Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण ने पुंडलिक की सहायता क्यों की Hitanshu Jinsi Vighnaharta Ganesh Episode 882 PenBhakti

प्रभु जिन योगी महात्मा का अपमान पुंडलिक ने किया था उन्होंने क्या कहा था आज जिस माता पिता को फोकर मार के तुम बाहर निकाल रहे हो कल उसी माता पिता की सेवा करने के लिए दरदर की ठोकरे खाओ और इतना ही नहीं भविष्य में तुम अपनी माता पिता की सेवा के लिए जगत में जाने भी जाओगे [संगीत] प्रभु यह तो खाई की ओर बढ़ा जा रहा है सुरक्षित तो रहेगा ना [संगीत] [संगीत] पुंडलिक देवी देवी हम हम शीघ्र पुंडलिक के निकट [संगीत] पहुंचेंगे य क्या हो रहा है ताज ई मुर्शद क्यों हो गई व मुछ से बाहर क्यों नहीं आ रही है पुत्र दिवाकर प्रभु गोपाला है हमारे साथ वह हमारा कुछ बुरा नहीं होने देंगे हे प्रभु गोपाला अब आपका ही आसरा [संगीत] है देव [प्रशंसा] [संगीत] देव सत्यवती [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] सारे जगत के जीव सारे मनु मेरी ही तो संतान [संगीत] है [संगीत] क [संगीत] [संगीत] मेरे पुत्र को कुछ हुआ तो नहीं ना प्रभु बताइए ना मुझे उसे कुछ नहीं हुआ [संगीत] ना मन बुद्धि और कृति इन तीनों का शुद्धीकरण ही प्रायश्चित है जब भक्त अपनी भूल समझकर प्रायश्चित के पथ पर हो तब भगवान उसे कैसे छोड़ सकते [संगीत] हैं धन ही तो चीना है संपत्ति ही चीनी है ना तुम्हारी सुंदरता तो नहीं छीन सके यह सुंदरता फिर संपन्न करेगी हमें और धनी बनाएगी [संगीत] केत की बाई अब भी पूरी योजना बना रही है विश्वास नहीं होता विश्वास करो पुत्री तुम्हारी मां सत्य कह रही है कोई अन्य पुंडलिक शीघ्र ही मिलेगा हम जहां जाएंगे कोई ऐसा अवश्य मिलेगा जो अपना सब कुछ तुम पर नछा कर देगा केकी भाई ईश्वर बारबार अवसर नहीं देता केकी भाई अवसर मिला है तो इसका लाभ उठा त्याग दो इन कुलू विचारों को तुम्हें आभास भी है कि तुम्हारे इन विचारों के कारण एक भरा पूरा परिवार बिखर गया परिवार का मुखिया जंगल में रहने को विवश है उसके घर की बहू उसकी ग्रह लक्ष्मी ग्रह विहीन हो गई और उसके घर का एक मात्र कुलदीपक कहां है किसी को ज्ञात [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] नहीं [संगीत] भाई आप कुछ कहते क्यों नहीं बताइए ना वो कुशल तो है ना वो सुरक्षित है ना देवी आप इतनी चिंतित क्यों है बताइए मुझे क्या है आपकी चिंता का कारण एक मां का हृदय तभी जोर से धड़कता है जब उसकी संतान पर विपत्ति की ली छाया छा जाती है मुझे आ हो रहा है मेरा पुत्र मेरा पुंडलिक उसे अवश्य कुछ हुआ है मुझे मेरे पुत्र के पास ले चलिए स्वामी अब मैं एक पल के लिए भी य नहीं रुकू मुझे ले चलिए स्वामी मुझे ले चलिए मुझे शांत हो जाइए सब कुशल होगा मुझे प्रभु गोपाला पर पूर्ण विश्वास है हमारे पुंडलिक को कुछ नहीं [संगीत] होगा कुशल कुछ नहीं हुआ [संगीत] मुझे चलिए इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद भी मैं सुरक्षित हूं तो मेरी रक्षा अवश्य मेरे प्रभु को पालने की [प्रशंसा] होगी तु मैं इसके योग्य का य तो बस मेरे आई और पिताजी का आशीर्वाद उनकी भक्ति जिसके कारण मैं जीवित हूं व मुझे लेकर बहुत चिंतित होगी स्वामी कुछ तो अवश्य हुआ है उसे मैंने मैंने देखा जैसे वो जैसे वो का में गिर रहा हो एक मां का हदय कभी झूठ नहीं कहता स्वामी जो मैं कह रही हूं उसे सुनिए स्वामी मुझे उसके पास जाना है मुझे उसके पास ले चलिए मुझे उसके पास ले चली उसकी चिंता तो मुझे भी है किंतु हमारे पुत्र और पुत्र वधु को हमारी आवश्यकता नहीं है तो हम कैसे लौट सकते हैं वहां उन्हे कष्ट होगा यद ऐसा ना होता तो उसी दिन हमें रोक ना लेते उन्होंने हमें नहीं रोका तो कुछ नहीं होता मुझे पूरा विश्वास है मेरा पुत्र संकट में है इस समय मुझे उसके साथ होना चाहिए मुझे उसके पास जाना है स्वामी हमें उसके पास चलना चाहिए ताऊ जी ताई जी यदि भाऊ के पास जाना चाहती है तो कदाचित हमें वहां जाना चाहिए हम वहा रुकेंगे नहीं बस भाऊ से मिलकर वहां से लौट आएंगे इससे उन्हें कष्ट भी नहीं होगा और जी का मन भी शांत हो जाएगा उचित है पुत्र आ पिताजी का आशीर्वाद जिसने मुझे दूसरा जीवन दिया मात्र देव भवा पित देव चलो [संगीत] प्रिय मात्र देव [संगीत] देव उस दैनी स्थिति में पुंडलिक गलत दिशा में जा रहा था अर्थात तो उसके माता-पिता से उसकी भेंट नहीं होने वाली थी दिशा अनुचित थी किंतु पथ नहीं उसने प्रायश्चित के पथ का चुनाव किया था और जो धर्म के पथ पर निकल पड़ते हैं उन्हें ईश्वर की कृपा से उचित दिशा भी मिल जाती है और उस दिशा में आगे बढ़ने का साहस [संगीत] भी इन्हें इस अवस्था में देखकर बहुत दुख हो रहा है [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] मुझे [संगीत] प्रभु बड़ी दुविधा में हूं कैसे कहू जिसे यह ढूंढने जा रहे हैं कोई नहीं जानता वह कहां है यह सुनकर य सुनकर इनके हृदय को कितना आघात लगेगा और वहां पहुंचकर [संगीत] वहां पहुंचकर जब जब सत्य पता चलेगा तोय और द्रवित हो जाए शमा महात्मा जी क्षमा उससे बहुत बड़ा अपराध हुआ है मुझे समाधान देने की कृपा [संगीत] कीजिए जो दुर्व्यवहार मैंने किया था व आई पिताजी द्वारा शमा योग नहीं ख मुझे इस अवस्था में देखेगी ने दुख हो फिर मैं क्यों लौट रहा व जाने का कोई लाभ [संगीत] नहीं महात्मा जी इस पापी पर कृपा कीजिए यह तो दयाकर का स्वर है अब तो आप जैसे महात्मा ही मेरा मार्ग दर्शन कर सकता हूं बाप का भागी तो मैं भी हूं जिसने एक संस्कारी पुत्र को अधर्म के मार्ग पर भटका जिसके परिणाम स्वरूप उसका परिवार तक छिन गया जब तक मैं अपना अपरा समझ पाता तब तक विलंब हो चुका था मेरा कोई भी प्रयास तुच्छ है उस अपराध के सामने क्षमा के योग्य नहीं हूं इसलिए बार-बार बारबार गिलानी होती है सच्चे मन से जो प्रायश्चित करे वो क्षमा के योग्य होता है स्वयं भगवान से समाधान देने के लिए तत्पर हो जाते हैं स्वयं भगवान से समाधान देने के लिए तत्प हो जाते हैं अपनी भूल समझने पर शमा मांगने पर भगवान भी मुझे क्षमा कर सकते हैं अर्थात मे आई पिताजी भी मुझे क्षमा कर सकते हैं हे महात्मा मेरे ही कारण एक एक धर्मात्मा माता पिता अपने पुत्र के द्वारा परिता के बाद जंगल में रहने को विवश है किंतु व अब भी अपने पुत्र की चिंता में तड़प रहे हैं किंतु व अ भी अपने पुत्र की चिंता में तड़प रहे अदभुत है उनका पुत्र प्रेम उससे दूर होते हुए भी उ अपने पुत्र के अक का आभास हो गया है उसी पुत्र की चिंता में व व घर लौट कर जा रहे हैं किंतु उन्ह जत ही नहीं कि उन्ह वहा क्या मिलने वाला है मुझे आई पिताजी की चिंता सदा रही है वो वहां लौटेंगे तु तो घर में कोई नहीं मिलेगा उन्हे चिंता मत करो पुत्र प्रभु की लीला और दया हमारी कल्पना से परे है भक्तों के लिए जो आवश्यक है प्रभु अवश्य करेंगे अभी तुम्हारा जो कर्म है तुम वो करो अभी तुम्हारा जो कर्म है तुम वो करो आप जो कहेंगे मैं वो करूंगा हे ज्ञानी महात्मा मेरा मार्ग दर्शन कीजिए मेरा मार्ग दर्शन कीजिए मुझे तो एक ही मार्ग पता है भक्ति का जो भक्ति के मार्ग पर चलते हैं उनकी सारी बाधाएं सारी कठिनाइया अपने आप ही दूर होती चली जाती है तब तो मुझे भी बाधाओं और कठिना की चिंता नहीं करनी चाहिए [संगीत] हे योगी महात्मा जी मुझे दीक्षा द ताकि मैं भक्ति के पथ पर चल सकू कल्याण [संगीत] हो [संगीत] लोव ताई जी आइए विश्राम कीजिए यही प तो प्रभु अंतत पुंडलिक उचित दिशा और उचित मार्ग पर आ ही गया हां पुष्पदंत जी कभी कभी धर्म का यह पथ अत्यंत कठिन हो सकता है किंतु जो इस पथ पर आने वाली कठिनाइयों को सहने की क्षमता रखता है उस पर कभी ना कभी प्रभु की कृपा अवश्य होती है उसे अपने लक्ष्य की प्राप्ति होती [संगीत] है [संगीत] [संगीत] पिताजी [संगीत] भूल होने पर उसको स्वीकार कर उसका प्रायश्चित करने पर भगवान भी सहायता करते हैं किंतु कोई अपनी भूल ही ना माने तो वह सबसे अकेला पड़ जाता है तुम्हें आभास भी है कि तुम्हारे इन विचारों के कारण एक भरा पूरा परिवार बिखर गया भूल तो की है तो प्रश्चित भी करना होगा कपट में भला कैसा अनंत तो फिर मेरे जीवन में आनंद कैसे आएगा मैं कैसे प्रसन्न रहूंगी इसका माग कौन दिखाएगा [प्रशंसा] मुझे [संगीत] मुझे जाना होगा जाना होगा मुझे तो क्या भगवान पुंडलिक को उस समय उचित मार्ग दिखा रहे थे और मैं उसे भटका रही [संगीत] थी [संगीत] अब हमने पर्याप्त विश्रम कर लिया है हमें चलना चाहिए सत्यवती आप लंबे समय से चलती आ रही हैं थोड़ा विश्राम कर थोड़ी ऊर्जा प्राप्त कर लीजिए फिर हम पुनः आगे बढ़ेंगे नहीं स्वामी अब हमें विश्राम नहीं करना है नहीं प्रिय आपका रुकना उचित होगा तभी आपके पांव की पीड़ा दूर होगी और आप पहुंच सकेंगे अपने पुत्र के [संगीत] पास मात देव [संगीत] देव [संगीत] अब मैं उनके चरणों में गिरकर उनसे सभी भूलों की क्षमा मांगूंगी उन्हें घर लाऊंगी जीवन भर उनकी सेवा करूंगी देवी मालती इस अवस्था में है किंत कहां है वो कहां ढूंढू मैं अपने सास ससुर [संगीत] को देवी मुझे देखकर आपका संदेह उचित है किंतु मैं वो दयाकर नहीं हूं मैं अब धर्म के मार् कान हूं भक्तिमय है मेरा हृदय रुकिए देवी क्या यह वास्तव में बदल सकता है मेरा विश्वास कीजिए मैं अपना अपरा समझ चुका हूं मैं आपका दोषी हूं आपसे क्षमा याचना करता हूं हो सके तो मुझे मुझे क्षमा कर दे [संगीत] देवी अपराधी तो हम सभी हैं दयाकर क्षमादान तो मैं भी चाहती हूं इसीलिए तो अपने सास ससुर को ढूंढते ढूंढते यहां तक चले आई इसमें मैं आपकी सहायता कर सकता हूं आप अभी ऊंची दिशा में नहीं जा रही है मैंने तो उन्हे नगर की ओर लौटते देखा था वन के मार्ग से यही मार्ग सुझाया था दयाकर ने वो यही कई [संगीत] होंगे और पिताजी से क्षमा प्राप्त कर जीवन भर उनकी सेवा करना बस यही लक्ष्य है मेरे जीवन का स्वामी अब और प्रतीक्षा नहीं करना चाहती मैं आइए आगे बढ़ते [संगीत] [संगीत] [संगीत] हैं [प्रशंसा] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] मेरे हाथ तो इस कीचड़ में धस गए [संगीत] [संगीत] अब मैं समझा मैं बारबार असफल क्यों हो रहा हूं मैंने अपने गोविंद अपने प्रभु को जो ठुकरा दिया पहले मुझे उन्हें अपनाना होगा तब वो मेरे परमेश्वर मेरे मां पिताजी से भेट करवाएंगे हे गोपाला मेरे आई और पिताजी तक पहुंचने में मेरी सहायता [संगीत] कर [संगीत] कृष्ण जिनका नाम है गोकुल जिनका नाम है ऐसे श्री भगवान को ऐसे श्री भगवान को बारंबार प्रणाम है बारंबार प्रणाम है क्या हुआ स्वामी आप रुक क्यों गए सत्यवती ये पुंडलिक का स्वर है कृष्ण जिनका नाम है गोकुल जिनका न है ऐसे श्री भगवान को ऐसे श्री भगवान भाऊ पुलिक यही कही है किंतु दिखाई क्यों नहीं दे रही है प्रणाम है बारंबार प्रणाम [संगीत] है स्वामी कहां है मेरा पुत्र मुझे दिखाई क्यों नहीं दे रहा उसका स्वर सुनाई क्यों नहीं दे रहा [संगीत] मुझे [संगीत] पिताजी [संगीत] [संगीत] भा भाई पिताजी [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] कुंडलिक [संगीत] [प्रशंसा] व्यक्ति की कई महत्वाकांक्षाओं होती हैं किंतु त्याग और भक्ति उसे श्रेष्ठ बनाती है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...