Sunday, 4 January 2026

श्री कृष्ण और पांडवों का संवाद Mahabharat Best Scene B R Chopra Pen Bhakti

महाभारत केशव क्या मैं आपके जाने में शीघ्रता का कारण पूछ सकता हूं आज नहीं जाऊंगा पार्थ तो कल जाऊंगा परंतु एक दिन तो जाना ही है ना हां और ऐसा भी नहीं लगता कि हमें छोड़ के जाने में बहुत दुख है आपको ना मैं तुम्हें आज छोड़कर जा रहा हूं पार्थ और ना कभी छोड़ सकूंगा अर्थात हमें छोड़ सकते हैं आप अपने आप को अर्जुन से अलग समझते हैं बड़े भैया मैं तो यह समझता हूं कि शरीर पांच अवश्य हैं परंतु आत्मा एक ही है और यदि नहीं तो आपको इन चारों पर इतना अधिकार क्यों होता जो आज इन पर है जीवन जुआ नहीं है बड़े भैया जीवन चेतना है राजनीति भी चेतना ही है ऐसा नहीं कि पासा पड़ गया तो पड़ गया और यदि नहीं पड़ा तो नहीं पड़ा आप जो हैं वो केवल इसलिए हैं कि आप एक नहीं पांच हैं और पांच होते हुए भी पांच नहीं एक ही है पर जाएंगे अवश्य मैं रुकना चाह रहा हूं ना इसलिए इनका जाना बहुत आवश्यक हो गया है अरे कृष्ण कुछ दिन और रुक जाओ बुआ कुंती का स्नेह से आशीर्वाद लो यदि जाना आवश्यक ना होता दाऊ तो भला मैं जाने का नाम ही क्यों लेता और अभी हम बुआ के घर थोड़ी आए थे तो फिर कहां आए थे हम लोग इंद्रप्रस्थ नरेश के राजस यज्ञ में भाग लेने आए थे दाऊ और इसमें भाग लेने वाले सारे या तो जा चुके हैं या जाने वाले हैं जी चाहे तो बड़े भैया से पूछ लीजिए कि अब कुल कितने लोग रह गए हैं ज्येष्ठ पिता श्री भी कल जा रहे हैं बस गंधार नरेश और दुर्योधन रुक रहे हैं कुछ दिनों के लिए दुर्योधन को तो राज सभा गृह ने मोहित कर लिया है और मामा श्री को किसने मोहित कर लिया मामा श्री मामा श्री को तो इंद्रप्रस्थ ही ने मोहित कर लिया होगा आप मुझे एक कारण बताइए मामा श्री कि अब हम यहां किस अपमान की प्रतीक्षा में रुके हैं मामा श्री चाहे तो रुक जाए और तुम्हारा जी चाहे दुर्योधन तो तुम भी रुक सकते हो परंतु मैं मैं महाराज के साथ जा रहा हूं जी तो मेरा भी नहीं लग रहा है यहां अरे तो फिर तुम सब चले जाओ परंतु मैं अभी नहीं जाऊंगा फिर वही मामा श्री अब हम यहां किस अपमान की प्रतीक्षा में रुके हैं अहो अब हम किसी अपमान की प्रतीक्षा नहीं कर रहे पुत्र दुर्योधन मैं तो केवल कृष्ण के जाने की प्रतीक्षा कर रहा हूं कृष्ण हम कृष्ण के आने जाने से हमें क्या लेने देना कृष्ण के आने जाने से ही तो हमें सब कुछ लेना देना है अंगराज कर्ण क्योंकि वसुदेव के इस पुत्र के अतिरिक्त शकुनी के काटे का मंत्र कोई नहीं जानता कोई नहीं [संगीत] आओ यह लो मैं तुमसे यही कहने आया था कि सुभद्रा की ओर देखकर मुस्कुराती रहना और तुम मेरे कहे बिना ही मुस्कुरा दी मैंने इससे लाख कहा कि द्रौपदी तुम्हें बहुत चाहती है परंतु यही घबराई जा रही थी भैया तनिक भगवान से भी डरा करिए किससे डरू ओ भगवान से तू कहती है तो डर लेता हूं परंतु तू मत घबरा द्रौपदी तुझे बहुत प्यार देगी मैं कब घबरा रही थी दीदी से झगड़ा करवाएंगे आप सुभद्रा तुम किसकी बात में आई जा रही हो द्रौपदी ठीक कह रही है इसे तो लड़ाने का चस्का है नंदगांव में खेल में गड़बड़ करता और फिर यशोदा मैया से जाकर जड़ देता कि मैया मोही दाऊ बहुत खी जायो और मैया मुझे डांटने लगती आप चिंता ना कीजिए दाऊ मैं इन्हें आज से थोड़ी ही जानती हूं पर देखिए देवकी नंदन आप मेरा और सुभद्रा का झगड़ा नहीं करवा सकते यह मेरी सौत नहीं आपकी छोटी बहन है मेरे पास आपकी धरोहर है सुभद्र की चिंता मैं कर लूंगी आप जाके शेष संसार की चिंता कीजिए ठीक है तो मैं चला शेष संसार की चिंता करने चलिए दाऊ [संगीत] आभार महाभारत महाभारत महाभारत हो महा भार

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