंता मत कीजिए सत्यवती हमारा पुत्र लौट आएगा व्यर्थ है आपकी [संगीत] [प्रशंसा] प्रतीक्षा जिसे आप दोनों की कोई चिंता ही नहीं उसके टने की आशा क्यों कर रहे हैं आप दोनों आप कैसे आप दोनों का स्वास्थ्य कैसा है यह सब भूलकर जो भटका हुआ है जिसे आप दोनों का कोई विचार नहीं उसके लिए दृष्टि गड़ाए बैठे रहने का कष्ट क्यों सह रहे हैं आप दोनों विचार तो उन्हें करना चाहिए आना तो उन्हें चाहिए इस आयु में तो आप दोनों को नियमित दिनचर्या के अनुसार एक समय पर भोजन मिलना चाहिए यह सब उन्हें सोचना चाहिए और यहां सारा भोजन व्यर्थ हो रहा है उनके कारण आप दोनों भी भोजन नहीं कर रहे हैं उनकी प्रतीक्षा का क्या लाभ जो कल यहां आए भी थे और आप दोनों को अनदेखा कर धन लेकर चले गए और यहां आप है जो उनकी बाट जो हो र है य के पुत्र प्रेम की कैसी पराकाष्ठा है मैं सत्य कह रहा हूं वो कल यहां आए थे किंतु आपसे भेट करने तक कि नहीं सोचे [संगीत] उन्हे मेरा पुत्र यहां आया और मुझे स्वस्थ देखकर भी नहीं रुका किसी का इतना सम्मोहन हो गया उस पर [संगीत] अब क्या करूं मैं पुंडलिक को और मोहित करने के लिए जिससे यह कभी जाने का विचार ही ना [संगीत] करे व्यक्ति के विचार में यदि विष घुल जाए तो उसके कर्म भी विषैले हो जाते हैं इसलिए विचार शुद्ध हो यह आवश्यक

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...