Monday, 5 January 2026

श्री राम जी ने खाए शबरी के दिए हुए मीठे बैर Gagan Sankat Mochan Mahabali Hanuman 362 Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] यह भी मीठा है लीजिए खाइए प्रभु आपका यह प्रेम देखकर माता कौशल्या का स्मरण हो आया आप उन्हीं की बाते चुन चुनकर मीठे बेर मुझे खिला रही [संगीत] हैं प्रभु मुझे गुरुवर मतंग ऋषि ने वर्षों पूर्व कहा था कि एक दिन प्रभु श्री राम अपने अनुज श्री लक्ष्मण के संग यहां [संगीत] आएंगे य भी मीठ [संगीत] है [संगीत] आप भी खाइए ना लक्ष्मण यह प्रेम रस से भरे बेर [संगीत] है [संगीत] [प्रशंसा] खाओ [संगीत] [संगीत] [संगीत] भक्ति शबरी माता की कुटिया से दिव्य आभा आलोकित हो रही है कहीं वही तो नहीं है मेरे प्रभु [प्रशंसा] श्रीराम प्रभु प्रभु गुरु और मतंग ऋषि ने बताया था कि आप देवी सीता को ढूंढते ढूंढते यहां आएंगे आप पंपा सर जाइए वहां रेशम पर्वत पर वास करने वाले महाबली सुग्रीव से भेंट कीजिए सु जी आपकी अवश्य सहायता करेंगे वे वहां आंजनेय हनुमान के साथ रहते हैं [संगीत] हनुमान अब तो प्रभु राम से मेरी भेंट हो ही जाएगी [संगीत] यहां तो कोई भी नहीं है माता शबरी माता शबरी माता [संगीत] शबरी माता शबरी भी यहां नहीं [संगीत] है [संगीत] [संगीत] मेरे प्रभु श्रीराम की उपस्थिति का आभास मुझे यहां पर हो रहा है हे प्रभु आप यह कैसी परीक्षा ले रहे हैं अपने भक्त हनुमान की [प्रशंसा] हनुमान यह तो भ्राता सुग्रीव का स्वर है कहीं पुन कोई नहीं नहीं वाली भैया कुछ भी करवा सकते हैं हनुमान को मेरे पास होना चाहिए था है कहां हनुमान मैं यहां हूं भ्राता सुग्रीव क्या [प्रशंसा] [संगीत] हुआ हनुमान यह दूध कह रहे हैं कि कोई सोर आ रहा है और वह मेरे बारे में पूछ रहा था हा हनुमान जी दो तपस्वी इसी ओर आ रहे हैं वो दोनों योद्धा है ओ हो पहले सु निश्चित करो कि वो योद्धा था या तपस्वी वे दोनों धनुर्धारी मनुष्य है किंतु वे ऋषि मुनियों वाली वेशभूषा धारण किए हुए हैं और महाराज सुग्रीव के लिए इसी ओर आ रहे हैं यह तुम कैसे कह सकते हो कि वे महाराज सुग्रीव के लिए इस ओर आ रहे हैं मैंने सुना था एक कह रहा था कि हमें शीघ्र ही पंपास सरोवर का मार्ग ढूंढकर वहां सुग्रीव को ढूंढना होगा हो सकता है वाली भैया ने मेरा वध करने के लिए उन्हें य भेजा हो मुझे ज्ञात है वाली भैया का क्रोध मेरी मृत्यु से ही शांत होगा ता सुग्रीव आपकी सुरक्षा करना ही मेरा प्रथम कर्तव्य है दानव हो या मानव यक्ष हो या गंधर्व मेरे रहते आपका कोई अहित नहीं कर सकता तो जाओ हनुमान ज्ञात करो ऋषियों का र्वे धारण किए हुए वे धनुर्धारी कोई भी हो सकते हैं मेरे शत्रु भी जो मेरे लिए इस ओर आ रहे हैं आप चिंता ना करें मैं अभी ज्ञात करके आता [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] हूं [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ध [संगीत] [संगीत] अच्छा यही है वह दोनों ऋषि वेश धारी घोर वन है यह हमें हर क्षण सावधान रहना होगा भैया इनका यह तेजस्वी मुखड़ा कहीं [संगीत] यह [संगीत] ज्ञात करो ऋषियों का छद्म वेश धारण किए हुए वे धनुर्धारी कोई भी हो सकते हैं मेरे शत्रु [संगीत] भी शत्रु जैसे नहीं लग रहे हैं भ्राता सुग्रीव की शंका मुझे निराधार प्रतीत हो रही है फिर भी उनकी सुरक्षा के लिए मुझे यह ज्ञात तो करना ही होगा कि यह दिव्य तेजस्वी मानव कौन [संगीत] है मैं तुम्हें काम रूप का वर देता हूं जिससे तुम अपनी इच्छा अनुसार कोई भी रूप धारण कर सकोगे यदि वे छद्म वेश धारण किए हुए हैं तो मुझे भी रूप बदलकर उनके समक्ष जाना चाहिए [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] अभी ज्ञात हो जाएगा कि कौन है वो दोनों धनुर धारी [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] इनकी यह दिव्य [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] आभा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] पनवन प्रणाम प्रणाम ब्राह्मण देव ऋषि मुख क्षेत्र में आपका स्वागत है किंतु आप जिस मार्ग की ओर जा रहे हैं वह मार्ग दुर्गम है आगे जाने के लिए मैं आपकी सहायता कर सकता हूं सहायता की आवश्यकता तो है हमें हम इस मार्ग से अपरिचित हैं तो कृपया आप अपना परिचय दीजिए आप कहां से आ रहे हैं क्या उद्देश्य है आपके आगमन का कौन है आप तुम्हें क्या प्रतीत हो रहा [संगीत] है कौन हूं [संगीत] मैं [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] नेत्र पुंडर पटल बाहुबल महा प्रबल रोम रोम आपका तेज से प्रदीप्त है [संगीत] भानु सम भाल है वृषभ समान चाल है समग्र सृष्टि आपकी चरण की रज में लित [संगीत] है आप सत्य निष्ठ है बखान करना क्लिष्ट है गज की सूंड के समान आपकी भुजाएं हैं आप शूरवीर है योगी है सुधीर है आप से ही पंपा सुर की प्रज्वलित देशाए [संगीत] हैं आप को नमन करूं पद का प्रक्षालन करूं आपके दरस से भाव में यही विराम है प्रतीत हो कदा चिता आप है परम पिता आपको है श्री प्रभु शत शत प्रणाम है आपको है श्री प्रभु शत शत प्रणाम है आपको है श्री प्रभु शत शत प्रणाम [संगीत] है अद्भुत हनुमान आपने मुझे कैसे पहचान लिया तुम्हारे कथन में नि श्रद्धा पूर्ण समर्पण वाक्य विन्यास का लालित्य व्याकरण की शुद्धता कवित्वम यह सब कोई वेदों का ज्ञाता ही बोल सकता था बल और पांडित्य का अद्भुत मिलन मात्र हनुमान ही हो सकता है तुम्हारे दिव्य कर्ण कुंडल और कंधार तुम्हारी पहचान है हनुमान राम राम राम राम राम राम श्री राम किंतु तुम मुझे नहीं जान पाए आप मेरे दिव्य कुंडल और कंठ हार देख सकते [संगीत] हैं किंतु जगत में मात्र तीन व्यक्ति ही उन्हें देख सकते हैं मेरी माता मेरे गुरुदेव और और मेरे आराध्य प्रभु श्री राम मैं तुम्हारा गुरुदेव नहीं हूं मां भी नहीं [संगीत] हूं प्रभु मेरे प्रभु श्री राम अंतत मेरे इन व्याकुल नेत्रों को आपने दर्शन दे ही दिए प्रभु प्रभु आप आ गए प्रभु प्रभु [संगीत] प्रभु प्रभु आपको देखकर स्वत ही मेरे जुड़ते हाथ मेरा झुकता हुआ शीष आपके श्री चरणों में बैठने को करता हुआ मेरा मन मुझे यही इंगित कर रहे थे कि आप मेरे प्रभु के अतिरिक्त कोई और हो ही नहीं सकते प्रभु नहीं हो सकते आप आ गए प्रभु प्रभु आप आ [संगीत] गए हनुमान [संगीत] मेरे [संगीत] बंधु मेरे सखा मेरे [संगीत] सहायक प्रभु [संगीत] प्रभु मेरे प्रभु [संगीत] राम राम राम राम श्री राम राम सभी दुखों से मुक्ति दिलाने वाला [संगीत] म आज से तो इसी नाम का जप करोगे जिसकी साधना से प्रभु श्री राम से तुम्हारा शुभ मिलन होगा जिसके उपरांत तुम योग की अंतिम अवस्था राजयोग प्राप्त करोगे जो तुम्हारे मस्तिष्क को असीमित उ चाइयों तक ले जाएगा और तुम के सचर के राम श्री रामराम राम राम राम राम रामम की भाती महा शक्तिशाली महायोगी हो जा राम राम राम श राम रघुनंदन को दरस जो पाए ऊर्जा तेज कपी भर आए राम चंद्र जब पुर से लगाई हनुमत केवल्या हो जाई दिव्य अनुपम अद्भुत बेला शिव विष्णु का परस्पर मेला भक्त परम परमा भगवंता संगम नेत्र देत आनंदा [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] भक्त किसी भी रूप में हो भगवान पहचान ही जाते हैं

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...