[संगीत] इस अग्नि को देख रहे हैं क्या क्या कर सकती है यह अग्नि प्रकाश दे सकती है भोजन पका सकती है और चाहे तो हमें जलाकर भस्म भी कर सकती है यह जल हमारी प्यास बुझा सकता है या हमें डुबो कर मार भी सकता है तो क्या यह इच्छा इस जल की है कि यह हमारी प्यास बुझाएगा या हमें डुबा कर मार देगा या यह इच्छा इस अग्नि की है जो हमें प्रकाश देगी जो हमें भोजन देगी या हमें जलाकर भस्म कर दे नहीं जल का गुण है बहना अग्नि का गुण है जलना अब यह हमारी इच्छा पर निर्भर करता है कि हम इसका प्रयोग ग कैसे करते हैं इसी जल और अग्नि की भाति ही संसार की हर वस्तु संसार के लोग भी होते हैं और यह हम पर निर्भर करता है कि हम उनमें से किसे मित्र बनाते हैं और किन्हे शत्रु शक्ति है पर निर्भर हम पर करता है कि उसे हम अपना उत्तरदायित्व बनाते हैं या अहंकार धन है परंतु निर्भर हम पर करता है कि उसे विकास के मार्ग पर लगाते हैं या व्यसन के मार्ग पर ईश्वर ने आपको केवल जीवन दिया है परंतु यह आप पर निर्भर करता है कि आप उसे आदर्श जीवन बनाना चाहते हैं या अभिशाप अपने परिणामों का उत्तरदाई हमारे चयन होते हैं इसलिए आवश्यक है कि अपने चयन को अपनी भावनाओं को उचित [संगीत] [संगीत] रखें [संगीत] बस हो गया साम मेरी ओर देखो एक योधा को ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे उसके कुल को ला जाए अपने बारे में नहीं तो कम से कम अपने पिता के बारे में तो सोचते कि उन परे क्या [संगीत] बीतेगी इस सबसे लक्ष्मणा के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा इसका अनुमान भी है तुम्हें साहब अब भी अफसर है कि अपनी भूल को सुधार लो लक्ष्मणा को मुझे सौंप दो सांप मैं तुम्हारे पिता का बहुत सम्मान करता हूं इसलिए यदि तुम मुझे लक्ष्मणा सौप देते हो तो मैं यहां से तुम्हें बिना दंड दिए चला [संगीत] जाऊंगा और मैं तो [संगीत] संक कौन हो तुम अपना परिचय दो क्या वासुदेव के पुत्र सामने लक्ष्मणा का अपहरण [संगीत] किया हा और उसने ना केवल लक्ष्मणा का अपहरण किया अभी तू मेरे पुत्र उत्तर परिवार करके उसे घायल करने का ू साहस भी किया और निचर इस बात का है कि वासुदेव अपने पुत्र के इस अधर्म पर अ भी मन मुझे विश्वास है यदि वासुदेव अपने पुत्र के विषय में मौन है तो उसका भी कोई कारण होगा कारण जो भी परंतु सा ने हमारा अपमान किया है यल किया हमारे पुत्र को आप सब हमारे समधी क्या आप सब इस विषय में कुछ नहीं करेंगे क्या आप भी वासुदेव की तरह मौन [संगीत] रहेंगे क्या हुआ काना आज इतना विवश मैं तुम्हें पहली बार ब देख रहा हूं आश्चर्य होता है कि आज पहली बार तुम मुझसे इस खेल में हार रहे [संगीत] हो क्या हुआ कहां खोए हुए हो मैं खोया हुआ नहीं हूं दाऊ मैं तो बस इस चाल की पूरी होने की प्रतीक्षा कर रहा हूं हार जीत का निर्णय तो तब होगा दाऊ जब मुझे अपनी चाल चलने का अवसर मिलेगा अपना परिचय दो युवक कौन हो [संगीत] तुम एक सिंह को चुनौती केवल एक सिंह ही दे सकता [संगीत] है ईश्वर से प्रार्थना है कि अब जब कभी भी हम एक दूसरे के सामने आए तो एक दूसरे के विपक्ष में ना हो क्योंकि यदि ऐसा हुआ तो हम दोनों में से कोई एक ही जीवित बचेगा मुसे तुम हा मैं तुम इस अधर्म में शाम के साथ हो धर्म अधर्म और मनुष्य परिस्थिति और निष्ठा के आधार पर परिवर्तित होते हैं जो मैं कर रहा हूं वह आपकी दृष्टि में अधर्म और जो आपने मेरे परिवार के साथ किया वो मेरी दृष्टि में अन्याय था आप अपना कर्तव्य निभाए मैं अपना धर्म निभाता हूं एक कन्या के अपहरण में साथ देना कहां का धर्म है वृष सेन अच्छा तो जब लक्ष्मणा की माता का अपहरण युवराज दुर्योधन ने किया तब आपने उनका साथ क्यों दिया क्योंकि वो आपके मित्र धर्म की मांग थी और जो मैं कर रहा हूं वो मेरे मित्र धर्म की मांग [संगीत] है एक फूल थी जिसका दंड भोग चुका हूं और एक पुत्री के जीवन का निर्णय लेने का अधिकार केवल उसके पिता का होता है अपना जीवन साथी चुनने का अधिकार केवल कन्या का होता है और पिता का कर्तव्य केवल इतना होता है कि वो उसे प्रेम से विदा करे आप मुझे वचन दे युवराज दुर्योधन लक्ष्मणा को मेरे मित्र के साथ विदा करें मैं आपको लक्ष्मणा सौप देने का वचन दे देता ह यह अधिकार मेरे पास नहीं है मैंने युवराज दुर्योधन को वचन दिया है कि मैं लक्ष्मणा को वापस लेकर आऊंगा क्षमा करें अंगराज वचन निभाने का व्यसन मुझे आप ही से प्राप्त हुआ है लक्ष्मणा को वापस देना ना देना सांप के हाथों [संगीत] में सा परिस्थिति की गंभीरता को समझो मैं इस स्थिति को शांति से सुलझाना चाहता हूं मेरी बात मानो साम बताओ कि लक्ष्मणा कहां [संगीत] है अन्यथा मैं प्रहार करने के लिए विवश हो [संगीत] जाऊंगा [संगीत] साम सावधान मैं चेतावनी देता हूं आगे मत [संगीत] [संगीत] बढ़ ये मेरी अंतिम चेतावनी है पिता श आगे मत बढ़ मुझे प्रहार करने पर विवर्स मत [संगीत] [प्रशंसा] कीजिए इतनी विकट समस्या में आप खेल में मगन कैसे रह सकते हैं सखा नीपा समस्या हमारे रहते हुए कौन सी समस्या आन पड़ी समस्या द्वारका से ही [प्रशंसा] है काम हमें शीघ्र ही जाना [संगीत] होगा कन्हा तुम उठ क्यों नहीं रहे हो बा दव अपनी चाल खेल ली अब मुझे खेलने का अवसर नहीं [संगीत] दोगे खेल का अंत तो कीजिए वहां तुम्हारा पुत्र संकट में और तुम्हें खेल की पड़ी है [संगीत] काना प्रत्येक कर्म की प्रतिक्रिया होती है जिसे कर्म करने वाले को ही भुगतना होता है दाऊ उचित है तो मैं एक ताऊ का कर्म करने जा रहा हूं तुम यहां बैठ के अपना खेल [संगीत] खेलो सखा आप मौन रहकर यह सब देखते ही रहेंगे क्या मैं मौन कहां रहता हूं सखी तो अब आप क्या [संगीत] करेंगे अंत उस खेल [संगीत] का जो प्रारंभ हो चुका है पीछे हट जाइए पिताश्री अन्यथा मुझे पाण संधान करना पड़ेगा मेरी पुत्री मेरी बच्ची को सुरक्षित लेकर आओ जाओ मित्र मैं फिर से कहता हूं पिताश्री आगे मत बढ़ी और उसके साथ जो कोई भी हो किसी को जीवित नहीं छोड़ोगे तुम कन किसी को नहीं रुक जाइए पिताश्री रुक जाइए रुक जाइए पिता सावधान पिताश्री [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] आ मैंने मैंने आपको चेतावनी दी थी और मैंने सुनी भी थी तुमने जो बाण चलाया उसे तो मेरे कवच ने रोक लिया परंतु जो तुम कर्म करने जा रहे हैं उसका फल रोकने की शक्ति संसार में किसी कवच के पास [संगीत] [संगीत] नहीं मि तुम ठीक तो [संगीत] हो युवक रा इतना दुस मेरे मेरे मित्र पर प्रहार किया तुमने [संगीत] अब [संगीत] मित्र य तुम्हारा पुत्र हां यह मेरा [संगीत] पुत्र पुत्र तुम्हें अनुमान भी है कि तुमने कितना बड़ा अनर्थ किया [संगीत] है अपने ही पिता पर प्रहार किया तुमने क्या यही एक पुत्र का धर्म होता [संगीत] है इस समय वृष सेन के समक्ष उसके पिता नहीं विपक्षी योद्धा खड़े हैं अब समझ में आया लिया पुत्र तुम्हारे तुम्हारे ही संगति के कारण इस बालक का मन मैला हो गया है सावधान हस्तिनापुर युवराज मेरे विषय में आपके विचारों को मैं होने वाले शव सूर समझकर क्षमा कर भी दूं परंतु मेरे मित्र के विषय में एक भी अपश मुझे स्वीकार नहीं हैसर यही इच्छा लिए तू शमशान जाएगा चलिए का पुत्र इससे पहले कि मैं तुम्हारा वध कर दू तुम्हारे प्राण ले लू बता मेरी पुत्री कहां है कहां है लक्ष्मणा लक्ष्मणा का हाथ छोड़ने के लिए नहीं पकड़ा है मैंने श्री अस्कर यही होगा कि आप इस संबंध को स्वीकार कर लीजिए स्वीकार तो आज यमराज करेंगे तेरी आती को दुष्ट यमराज [संगीत] बलराम अब आप मेरे विरुद्ध खड़े होंगे आप भूल गए भूल गए आप कि आपने मुझे भजन दिया था भजन दिया था कि युद्ध में शत्रुओं को पराजित करने में आप मेरा साथ देंगे अवश्य दिया था परंतु साम कोई शत्रु नहीं है दुर्योधन और ना ही यह कोई युद्ध है और साब ने जो किया वोचित नहीं है उसके किए पर मुझे खेद है परंतु साम मेरा भतीजा है और उसके प्राणों की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है [संगीत] नाम अधिकार नाम धम साम अम सत्या [संगीत] हो
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