Sunday, 4 January 2026

शिव जी ने अपने भक्त को दर्शन कैसे दिया था Malkhan Singh Uzair B Vighnaharta Ganesh Episode 648

अवश्य कोई ढोंगी होगा वो जो मेरे अंग वस्त्र लेकर के यहां वहां घूमता [संगीत] रहा नहीं स्वामी ढोंगी नहीं स्वयं शिव [संगीत] थे उन्होंने कहा मैं कौन हूं ये कैसे ब कोई अपना समझ लो या कोई तो फिर मैंने तब क्यों नहीं माना कि वही मेरे भोलेनाथ उन्होंने कहा पूर्व जन्मों का परिचय मेरे प्रभु मेरे शिव शंभू य आए थे आप य आए और मैं आपको पहचान ना [प्रशंसा] [संगीत] सकी [संगीत] शांत हो जाओ नीला शांत हो जाओ ये सब मत सोचो वो तो केवल एक मंदिर का पुजारी था अब शिवाय हो या शम भैया उससे क्या व मेरे प्रभु थे मेरे शिव शकर थे मेरे भोले नाथ और उ नहीं पहचान इतने दिव्य थे ऐसी अनूठी आबा थी उनकी ऐसे चमक देखकर भी कैसे गई पहचान क्यों ना सकी मैं अपने प्रभु को नहीं वो शिव नहीं हो सकते कदापि नहीं हो सकते देखो कितना र्च दिया है [संगीत] तुम्हें व मेरी शिफ मेरी शि बस बहुत हुआ हमने तुमसे कहा था नीला जब तक तुम्हारे भगवान हमारे मध्य नहीं आते हम तुम्हारी भक्ति सहन कर लेंगे किंतु आज दूसरी बार उन्होंने हम दोनों में भेद उत्पन्न किया है आज हम इस भगवान को हमारे बीच में से सदा के लिए हटा देंगे तुम बस प्रार्थना करो व आकर रोक सके तो रोक ले मुझे [संगीत] [प्रशंसा] यह तो कभी भी मंदिर में प्रवेश नहीं करता था और यह इतने क्रोध में क्यों आया है यहां रुको मैं कहता हूं रुक [संगीत] जाओ ये यहां पूजा करने नहीं अभी तू प्रभु को यहां से हटाने के लिए आया है आप जब उसने स्पर्श कर मे काल हस्ती लिंग को अपनी भुजाओ में भर लिया है तो मुझे उसे शांत करना चाहिए अब उसके इस कर्म से उसके े जन्म का दोष मिट गया [संगीत] तो अंततः तो आ ही गए पुत्र मैंने कहा था ना जब तुम अपनी त्रुटिया और दूसरे तुम्हारी विशेषताए समझने लगे और जब तुम दृष्टि से परे जो भी है उसे देखने ल तो तुम्हारा भी तीसरा नेत्र जागृत हो जाएगा तुम्ह वो दृश्य दिखाई देगा जो किसी ने ना देखा होगा श महादेव आप है प्रभु वास्तव प्रभु शिव वास्तव में प्रभु आप सर्वत्र सर्वत्र मेरे नेत्र खोलकर मुझे दर्शन देकर प्रभु आपने बहुत बड़ी कृपा की है मुझ पर मुझे मेरी भूल समझा दी प्रभु मुझे क्षमा कर दे प्रभु इतने वर्ष आपका अपमान करता रहा प्रभु ना आपको माना ना उनकी एक सुनी जिन्होने आपको मानने के लिए कहा प्रभु उ देवता तुल्य पिता को भी नहीं जिने मेरा पालन पोषण किया मुझे विस दिया परिवार दिया प्रभु अपनी पत्नी की एकना सुनी प्रभु जिसने सर्व से अपना जीवन त्याग दिया मेरे लिए प्र मैं ये मूर्खता करता रहा प्रभु सवा करने सवा कर दे मुझे प्रभु किंतु मैं अब अपनी सभी भूले सुधार लूंगा प्रभु सभी भूले सुधार [संगीत] लूंगा [संगीत] [संगीत] [संगीत] स्वामी जगत के स्वामी के सामने झुक मेरा जीवन सफल हो [संगीत] गया नीला की सच्ची भक्ति थिन्ना को उचित मार्ग पर ले आई उस दिन थिन्ना भी इस सत्य से अवगत हो गया कि जो कुछ भी होता है वह प्रभु कृपा से ही होता है [संगीत] व्रत आरंभ करने के लिए जल में तिल डालकर भोर में ही उस जल से स्नान करना चाहिए फिर गणेश और गौरी शंकर को साक्षी मानकर रक्षा धागे को उनके चारों ओर गाठ बांधकर अपनी इच्छा व्यक्त करनी होगी [संगीत] हे विघ्नहर्ता मैं अपने 16 सोमवार व्रत का आरंभ कर रही हूं मुझे आशीष दीजिए मैं इसे निर्विघ्न पूर्ण कर सकू हे गणेश गौरी शंकर मेरी एक ही इच्छा है मुझे भी वैसा ही परिवार मिले जैसा आपका है ओ गण गणपते नमः यह तो नीला के साथ का ही परिणाम था जो थिन्ना को प्रभु के दर्शन मिले उनकी इस कथा से हमें यह सीख मिलती है कि उचित जीवन साथी का साथ मिलने से जीवन में हमेशा सकारात्मक परिवर्तन ही आते [संगीत] हैं [संगीत] शेष सभी तो पूर्ण हो गया किंतु महादेव की कथा मैं किससे [संगीत] सुनू पति पत्नी के संबंध में परस्पर त्याग की जो भावना होती है उसी से दोनों के जीवन में सुख समृद्धि आती है और दोनों मिलकर एक दूसरे के जीवन के उद्देश्य को पूर्ण करते हैं किंतु गणेश ना के रूप में अन का मुख्य उद्देश्य तो मोक्ष प्राप्ति का और अभी तो उसे मातृ प्रभु के दर्शन ही प्राप्त हुए थे उचित अब हम क्या करें आपने तो कहा था अंतिम आहुति हमारी होनी चाहिए यज्ञ तो समापन की ओर है और हम इस अा कवच के भीतर नहीं जा सकते शांत हो जाओ मुझे बत बताओ कि मुझे क्या करना है यह सुरक्षा का वज असरों के लिए है किंतु किसी निर्दोष निर पशु के लिए नहीं तो हम नहीं किंतु य आज तो वहां जा सकता [संगीत] है मेरा स्वान मेरे ऊपर और संसार मेरे कदमों [संगीत] में [संगीत] गणेश हमारे पास समय अधिक नहीं है हमें सूर्यास्त के पूर्व श्री काल हस्ती में संध्या बंदन भी करना है इसीलिए शीघ्र ही अपनी य कथा पूर्ण करो हां भ्राता समय नहीं है भाखन अपनी अगली चाल चल चुका है इसलिए मुझे कथा शीघ्र समाप्त करनी होगी जिससे आप श्री काल हस्ती से वायु तत्व प्राप्त कर सके और भाखन द्वारा उत्पन्न इस संकट का सफलता पूर्वक सामना कर सके ओ नम शिवाय ओम नमः [संगीत] शिवाय कहा था ना मैंने यज्ञ देव ऋषि नारद का होगा किंतु पूर्ण आहूति हमारी होगी नारायण नारायण अशुभ अनर्थ मेरे महायज्ञ का य परिणाम सर्वथा अनुचित है बाघन की चाल उचित अनुचित का भेद मिता देती है सदा सफल ही होती है संसार मेरे पांव तले देवऋषि इस यज्ञ का फल तो हमें ही मिलेगा पराक्रमी है कार्तिके पर अब होगी उसकी मानसिक शक्ति की परीक्षा ये भूकंप कैसा था स्वामीनाथा अवश्य कोई संकट ही है जिसे ढूंढकर हमें उसे मिटाना ही होगा भाखन तुम्हारी यह चाल सफल नहीं होगी क्योंकि भ्राता कार्तिकेय का ध्यान अभी मैं बटने ही नहीं दूंगा कथा सुन कर पूजा संपन्न होने और वायु शक्ति प्राप्त करने तक मैं उन्हें रोकूंगा भाखन मेरी योजना के अनुसार तो तुम्हें भ्राता का भक्त बनना ही है भ्राता आगे की कथा तो सुनिए अभी तो थिन्ना जो कि अर्जुन का पुनर्जन्म है उसका थिन्ना से कनप्पसामी थिन्ना को पूजा पाठ की पद्धति ज्ञात नहीं थी अतः उसके दोनों हाथों में प्रसाद के रूप में पका हुआ पशु का मांस होने के कारण जब उसके हाथ में कोई रिक्त स्थान शेष नहीं रहा तो जलाभिषेक के लिए जल अपने मुख में भरकर वह मंदिर पहुंच गया और इसी पद्धति से प्रतिदिन प्रभु की पूजा करने लगा इस प्रकार अब उसके मन दृष्टि और हृदय में बस शिव थे और शिव भक्ति थी प्रभु का नाम भी जिसे कुपित करता था वह अब उनका परम भक्त बन गया किंतु यह कैसी विचित्र भक्ति है इस [संगीत] भक्त ओम शिवाय शंभू शंभू विश्वास नहीं होता प्रभु इसकी भक्ति को स्वीकार [संगीत] करेंगे शिवाय शंभू आप देख क्या रहे हो प्रभु ला कहती है भक्त जो लाता है भगवान उसे प्रेम से ग्रहण कर लेते हैं प्रभु सभी आपको बेलपत्र फूल फल आदि देते हैं मैंने सोचा कुछ तो स्वादिष्ट आहार बनाऊ आपके लिए पशु का मास लाया हूं प्रभु लीजिए मुझे ज्ञात नहीं कि यह आपको कैसा बगा इसलिए दोनों प्रकार का लाया हूं एक जो नीला को प्रिय है साधारण और एक जो मुझे प्रिय है [संगीत] तीखा मुझे तो यह भोजन देकर लालच आ रहा है प्रभ मन कर रहा है कि ये सब खा जाऊ और एक आप है जो मेरे देने पर भी नहीं ले रहे हैं ये लीजिए प्रभु आप तीखा ग्रहण कीजिए और मैं साधारण ले लेता हूं चलिए प्रभु भक्त और भगवान दोनों साथ में भोजन करते हैं ग्रहण कीजिए ना प्रभु कीजिए भोलेनाथ का भोला भक्त अपनी भोली भक्ति में उचित अनुचित का भेद भी भूल ग ये लीजिए प्रभु समाप्त हो गया [संगीत] प्रभु ने तोसे छोड़ा भी नहीं प्रभु लगता है कि फल आद खाकर आपका मन भरा हुआ है कोई बात नहीं आपकी इच्छा किंतु भोजन व्यर्थ नहीं होना चाहिए तो मैं हीय समाप्त कर देता हूं अब उचित है देखिए प्रभु मैंने आपका भी कार्य कर दिया अभी आज्ञा दीजिए प्रभु ज शंभु जय [प्रशंसा] शंभु और य सत्य है ना इसी प्रकार प्रतिन विचित्र पूजा करता रहा जो भी आखेट करता सर्वप्रथम नीला से पकवा कर प्रभु महादेव के लिए लेकर आता और उन्हे समर्पित करने के बाद ही स्वयं भोजन करता किंतु एक दिवस उसने ठान लिया कि प्रभु को अपने हाथों से भोजन कराए बिना नहीं मानेगा प्रभु मैं इतने दिनों से आपके लिए भोजन लाता हूं किन तु अब उसे छूते भी नहीं फिर बाद में दोनों मुझे ही खाने पड़ जाते हैं प्रभु इसलिए नहीं कि मैं लालची हूं बल्कि इसीलिए क्योंकि नीला कहती है कि जो चढ़ाव आपको चढ़ाया जाता है वो आपका प्रसाद होता है और प्रसाद कभी व्यर्थ नहीं होना चाहिए किंतु अब यह मुझे स्वीकार नहीं प्रभु नीला इतने मन से पकाती है मैं उसका स्वाद लेकर के देखता हूं कि उचित है कि नहीं यहां इतनी दूर आपके लिए लेकर आता हूं और आप खाते ही नहीं [संगीत] प्रभु समझ गया प्रभु कि आप क्यों नहीं खाते ठीक है प्रभु आज एक भक्त अपने भगवान को अपने हाथों से खिलाएगा और जब तक भगवान नहीं खाएंगे उसका भक्त भोजन ग्रहण नहीं [संगीत] करेगा कीजिए प्रभु ग्रहण [संगीत] कीजिए [संगीत] आप हाते क्यों नहीं प्रभु और कितनी परीक्षा लेंगे मेरी और यह तो आपको भी पता है प्रभु कि मैं भूखा नहीं रह सकता इस तरह अपने भक्त को मत सताइए प्रभु आ जाइए प्रभु आ जाइए कब तक भूखा रखेंगे [संगीत] मुझे प्रभु आप भी अपने भक्त के समान हट लगते हैं तो करिए हट अपने भक्त को जन्म जन्मांतर तक भूखा रखना चाहते हैं ना तो रखिए प्रभु तो मैं भी इसी प्रकार हट करूंगा यही बैठा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] रहूंगा [संगीत] च प्रभु यदि आज आपने दर्शन नहीं दिए ना तो आपका यह भक्त [संगीत] अपनी प्रभु [प्रशंसा] [संगीत] ओम नमः शिवाय जिस व्यक्ति की अनास्ता जितनी अधिक दृढ़ होती है उचित मार्गदर्शन मिलने पर उसकी आस्था भी उतनी ही अधिक दृढ़ हो जाती है

No comments:

Post a Comment

ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...