Wednesday, 7 January 2026

हस्तिनापुर में विवाद क्यों हुआ था Gautam Rode Suryaputra Karn Episode Pen Bhakti

[संगीत] यह सत्य है कि एक दिन सबको मरना है परंतु यह सत्य जानते हुए भी सबको अमर रहना सदा जीवित रहना है आप भी सदा जीवित रहना चाहते होंगे अपने संतान और उनकी संतान को आनंद करते देखना चाहते होंगे अपना व्यापार बढ़ते देखना चाहते होंगे परंतु बड़े-बड़े ज्ञानियों ने तो यही कहा है कि कोई भी अमर नहीं किसी ना किसी रूप में कोई रोग विनाश या मृत्यु आपको पकड़ ही लेंगे है ना परंतु यदि मैं आपसे कहूं कि आप अमर हो सकते हो आप सदा जीवित रह सकते हो तो क्या क्या आप मेरा विश्वास करेंगे नहीं जानते हैं ये दिया क्या कर रहा है यह दिया अमर हो रहा है अपनी लॉ से अनेक दिए जलाए हां कुछ समय पश्चात यह स्वयं बुझ जाएगा परंतु अपना प्रकाश जीवित रखेगा और यही सीधा सा रहस्य है अमर होने का क्योंकि दीपक का अस्तित्व उसके प्रकाश से है प्रकाश नहीं तो दीपक समान और यदि प्रकाश जीवित रहेगा तो दीपक का लक्ष्य पूर्ण हो जाएगा उसी प्रकार मृत्यु तब नहीं होती जब शरीर मरता है मृत्यु तब होती है जब हमारी सोच हमारी विचारधारा हमारा ज्ञान हमारा सम्मान मर जाता इसीलिए अपने ज्ञान सोच और प्रेम को बांटे ठीक इस दीपक की भात जिससे कई दीपक जले और वह कुछ और दीपक जलाए और आप सदा सदा के लिए अमर हो जाए मेरे प्रतिशोध की अग्नि से तुम्हारे राज्य का हर एक घर क हो जाएगा [संगीत] दुर्योधन शांत चलो यहां [संगीत] [संगीत] से णी पाप महाराज महारानी का स्वास्थ अब कैसा है भाई खोने की पीड़ा है कंक जाते जाते ही जाएगी अभी अपने कक्ष में विश्राम कर रही है क्या कोई आवश्यकता पड़े तो स्मरण कर लीजिएगा महाराज सबसे अधिक आवश्यकता के समय तुम सहायता कर चुके हो [संगीत] कं तुमने ठीक ही कहा था मैं कीचक के नहीं संशय के दबाव में था एक राजा और एक पिता को उसका कर्तव्य स्मरण कराने के लिए धन्यवाद कंक मुझे मेरा खोया हुआ आत्मविश्वास लौटाने के लिए धन्यवाद क्षमा कीजिएगा महाराज समय सावधान रहने का है हस्तिनापुर युवराज की ललकार को मत भूलिए का क्योंकि मत्से का वह सेनापति मारा जा चुका है जिसके भय के कारण विराट नगर की सीमाएं सुरक्षित थी पुरु सेना किसी भी क्षण आक्रमण कर सकती है महाराज किसी भी क्षण ठीक कहा कंग तुमने सच में संकट की घड़ी आ गई है मैं आसक्त हूं और कुमार उत्तर तो अभी स्वयं बालक है इस संकट की घड़ी में तुम्हें कोई मार्ग [संगीत] दिखाओ [संगीत] आक्रमण होने की दशा में मार्ग तो केवल युद्ध ही है महाराज परंतु मैं आपको वचन देता हूं कि जिस मत से भूमि का हमने अन खाया है उसे नाश नहीं होने देंगे महाराज नाश नहीं सर्वनाश चाहिए मुझे सर्वनाश मत से राज्य का सर्वनाश चाहिए मुझे उसने मेरा दुर्योधन का अपमान किया है दुर्योधन [संगीत] का उस अपमान का कारण स्वयं तुम हो दुर्योधन अतिथि की मर्यादा तुमने भंग की [संगीत] है मैं कुछ भंग करना चाहता था तो वह केवल उन पांडवों का अज्ञातवास जो उस सभा में नहीं हुआ व अब रणभूमि में होगा विराट पर आक्रमण करके [संगीत] होगा मूर्खता से पूर्ण प्रलाप बंद करो दुर्योधन केवल इस कारण कि तुम्हें संदेह है कि पांडव वहां थे हम आक्रमण नहीं कर सकते संदेह नहीं पूर्ण विश्वास है मुझे वो सर्री ही पांचाली थी अब मामा श्री से पूछ लीजिए कण से पूछ लीजिए व भी वहां उपस्थित [संगीत] थे सर्वप्रथम तुम मुझे उत्तर दो क्या तुमने पांडवों को देखा क्या तुमने पांचाली को देखा मैं बस देखने ही वाला [संगीत] था ठीक नहीं देख पाया परंतु उसका अर्थ यह नहीं कि वो वहां नहीं है अही बताइए बता श्री कीटक जैसे म शक्तिशाली का वत और कौन कर सकता है उसका वद ही इस बात का साक्ष्य है कि भीम वहां उपस्थित [संगीत] था मैं दुर्योधन की इस बात से सहमत हूं [संगीत] ताच महाराज कड़ी धूप में हमें आभास होता है कि दूर कहीं जल है परंतु पास जाने पर ज्ञात होता है कि वह हमारा भ्रम था वह मृग तृष्णा थी दुर्योधन भी मृग तृष्णा का रोगी है आपको क्या लगता है मैं मूर्ख हूं शत्रुता के कारण समस्त राज्य को युद्ध की अग्नि में जो झोक दे व मूर्ख नहीं है तो और क्या है कितनी बार तुम्हें समझाने का प्रयास किया है परंतु तुम समझने को तैयार ही नहीं हो पांडवों से बैर के कारण कब तक हस्तिनापुर को कलंकित करते रहोगे तुम कब तक राज धर्म को दूषित करते रहोगे अपने संदेह के निवारण के लिए सहस्त्र सैनिकों के प्राण दाव पर लगा रहे हो अपने संदेह के निवारण के लिए सहस्त्र सैनिकों के प्राण दाव पर लगा रहे हो क्षमा कीजिएगा महामहिम [संगीत] परंतु मनुष्य के निर्णय लेने के पीछे केवल दो ही तो कारण होते एक विश्वास और दूसरा [संगीत] संदेह आपको संदेह था महाराज धृतराष्ट्र की योग्यता पर इसीलिए आपने महाराज धृतराष्ट्र के भाई महाराज पांडव को राजा बना [संगीत] दिया आपको संदेह था कि युद्ध में कण कहीं अर्जुन के प्राण नाने अर्जुन को परास्त ना कर इसीलिए आपने हस्तिनापुर का विभाजन भी स्वीकार कर लिया [संगीत] आपको संदेह था कि दूत सभा में आपके प्यारे पांडवों के साथ कोई ल ना हो जाए इसीलिए आपने नियम बनाए और इस समय भी आपको संदेह ही है कि कहीं मेरा प्यारा दुर्योधन आपके प्रिय पांडवों को खोज ना ले और फिर से उन्ह वनवास पड़े महा महिम बस करिए गंधा राज आप ही है जो सदैव दुर्योधन का मन कुषित करते रहते हैं कभी समझाया है आपने इसे कि एक सैनिक जब मृत्यु को प्राप्त हो जाता है तो कैसे उसका परिवार धीरे धीरे वर्षों तक मरता रहता है सहस्त्र सैनिकों के प्राण का कोई मोल है मुझे मूल नहीं है मूल है पिता मा है मुझे कुछ 100 सैनिकों का नहीं उन उन लाखों सैनिकों के प्राण का मल है [संगीत] यदि यह यह युद्ध नहीं हुआ तो पांडव प्रस्तुत होंगे और फिर महायुद्ध होगा ऐसा महायुद्ध जिसमें लाखों सैनिक अपने प्राण गवाए फिर लाखों परिवार थोड़ा थोड़ा करके हर दिन मरते रहेंगे आप आप ही बताइए पिता श्री क्या मैं अनुचित कह रहा हूं लाखों सैनिकों के प्राण बचाने के लिए कुछ 100 सैनिकों का वीर गति प्राप्त करना बलिदान है या [संगीत] मरता मैं तो कहता हूं कि विराट पर आक्रमण करके पांडवों का अज्ञातवास भंग करना ही नीति है यही नीति है पिता म पुत्र दुर्योधन विचार करो पांडव तुम्हारे साथ कैसे युद्ध करेंगे द्वारका सहित आधा भारत तुम्हारी संधि में है और शेष और तुम दिग विजय प्राप्त कर चुके हो संधिया तो टूटने के लिए ही होती है पितामह पांडवों के वो मित्र जिन्होंने मेरे भय से मुझसे संधी की है ई उनके सामने आते ही मुझसे संधि तोड़ देंगे परंतु आपको क्या आपने तो सज पांडवों का ही समर्थन किया है आज भी जब मैं उन पांडवों से हस्तिनापुर की सुरक्षा का प्रयास कर रहा हूं आज भी आप उन्ही का समर्थन कर रहे [संगीत] हैं क्या तुम्हें विश्वास है कि पांडव विराट नगर में है उतना ही जितना इस बात पर है आप हस्तिनापुर के राजा है और पिता मा भीष्म हस्तिनापुर का हित चाते हैं पिता श्री यदि पांडवों का अज्ञातवास पूर्ण हो गया तो वो अवश्य युद्ध [संगीत] करेंगे और यह युद्ध हां युद्ध होगा महा भारत होगा जिसमें व विनाश होगा [संगीत] नहीं मैं ऐसा नहीं होने [संगीत] दूंगा यदि विराट पर हमला करने से यह महायुद्ध यह महाविनाश डल सकता है तो मुझे पुत्र दुर्योधन का यह प्रस्ताव स्वीकार है परंतु यह हस्तिनापुर के राजा का आदेश है हस्तिनापुर विराट पर आक्रमण [संगीत] [प्रशंसा] करेगा युद्ध की तैयारी हो [संगीत] समय आ गया है मित्र अर्जुन से तुम्हारा अधूरा द्वंद अब पूर्ण [संगीत] होगा अब तुम बच नहीं सकते मेरे प्यारे भांजे पांडवों [संगीत] [संगीत] आ प्रपात माता श्री मैं जानता हूं आप आज मुझे विजय होने का आशीर्वाद नहीं देंगे मैं आज कुछ देने नहीं स्मरण दिलाने आई हं तुम्हे ज्ञात होगा कि रे पुत्र पुत्र वधु के साथ ल हुआ है प्रस के सम्राट थे वो बने 12 वर्ष से वन में भटक रहे [संगीत] हैं और कुछ ही दिन बचे उनकी स्वतंत्रता और उनके साथ फिर से ल होने जा रहा है हस्तिनापुर से इतनी बड़ी सेना उनकी वृत प्रान कर रही है उनकी आत्मा रक्षा के लिए उनके पास एक भी सैनिक [संगीत] नहीं मुझे पूर्ण विश्वास है कि तुम मेरे पुत्रों के साथ एक और अन्याय नहीं होने दोगे मैं तुम स्मरण दिलाने आई हूं माता श्री कारण को अपना हर वचन स्मरण है मैंने युवराज दुर्योधन के लिए शस्त्र उठाने का वचन दिया है यु तो मैं अवश्य करूंगा परंतु मैंने एक और वचन दिया है कि आपके पुत्र क्या आवास पूरा करेंगे ये वचन भी मैं अवश्य पूरा [संगीत] करूंगा आज्ञा दीजिए माता [संगीत] श्री

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...