[संगीत] महा प्रणाम माते प्रणाम मेरे विचार में गंगापुत्र को अपने जीवन के अंतिम क्षणों के साथ अकेला छोड़ना चाहिए इन्हे छोड़ कैसे दे वासुदेव ये हमारे पितामह है पितामह तो मैं पांडवों का हूं दुर्योधन मुझे अकेला छोड़ दो जीवन भर मैंने तुमसे या तुम्हारे पिता से कुछ नहीं मांगा आज एकांत मांग रहा हूं जो आया पितामह परंतु हम लोग आपको देखने के लिए आते जाते रहेंगे आज धराशाई हुए गुरुकुल के सरताज उनको अभिवादन करे सारा वीर समाज सारा वीर [संगीत] समाज श्वेत आत्मा श्वेत युग श्वेत केश या [प्रशंसा] वेश कहां दिखे इस लोक में ऐसा वीर विशेष ऐसा वीर विशेष रत सना हर तीर है अश्रु भरा हर नैन रधा रधा हर कंठ है रधा रधा हर बै रधा रधा हर बैन अ अर्जुन ने छुए चरण लिए हृदय में घाव कृष्ण खड़े कर बध हो ऐसा पुण्य प्रभाव ऐसा पुण्य प्रभा तुम्हारे अतिरिक्त मेरी व्यवस्था कौन समझ सकता है गिरिधर कौन समझ सकता है तो क्या मेरा समझ लेना पर्याप्त नहीं है गंगापुत्र आप सत्य और निष्ठा का प्रतिबिंब बनकर सदैव जीवित रहेंगे हर युग में मानव जाति आपको प्रणाम करती रहेगी पुत्र अब चलो अभी कैसे चलू माते मैंने तो पिता श्री को वचन दिया था कि जब तक हस्तिनापुर को चह ओर से सुरक्षित ना देख लू प्राण नहीं त्याग किंतु पुत्र ये पीड़ा मेरा तो जीवन ही पीड़ा की परिभाषा है माते फिर भी यदि हस्तिनापुर जीवित और सुरक्षित हो जाए तो मैं समझूंगा कि मेरा जीवन सफल हुआ महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत [संगीत]
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
-
[संगीत] किंतु मेरे परिवार पर से किस पर संकट आने वाला है ऋषिवर बताइए ना ऋषिवर संकट किस पर होगा यह सोचने के स्थान पर तुम्हें यह सोचना चाहि...
No comments:
Post a Comment