Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण ने शांतिदूत बनना स्वीकार क्यों किया था Gautam Suryaputra Karn Episode 204 PenBhakti

[संगीत] सभी बड़े सदा यही कहते आए कि यदि आगे बढ़ना है तो अपनों का साथ दो सत्य कहते हैं अपनों का साथ देना ही चाहिए परंतु साथ देने से पूर्व यह अवश्य पहचान लेना चाहिए कि अपने हैं कौन क्या अपने वही होते हैं जिनके साथ हमारा रक्त संबंध होता है या अपने मित्र अपने वो होते हैं जो हमें सदक के लिए प्रेरित करें हमें आगे बढ़ाए हमारा साथ दे और वह जिनका साथ देने से समाज का नाश धर्म की हानि हो वह सगे हो कर के भी सगे नहीं होते इसलिए जब अपनों की परिभाषा का चुनाव कर तो उन्हें अपना माने जो आपका साथ दे उन्हें नहीं जो हमें अज्ञान के मार्ग पर ले जाए अपने खेल पर ध्यान रखो दुर्योधन नहीं तो तुम मुझे परास्त नहीं कर [संगीत] पाओगे क्षमा कीजिए महाश्री आपके इस कौसर में आप जितना कौशल नहीं है मेरा और खेल में मेरा ध्यान नहीं लग रहा है क्योंकि मुझे समझ में ही नहीं आ रहा है कि आपने ऐसा किया क्यों मैं पांडवों के समक्ष प्रस्ताव ले जाने के विरुद्ध था आपने मुझे बाध्य किया क्यों आप पांडवों का विनाश नहीं चाहते आप बदल गए क्या क्यों आपने पिता श्री को शांति प्रस्ताव ले जाने के लिए मनाया तुम्हें तुम्हें क्या लगता है दुर्योधन क्या यह शांति प्रस्ताव युद्ध को रोक पाएगा कदापि नहीं अब यह युद्ध हो कर रहेगा इस युद्ध को कोई नहीं रोक सकता अ तो फिर संजय और वेदर को शांति प्रस्ताव लेकर क्यों भिजवाया [संगीत] आपने बताइए ना बताता समझो दुर्योधन जिस प्रकार हम दूत भेजेंगे उसी प्रकार वहां से भी दूत भेजना होगा ना तुम्हें क्या लगता है कौन आएगा दूत बन के पांडवों की तरफ से कौन आएगा वही जो दर्शाता तो यही है कि उसका किसी भी निजी प्रकरण से कोई संबंध नहीं परंतु जो हर प्रकरण में बीच में घुसता है जो मेरे हर ल को अपनी बुद्धि के बल से असफल कर देता है वो जिसकी मनोहर बातों का व्य गुरु द्रोणाचार्य के चक्रव्यू से भी अधिक शक्तिशाली है वो जो हस्तिनापुर के सिंहासन पर तुम्हें नहीं उन पांडवों को बिठाना चाहता है वही लिया वही वासुदेव कृष्ण तो उसम हसने वाली क्या बात है उसका क्या बताता हूं [हंसी] [संगीत] [संगीत] [हंसी] चलिए कृष्ण यहां आएगा तो अवश्य परंतु जा नहीं [हंसी] पाएगा [संगीत] जा आपका क्या मत है वास्टप मैं इस प्रकरण में सम्मिलित ही नहीं हूं संजय महोदय इसलिए इसका निर्णय भी युधिष्ठिर और दुर्योधन पर निर्भर करता है परंतु मेरा यह कर्तव्य है कि मैं आप लोगों के विचारों को जानू क्योंकि शांति प्रस्ताव के लिए आप सबके समक्ष मुझे भेजा गया है और मैं यह आशा करता हूं कि धर्मराज भी शांतिपूर्वक इस प्रस्ताव पर विचार करेंगे वह तो इस पर निर्भर करता है कि आपके युवराज का क्या विचार है मैं केवल महाराज धृतराष्ट्र का संदेश लेकर आया हूं वासुदेव युवराज दुर्योधन के विचार मैं नहीं जानता क्योंकि मेरे पास दिव्य दृष्टि नहीं है किसे ज्ञात संजय महोदय किसी दिन आपको दिव्य दृष्टि मिल जाए और आप वो देख जो सबके लिए संभव ना हो धर्मराज आपके समक्ष हस्तिनापुर से शांति प्रस्ताव आया है क्या विचार है [संगीत] आपका [संगीत] यदि हस्तिनापुर शांति चाहता है तो हमें भी युद्ध करने की कोई ललक [संगीत] नहीं जब पितामह ने पहल की तो उनके निर्णय का मैं सम्मान करूंगा परंतु य युद्ध केवल मेरा नहीं मेरे अनुज का भी है और पांचा का भी इसलिए उनका मत जानना भी अत्यंत आवश्यक [संगीत] है हमें ज्ञात है कि अवश्य ही तुम सबके हित की सोचोगे युधिष्ठिर इसलिए हम सबको सबसे अधिक आशा तुमसे ही है मुझे विश्वास है प्रतिकार और प्रतिघात के स्थान पर तुम शांति को महत्व दो जहां तक शेष पांडवों का प्रश्न है मुझे विश्वास है यह सब तुम्हारे निर्णय का सम्मान [संगीत] करेंगे विचार विमर्श करके उत्तर दे धर्मराज क्या निर्णय होगा [संगीत] आपका वृष सन अरे लक्ष्मणा कैसी हो मैं ठीक हूं परंतु तुम्हें यहां देख के आश्चर्य हुआ तुम यहां कैसे वो मैं मम से मिलने आया था हां परंतु कुमार शाम से पहले मैं तुमसे मिलना चाहती थी परंतु क्यों क्योंकि अब केवल तुम ही अपने मित्र को इतनी बड़ी भूल करने से रोक सकते हो साभ युद्ध में ना केवल अपने पिता के विरुद्ध खड़े हो रहे हैं अी त वो स्वयं हस्तिनापुर की ओर से ना नारायणी सेना का नेतृत्व कर रहे हैं परंतु अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है वृषि सेह साम तुम्हारा मित्र है उसे समझाओ वो तुम्हारी बात कभी नहीं डालेगा कमा चाहता हूं लक्ष्मण देखो मैंने सदैव मित्र बनकर तुम्हारी सहायता की तुम्हारा पक्ष लिया है परंतु [संगीत] आज मैं शाम का पक्ष ष सि हां लक्ष्मण य बहुत पहले ही निर्णय ले चुका हूं कि साम जिस भी पक्ष में होगा मैं सदैव उसी का साथ [संगीत] दूंगा परंतु तुम्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है लक्ष्मण मेरे जीते जी शाम को कुछ नहीं होगा विश्वास करो मेरा भी हो हानि तो मेरे परिवार को पहुच रही है ना वृष्टि से तुम बताओ मुझे प्रभु से मैं किस पक्ष के लिए प्रार्थना करू दोनों ही पक्षों में मेरा ही परिवार लड़ रहा है मैं क्या करू वृषि से तुम्हारे इस प्रश्न का उत्तर मेरे पास नहीं है [संगीत] लक्ष्मण मैं तो यह भी नहीं कह सकता कि मैं तुम्हारी इस असमंजस से भरी स्थिति को समझ सकता हूं तुम इस युद्ध में भाग क्यों ले रहे हो वृष से तुम्हारा तो पांडवों से कोई संबंध नहीं है तो तुम अपने पिता के साथ इस युद्ध में क्यों भाग ले रहे हो केवल इसीलिए केवल इसीलिए लक्ष्मणा क्योंकि सां को वो के पक्ष में और इससे अधिक मेरे लिए कुछ महत्त्वपूर्ण नहीं ष से भान है तुम कितनी बड़ी भूल कर रहे हो नहीं भाने तुम्हे यद भान होता तो इस युद्ध में भाग देने की बजाय उसे रोकने का प्रयत्न कर रहे होते तु मैं तुम्हारे समक्ष बहुत सी उम्मीदें लेकर आई थी वृषि से परंतु प्रतीत होता है ये मेरी भूल थी अपना ख्याल रखना वृषि [संगीत] से अब मैं तो क्या कोई भी इस युद्ध को होने से रोक नहीं सकता है लक्ष्मणा तुम्हारा अपमान मुझे स्मरण है पांचाली परंतु इस महायुद्ध में केवल महाविनाश होगा दोषियों को दंड अवश्य मिलेगा परंतु सहस्त्र लाखों निर्दोषों के प्राण भी जाएंगे ना जाने कितने परिवार बिखर जाएंगे पांचाली कितने परिवार और न्याय का क्या धर्मराज यह युद्ध न्याय का [संगीत] है और आपकी ली हुई प्रतिज्ञा का क्या अरे भीम मैं कुछ नहीं भुलाऊं पांचाली ना ही तुम्हारे अपमान को ना ही मेरी प्रतिज्ञा को और जहां तक बात है इस शांति प्रस्ताव की तो मैं इससे बिल्कुल सहमत नहीं हूं परंतु पांचाली हम सब तुम्हारा मत जानना चाहते हैं क्योंकि यह प्रस्ताव स्वयं पितामह और महाराज के द्वारा भेजा गया है और इसे ऐसे ही ठुकराया भी नहीं जा सकता आप भूल रहे हैं वकोर उस सभा में श्रद्धेय पितामह और महाराज राष्ट भी उपस्थित थे और वो भी मेरा अपमान होने से नहीं नहीं रोक पाए [संगीत] थे मुझे लगा था कि वनवास पूर्ण होने के पश्चात हम सबके जीवन का एक ही उद्देश्य है कौरवों का विनाश परंतु अब मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि आप सबके लिए केवल प्रस्ताव ही महत्त्वपूर्ण है एक प्रस्ताव पर आपने अपना सब कुछ खो दिया और आज एक दूसरे प्रस्तावने आप सबको सब कुछ भुला दिया जो हमने खोया था क्या शांति प्रस्ताव क के दिए गए वर्षों पुराने घमों को भर सकता है आप सबके दिए गए चनों को बुला सकता है ि यदि तुम चाहो तो इस संधि को ठुकरा सकती हो तुम्ह इसका पूर्ण अधिकार है परंतु इसके प कोई भी निर्णय लेने से पूर्व मैं सखा वासुदेव से वार्तालाप करना चाहती हूं [संगीत] क्या हुआ सखा कहां है व हस्तिनापुर के लिए प्रस्थान कर रहे परंतु क्यों परंतु क्यों पांडव की ओर से शांति दूध बन कर [संगीत] खा [संगीत] क्रोधित हो अपने सखा [संगीत] से क्रोधित हो अपने सखा से [संगीत] मुझे लगा प्रस्थान कर गए भला अपनी सखी से मिले बिना मैं प्रस्थान करने की सोच भी कैसे सकता [संगीत] हूं जानता हूं तुम्हारे मन में बहुत प्रश्न तुम्हें व्याकुल कर रहे हैं जो कुछ भी तुम्हारे हृदय में है कह सक मैं वचन देता हूं तुम्हारे हर प्रश्न का उत्तर देगा य स ठीक तो बताइए कहां जा रहे थे आप हस्तिनापुर पांडवों की शांति दूत बनकर अपनी सखी का अपमान भूल गए आप सखा अपमान करने वालों के समक्ष संधि का प्रस्ताव लेकर जा रहे हैं आप मुझे आपसे यह आशा नहीं ी सका आप उन दोषियों से गले मिलने को तत्पर हो ग ने मेरे क्या यही आपका न्याय है सखा कि आप मेरा मत जाने बिना ही जा रहे [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] थे नहीं सखी ऐसा नहीं मैं भली भाति जानता हूं कि तुम्हारा मत क्या है और मैं तुम्हें वचन देता हूं कि तुम्हारा मत और मंत दोनों ही पूर्ण होगा सखी और इसीलिए मैं हस्तिनापुर जा रहा हूं जो कह रहे मुझे समझ नहीं आ रहा है सखा मैं शांति दूत बनकर इसलिए जा रहा हूं सखी क्योंकि पहले संदेश हस्तिनापुर से आया है परंतु अभी शांति प्रस्ताव स्वीकार नहीं [संगीत] हुआ मैं इसलिए जा रहा हूं ताकि कोई यह ना कह सके कि शांति प्रस्ताव होते हुए भी पांडवों ने आक्रमण किया या फिर शांति प्रस्ताव का उत्तर नहीं दिया मैं आपके इस उत्तर से संतुष्ट नहीं हो सका सखी मैंने तुम्हें यह कहा था कि मैं तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर दूंगा परंतु संतुष्ट होना या ना होना यह तुम पर निर्भर करता है सखी अब मुझे हस्तिनापुर जाने की आज्ञा [संगीत] [संगीत] दो तुम कहां थे पुत्र द्वारका परंतु क्यों मैं पहले ही बता चुका हूं कि मैं इस युद्ध में भाग ले रहा हूं और उसी पक्ष से लड़ने वाला हूं जिस पक्ष से मेरा मित्र साम लड़ने वाला [संगीत] है काम युवराज दुर्योधन के पक्ष में है और इसीलिए मैं भी वही हूं आप मौन क्यों है समझाइए इसे रोकिए अपने पति को अपने आराध्य वासुदेव के विरुद्ध खड़ा देखना क्या कम था जो अब मेरा पुत्र भी उनके विरुद्ध खड़ा होगा नहीं मैं तुम्हें इस युद्ध में भाग नहीं लेने दूंगी कुछ नहीं होने दूंगी तुम्हें [संगीत] आप इसे रोकिए [संगीत] समझाइए श्री कृष्ण के विरुद्ध युद्ध में खड़े होने का अर्थ है केवल सर्वनाश और यह अपने पिता की आज्ञा के विरुद्ध जाकर इस युद्ध में भाग नहीं ले सकता है जब तुमने मुझ पर बाण छोड़ा तो तुमने मेरे सीने को लक्ष्य बनाया था परंतु तुम्हारा लक्ष्य थोड़ा चूक गया उसमें तुम्हारी भूल नहीं थी उसका कारण तुम्हारा धनुष था तुम्हारा धनुष संतुलित नहीं [संगीत] [संगीत] है [संगीत] यह बिल्कुल संतुलित धनुष है इसे मैंने अपने हाथों से बनाया है जो तुम इसी का प्रयोग करना है लक्ष्य कभी नहीं चुके ग मनुष्य तम अर्थम बते मनुष प्रीतम तुम ना [संगीत] शत

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