[संगीत] हे प्रभु हे [संगीत] प्रभु चमत्कार चमत्कार देखो चमत्कार हो गया चमत्कार प्रभु प्रभु चमत्कार हो गया हे प्रभु हे [संगीत] प्रभु प्रभ हे दया निन हे कृपा अवतार आपकी कृपा पाकर मैं धन्य हो गया प्रभु मैं धन्य हो गया प्रभु मैं धन्य हो गया ओम श्री सत्यनारायण प्रभु ओम श्री सत्यनारायण मेघ वर्ण तुम सुंदर पीतांबर राजे स्वामी पता रा हमारी कुटिया कमल हमारी कुटिया चक्र साजे ओम जय नारा [संगीत] [संगीत] प्रभु सुवर्ण बहुमूल्य मात्राए सब है यहां सब है यहां प्रभु सत्यनारायण के व्रत और उनकी कथा की अपार महिमा है प्रभु में निष्ठा का परिणाम अवश्य मिलता है आगे जो भी होगा आपकी इच्छा से होगा प्रभु प्रभु हरि पर इतना विश्वास है तो प्रभु का वो व्रत क्यों नहीं रखते जिससे सुख और समृद्धि प्राप्त होती है मुझे तो अपने सर पर केवल एक छत चाहिए थी वह मुझे मिल गई और आपके परिवार को मैं कठिनाई में डालकर कहां विश्राम कर [संगीत] पाऊंगा आप री कुटिया में आए और मैं मूर्ख मैं मूर्ख आपको पहचान ही नहीं सका वोह ब्राह्मण देवता कोई और नहीं आप ही थे प्रभु आप ही थे प्रभु यदि आप अपने वास्तविक स्वरूप में दर्शन देते तो इस भक्त का जीवन धन्य हो जाता कदाचित मैं अभी आपके दर्शन योग्य ही नहीं था किंतु प्रभु मैं प्राण लेता हूं आपके दर्शन की कामना में मैं प्रत्येक माह श्री सत्यनारायण की पूजा करता रहूंगा जब तक आप आप मुझे अपने दर्शन देने का सौभाग्य प्रदान नहीं [संगीत] करते उस दिन मेरे प्रभु ने मुझे अपार सुख और समृद्धि तो दे दी किंतु मैं अज्ञानी अपने प्रभु को पहचान ही नहीं पाया उनके साक्षात दर्शन से वंचित रह गया मुझे गलानी हुई और प्रभु दर्शन की आस में प्रत्येक माह प्रभु श्री सत्य नारायण व्रत करने लगा और वह दिन आ ही गया जब प्रभु को मुझ जैसे अज्ञानी भक्त पर दया आ ही गई [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] प्रभु [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] शतानंद तुम्हारा व्रत सफल हुआ मैं तुम्हें आशीष देता हूं आज से तुम गोलोक में मेरे साथ वास करोगे और द्वापर युग में मेरे अवतार श्री कृष्ण के अभिन्न मित्र बनोगे आज से तुम्हारा [संगीत] एक बार प्रेम से बोलिए प्रभु श्री सत्यनारायण भगवान की जय जय जय कल्याण हो सुदामा जी की कथा यही समा नहीं होती द्वापर युग में देवी राधा के श्राप के कारण उन्होंने फिर से एक दरिद्र ब्राह्मण के रूप में जन्म लिया किंतु प्रभु सत्यनारायण के कारण वह बाल्यकाल से ही श्री कृष्ण के अभिन्न मित्र बने और उनकी मित्रता की प्रभुता उन्होंने स्वीकार की उनके लिए वह कुछ भी करने के लिए तैयार थे मित्र सुदामा देखो मैं क्या लाया हूं आ आओ मिलकर खाते हैं यह [संगीत] लो मुझे एक और मिलेगा मित्र हां हां [संगीत] [प्रशंसा] लो मित्र सुदामा लगता है भूख बहुत लगी है तुम्हें हां मित्र एक और दो [संगीत] [संगीत] ना बहुत भूखा हूं मैं एक और दो [संगीत] ना मेरी भूख तो अभी भी नहीं मिटी मित्र दो ना मित्र यह उचित नहीं मित्र तुम तो चार फल खा चुके हो तो क्या मैं एक भी ना खाऊं नंदलाल को आमों की क्या कमी तुम्हारे आ तो टोकरिया खाऊंगी मन भर कर खा लेना यह मुझे दे दो नहीं नहीं दूंगा अपने मित्र के लिए इतना तो कर ही सकते हो दो ना नहीं कदापि नहीं नहीं दो [संगीत] [प्रशंसा] नहीं यह तो बहुत खट्टा है [संगीत] तो यह बात थी मित्र सभी फल खट्टे थे इसलिए तुम सब खा गए जिससे मैं खट्टे फल ना खा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] पाऊ [संगीत] मेरे छोटे से छोटे सुख का ध्यान रखते हो तुम मित्र मेरे मुंह का स्वाद भी बिगड़ता हुआ नहीं देख सकते ना मित्र हो तो तुम्हारे जैसा जो स्वयं सभी कड़वाहट सह लेगा किंतु मेरे जीवन में कड़वाहट नहीं आने [संगीत] देगा कितनी सरलता से सुदामा जी ने अपनी मित्रता का प्रमाण दे दिया जिस श्रद्धा से वह अपनी मित्रता निभाते थे उसी श्रद्धा से वह अपने धर्म पर भी अड़क रहते थे समय बीता और एक दिन श्री कृष्ण द्वारकाधीश बन गए किंतु सुदामा जी अपने शतानंद स्वरूप के समान दरिद्रता में ही जगड़े रहे और वह भी ऐसी दरिद्रता की भोजन के लिए एक भी दाना उनके समीप ना [संगीत] था [संगीत] स्वामी इतना ही है इतना हमारे परिवार के लिए तो क्या यह हम में से किसी एक के लिए भी कम पड़ेगा आपके प्रभु यह किस अपराध का दंड दे रहे हैं हमें यह सब कब तक सहेंगे [संगीत] हम श्री कृष्ण श्री कृष्ण श्री कृष्ण श्री कृष्ण कब से सुनते आ रही हो श्री कृष्ण आपके मित्र है उन पर इतना ही विश्वास है तो जाइए उनसे कहिए एक बार तो आपकी सहायता करें एक मित्र अपने मित्र का दुख नहीं समझेगा तो कौन समझेगा प्रभु और मित्र से कुछ छिपा नहीं रहता और सौभाग्य से वह मेरे दोनों है और मेरा सिद्धांत भी है अपने मित्र के आगे कभी हाथ नहीं फैलाना सिद्धार्थ सिद्धांत से आपके बालको का पेट भर जाएगा क्या मित्र के सामने हाथ नहीं फैलाना तो मत फैलाए किंतु भगवान भी तो मानते आप उन्हे तो भगवान से ही मांग लीजिए उनसे कैसी [संगीत] लजा मेरे लिए तो अवश्य भगवान है किंतु वो मुझे भक्त नहीं अपना मित्र ही मानते हैं ना और वो मुझे मिलेंगे भी तो एक मित्र के रूप में ही मिलेंगे अब वो आपको मित्र मानकर मिले या भक्त मानकर आपको जाना ही होगा ऐसे भूखे पेट कब तक जीवित रहेंगे आपको इनकी सौगंध है मना मत कीजिए जाइए उचित है मैं मैं अपने प्रभु के पास जाऊंगा किंतु वह राजा है उनके पास खाली हाथ कैसे [संगीत] जाऊं तो जो उन्होंने दिया है यह चूड़ा यही ले जाइए भगवान का दिया यही तो है हमारे पास चिंता मत कीजिए स्वामी कोई इसका कदा प बुरा नहीं मानेंगे [संगीत] ये [संगीत] लीजिए [संगीत] स्वामी प्रभु के पास खाली हाथ तो जा रहे हैं खाली हाथ लौट एगा नहीं उनसे सहायता अवश्य मांगिए खाली हाथ लौट एगा नहीं उनसे सहायता अवश्य [संगीत] [हंसी] मांगिए आप आओ मिलकर खाते [संगीत] हैं मेरी भूख तो अभी भी नहीं मिटी [संगीत] मित्र मित्र हो तो तुम्हारे जैसा जो स्वयं सभी कड़वाहट सह लेगा क्या हुआ स्वामी कुछ चाहिए स्वामी आप अचानक उठ क्यों गए स्वामी आप कुछ बोल क्यों नहीं रहे [संगीत] हैं दीदी रुक्मिणी स्वामी को क्या हो गया यह तो मेरी समझ में भी नहीं आ रहा है बहन [संगीत] सत्य [संगीत] नहीं सुदामा सुदामा सुदामा हां प्रिय मेरा मित्र सुदामा आ रहा है मेरा परम मित्र सुदामा आ रहा है सुदामा सुदामा स्वामी मेरा सुदामा आ रहा है सुदामा आ रहा है मेरा सुदामा इतने वर्षों बाद सुदामा आ रहा [संगीत] है इतना भव्य राज भवन यहां मेरे जैसे दरिद्र ब्राह्मण का भला क्या स्वागत होगा कैसे जाऊ भीतर किंतु वचन दिया है तो जाना तो [संगीत] होगा [संगीत] रुकिए ब्राह्मण देवता भीतर कहां चले आ रहे हैं यह राज भवन है अपना परिचय दीजिए और कहीं आप मार्ग तो नहीं भूल गए हैं अपनी दरिद्रता देखिए और यह राज भवन देखिए ज्ञात है मुझे यह राज भवन है जहां मेरे मित्र रहते हैं श्री कृष्ण लो सुनो इनके मित्र हैं हमारे [संगीत] महाराज स्पष्ट रूप से बताइए ब्राह्मण देवता यहां किस लिए आए हैं आप मैं भक्त हूं प्रभु श्री कृष्ण [संगीत] का जाइए जाइए हमारे महाराज के पास इतना समय नहीं है कि वो ऐसे किसी से भी मिलते रहे [प्रशंसा] लो अभी मित्र थे अब भक्त हो गए कुछ ही समय में महाराज के संबंधी भी बन जाएंगे मित्र मित्र है वो मेरा सुदामा सुदामा सुदामा सुदामा सुदामा [संगीत] सु [संगीत] सुदामा मित्र से मिलने आए हो बिना भेंट किए चले [संगीत] जाओगे [संगीत] सुधामा [संगीत] सुदामा सुदामा [संगीत] [संगीत] सुधामा [संगीत] सुधामा कृष्ण [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] [संगीत] इतने वर्षों बाद तुम्हारे गले लगकर आज मुझे आनंद आ गया [संगीत] सुदामा चलो मित्र चलो [संगीत] संकोच मत करो मित्र चलो आओ [संगीत] बड़े से बड़े तपस्वी भी प्रभु दर्शन से वंचित रह जाते हैं किंतु मेरे प्रभु की उदारता का तो मैं क्या वर्णन करूं शब्दों में कहना संभव नहीं प्रभु ने स्वयं मुझे अपने हृदय से लगाया ऐसा प्रतीत हुआ जैसे संसार का संपूर्ण ऐश्वर्य मुझे एक पल में मिल गया हो और प्रभु यही नहीं रुके ऐसा स्वागत किया कि मैं मैं अपनी सुद बुद्धि खो [संगीत] बैठा आओ सुदामा यहां आसन ग्रहण [संगीत] करो [प्रशंसा] मैं यहां हां तुम्हारा यही उचित स्थान है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] आओ आओ [संगीत] मेरे मित्र आए हैं आप लोग उनका स्वागत नहीं [संगीत] करेंगी नहीं नहीं ये क्या कर रहे हैं आप [संगीत] सुदामा तुम अपने धर्म पर टिके रहे मुझे भी अपना धर्म निभाने दो तुम मेरे मित्र होने के साथ-साथ मेरे अतिथि भी तो हो तुम ब्राह्मण देवता हो तो यथोचित हमें भी अपने आदर और सत्कार की अनुमति दो अब मुझे अपने स्वागत का सौभाग्य तो दो [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] मित्र नहीं प्रभु नहीं प्रभु नहीं प्रभु सुदामा जी आपने प्रभु के हाथों भोजन ग्रहण करने से मना कर [संगीत] दिया सच्चा मित्र वही है जो मित्र के हिस्से की सारी कड़वाहट स्वयं लेकर उसके छोटे से छोटे सुख को महत्व दे
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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
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[संगीत] किंतु मेरे परिवार पर से किस पर संकट आने वाला है ऋषिवर बताइए ना ऋषिवर संकट किस पर होगा यह सोचने के स्थान पर तुम्हें यह सोचना चाहि...
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