Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण जी पुंडलिक का स्वभाव कैसे बदलेंगे Hitanshu Vighnaharta Ganesh Episode 868 PenBhakti

[संगीत] जबसे तुम्हारा प्रवेश हुआ है मेरा जीवन दूभर हो गया एक पल का भी एकांत संभव नहीं है मुझे अपनी पोटली उठाओ और जाओ यहां से अच्छा हुआ ताऊजी और ताई जी ने कुछ सुना नहीं वह पहले से ही इतने दुखी है व यह सब देखते या सुनते तो उन पर तो दुखों का पहाड़ी टूट पड़ता नहीं नहीं मैं उनसे कुछ भी नहीं [संगीत] कहूंगा [संगीत] [संगीत] अच्छा हां हां समझ गया मैं आपको यही लग रहा है ना कि मैं बदल गया आई और पिताजी के समान आपको भी यही लग रहा है ना कि जैसे मैं भटक गया है ना किंतु मैं भटका नहीं अब उचित मार्ग पर आया एक युवा का सौंदर्य के प्रति आकर्षण जीवन का आनंद लेना और एकांत की इच्छा यह तो यह तो स्वाभाविक [संगीत] है लगता है आपसे मेरा आनंद देखा नहीं जा रहा [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] कभी-कभी ज्ञानियों का ज्ञान भी व्यर्थ हो जाता है अबोध हो जाते हैं लोग भूल जाते हैं लोग भगवान की प्रतिमा को पलट देने से मंदिर में अंधेरा कर देने से भगवान की आंखें बंद नहीं हो जाती भगवान की दृष्टि से कुछ नहीं छिपता कुछ नहीं बचता इसीलिए मनुष्य जो भी अनुचित करता है वो उसकी अत देख सकती है और जो अत आत्मा देख पाती है वो परमात्मा भी देख सकते हैं भगवान को सब ज्ञात होता है और कुंडलिक उसे नकारने का प्रयास कर रहा है जो उसकी अंतरात्मा देख सकती है इसीलिए वो कुमार्ग पर जाने के लिए प्रेरित हो रहा है [संगीत] [संगीत] अरे गुरु प्रेम के गुरु मन के स्वामी उठिए अरे जाग जाइए जल्दी उठिए क्या हुआ क्यों उठा दिया इतना सुंदर स्वपन देख रहा था मैं स्वपन जहा समाप्त होते हैं वहा से वास्तविक जीवन शुरू होता है आप हमारे साथ चलिए हम आपको सपनों के संसार से अधिक सुंदर दृश्य दिखाएंगे वैसे वास्तविक सुंदरता तो मोर में दिखाई देते हैं गुरु [प्रशंसा] [संगीत] क्या हुआ पुत्र दिवाकर तुम यहां क्यों सो रहे हो अवश्य कुंडलिक नेही तुम्हें अपने कक्ष से बाहर जाने के लिए कहा होगा अब मुझे कोई संदेह नहीं रहा वो बुरी संगति के प्रभाव में इतना गहरा चला गया है कि अब अच्छे बुरे का भेद पूर्ण रूप से भूल गया [संगीत] है सत्य कह रहे हो ना त हां गुरु हम सत्य कह रहे हैं आप हमारे साथ चलिए तो सही उसे रोकने का और सुधारने का समय अभी है अन्यथा बहुत देर हो जाएगी अब मुझे ही कुछ करना होगा स्वामी रुकिए कहां जा रहे हैं मुझे मत रोकिए आज उसे ना समझाया तो छोटी भूल बड़ी भूल बन जाएगी और फिर भूलों की श्रंखला में ऐसा उलझता जाएगा कि इस भूल भुलैया से बाहर निकलना असंभव हो जाएगा उसे रोकना होगा उसे समझाना ही होगा [संगीत] मुझे गुरु जब आपने निर्णय ले ही लिया है कि आपके सच्चे मित्र कौन है तो एक पल का विलं मत कीजिए चलिए आप हमारे साथ [संगीत] पुंडलिक पुंडलिक गुरु अब और सोच विचार नहीं कर सकते पालकी तैयार है चलिए कुंडलिक कुंडलिक अरे चलिए गुरु चलिए आइए चलिए च चलिए पालखी तैयार है कुंडलिक में भीतर आ रहा हूं [संगीत] प्रभु भक्त जानु देव का पुत्र प्रभु को छोड़ उस संगति के संगत में पड़ गया प्रेम का गुरु कौन है हमारा भाई पुंडलिक है प्रेम का गुरु कौन है हमारा भाई पुंडलिक [संगीत] है [संगीत] क्षमा करना प्रभु कुंडलिक को पता नहीं उससे य कैसी भूल हो रही है स्वामी आप चिंता मत कीजिए मुझे एक अवसर दीजिए आज जब व घर लौटेगा मैं उसे समझाऊ मुझे पूरा विश् है व अपनी आई का कहा मानकर स्वयं को सुधार लेगा मुझे इस बात का भय है कि कहीं वह इतनी बड़ी भूल ना कर दे जिससे जिस प्रकार उसने अपने प्रभु का मुख मोड़ा है उसी प्रकार कहीं प्रभु ने भी उससे मुख मोड़ लिया [संगीत] तो [संगीत] [संगीत] [संगीत] ये पुंडलिक का कैसा अशिष्टा आचरण [संगीत] है यह क्या प्रभु क्या आप भी अपने भक्त से अपना मुख फेर लेंगे नहीं भक्त भले ही भगवान से मुख फेर ले किंतु भगवान अपने भक्त से कभी मुख नहीं फेरते ऐसे समय पर भगवान का ध्यान भक्त पर और बढ़ जाता है उस एक अवसर की प्रतीक्षा में जब एक भक्त फिर कुछ ऐसा कर सके जिससे भगवान के लिए उसका हाथ थामना उसे उचित मार्ग दिखाना संभव हो सके और प्रभु परम श्री कृष्ण बस उस एक क्षण की प्रतीक्षा में ही थे जिससे वह पुंडलिक की उचित पथ पर लौटने में सहायता कर सके यही भक्ति की मर्यादा और यही भगवान का हृदय है जो सदा भक्त की भलाई करने को लालायित रहता [संगीत] है यही तो आप भी कर रहे हैं ना प्रभु मुझे एक और अवसर दे रहे हैं कि मैं उचित मार्ग पर लौट सकूं और यदि आप अपना प्रयास रोक भी देंगे मैं तब भी प्रयास करता रहूंगा अपने भक्त की भक्ति को भगवान सर्वाधिक महत्व देते हैं क्योंकि भक्त की भक्ति है तो भगवान भी [संगीत] हैं किंतु पुंडलिक के भीतर काम विकार का जो पिशाच जागृत हुआ था वह उसे अपनी भूल समझने ही नहीं दे रहा था इसीलिए भगवान को भी अवसर नहीं मिल रहा था और अब तो उसकी स्थिति और भी बिगड़ने वाली [संगीत] [प्रशंसा] थी [संगीत] आ स्वामी इतनी देर तो वह घर से बाहर कभी नहीं रहा भोर में ही बिना भोजन किए चला गया पता नहीं कहां भूखा पैसा भटक रहा होगा प्रेम का गुरु कौन है हमारा भाई पुंडलिक है प्रेम का गुरु कौन है हमारा भाई पुंडलिक है प्रेम का गुरु कौन है हमारा भाई पुंडलिक है स्वामी कौन हैरा पुंडलिक है प्रेम का गुरु कौन है हमारा भाई पुंडलिक है का स्वामी कौन है हमारा भाई पुंडलिक है प्रेम का गुरु कौन है हमारा भाई कुंडलिक है अका स्वामी कौन है हमारा भाई कुंडलिक [संगीत] है गुरु जो घर के भीतर का युद्ध जीत जाता है वही विजेता कहलाता है कहीं ऐसा ना हो कि आप इनके फिर से अधीन हो जाओ और इनके हाथ की कठपुतली बन जाओ मैं चलता हूं यह सब क्या हो रहा है पुत्र यह किसकी संगति में पड़ते जा रहे हो तुम आज भोर से ही घर से बाहर हो तुम ना आज तुमने हमारे साथ पूजा की ना अपने गोविंद की सेवा और आराधना की ना अपने पिता के साथ ज्ञान के लिए बैठे ना हमारे साथ भोजन किया यह सब क्या हुआ तुम्हें तुम्हारे चेहरे का भाव बता रहा है तुमसे भूल हुई है मुझे पता था तुम उसे स्वीकार करोगे मुझे अधिक समझाने की आवश्यकता नहीं होगी अब कल से तुम अपनी पुरानी दिनचर्या पर आ जाना पुत्र मुझे पता है तुम अपनी आई का कहना मानोगे आई मैंने बाल्यकाल से आपकी हर आज्ञा का पालन किया है उसी में आनंद को ढूंढा है परंतु अब मेरे मित्रों ने उन्होने वास्तविक आनंद से मेरा परिचय करवा दिया है इसीलिए उचित मार्ग तो मुझे अब मिला है और मुझे जत है पिताजी की सीख कि जिस कार्य में आनंद मिले वही करना चाहिए कल से तुम भी चलो मेरे साथ तब तुम्हें ज्ञात होगा आनंद इन ग्रंथों में नहीं परमानंद तो कहीं और है [संगीत] कुंडलिक ये मैंने उचित नहीं किया गुरु जो घर के भीतर का युद्ध जीत जाता है वही विजेता कहलाता है नहीं इसमें मुझे बुरा लगने का कोई कारण नहीं [संगीत] है [संगीत] आ गोविंद आप मुझे बारबार घूर करर गलानी का आभास क्यों करवा रहे हैं अपना जीवन अपने अनुसार जीने का सभी को अधिकार है इसलिए अभी मुझे क्षमा [संगीत] कीजिए [संगीत] आप ऐसे नहीं मानेंगे मेरे पास उसका उपाय [संगीत] है जब मन में अपराध बोध का अनुभव हो तो ऐसा लगता है कि सबकी दृष्टि उसी पर टिकी है पुंडलिक को भी यही आभास हो रहा था इसलिए वह बार-बार कुतर्क कर स्वयं को ही समझाने का प्रयास कर रहा था और प्रभु श्री कृष्ण से अपना मुख छिपाने पर विवश था अपने अनुसार जीवन जीने का उसका अनुभव करने का सभी को अधिकार है किंतु दूसरों के सुख का हनन कर नहीं जीवन के चार पुरुषार्थ धर्म अर्थ काम मोक्ष में भी धर्म ही प्रथम है अर्थात अर्थ भी धर्म से ही अर्जित किया जाना चाहिए काम भी विवाह की मर्यादा में रहकर ही अनुभव किया जाना चाहिए शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने पर ही मोक्ष की प्राप्ति होती है यह तो पुंडलिक को भी ज्ञात था भीतर ही भीतर यह ज्ञान उसको कचोट भी रहा था किंतु उस समय वह काम और मोह जैसे विकारों के वश में था उनके अधीन था तो क्या जानु देव और सत्यवती ने उसे समझाने का प्रयत्न नहीं किया प्रभु वह तो निरंतर प्रयास करते रहे किंतु पुंडलिक का मन जिसमें भी लगता था वह उसी में एकाग्र हो जाता था यह उसका मूल स्वभाव था इसलिए अब अन्य कोई उसे उस कीचड़ से नहीं निकाल सकता था स्वयं उसकी अंतर आत्मा के जागृत होने पर ही संभव था किंतु वह तो उस दलदल में और गहरा उतरता जा रहा था अपने गोविंद और उनकी भक्ति से व जितना दूर जा रहा था अनुचित कार्यों के लिए उसका साहस उतना ही बढ़ रहा था गुरु वह कौन स्त्री है जो आपको ऐसी भा गई है जिसके सोहन पाश से आप निकल ही नहीं पा रहे पुंडलिक को आज तक ऐसी कोई लड़की मिली ही नहीं जिसके सोहन में पुडलिक बन पाए बस उसी की कल्पनाओं में खोया जो मेरे योग्य मेरी रानी बनेगी जो इतनी सुंदर हो कि अन्य सभी सुंदरियों को मिला भी दिया जाए तो उसके सामने टिक ना पाए जो अदभुत हो सौंदर्य की देवी [संगीत] हो ऐसी अति सुंदर कन्या कहां मिलेगी गुरु मिलेगी क्यों नहीं मिलेगी संसार में कुछ भी असंभव नहीं लेकिन इसका पता सिर्फ एक ही व्यक्ति दे सकता है दया कर दया कर पुष्प [संगीत] वाला दयाकर की दुकान पर फूल तो क्या पंखुड़ी भी बिना मोल नहीं मिलती गाठ बांध लो जी पर हां कोई पहली बार आए तो रुचि लगाने के लिए कम मूल्य में दे देना पर बिना मूल्य नहीं समझ गए [संगीत] हां [संगीत] [संगीत] हां हां तुम्हारी टोकरी सजा दी [संगीत] हम रहने दो तुम्हारे लिए मैं सारे नियम भंग कर दूंगा तुमसे कोई मूल्य नहीं लूंगा इह पहचान लो बहुत विशेष ग्राहक हैय अरे वाह ऐसा भी हमें विशेष क्या है जो दया करर किसी पर दया नहीं करता बिना मोर किसी को पुष्प नहीं देता वह बिना कुछ लिए पुष्पों की भरी टोकरी दे रहा है केत की बाय आप इतनी भी ना समझ नहीं है [संगीत] चंद्रकला जैसी चांद है आपके पास और उस चांद के लिए दया कर अपने प्राण तक दे देगा तुम मांग कर तो देखो [संगीत] प्राण हमारे प्राणों का इतना मोल नहीं कि चंद्रकला तुम्हें मिल जाए चंद्रकला की एक झलक पाने के लिए तुम्हें बहुत कुछ करना होगा करूंगा अवश्य करूंगा बताओ तो सही क्या करना होगा मुझे तो ठीक है पकड़ लाओ किसी धनी को जो चंद्रकला की चादनी में स्वयं को भूल जाए उसके प्रेम पाश में ऐसा उलझे कि उसे रानी बनाकर रखे उस पर अपना सब कुछ लुटा दे उसकी प्रत्येक मांगे पूरी कर यह क्या कह रही हो इसमें मेरा क्या लाभ चंद्रकला का साथ तो मुझे चाहिए दया कर पुछ बचते बचते तुम्हारे मस्तिष्क में सुगंध की जगह फूसा भरा है अरे धन लुटाते लुटाते कभी तो धन ही निर्धन बनेगा तो बस चंद्रकला तुम्हारी ही हो जाएगी सत्य कह रहे हो ना केतकी भाई जाओ ऐसे किसी को ढूंढ के लाओ संभव है इसी कारण तुम्हें चंद्रकला के दर्शन मिल जाए [संगीत] वैसे अब ऐसा धनी कहां ढूंढ और उसे यहां कैसे लाऊ तब तो इस दयाकर पुष्प वाले से आज ही मिलना होगा मुझे किंतु यह कार्य मैं अकेला ही करूंगा वस पुलि कहां जा रहे हो तुम तुम्हारे घर पर तो ज्ञान सभा होने वाली है मुझे जो ज्ञान आनंद चाहिए वो आप वृद्धों कि सभा में जाकर कहां मिलेगा आप ही बताइए वहां जाकर मैं क्या करूंगा तो आप जाइए अपनी सभा में और मैं चला अपनी सभा में जानु देव के पुत्र में संस्कार नाम का कोई व्यवहारी शेष नहीं रहा आज किसी भी प्रकार से ज्ञान सभा में पुंडलिक के पिता से बात करनी ही होगी हा आज भ्राता जान को उत्तर देना ही होगा अपना ज्ञान व अपने पुत्र को क्यों नहीं दे रहे हैं उसका बुरा आचरण चरम पार कर रहा है तो वह उसे क्यों नहीं रोक रहे [संगीत] हैं महापंडित जानु देव का सिस्ट चाचारी पुत्र यहां यह मार्ग तो नहीं भटक गया भटका नहीं है मालिक अटका है हमारी ओर ही आ रहा है यहां क्यों अभी कुछ दिन पूर्व एक अधर्मी चोर को दंड दिया था इसने कहीं मेरे पीछे तो [संगीत] नहीं दयाकर पुष्प वाले आप ही हैं नहीं दयाकर तो य है मैं तो इनका सहायक भर हूं तो ये तो बताइए क्या भूल हुई है इनसे जो आपको यहां आना पड़ा फूल फूल कैसे मैं तो यहां पुष्प लेने आया हूं किंतु यहां के पुष्प आपके किस काम के ये तो पूजा में नहीं चढ़ाए जाते किंतु आपको जो भी पुष्प चाहिए ले जाइए मैं तो सुंदर पुष्पों का प्रेमी हूं पर इन पुष्पों से अधिक कोई सुंदर हो तो बता अवश्य मेरी परीक्षा ले रहा है मुझे कुछ नहीं कहना चाहिए और किसी सौंदर्य का तो पता नहीं यह कुछ भी है मेरे पास उचित है नगर के सबसे शक्तिशाली और धनी व्यक्ति के पुत्र है ये किंतु अपने पिता से पूर्ण रूप से विपरीत है पथ भ्रष्ट है इसकी पूरी मित्र मंडली है जो गांव की सभी युवतियों पर दृष्टि रखती [संगीत] है पकड़ लाओ किसी धनी को उस पर अपना सब कुछ लुटा [संगीत] दे उसकी प्रत्येक मांगे पूरी कर जाओ ऐसे किसी को ढूंढ के लाओ संभव है इसी कारण तुम्हे चंद्रकला के दर्शन मिल जाए बोले [संगीत] महोदय पुंडलिक भाई रुकिए तो मैं समझ गया आपको क्या [संगीत] चाहिए तब तो हाथ झटक दिए थे अब क्या समझ आ गया तुम कहीं तुम्हारी बुद्धि में कोई छल तो नहीं आ गया इतना साहस मुझ में कहां इस नगर की जो सर्वाधिक सुंदरी है सौंदर्य की जीवित मूरत मैं आपको उसके पास लेकर जा सकता हूं तुम सत्य कह रहे हो ना वो सुंदरी जहां खड़ी हो जाए वहां बाहर आ जाए उसका मुखड़ा उसका मुखड़ा चंद्रमा की चमक को भी फीका करते बोली इतनी मधुर कि कोयल भी लज्जा जाए चाल ऐसी कि हिरण भी छिप [संगीत] जाए जो गुलाब की पंखियो से भी अधिक कोमल है ऐसे नेत्र क्या उनमें बस डूबने का मन करे और क्या कहूं उसके पांव के घुंघर की छनछन जैसे जैसे जैसे क्या जैसे ऐसा क्या होता है उसके भाव की रू की नक से स्वयं उसके अनुसार नृत्य करने का मन करता है अच्छा इतनी सुंदर है वो नाम क्या है [संगीत] उसका [संगीत] चंद्रकला चंद्रकला चंद्र [संगीत] कला चंद्रकला चंद्रकला उसे देखे बिना यह अवस्था है तो देखने पर क्या होगा जो तुमने कहा वह सत्य है तो आज ही मेरी उससे भेट करवाओ इतना सरल नहीं है धन चाहिए होता है उसके लिए एक पोटली धन भी कम पड़ता है जो चाहिए वो करूगा पर आज रात्रि मुझे उसके दर्शन चाहिए पुंडलिक यहां इस दयाकर पुष्प वाले के साथ विश्वास नहीं होता [संगीत] क्षण भंगुर संसार का आनंद भी क्षणिक होता है इसलिए व्यक्ति को सोच विचार कर कदम उठाना चाहिए

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