Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण का स्वागत दुर्योधन ने कैसे किया था GautamRode Suryaputra Karn Episode 205 PenBhakti

[संगीत] सीमा एक रेखा ही नहीं एक परिभाषा भी है सीमा हर किसी की होती है प्रेम की धैर्य की मित्रता की और शत्रुता की भी और जो सदैव सीमा में बंधे रहते हैं वह सामान्य मनुष्य बनकर रह जाते हैं परंतु जो समय आने पर सीमा तोड़ देते हैं वही भविष्य बनाते हैं क्योंकि सीमा केवल आपको मर्यादा में नहीं रखती आपको बांधती भी है अब यह आप पर मुझ पर हम सब पर निर्भर करता है कि यह जाने कौन सी सीमाए हमें बांधती और कौन सी सीमा शक्ति के नए मार्ग समक्ष लाती इसलिए सीमाए तो जो कर सकते हो उससे अधिक करने का प्रयत्न करो तभी नई सीमाएं बना पाओगे मैं हस्तिनापुर की ओर प्रस्थान कर रहा हूं मेरे वापस लौटते ही तुम्हारा प्रशिक्षण प्रारंभ हो जाएगा कदाच हमारी सोच में मतभेद [संगीत] हो परंतु हमारे पक्ष में कोई मतभेद [संगीत] नहीं सुना है कि वासुदेव शांति दूत बनकर हस्तीन पुर आ रहे हैं तो हो सकता है कि यह युद्ध टल जाए नहीं युद्ध होना निश्चित है हां वासुदेव स्वयं आ रहे हैं तो अवश्य कोई बात [संगीत] होगी [संगीत] देख रहे हो दुर्योधन यह कोई साधारण धातु नहीं है बहुत विशेष धातु है यह जिसका आविष्कार असुरों ने किया था देवों को बांधने के लिए इससे सक्षम और कठोर कुछ हो ही नहीं सकता उस ली को बांधने के लिए अब उसके आते ही इसी से उसे बंदी बना लेंगे बहुत अच्छे मामाश्री सबसे कठोर दातों की श्रंखला [हंसी] देखो मैंने कहा था ना [संगीत] तुमसे परंतु मैं यह मैं ये देखना चाहता हूं कि यह कितनी कठोर है तो कर लो प्रयास मामा श्री को इसमें बांध दो ये क्या कह रहे हो [हंसी] [संगीत] तुम मुझे श्रंखला से बांध दिया जाए बांधो अरे बांधो बांधो [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] अब देखते हैं यह श्रंखला कितनी सक्षम है [संगीत] अद्भुत संदे य ये अद्भुत है अब हुआ पूर्ण प्रबंध उस उस वासुदेव के स्वागत [संगीत] [संगीत] का देख रहे हो दुर्योधन यह वही छलिया कृष्ण है जो अपने चाल में अपने छल में सबको फता रहता हैला भवती आज यह स्वयं मेरे रचाए चक्र में फसने आ [प्रशंसा] गया ज्ञात नहीं है कि आज ये इस प्रासाद से बाहर निकल ही नहीं [संगीत] [संगीत] पाएगा यदा य धर्मस्या भवती भारता धर्मस्या सनम [संगीत] सजाम ना रा जाया जता [संगीत] ओ नारायणम नमस्कृत्य नरम चैव नरोत्तम देवि सरस्वती वसम ततो जयम उधर प्रणिपात हस्तिनापुर नरेश कल्याण हो वासुदेव प्रणिपात गंगापुत्र कल्याण हो [संगीत] वासुदेव प्रणिपात संधि श्री स्वास्थ प्रणिपात गांधार नरेश प्रणिपात मुरली मनोहर आपका स्वागत है हस्तिनापुर में प्रणिपात वासुदेव मैं समस्त हस्तिनापुर की ओर से आपका आभारी हूं कि आपने शांति प्रस्ताव को एक अवसर दिया और हस्तिनापुर आए अवसर तो धर्मराज ने दिया है महात्मा विदुर अपने बड़ों के प्रस्ताव को आदर देकर मैं तो बस उनका संदेश यहां लाया हूं वासुदेव संदेश अपने स्थान पर है मुझे तो आपको हस्तिनापुर में देखकर ही प्रसन्नता हो रही है मुझे ज्ञात है युवराज और आशा भी कि आप ने मेरे स्वागत की सारी तैयारियां पूर्ण कर ली [संगीत] होगी क्या आपने मेरे स्वागत की सारी तैयारियां पूर्ण कर ली होगी अवश्य आप मेरे समधी जो हैं चलिए आइए मेरे कक्ष में चले [संगीत] मेरे कक्ष में चलके आदर सत्कार ग्रहण कीजिए आपके मुख से ऐसे वचन सुनकर संतोष हुआ युवराज और अधिक प्रसन्नता इस बात की हुई कि आपने मुझे शांति दूध के रूप में स्वीकार किया ये शांति प्रस्ताव के बारे में हम हम कल बात करेंगे आप यात्रा से आए हैं विश्राम करें थकान दूर करें आइ क्यों नहीं युवराज [संगीत] अवश्य [संगीत] क्या हुआ वासुदेव आप ठहर क्यों गए मैं आपके सत्कार भाव का सम्मान करता हूं युवराज परंतु मैं शांति दूत शरणागत नहीं और वैसे भी पांडवों ने मुझे अपने पक्ष में [संगीत] चुना और नीति अनुसार एक दूत अतिथ तब तक ग्रहण नहीं कर सकता जब तक उसका कार्य पूर्ण ना हो [संगीत] जाए इसलिए क्षमा कीजिएगा मुझे मैं आपका सत्कार ग्रहण नहीं कर सकता परंतु फिर आप कहां ठहर आप उसकी चिंता ना करें युवराज मेरे पास अपनी व्यवस्थाएं हैं आइए भी ना वासुदेव आप आप हमारे यहां पधारे हम धन्य हुए हमारे यहां आकर हमें कृतार्थ करें हमने आपकी ऐसी व्यवस्था की है ऐसी व्यवस्था की है वासुदेव आप हस्तिनापुर छोड़कर कहीं जाएंगे ही नहीं ऐसा कुछ नहीं जो सदा रहे और ऐसा कुछ नहीं जो सदा ना रहे तो फिर मेरे यहां होने ना होने का क्या अर्थ रह जाता है गांधार नरेश वासुदेव आपके कहने का तात्पर्य कुछ पकड़ में नहीं आया यदि सागर में अपना हाथ डालोगे तो ऐसा अनुभव होगा कि संपूर्ण सागर तुम्हारा है गांधार राज और यदि उसी सागर को मुट्ठी में बंद करने का प्रयास करोगे तो कुछ नहीं [संगीत] पाओगे हां यह अवश्य हो सकता है कि उसमें डूब [संगीत] जा ण [संगीत] पात क्या क्या चल क्या रहा है इस चलिए के मन में कहीं से हमारी योजना का भान तो नहीं हो गया शांत रहो दुर्योधन शांत रहो आज नहीं आया तो क्या हुआ कल तो इसे सभा में आना ही होगा और य आएगा क्यों शांति दूत है इसे अवश्य आना होगा और फिर फिर हमारी योजना सफल वासुदेव आपका अतिथ बनने का सौभाग्य मिला मेरे लिए सम्मान की बात है आ करता हूं जेष्ठ पांडु पुत्रों की ओर से कोई सकारात्मक संदेश लाए [प्रशंसा] होंगे संदेश तो मैं लाया हूं महात्मा विधुर परंतु वह संदेश मैं कल सभा में सबके समक्ष रखूंगा प्रपात माधव मेरा सौभाग्य है कि आज मेरे आराध्य मेरे घर पधारे हैं सेवक प्रभु के लिए भोजन लेकर आओ [संगीत] भोग लगाइए [संगीत] प्रभु मेरा प्रिय मिष्ठान नहीं दिखाई दे रहा [संगीत] जानती हूं आपको मिष्ठान बहुत प्रिय है वासुदेव परंतु जब से कुलवधू का राजसभा में अपमान हुआ हमने मिष्ठान त्याग दिया हां वासुदेव उसी दिन गुरुकुल के पतन का प्रारब्ध लिखा जा चुका था जिसके कुल का नाश हो रहा हो व विलाप करता मिष्ठान कैसे खा सकता उसी दिन से हम यह साधारण भोजन ग्रहण करते हैं यह विनाश एक नए आर्यव्रत को जन्म देगा महात्मा जब अन्याय से न्याय के त्राण के लिए रण भेरी बजे तो वह अवसर शुभ ही होता है और शुभ अवसर पर मिष्ठान आवश्यक है और मैं यहां भोजन पर निमंत्रित हूं अपना प्रिय मिष्ठान खाए बिना यहां से जाने वाला नहीं मैं [संगीत] आइए मिष्ठान ग्रहण [संगीत] कीजिए वाह काका श्री वाह [संगीत] 5 भोग का आनंद लिया जा रहा है आओ पुत्र दुर्योधन तुम भी मिष्ठान ग्रहण करो मिष्ठान नहीं व क्या है ना काका श्री मेरे मन में जो कड़वाहट भर दी है आपने [संगीत] उस इस मिष्ठान की मिठास से मिट नहीं सकती [संगीत] है कितने कितने ले हैं मन में मन में कुछ और रखते हैं और ड़ी में कुछ और तुम क्या कह रहे हो मैं समझ नहीं पा रहा हूं परंतु मुझे समझ में आ रहा है मैं मैं समझ गया हो कि आप इतने वर्षों से क्या करना चाहते [संगीत] हैं आप मुझे मुझे नीचा दिखाना चाहते [संगीत] हैं वासुदेव कितना बुरा है ये ये मेरे संबंधी [संगीत] हैं और इन्होंने अपनी सेना की शक्ति भी मुझे दी है तो दोनों ही नाते से इनका सम्मान सत्कार करने का अधिकार पहले मेरा है परंतु आपने क्या किया आपने यहां ले आए ताकि आप अपने स्वार्थ और और षड्यंत्र को पूर्ण कर सके परंतु वासुदेव को निमंत्रित करने में मेरा क्या स्वार्थ है दुर्योधन अरे स्वार्थ है स्वार्थ है काका श्री राजसभा में से पूर्व अपने यहां इसलिए लाए ताकि आप आप अपने वो वो प्रिय पांडवों के पक्ष में ने उसा सके स् [संगीत] है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...