कलयुग में जब मैं कल की अवतार लेकर अवतरित होऊंगा तो आपसे ही विवाह करूंगा तो आपसे ही विवाह करूंगा मैं अवश्य करूंगी आपकी प्रतीक्षा कलयुग के आगमन पर आपकी भक्ति में आप ही का एक भक्त आपको पुकारेगा तब आपका आविर्भाव त्रिकूट पर्वत पर आपको आपका विशेष धाम प्राप्त करने में सहायक बनेगा और मेरे परम भक्त श्री हनुमान सदैव अपने लंगुरिया रूप में आपकी रक्षा हेतु उपस्थित रहेंगे माता आपके पावन धाम की और आपके पवित्र तीर्थ स्थान की रक्षा करने के लिए मैं सद [संगीत] जब तक प्रभ क अवतार धारण कर नहीं लते सदा आपका रक्षक बनकर वही पर रहूंगा माता आपके उस दरबार में जो भी भक्त सच्चे मन से और भक्ति से आपके दर्शन करने आएगा आपकी कृपा उस पर होगी उसकी इच्छा अवश्य पूर्ण होगी आपके भक्त आपको माता रानी माता वैष्णव देवी के नाम से जा के नाम से जानेंगे [संगीत] [संगीत] [संगीत] वो है हमारी माता रानी माता वैष्णो [संगीत] देवी अद्भुत है माता रानी अद्भुत है उनकी महिमा अब मुझे ज्ञात हुआ मेरे मन में जिनकी आकृति बसती है वो कोई और नहीं माता वैष्णवी है वो माता जिनम तीनों माताओं का स्वरूप समाहित है माता रानी सर्वथा अद्भुत है सत्य है और तब से कितने युग बीत गए कलयुग भी आ गया किंतु माता वैष्णवी आज भी प्रतीक्षा में है और यह प्रतीक्षा केवल अपने प्रभु की नहीं अपितु अपने महान भक्त की भी है व भक्त जो कलयुग में अपनी भक्ति से उनको उजागर करेगा उन्हें उनके उचित धाम पर पहुंचने में उनका सहायक [संगीत] बनेगा तब तो माता की प्रतीक्षा शीघ्र ही समाप्त होनी चाहिए अपार सौभाग्य है उस भक्त का जो माता के प्रकट होने का स्वयं माध्यम बनेगा आप अपनी भक्ति को कभी क्षीण मत होने देना कौन जानता है माता के मन में क्या है संभव है उनके वह भक्त आप ही [संगीत] [संगीत] हो इस प्रकार हनुमान जी जी ने भक्त श्रीधर को माता रानी का परिचय करा दिया और उन्हें एक संकेत भी दिया और फिर हनुमान जी माता वैष्णवी को इसकी सूचना देने उनके पास चले गए माता रानी मैंने अपना कार्य कर दिया आपके भक्त को आपका परिचय प्राप्त हो गया है माता आपके भक्त श्रीधर आपकी महिमा जान गए हैं [संगीत] प्रणाम माता माता श्रीधर आपके विशेष भक्त है और उनका चुनाव सर्वदा उचित है वह शीघ्र कलयुग में आपको उजागर करेंगे योग्यता तो परीक्षा के बाद ही जत होती है हनुमान जी आज एक परम भक्त ने अक् मा दिखाया है किंतु भक्ति का वो दीपक जो आपने उसके मन में जागृत किया है अनेको बवंडर का सामना कर उस भक्त को भक्ति के इस दीपक को जागृत रखना होगा परीक्षा प्रभु कैसी परीक्षा अपनी भक्ति को अपनी योग्यता को प्रमाणित करने की परीक्षा किंतु क्यों श्रीधर की भक्ति का प्रमाण तो पहले से ही उपलब्ध था फल धूप में पकता है स्वर्ण अग्नि में तपक निखरता है उसी प्रकार भक्त को परिपक्व बनने के लिए भक्ति की परीक्षा देनी होती है जो भक्त उस परीक्षा में खरे उतरते हैं वही सच्चे भक्त होते हैं और भक्त श्रीधर की भक्ति की सच्चाई की गाथा यहीं से आरंभ [संगीत] हुई जग जननी जय जय मा जग जननी जय जय भय हारिणी भव तारिणी भय हारिणी भव तारिणी भव भामिनी जय जय मां जग जननी जय जय णा माता रानी प्रिय मैं जा रहा हूं बाहर बोला भैया और लन सक जी मेरी प्रतीक्षा करते होंगे रुकिए स्वामी चुंडरी लेकर ही जाइए बस वो तैयार होने ही वाली [संगीत] है तो आपको स्मरण था प्रिय स्मरण क्यों ना हो जब से आपने माता वैष्णव देवी की कथा सुनी है प्रत्येक जगराते में आप माता रानी को लाल चुनी अवश्य चढ़ाते हैं और उसे तैयार करना मेरा कर्तव्य है और मैं मैं अपना कर्तव्य कभी नहीं भूलती देखिए चंदरी किंतु प्रिय अब विल हुआ तो नयन सुख जी बहुत खरी खोटी सुनाएंगे और आप तो जानती है क्रोध में उनकी जीत स्वयं चलने लगती है अपने पड़ोसी को कैसे ना जानू मैं वो आपके वरिष्ट तो बाद में [संगीत] है नन सुख नाम है हमारा तो नैन सुख है भी बड़े-बड़े राजा महाराजा पानी भरते हैं मेरे आगे अरे भाग्यवान विलंब हो रहा है हमें अंग वस्त्र लेकर आओ शीघ्र [संगीत] हमारा देखो लल्ला मैं तुम्हारे लिए क्या लाई [संगीत] हूं मेरा प्यारा लल्ला भाग्यवान विलं हो रहा है विलं तो मुझे हो रहा है अपने लल्ला को भोजन देने में देखो लल्ला मैं तुम्हारे लिए क्या लाई हूं मेवा है मेरे प्यारे लल्ला के लिए है ना नहीं नहीं मुंह से निकालो अंगूठा मां आप मुझे वचन दो कि मेवा चावल के बाद अच्छे-अच्छे मिष्ठान भी दोगी दोगी ना मां दोगी ना हां हां खिलाऊंगी ना अवश्य खिलाऊंगी मैंने अपने हाथों से जो बनाया है मेरे लिए अल्लाह की इच्छा हो और मैं उसे पूरी ना करूं ऐसा हो सकता है चलो अब शीघ्र खाना खा लो चलो मैं नहीं खाऊंगा भाग्यवान मेरा अंग [संगीत] वस्त्र आ हां अच्छा है ना अरे कब से चिल्ला रहा हूं मेरा अंग वस्त्र कहां है लेकर के आओ शीघ्र तो मैं भी एक ही बार चिल्ला कर कह रही हूं स्वयं ले लीजिए पता तो है आपको कहां रहता है मिल गया मिल गया मिल गया मिल गया भाग्यवान मिल गया मुझे आने की आवश्यकता है नहीं नहीं आपको आने की आवश्यकता नहीं है मिल गया मिल गया अंग ब कैसी भूल हो गई अब कहीं विस्फोट ना हो जाए छुपके से निकल जाता हूं कहीं कहीं देख लिया तो और सुननी [संगीत] [संगीत] पड़ेगी छपते छिपाते कहां चल दि है ध्यान से सुनिए अगली बार लल्ला को खाना खिलाते समय मुझे पुकारा ना तो तो मां नयन सुख से नयन दुख में बदल दगी क्या कर रहे हो पिता हूं तुम्हारा वो मेरा प्यारा सा नन्हा सा बालक है मेरा लल्ला है है ना बालक बोल रही है का विवाह हो जाता तो दो बच्चों का बाप होता स्वयं मा मा मा देखिए ना पिताजी को आपके लल्लो को क्या कह रहे नहीं नहीं मैंने कुछ नहीं कहा मैं तो बस यह कह रहा था कि जगराते में समय से आ जाना जगराते में विलम से आना ठीक नहीं ठीक [संगीत] है समझ गए ना देर मत करना अरे भोला प्रणाम नैनसुख जी प्रणाम प्रणाम श्रीधर कहां रह गया अभी तक नहीं आया श्रीधर आता ही होगा अरे मैं बड़ा पंडित हूं वरिष्ठ हूं हर जगराते में उसको अपना सहायक बना कर के ले जाता हूं अब देख लो मैं आ गया हूं लेकिन वो अभी तक नहीं आया महानुभाव को विलंब हो रहा है शीघ्र जाइए अन्यथा बहुत कहित होंगे नयन सुख जी आप भी विलंब मत कीजिएगा आप भी शीघ्र ही तैयार होकर माता के जगराते में भाग लेने के लिए आ जाइएगा हां स्वामी मैं भाभी जी के साथ आ जाऊंगी उचित रहेगा जय माता की जय माता की मैं आ गया और वो अभी तक नहीं आया अरे नैन सुख जी आ जाएगा अब क्या आ जाएगा उसके बगैर भी जगराता हो सकता है चलो हम बढ़ते हैं अरेरे ख जी ा रुकिए वो आ ही रहा होगा चुनरी बनवा रहा होगा ठीक है भोला तुम कहते हो तो थोड़ी प्रतीक्षा कर लेते हैं धन्यवाद मैं आ गया मैं आ गया प्रणाम नन सु जी भला भैया मैं आ गया चलिए ऐसे कैसे चलिए क्षमा नहीं मांगेंगे आप अपने वरिष्ठ पंडित से विलंब जो किया है आपने क्षमा कर दीजिए वरिष्ठ पंडित जी हां अब ठीक है क्षमा किया चलो भोला चल प्रणाम महाराज पधारिए यहां हम बस आपकी ही प्रतीक्षा में थे आइए प्रणाम कीजिए किंतु इधर वरिष्ठ पंडित मैं हूं ये तो सहायक है मेरे अर्थात चेले हैं प्रणाम चलिए पता [संगीत] जय माता [संगीत] दी शीघ्रता करनी होगी बहुत बहुत शीघ्रता करनी होगी मां इतनी शीघ्रता किस लिए कर रही हो अरे क्या करूं लल्ला शीघ्रता नहीं की तो वो श्रीधर की पत्नी सुलोचना आ धम केगी उसकी कोई संतान भी नहीं है तो शुभ कार्य में मैं उसके साथ क्यों जाऊं क्या करूं दया तो आती है सुलोचना पर किंतु कितनी दया करूं उस पर जब भी उसका मुंह देख लेती हूं तो कोई कार्य सफल ही नहीं होता ओ आध श्री रुको रुको तुम पाठ मत करो मुख्य पंडित मैं हूं तो पाठ कौन करेगा मैं करूंगा तुम आच मनी पकड़ो और दीपक में घृत [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] डालो रुको रुको नैन सुख जी रोक नहीं रहे हैं कह रहे हैं कि चुनरी पहले मां के चरणों में अर्पित करो फिर भेट चढ़ाओ है नन सुख जी अन्यथा मां के चरणों में कोई चुरी चढ़ाए और नन सुख जी मना करें ऐसा कभी हो सकता है हां हां वही तो चुनरी चढ़ाओ माता रानी को चुनरी अवश्य चढ़ाओ किंतु विधि पूर्वक चढ़ाओ क्यों भाई श्रीधर तुम अभी तक इतना भी नहीं [संगीत] [संगीत] सीखे माता रानी की जय [संगीत] हो हो गया चढ़ ली ल रखो ग पर और दीपक पर ओ अथ श्री दुर्गा सप्त सती पाठ रंभ या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये सर्वभूतेषु शक्ति रूपे संता [संगीत] नमस्तस्यै भद्र काली भाभी आ गई तो सुलोचना कहां रह गई सरूप का काली भद्र काली सते शक्ति रूप संता या देवी सूते शक्ति रूपे भद्र काली महाकाली लगता है बापू नैन सुखे नैनों के सामने अंधकार सा छा गया है इनकी स्मरण शक्ति हो गई है ओ का काली मंत्र उच्चारण भी नहीं कर सकते स्वयं को पंडित बुलाते हैं सबके नैन में गिर जा ंगे आज हम इन नैन सुख के कारण कैसे बाप है ये अपने बेटे की नाक कटवा देंगे ओम जयंति मंगला काली भद्र काली [प्रशंसा] कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] सर्व मंगल मांगल्य शि सर्वार्थ साधिक सर्व मंगल मांगल्य श सर्वार्थ साधिके शरण नेत्र मके गौरी नारायण नमोस्तुते शरण नेम के [संगीत] नारायण [संगीत] वरिष्ठ ये है किंतु गा रहा है इनका चेला माता रानी मुझ प कृपा कीजिए माता नी मेरी गर सुनिए मेरी गर सुनिए माता रानी मेरी भी गो भर दीजिए [संगीत] माता सुलोचना कहां है आई तो अवश्य होगी किंतु दिखाई क्यों नहीं दे रही [संगीत] [संगीत] है व्यक्ति की विनम्रता उसे सम्मान दिलाती है और योग्यता से उसे उचित स्थान की प्राप्ति होती है
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