Sunday, 4 January 2026

शिव शक्ति ने संसार की रचना कैसे की थी Akanksha Puri Malkhan Singh Vighnaharta Ganesh Episode

हता श्री गणे श्री गणे पृथ्वी देवी और आदित्य सूर्य के उत्पन्न होने पर भी सृष्टि अपूर्ण क्यों थी माता तेरी दृष्टि में ही तेरे प्रश्न का उत्तर निहित है रे देख देख अपने चारों ओर तुझे क्या दिखाई दे रहा है रे [संगीत] माता मुझे दिखाई दे रहे हैं यह नदी यह झरने यह वृक्ष यह पौधे आदि हां उचित कहा तूने यह है प्रकृति और उसका संपूर्ण विस्तार उसकी भव्य विशालता पृथ्वी पर फल उत्पन्न करने वाले वृक्षों की अनाज उत्पन्न करने वाले पौधों की आवश्यकता थी तभी तो उसमें जीवन फल सकता था ना अर्थात प्रकृति का प्रकट होना भी तो आवश्यक था [संगीत] ना प्रिय अब सृष्टि के विकास का समय आ गया है जीवन के संचार के लिए पृथ्वी को प्रकृति की आवश्यकता है सूर्य की अति ऊर्जा का तो निरंतर विस्तार हो रहा था जिससे संपूर्ण सृष्टि प्रकाशित हो उठी थी उन सूर्य का सृजन करने वाली देवी तारा और प्रभु अक्षोभाया इसीलिए प्रकृति के सृजन के लिए मुझे शीतल होना ही था और तब मैंने धारण किया अपना अगला महाविद्या स्वरूप देवी शोण [संगीत] श और तब महादेव ने लिया पंचवक्त्र शिव का रूप इस रूप में महादेव के पांच मुख के नाम है तत्पुरुष सद जात बामदेव अघोर और [संगीत] [प्रशंसा] ईशान या देवी सवू नम नमो नम नम नम नम नम [संगीत] नम सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संता नमस्तय नमस नम देवी की हथेली से ल की बूत पृथ्वी पर [संगीत] [संगीत] गि उनके संकेत पर आदित्य सूर्य ने अपनी ऊर्जा का संपादन किया जो देवी शो के माध्यम से पृथ्वी तक पहुंची और जीवन का बीज अंकुरित हुआ और फलने फूलने लगा फिर उनकी कृपा से और उनकी निगरानी में प्रकृति का विस्तार [संगीत] हुआ [संगीत] पौधे लहरा उठे पुष्प खिलने लगे और उनके साथ वन्य जीवों में भी प्राणों का संचार हुआ और प्रकृति अपने पूर्ण वैभव में जीवन का आधार [संगीत] बनी इस प्रकार मेरी महाविद्या के तृतीय देवी शोशी के स्वरूप में मैंने और महादेव ने पृथ्वी पर प्रकृति को आरंभ रूप दिया बाल व्यक्त विभ करा मिति निम भव्य प्रधाम भारति त फुल मुखा बुज स्मित करे रासा भवान पम कितनी अनुपम दिव्यता है मा श की कितना भव्य सौंदर्य है मा का इतने समय के पश्चात मां के मुख पर यह सुंदर मुस्कुराहट देखकर हम सभी कृतार्थ हो गए जो मेरे इस रूप की पूजा करते हैं वह सर्व सिद्धियां संपन्न हो जाते हैं कोई भी दुख उनके निकट नहीं आता [प्रशंसा] [संगीत] बाल व्यक्त विभ करा मिति नि बाम भव्य प्रधाम भारति त फुल मुखा बुज स्मित करे रासा भवान द पम पासम साय मंकु शं च वदम सतिम भूति राजति चतुर कति करे भक्त [संगीत] बजे बोल अभी भी तेरे मन में कोई भी शंका कोई भी जिज्ञासा जन्म ले रही है क्या हां माता अब तो संसार पूर्ण हो चुका था पृथ्वी सूर्य जल प्रकृति सब उत्पन्न हो चुके [संगीत] थे अपना प्रश्न अधूरा मत छोड़ गणेश जो भी मन में है व्यक्त कर पूछ पूछ पूछ रे क्या पूछना चाहता है माता ब्रह्मदेव नारायण महादेव पृथ्वी माता सूर्य देव सब आपकी लीला से उत्पन्न हुए हैं किंतु देवगण जैसे देवराज इंद्र अग्नि देव वायु देव वरुण देव और ऋषि गण जैसे ऋषि दुर्वासा ऋषि मारकंडे इनका अस्तित्व कैसे प्रकट हुआ माता बुद्धि में तो तू श्रेष्ठ है गणेश प्रश्न भी तू उत्तम ही पूछता है रे तो अब मेरा उत्तर सुन गणेश सृष्टि आराम हो चुकी थी इसीलिए आप देवताओं का जन भी आवश्यक था मेरे आदेश से ब्रम देव ने अपनी मानस संतानों को जन्म दिया धर्म रुद्ध सनद सनातन ब्रेग मरीच अत्री अंगी अंगी पुलस्त्य क्रतु कश्यप सनद कुमार रुद्ध प्रताप वशिष्ठ एवं नारद की उत्पत्ति के बाद ब्रह्मदेव के द्वारा बहिर शद अग्नी स्व कब्या आज सुका उपत और दिव्य नामक पृत गणों का भी प्रादुर्भाव हुआ और फिर उसने अपने बाए अंगूठे से दक्ष को जन्म दिया किंतु ब्रह्मदेव की मानस संताने वृक्ष बीज अर्थात वंश वृद्धि करने में असमर्थ थी इसीलिए सृष्टि के विस्तार के लिए प्रजनन की आवश्यकता थी और यह प्रजनन शक्ति संसार को देने की क्षमता ब्रह्मदेव में नहीं थी इसीलिए उन्होंने मेरी और महादेव की स्तुति आरंभ की उस समय शिव और शक्ति संयुक्त थे अर्ध नरेश्वर रूप में ही थे ओ ओ ओ ओ नम शिवाय ओ नमः शिवाय ओ ओम नमः शिवाय ओ ब्रह्मदेव हम आपकी स्तुति से [संगीत] [प्रशंसा] प्रसन्न प्रभु शिव माता शक्ति मेरे द्वारा जिन जीवों का सृजन हुआ है उनकी संतान उत्पन्न हो सके इसके लिए प्रजनन अति आवश्यक है पर यह तभी संभव है जब प्रकृति शिव से पृथक हो और ऐसे स्त्री पुरुष का जन्म हो जिनसे मैथु शक्ति का आरंभ हो सके यदि श आर और लिए एक दूसरे सेल तो ऐसा ही होगा [संगीत] ब्रह्मदेव की प्रार्थना से शिव और शक्ति एक दूसरे से अलग हो गए और उनसे एक पुरुष और स्त्री का जन्म हुआ उसमें जो पुरुष उत्पन्न हुए थे व मनु थे और स्त्री थी शतरूपा उन दोनों से प्रियवर और उत्पा पाद नामक दो पुत्रों का जन्म हुआ और आकूति देवहूति और प्रस्तुति नामक तीन कन्याएं भी हुई और फिर उनकी इन संतानों का विवाह ब्रह्मदेव की मानस संतानों से हुआ और उनसे मैथु सृष्टि अर्थात स्त्री पुरुष के मिलन द्वारा संतानों की उत्पत्ति की प्रक्रिया का आरंभ हुआ और सृष्टि का विस्तार होने लगा दक्ष और प्रस्तुति से मैथुन क्रिया द्वारा अनेकों संताने उत्पन्न हुई जिसमें से 13 कन्याओं का विवाह प्रजापति कश्यप के साथ हुआ प्रजापति कश्यप और दक्ष की कन्याओं से देवता असुर दानव अश्व गंधर्व राक्षस वृक्ष अप्सरा सर्प और नाक गौ भैस शपत अर्थात हिंसक जीव स्वेन अर्थात गिद आदि जीव यादव गढ़ अर्थात जलचर जीव गरुण और अरुण पतंग और शलम आदि का जन्म हुआ इन्हीं से संसार की समस्त प्रजातियों का जन्म हुआ माता अब तो सृष्टि पूर्ण हो गई थी प्रकृति जीव जंतु देव गंधर्व यक्ष आदि सभी उत्पन्न हो चुके थे और सबसे महत्त्वपूर्ण इस समस्त जीवन के लिए पृथ्वी भी थी नहीं रे मात्र एक पृथ्वी से संसार की रचना नहीं होती रे गणेश बता मुझे कौन है जो पृथ्वी पर करता है जीव जंतु और पुरुष माता और अन्य सभी उनका क्या स्थान है रे सभी देव तो अपने अपने लोक में विराजमान रहते हैं और अन्य सभी भी माता और अन्य सभी अपने अपने भुवन में रहते हैं और उन भवनों की उत्पत्ति के लिए मेरी चतुर्थ महाविद्या स्वरूप देवी भुवनेश्वरी की कथा मैं आप कहूंगी देवी भुवनेश्वरी मेरी महाविद्या का चतुर्थ स्वरूप देवी भुवनेश्वरी ब्रह्मांड की ईश्वरी है [संगीत] हम [संगीत] संपूर्ण ब्रह्मांड की हम ही जन्मदाता है ब्रह्मांड हमसे ही उत्पन्न होता है और अंतत मुझ में ही समाहित होता है मैं ही उसकी रक्षा करती हूं जब मैं अपने भुवनेश्वरी रूप में प्रकट होती तो महादेव अपना त्रयंबक रूप धारण करते ओ नम शिवाय ओ नम [संगीत] शिवाय प्रिय अभी समय आ गया है अपनी भनों का निर्माण कर सभी देवताओं ऋषि गण अन्य सभी प्राणियों को अपने अपने भवनों पर निर्धारित [संगीत] करें [संगीत] [संगीत] [संगीत] इन्हें भूमन के क्रम में ब्रह्मदेव जहां निवास करते उस सत्य लोक का आविर्भाव हुआ यह समस्त लोकों में सर्वोच्च लोक है जहां के वासी जन्म और मरण के चक्र से मुक्त है फिर तब लोक प्रस्तुत हुआ जहां शरीर रहित पुण्य आत्माओं का वास है जो इस लोक में वास करते हैं वो अपने सत्य लोग प्रस्थान की प्रतीक्षा में रहते [संगीत] हैं फिर ज्ञान लोक प्रस्तुत हुआ जहां जिज्ञासा से परिपूर्ण तपस्वी वास करते हैं उसके पश्चात महर लोक का आविर्भाव हुआ जहां तप की पराकाष्ठा के उपरांत ऋषियों मुनियों को स्थान प्राप्त होता है जो ऋषि यहां निवास करते हैं उनकी शक्तियां देवताओं की शक्तियों के स होती इसीलिए इस लोक में सत ऋषियों का वास होता है फिर इस कर्म में आनंद लोक अर्थात स्वर्ग लोक आता [संगीत] है जो देवताओ और उत्तम पुण्य कर्म करने वालों का निवास है जिसके बाद भुवर लोग है जहां सूर्य देव और अन्य नवग्रह स्थित [संगीत] [संगीत] है [संगीत] भुवर लोक के पश्चात मनुष्य और मृत्यु लोक के अन्य प्राणियों के लिए भूलोक [संगीत] है [संगीत] माता आपने जितने भी लोगों का निर्माण किया वह तो सात्विक और सदगुण स्वभाव के प्राणियों के लिए किया किंतु उनका क्या जिनका स्वभाव ही तामसिक है उनका निवास कहां होगा कहां जाएंगे वह फिर भूमि के नीचे के लोग प्रकट हुए इसमें सर्वप्रथम है अतल लोक यह भोग विलास का लोक है भूमि की समस्त धन संपदा यही संचित रहती है फिर वितल लोक है जहां भूमिगत जीव स्वर्ण आदि का खनन करने हेतु निवास करते हैं अतल लोक के समान वितल लो भौतिक संपत्ति पर केंद्रित लोग है फिर असुर राजा वली द्वारा सुत लोक का आविर्भाव [संगीत] हुआ फिर तलात लोक की उत्पत्ति हुई फिर उसके नीचे महात उत्पन्न हुआ यही नागलोक है जहां ना पुरुष और ना कन्याओं का वास है फिर उसके भी नीचे है दानवों और दैत्यों का लोक रसातल [संगीत] और सबसे नीचे पाताल लोक प्रकट हुआ जहा नागराज वासुकी का निवास यही सभी अन्य भवनों का आधार [संगीत] हैम हे मा देवी नमस्ते काका देवी नमस्ते हे सर्वशक्ति नमस्ते ना सब लो के बारे में तो जत हो अपने पूर्वक निवास भी करने लगे तो फिर माता के अगले महाविद्या रूप का क्या उद्देश्य [प्रशंसा] थाय कार्य जब तक पूर्ण नहीं होता तब तक परम ब्रह्म भी तत्परता से उसे पूर्ण करने में कोई भी कमी नहीं छोड़ते इससे यही संदेश और प्रेरणा हमें मिलती है कि जब तक कार्य पूर्ण ना हो उसे छोड़ना नहीं चाहिए

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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