Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण ने अपना समर्थन किसे दिया था Gautam Rode Suryaputra Karn Episode 200 Pen Bhakti

[संगीत] मनुष्य अपना जीवन विश्वास पर जीता है परंतु विश्वास किसका तनिक सोचिए किस पर विश्वास है आपको महापुरुषों की कही बातों पर ग्रंथों में लिखे ज्ञान पर माता-पिता की सीख पर या मित्रों के दिए गए निर्देशों पर या फिर मेरी कही बातों पर यह सब विश्वास अपूर्ण है जब तक आपको स्वयं पर विश्वास ना हो यदि विश्वास करना है तो पहले अविश्वास करने के विज्ञान को भी सीखना चाहिए आप किसी की बातों पर विश्वास ना करें आप अपने मन से पूछे अपनी अंतर आत्मा से प्रश्न करें और जो उत्तर मिलेगा वही सबसे उचित होगा जब आप अपने मन अपनी अंतरात्मा पर विश्वास करना सीख जाएंगे तो नीति ज्ञान सब आपके भीतर से स्वतः उमड़े और यदि आप स्वयं पर ही विश्वास ना कर पाए तो धर्म ग्रंथों में लिखे श्लोक महापुरुषों की वाणी माता-पिता की सीख या मित्रों का निर्देश कोई भी लाभ नहीं दे [संगीत] पाएगा तुम्हें आने में तनिक विलंब हो गया अनुज तनिक विलंब [संगीत] यह छलिया तो सो रहा [संगीत] है प्रतीक्षा करनी [संगीत] होगी [संगीत] [संगीत] माधव विश्राम कर रहे हैं जगाना उचित नहीं [संगीत] [संगीत] होगा [संगीत] ओ नारायणम नमस्कृत्य नरम चैव नरो अरे अर्जुन एक वर्ष किन्नर क्या रहे तुम तो क्षत्रियों के लक्षण ही भूल गए केवल समर्थन पाने के लिए तुम क्षत्रिय कुल का अपमान कर रहे हो तुम तो धरा पर बैठ गए ऐसे जो इस धरा के स्वामी है उनके समक्ष ब्राह्मण क्या और क्षत्रिय क्या ना मैं इस समय क्षत्रिय हूं और ना ही मेरे मन में समर्थन का लोप मैं तो केवल इस समय एक भक्त जो अपने आराध के चरणों में बैठा [संगीत] है बैठो [संगीत] बैठो [संगीत] माधव कब आए [संगीत] पार्थ मुझे तो तुम्हारे आने का भान ही नहीं हुआ आप विश्राम कर रहे थे माधव इसलिए जगाना उचित नहीं समझा और तुम नीचे क्यों बैठे हो इधर आओ मेरे समीप आकर बैठो माधव मैं यहां आपका यु केलिए समर्थन अरे ठहरो यहां पर पहले मैं आया तो समर्थन मांगने का अधिकार मेरा है अरे दुर्योधन तुम भी यहां हो आश्चर्य आश्चर्य आश्चर्य तो मुझे हो रहा है मेरे आने पर तो आप उठे नहीं और और अर्जुन की आते ही आपकी नींद खुल गई वासुदेव [संगीत] मैं यहां अर्जुन से पूर्व उपस्थित हुआ हूं इसलिए इसलिए समर्थन मांगने का अधिकार पहले मुझे मिलना [संगीत] चाहिए यह तुम्हारा मत है दुर्योधन परंतु पहले मैंने अर्जुन को देखा इसलिए मांग रखने का अवसर पहले अर्जुन को ही मिलना चाहिए यही धर्म है परंतु नियम यह था वासुदेव की जो द्वारका पहले पहुंचेगा आपका आपका समर्थन उसी को मिलेगा और मैं मैं अर्जुन से पहले यहां उपस्थित हुआ [संगीत] हूं कदाच तुमने नियम ठीक से नहीं सुना था दुर्योधन नियम यह था कि द्वारका पहुंचकर मेरे समक्ष आकर प्रथम जो समर्थन की मांग करेगा मैं उसका साथ दूंगा अब आप कुतर्क का सहारा ले रहे हैं [संगीत] वासुदेव जानता था मैं कि आप पक्षपात अवश्य करेंगे आरोप मत लगाओ माधव [संगीत] पर दुर्योधन सत्य कह रहा है माधव मुझसे पूर्व यह यहां उपस्थित था परंतु आपके पीछे बैठने के कारण आप इसे देख नहीं पाए इसलिए समर्थन का पहला अवसर दुर्योधन को ही मिलना [संगीत] चाहिए कुछ समझ में आया दुर्योधन कुछ मांगने के लिए अहंकार नहीं विनम्रता होनी चाहिए [संगीत] कहो क्या चाहिए मैं चाहता हूं कि आने वाले महायुद्ध में द्वारका हम हम कौरवों का समर्थन करें विनम्रता से अपनी मांग पर अडिग हो हां अडिग हूं मेरी यही मांग है मैं चाहता हूं कि महायुद्ध में दवारका हम गौरव का समर्थन करे ठीक तथास्तु [संगीत] परंतु तुम्हारे इस वचन ने मुझे बहुत बड़ी उलझन में डाल दिया है दुर्योधन अब मुझे हस्तिनापुर के साथ-साथ इंद्र प्रस्थ की भी सहायता करनी होगी असंभव य असंभव है य य पक्षपात है परंतु तुमने यही तो मांगा है गांधारी नंदन मैंने वचन बोलने से पूर्व अपने मन की तुला पर उन वचनों को तौल लेना चाहिए दुर्योधन तुमने कहा कि कौरवों को द्वारका का समर्थन मिलना चाहिए अपने द्वेष के कारण तुमने पांडवों को सदा भिन्न माना परंतु नीति अनुसार हर कुरु संतान कौरव है और पांडव उसी कुरुवंश के हैं जिसके लिए तुमने सहायता की मांग [संगीत] रखी इसलिए मुझे अपना समर्थन दोनों पक्षों में बांटना होगा इसलिए मुझे अपना समर्थन दोनों पक्षों में बांटना होगा क्या करू पक्षपाती होना मेरे स्वभाव में जो नहीं पक्षपात तो कर ही रहे हैं आप हम दोनों एक दूसरे के विरुद्ध खड़े हैं तो स्पष्ट कीजिए हम दोनों को एक साथ कैसे समर्थन देंगे [संगीत] आप या ये भी आपका कोई छल है [संगीत] विभाजन से पहली बार युद्ध को टालने के लिए मैंने विभाजन का सहारा लिया था और इस बार युद्ध में सम्मिलित होने के लिए विभाजन करू मैं द्वारिका की शक्ति को दो भागों में विभाजित [संगीत] करूंगा एक और होगी मेरी शक्तिशाली नारायणी सेना जो कभी पराजित नहीं [संगीत] हुए [संगीत] [संगीत] और दूसरी ओर केवल [संगीत] मैं अकेला और निहत था मैं वचन देता हूं किसी भी परिस्थिति में मैं इस युद्ध में अस्त्र नहीं उठाऊं ना ही धनुष ना गदा ना खड़क ना ही सुदर्शन चक्र मैं किसी भी अस्त्र का प्रयोग नहीं करूंगा क्या आप अब युद्ध में अस्त्र नहीं उठाएंगे हां दुर्योधन सही सुना तुमने [संगीत] मैंने निर्णय ले लिया है कि मुझे क्या चाहिए नहीं दुर्योधन पहले तुम्हें मांगने का अवसर नहीं मिलेगा क्या यह मां गुरु वंश के मध्य हो रही है और अर्जुन तुम्हारा अनु और धर्म कहता है कि मांगने का पहला अधिकार अनुज का होता है कोई अनुज नहीं है वो शत्रु है यह मेरा और आपने कहा था जो जो आपके समक्ष पहले आएगा आपका समर्थन उसी को मिलेगा मैंने अपना वचन निभाया दुर्योधन तुमने कुरुवंश को समर्थन देने की मांग की और कुरुवंश के लिए मैंने अपनी शक्ति को दो भाग विभाजित किया अब विषय नीति का है दुर्योधन और नीति के अनुसार प्रथम मांगने का अधिकार अर्जुन को [संगीत] है यदि बात नीति की है तो इस अर्जुन का यहां आना ही नीति समत नहीं है किसी राज्य का राजा नहीं है वो राजा तो तुम नहीं हो युवराज दुर्योधन परंतु मैं मैं अपने पिता महाराज मराज त राष्ट्र का प्रतिनिधि करता हू और मैं अपने जेता महाराज युध का प्रतिनिधित्व करता हूं राजा कैसा राजा 13 वर्ष पूर्व उनसे उनका सिंहासन छन चुका है और वही सिंहासन उन्ह मिले इसलिए ये युद्ध हो रहा है यदि तुमने राज्य लौटा दिया होता तो यह युद्ध कभी नहीं होता यदि अज्ञात ब फन किया होता तो राज्य अवश्य लौटा [संगीत] देता यदि अज्ञात ब फन किया होता तो राज्य अवश्य लौटा देता शांत हो जाओ तुम दोनों यह मत भूलो कि तुम दोनों यहां अतिथि हो और अतिथि की मर्यादा होती अपने अतिथि के घर पर य झगड़ा करना तुम दोनों को शोभा नहीं देता तो जैसा कि मैंने कहा अर्जुन को प्रथम अवसर मिलना चाहिए आप चाहते हैं कि अर्जुन को नारायनी सेना चुनने का अवसर मिले मुझे क्या चाहिए इसका निर्णय तुम मत लो दुर्योधन माध आप अस्त्र उठाए या ना उठाए मुझे मेरे पक्ष में केवल आप चाहिए मुझे नारायणी सेना से कोई मुह नहीं यदि नारायण मेरे साथ है तो मेरे लिए पर्याप्त है मुझे आपकी सेना का नहीं आपका समर्थन [संगीत] चाहिए क्या आपको यह विनती स्वीकार है [हंसी] मा अब समझा में य 12 वर्ष के वनवास ने तुम्हारा क्षत्रिय गुण ही नहीं तुम्हारा तुम्हारी बुद्धि भी ली मर्ख स्वयं मेरे गले में विजयश्री की माला पहना दी तुमने तुमने तो स्वयं अपनी पराजय का मार्ग चुन लिया इतनी इतनी विशाल शक्तिशाली अपराज सेना को ठुकरा कर [संगीत] और तुमने चुना ते कृष्ण को जोब जोब कदाचित स्वयं की रक्षा भी नहीं कर पाएगा युद्ध में दिख रहा है मुझे कैसे तुम पांचों पांडवों के श पर अठस मारकर उत्सव मना रहा हूं [संगीत] मैं [संगीत] [प्रशंसा] कृष्ण मुस्कुरा रहा है नहीं नहीं कुछ तो छल है अब समझा नारायनी सेना मुझे दे दी जबकि उसके स्वामी तो आप स्वयं है व अपने ही स्वामी पर प्रहार कैसे करेगी उल्टा व तो हमारी ही सेना को हानि पहुंचाएगी [संगीत] य य ल है ल है य नहीं दुर्योधन यदि ऐसा होता तो मैं पहले ही तुम में से किसी एक को पूर्ण समर्थन दे चुका होता पक्षपात ना हो इसलिए मैंने अपनी शक्ति को दो भागों में विभाजित किया है परंतु क्या है ना वासुदेव मुझे संदेह है कि आपकी यह सेना मेरा आदेश नहीं मानेगी अवश्य मानेगी क्योंकि मैं नारायण सेना का नेतृत्व करूंगा वसर [संगीत] श्री

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...