Sunday, 4 January 2026

श्री कृष्ण और बलराम के बीच बहस क्यों हुई थी Gautam Rode Suryaputra Karn Episode 195 PenBhakti

[संगीत] एक पिता होने के नाते आप अपनी संतान के लिए क्या करते हैं उसके लिए बहुत सारी सुविधाएं जुटा बहुत सारा धन कमाते हैं है ना और क्या आपको ऐसा लगता है कि यही उचित है आपकी संतान के लिए इस पंछी को देख रहे हैं यह भी संतान को जन्म देता है उन्हें पालता है पसता है उड़ना सिखाता है और भोजन का प्रबंध भी करना सिखाता है परंतु उनके बड़े हो जाने के बाद उनके लिए अलग से घोसला नहीं बनाता क्यों क्योंकि यदि इसने संतान को सब कुछ करके दे दिया तो संतान क्या [संगीत] करेगी वह अपनी संतान को तब तक भोजन कराता है जब तक उसकी संतान स्वयं भोजन का प्रबंध करने में सक्षम नहीं हो जाते और उसका लाभ यह मिलता है कि उसी की भाती उसकी संतान आत्मनिर्भर बनती है इसलिए अपनी संतान उतनी ही सुविधाए दे जितनी आवश्यक है मोह को त्यागे आपका उनसे मोह उन्हें कभी आत्मनिर्भर नहीं बनने देगा अपनी संतान को कर्म करना सिखाई यदि आपकी संतान कर्म करना सीख गई तो वह धन स्वयं कमा लेगी और यदि वह आलसी अकर मन्य बन बैठ तो आपके संचित धन का भी नाश कर कर देगी ईश्वर की कृपा से सब कुछ ठीक ठीक हो रहा है दुधन ईश्वर की कृपा से [संगीत] या आपके ल से मम श्री क्या कर रहे होय प स्मरण कीजिए कि मैंने क्या कहा था विराट प्रस्थान से पूर्व मैंने क्या कहा था क्या कर अपने मामा पर कर रहे हो और जो आपने मेरे पुत्री के साथ में किया वो क्या था कहा था कि मामा श्री मेरी मेरी पुत्री है वो उसे अपने षड्यंत्र में सम्मिलित मत करना स्मरण है कहा था कि दुर्योधन की पुत्री है वो आपके चौसर का मेरू नहीं स्मरण है या ल किया अपने मेरे साथ अब स्वीकार कीजिए स्वीकार करिए सत्य को कि आप कभी लक्ष्मणा का विवाह उत्तर से कराना ही नहीं चाहते थे स्वीकार कीजिए कि आप लक्ष्मणा को यहां लाए ही थे ताकि आप उसका विवाह हम के साथ कराने की योजना बना सके जो कुछ हुआ क्यों आपसे अच्छा कोई नहीं जानता कि मैं कृष्ण से कितनी घृणा करता हूं फिर भी फिर भी आपने मेरी पुत्री का विवाह रणछोड़ के पुत्र से करवाने की योजना [संगीत] बनाई तुम्हारे भलाई के लिए हस्तिनापुर के भविष्य के लिए हमारी बच्ची लक्ष्मणा की प्रसन्नता के लिए किया मैंने बस मुझे बहुत और ठस पहुची है तु जिस भांजे के लिए मैंने अपना मैंने अपना राज पाट अपनी प्रजा सबका त्याग करके यहां हस्ती कापुर में बैठ [संगीत] गया इसे इतना ना माना मैंने कि अपनी संतान को भी भूल गया वही वही आज मेरे प्राण लेने निकला रसन मेरे मैंने यह सब इसलिए किया होने वाले महायुद्ध में तुम्ह कोई हानि ना [संगीत] हो ऐसे लक्ष्मणा का विवाह करा शम से विवाह करा क्या मैं बिना युद्ध के पांडवों से जीत जाऊंगा नहीं परंतु पांडवों की विजय के मार्ग में बाधा अवश्य आएगी बाधा अवश्य आएगी [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] कब कब समझोगे तुम यदि यदि मैं यह ना करता तो कोई और करता और लक्ष्मणा शाम की ही होकर रहती क्योंकि शाम को उससे प्रेम [संगीत] है यदि इस एक विवाह के कारण हमारे बच्चे लक्ष्मणा के जीवन में आनंद और तुम्हारे चरणों में विजय तो तो क्या बुरा है यदि मेरे भांजे और नातिन का भविष्य इस एक विवाह के कारण सुरक्षित है तो क्यों नहीं देखा ना तुमने वासुदेव यदि हमारा साथ नहीं देंगे तो उन पांडवों का भी नहीं अब हमें बलराम समेत किसी भी यादव योद्धा का भय नहीं और ना द्वारका की नारायणी सेना का दुर्योधन अब इस युद्ध में हस्तिनापुर की विजय निश्चित है तो केवल इस विवाह के कारण [संगीत] देखो कान्हा भाग्य किस प्रकार बदलता है कुछ ही समय पहले हम द्यूत खेल रहे थे और कुछ ही समय पश्चात हमारे भतीजे का विवाह हम देख रहे हैं अरे इन सब में तो हमें स्मरण ही नहीं रहा कि हमारा द्यूत अभी भी अपूर्ण है माना कि मैं विजय के निकट हूं परंतु प्रयास करोगे तो तुम अभी भी जीत सकते [संगीत] [प्रशंसा] हो क्षमा चाहता हूं दाव परंतु यह दाव भी मैं पूर्ण नहीं कर पाऊंगा क्यों क्या हुआ क्योंकि महायुद्ध की भाति हमारी दाव की स्थिति भी विकट है और विकट स्थिति में भाग नहीं लेना चाहिए इसका आदेश आपने ही मुझे दिया है [संगीत] [संगीत] नाथा क्षमा कर दीजिए मुझे क्या करूं मैं जब जब एक पुत्री विदा होती है तो उसके पिता के आंखों में अश्रू होते हैं परंतु मेरी इन आंखों में अश्रू है क्योंकि मुझे मेरे शत्रु के समक्ष चुना पड़ा कितना बड़ा मूल्य चुका रहा हूं मैं का मामा शर कित [संगीत] संसार में ऐसा कुछ भी नहीं दुर्योधन जो बिना मूल्य चुकाए मिल जाए जीवन का मूल्य चुकाना पड़ता है भोजन का मूल्य चुकाना पड़ता है ठीक उसी बात ही पराजय और विजय का भी मूल्य चुकाना पड़ता है दुर्योधन और अब अब ये जो युद्ध होने वाला है ये केवल केवल युद्ध नहीं है महायज्ञ है ये महायज्ञ इसमें इसमें बड़ी-बड़ी आहुतियां देनी पड़ेंगी दुर्योधन हम पांडवों से उनकी पराजय का मूल्य वसू लेंगे [संगीत] अवश्य व सुनेंगे [संगीत] [संगीत] कान्हा तो तुम मुझ पर आरोप लगा रहे हो कि मैंने तुम्हें तुम्हारी इच्छा के विरुद्ध रोका है नहीं दाऊ मैं आप पर कोई आरोप नहीं लगा रहा नहीं लगा रहे हो तभी तुम हमारे अधूरे खेल को इस युद्ध से जोड़ कर देख रहे हो नहीं दाऊ मैं तो ऐसे ही एक खेल के परिणाम के विषय में बात कर रहा हूं जो आज से 13 वर्ष पूर्व हस्तिनापुर में हुआ था मैं तुम्हारे शब्दों का अर्थ भली भाति जानता हूं कान्हा तो क्या अर्थ है मेरे शब्दों का यही तुम गुरु वंश के बीच हो महायुद्ध में भाग लेना चाहते हो परंतु यह मत भूलो का य एक ही वंश के संतानों के बीच का युद्ध है मानता हूं कि तुम्हें पांडव प्रिय है और द्रौपदी तुम्हारी सखी परंतु केवल इसी कारण से युद्ध में भाग लेना उचित नहीं है दुर्योधन भी हमारा संबंधी है विचार करो काना युद्ध में दोनों ओर से अपनों का ही रक्त पहना निश्चित है तो क्या हमारे युद्ध में तटस्थ होने से क्या हमारे अपनों का रक्तपात नहीं होगा क्या हमारे अपनों का रक्तपात रुक जाएगा दाऊ परंतु हमारे हाथ हमारे ही अपनों के रक्त से नहीं रंगें और हम अधर्म से बच [संगीत] जाएंगे हां दाओ हमारे युद्ध में तथ स्थ रहने से हम इस रक्तपात से अवश्य बच जाएंगे परंतु क्या हम उनकी रक्षा कर पाएंगे जिनकी रक्षा करना धर्म की मांग है क्या नदी की धारा में किसी को डूबते देखना धर्म है दाऊ या उसे बचाने का प्रयास करना यदि धारा को बदलना है तो वस्त्र के भीगने का भय त्यागना पड़ता [संगीत] है यदि नया कुंभ बनाना है तो माटी को हाथ लगाना ही होगा आप तो योद्धा हो द क्या व्यू से बाहर रहकर यू को भेद जा सकता है यदि अधर्म का नाश करना है तो धर्म का पक्ष लेना ही होगा क्योंकि धर्म युद्ध अपना धरम ना निभाना भी अधर्म ही होगा ना हम ने पहले भी अपने संबंधी के रक्त से अपने हाथों को रंगा है ताकि निर्दोष जनों रक्त के अश्र ना बहाने पड़े मामा कं स्मरण है ना दाओ जो भी होगा मैं इस युद्ध में भाग नहीं लूंगा मैं आपको इस युद्ध में सम्मिलित होने के लिए बाध्य कर भी नहीं रहा हूं दा आपके निर्णय का पालन कर आपके वचन का मान रखना मेरा धर्म है जिसे मैं पूर्ण अवश्य करूंगा [संगीत] [संगीत] था [संगीत] सदा सुखी [संगीत] रहो पुत्रवती [संगीत] बव सदा सुखी [संगीत] रहो पुत्रवती [संगीत] [संगीत] भव सदा सौभाग्यवती [संगीत] भव पुत्री लक्ष्मणा मुझे बहुत प्रसन्नता हुई कि तुम्हारे पिता ने कन्या की स्वतंत्रता का मान रखा [संगीत] मुझे भी प्रसन्नता है दुर्योधन कि तुमने राजनीतिक शत्रुता से ऊपर आकर अपने पुत्री के हृदय की सुनी उसके मन का मान रखा संसार में हर किसी को अपना जीवन साथी चुनने का और अपने भविष्य के लिए निर्णय लेने का अधिकार है छोटों का कर्तव्य है कि वे बड़ों के आज्ञा का आदर करें और बड़ों का धर्म है कि वह छोटों के निर्णय का मान रखे और मैं भी आज यही करने जा रहा [संगीत] [प्रशंसा] हूं मुझे क्षमा कर देना [संगीत] काहा मैंने अपने अधिकार का अतिक्रमण [संगीत] किया तुम्हारी ओर से मुझे निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं [संगीत] था होने वाले इस महासमर में तथा शने के मेरे अपने कारण इस युद्ध में भाग लेने के तुम्हारे अपने कारण हो सकते हैं मैं तुमसे तुम्हारा कारण या तुम्हारा अधिकार छीनना नहीं चाहता इसीलिए मैं तुम्हें अपने दिए हुए वचन से मुक्त करता हूं और युद्ध में तुम्हें किस पक्ष में जाना है उसका निर्णय तुम स्वयं ले सकते [संगीत] हो धन्यवाद मैं जानता था कि आप मुझे निराश नहीं करेंगे वासुदेव हम हम दोनों ही आपके संबंधी है आप आप किसके पक्ष में [संगीत] रहेंगे ना मे मेरे कहने का तात्पर्य यह है वासुदेव के अपनों का रक्त बहाना क्या अधर्म नहीं होगा धर्म का समर्थन ना करना मेरे विचारों के अनुसार अधर्म है गांधार राज जो सक्षम हो आवश्यकता पड़ने पर उसे धर्म युद्ध में आगे बढ़ना चाहिए और मैं इस धर्म युद्ध में सम्मिलित होऊंगा [संगीत] तो युद्ध में आप किसका समर्थन करेंगे वासुदेव हमारा या पांडवों [संगीत] का उसका गान भार राज जो मेरे पास सर्वप्रथम समर्थन मांगने [संगीत] आएगा

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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