Saturday, 3 January 2026

वृषसेन ने कर्ण को युद्ध के विषय में क्या कहा था Gautam Suryaputra Karn Episode 199 Pen Bhakti

[संगीत] जन्म के पश्चात बालक जब पहली बार अपने नेत्र खोलता है तो उसका मन उत्सुकता से भरा होता है यह संसार क्या है उसे क्या दिख रहा है यह उसके जीवन का नया आरंभ होता है परंतु जैसे हम धीरे-धीरे बड़े होने लगते हैं अनुभव अर्जित करते हैं हमारे मन की उत्सुकता हमारे जीवन का चाव होने लगता है तक सोचिए जब हम सुबह सोकर जगते अपनी आंखें खोलते तो उसे ही हम अपने जीवन का प्रारंभ समझ ले तो सुबह से लेकर संध्या तक के समय को ही अपने जीवन जीने का समय समझ ले तो कितनी स्फूर्ति आ जाएगी आप कितने काम कर पाएंगे कितने लक्ष्य अर्जित कर पाएंगे पलों से मिलकर घड़ी बनती घड़ी से मिलकर प्रहर प्रहर से मिलकर दिन बनते हैं और दिनों से माह और वर्ष यदि आप अपना हर पद हर प्रहर विश्वास से हर दिन उत्साह से जिए तो आपका संपूर्ण जीवन सार्थक हो सकता है पिताश्री क्या आपका विश्राम पूर्ण होने तक क्या मैं आपके कक्ष के बाहर आपकी प्रतीक्षा कर सकती हूं मुझे पता है लक्ष्मणा कि तुम्हारे मन में क्या चिंता है परंतु मेरा विश्वास करो जो भी मेरे समक्ष प्रथम आएगा मैं उसी का समर्थन करूंगा और रही बात प्रतीक्षा की तो तुम मेरी पुत्री हो मेरे कक्ष के बाहर प्रतीक्षा करने के लिए तुम्हें अनुमति की आवश्यकता [संगीत] नहीं बहुत प्रतीक्षा कर ली तुमने अर्जुन परंतु अब उसका अंत हुआ क्योंकि तुम अपने वास्तविक सखा से मिल ली मैं हूं तुम्हारा वास्तविक सखा तुम्हारा तारणहार क्योंकि मैं ही वास्तविक वासुदेव अब तो तुम जान गए मन रहो पाखंडी तुम्हें क्या लगता है कि वासुदेव की पोशाक धारण कर लेने से तुम वासुदेव बन सकते हो दया आती है तुमको देखकर अर्जुन जो पहले आया तुम्हारे समक्ष उसी को वासुदेव समझ लिया बहुत बड़ी भूल कर रहे हो तुम परंतु अब अब तुम चिंता मत करो पार अर्जुन अब तुम मुझसे मिल लिए हो ना सब ठीक हो जाएगा मैं तुम्हारी इस भूल को सुधार भूल तुमने की है और आंखें भी तुम्हारी बंद है वासुदेव कर्म में विश्वास रखते हैं दिखावे में नहीं पर वास्तविक वासुदेव अपने आप की प्रशंसा नहीं करते और ना ही दूसरों की आलोचना उनके कर्मही उन्हे वासुदेव बनाते हैं और वो स्वयं से पूर्व संसार के हित की सोचते हैं परंतु तुम तुम केवल स्वार्थी मनुष्य हो जो अपने आप को वासुदेव कहते हो सत्य तो यह है कि तुम्हें वासुदेव का अर्थ भी नहीं पता नहीं समझते तुम स्वपन से बाहर निकलो और सत्य क्या है उसे समझो मन रहो दु साहसी इतना दु साहस सुमारा कि य पर मेरे सम ऐसी बातें कर रहे हो तुम्ह अंदेशा भी नहीं है कि नियती नियती तुम्ह मेरे समक्ष लेकर के आई है क्योंकि तुम अनुचित मार्ग पर जा रहे हो अर्जुन मैं तुम्हें सही मार्ग दिखाना चाह रहा हूं परंतु मैं समझ गया यह सब मुझे मेरे उचित मार्ग से भटकाने का प्रयत्न था और इस बात का भी अनुमान है मुझे य सब करने के लिए तुम्हें यहां किसने भेजा है परंतु मेरे और मेरे लक्ष्य के मध्य कोई नहीं आ सकता कोई [संगीत] नहीं मेरे समक्ष आओ अपने आप को वासुदेव कहने वाले बहरूपिया समक्ष हां उचित कहा तुमने अर्जुन मैं बहरूपिया ही हूं क कई रूप है मेरे मा माखन चोर कान्हा बंसीधर और और और रन छोड़ इसीलिए रन छोड़कर भाग रहा हूं मुझे अपना समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए मुझे शीघ्र अति शीघ्र वासुदेव के पास पहुंचना है [संगीत] पार्थ अर्जुन पार्थ अर्जुन कहां जा रहे हो अर्जुन अर्जुन मुझे छोड़कर कहीं नहीं जा सकते अर्जुन घर से आपका तात्पर्य अंग से है ना या हस्तिनापुर के राज भवन से आपके इस यथा कथित समाज में मेरे और मेरी माता की कोई स्थान नहीं आइए पिताश्री आपका स्वागत [संगीत] है क्या हुआ सुप्रिया कुछ नहीं [संगीत] मैंने अभी जो इन्हें निर्णय सुनाया है यह उसी की प्रतिक्रिया [संगीत] है कैसा निर्णय य किस विषय में बात कर रहा है [संगीत] सुप्रिया [संगीत] शिया वो कुछ नहीं कह पाएंगे परंतु मैं बताता हूं व मैं मैं आपसे धनुर विद्या और युद्ध कला का ज्ञान सीखना चाहता हूं [संगीत] बस इतनी सी बात हर पिता अपना ज्ञान अपनी [संगीत] शिक्षा अपनी संतान को देना चाहता है मुझे बहुत प्रसन्नता होगी तुम्हें सिखा [संगीत] [प्रशंसा] करर परंतु तुम्हें सिखाने की कोई आवश्यकता नहीं है मैंने तुम्हे देखा है तुम युद्ध कला में निपुण हो पुत्र हां ह अवश्य हूं पिता श्री परंतु आपसे अधिक नहीं मैं आपसे भी अधिक कुशल बनना चाहता हूं और इसके लिए मेरे पास समय बहुत कम शेष है मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या आप मुझे सिखाएंगे हां मैं तुम्हे अवश्य सिखाऊंगा पुत्र जो तो अभ्यास के बहाने ही सही हम साथ में समय तो बिता पाएंगे परंतु किस बात के लिए कम समय [संगीत] शेष इसका उत्तर आप भी जानते हैं पिताश्री संसार अब तक के सबसे बड़े महासंग्राम के द्वार पर खड़ा है वासुदेव के निर्णय के साथ ही युद्ध की घोषणा भी हो जाएगी ठहरो पार ठहरो तुम मुझे छोड़कर कहीं नहीं जाओगे नहीं जाने दूंगा मैं [संगीत] तुम्हे कहीं नहीं जा दूंगा तुमको सा शीघ्र [संगीत] करो तुम्हारा इस युद्ध से क्या संबंध है एक योद्धा का युद्ध से वही संबंध होता है जो धनुष का बाण से होता है मैं भी इस युद्ध में सम्मिलित होना चाहता [संगीत] [प्रशंसा] हूं इसीलिए तुम मुझसे परीक्षण लेना चाहते थे हां क्यों एक योद्धा ह होने के नाते आपको ऐसा नहीं करना चाहिए करना चाहिए मुझे ऐसा करना चाहिए देखो पुत्र मैं तुम्हारे निर्णय का बहुत सम्मान करता मुझे मुझे तुम पर गर्व है परंतु इस किंतु परंतु इसके लिए अब कोई स्थान शेष नहीं है मैं अपना निर्णय ले चुका हूं और अपना पक्ष भी चुन चुका [संगीत] हूं तुम अपना पक्ष भी चुन चुके हो हा जिस और मेरा मित्र साम होगा पिताश्री मैं जानता हूं यह युद्ध अनेक लोगों की बलि लेने वाला है इसलिए मैं चाहता हूं कि मेरे मित्र शाम को जब मेरी आवश्यकता हो तब मैं उसके साथ उसकी सहायता के लिए उपस्थित प्रस्तुत और आपने तो सदा मित्र धर्म निभाया [संगीत] है है आशा है कि आप मेरे मित्र धर्म के आड़े नहीं है [संगीत] मुझे अभ्यास करने जाना है प्रपात [संगीत] देखो रहने दो पुत्री तुम एक राजकुमारी तुम्हें इतना परिश्रम करने का अभ्यास नहीं है थक जाओगी नहीं पिताश्री आप चिंता मत कीजिए मैं कर [संगीत] लूंगी [संगीत] मैं तुम्हें अंतिम चेतावनी देता हूं इस माया जाल को समाप्त करो और मुझे जाने दो यहां से अन्यथा मेरा अगला प्रहार तुम्हारा प्राण ले लेगा और मेरा अगला प्रहार तुम्हारे जीवन का अंतिम क्षण होगा अर्जुन [संगीत] [संगीत] ठीक है तुम तुम मुझे मुझे अपना आराध्य नहीं मानते ना सही तुम तुम जा सकते हो क्योंकि मैं तुम्हारा शत्रु नहीं ना तुम मेरे शत्रु हो परंतु उस ूर कृष्ण को एक संदेश मेरा अवश्य दे [संगीत] देना [संगीत] उस उस पाखंडी कृष्णा को यह उपहार दे देना समझ जाएगा कहना उसको उसके पास मेरी एक वस्तु है जो मुझे चाहिए तुम जा रहे हो जाओ जाओ परंतु तुम मेरे पास अवश्य आओगे आना ही होगा तुमको आना ही [हंसी] [संगीत] होगा [संगीत] प्रतीत होता है कि कि अर्जुन अब तक द्वारका नहीं पहुंचा ये मेरे लिए शुभ है चलिए मैं आ गया [संगीत] और शिकता करो [संगीत] सथी प्रणाम ससुर श्री सुख द्वारका में स्वागत है आपका आपको मैं बधाई अवश्य दूंगा कि पांडवों से पूर्व आप द्वारका पहुंच गए परंतु भय इस बात का लग रहा है कि आपके लौटने पर इस बात का दुख ना मनाना पड़े कि आपके सारे प्रयत्न बेकार जाएंगे मैं जानता हूं मेरे पिता जो करने वाले हैं परंतु आश्चर्य इस बात का है कि पिछले अनुभव को देखते हुए भी आप उनसे समर्थन मांगने यहां कैसे आ गए भल रहे हो सा तुम्हारे पिता ने समस्त विराट नगर के समक्ष य वचन दिया था जो भी उनके पास पहले पहुंचेगा उनका समर्थन उसी को मिलेगा और देखो मुझे देखो मुझे मैं पांडवों से पहले यहां पहुचा हूं य जान भी वचन तोड़ने मड़ने में व सिद्धत है उस सब बात में पहले मुझे केवल इतना बताओ कि तुम्हारे पिता इस समय कहां पे मुझे उनसे अभी मिलना है इस समय वह विश्राम कर रहे हैं मुझे विश्वास है इसमें भी उनकी कोई चाल है कहां है तुम्हारे पिता का विश्राम [संगीत] कक्ष आश्चर्य होता है इतना सब देखकर भी इन्हें अभी भी लगता है द्वारका देश इनकी सहायता [संगीत] करेंगे धन का रथ श्वर कहीं माधव ने उसे समर्थन का वचन तो नहीं दे [संगीत] [संगीत] दिया [संगीत] अर्जुन किसी भी परिस्थिति में मुझे मुझे अर्जुन से पहले वासुदेव तक पहुंचना [संगीत] है वासुदेव का वो अपने कक्ष में विश्राम कर रहे हैं [संगीत]

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...