Wednesday, 31 December 2025

बाली ने रावण का यज्ञ विध्वंस कैसे किया था Vishal Aarya Mahabali Hanuman Episode 270 PenBhakti

[संगीत] आपने ही तीर्थ यात्रा का सुझाव दिया था मैंने उस सुझाव का पालन किया सत्य है बड़ों के बताए हुए मार्ग पर चलने से अवश्य सफलता प्राप्त होती [संगीत] है हां पुत्र हनुमान विनम्रता ज्ञान साहस का अद्भुत उदाहरण हो तुम तुमने जो असाध्य कार्य को साध्य बनाया व कोई और नहीं कर सकता [संगीत] था तुम्हारा सदैव कल्याण [संगीत] पुत्र रिक्षा महाराज जामवंत जी पधार रहे हैं धम धम ल [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] ल [संगीत] प्रणाम रिक्षा जामवंत प्रणाम प्रणाम जामवंत [संगीत] जी हम आप ही की प्रतीक्षा कर रहे थे आपका स्वागत है प्रणाम केसरी महाराज आपको जीवन दान मिला इतना सुखद समाचार पाकर भला मैं कैसे नहीं आता महाराज केसी सभी अतिथि गण पधार चुके हैं प्रजा भी उत्साहित हो रही है अब समारोह आरंभ कर किंतु गणों के राजा जटायु और नागराज पचपन तो अभी तक आए नहीं वे कब आएंगे आएंगे भी या नहीं कौन जानता है नागों और गरुड़ की तो च काल से शत्रुता है सत्य है गरुड़ और नागों को परस्पर युद्ध करने से अवकाश ही कहां मिलता है संभव है यहां के मार्ग में वह एक दूसरे के सामने आ गए हो और युद्ध प्रारंभ हो गया हो उनकी प्रतीक्षा करना व्यर्थ है आप उचित कह रहे हैं तो फिर हमें मंगल ध्वनि से समारोह प्रारंभ करना चाए और प्रतीक्षा नहीं महाराज केसरी की जय [प्रशंसा] [संगीत] की हनुमान हनुमान चलो हम भी नृत्यों और वाकों के समीप चलते हैं बहुत ही आनंद है नृत्य और संगीत में प्रणाम रिक्षा काका जामवंत यशस्वी भवा पुत्र सुग्रीव बाली कहां है दिख नहीं रहा बाली भैया तपस्या से लौटे नहीं है देवराज से वरदान लेकर ही [संगीत] लौटेंगे यदि बाली भैया भी यहां होते तो कितना आनंद आता बाली भैया अपनी तपस्या में अवश्य सल होंगे यह हनुमान का विश्वास है अरे अरे चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है प्रतीत हो रहा है मेरा पुत्र वाली आ गया जो तपस्या करने के पश्चात वरदान प्राप्त कर वापस लौट रहा है वाली नहीं यह तो पंचन और पक्षीराज जटायु है अरे ये क्या जटायु पंपन के साथ महाराज गरुड़ की जय महाराज पंचन की जय महाराज गरुड़ की जय महाराज पंचन की जय प्रणाम प्रणाम आप सभी को जटायु का प्रणाम पक्षीराज महाराज जटायु और नागराज पंच फन पधार रहे [संगीत] हैं आ आ [संगीत] नागराज और जटायू एक साथ यह कैसा चमत्कार है गरुड़ और नागों की शत्रुता समाप्त हो गई चिर शत्रु और परम मित्र बन गए हैं आप दोनों का स्वागत है [संगीत] पधारिए सबको लगा था कि वाली भैया आने वाले हैं यह तो नागराज और पंचवन है तो वाली भैया कहां है वो क्यों नहीं आया अभी [संगीत] तक [संगीत] [संगीत] ओम ब्रह्म देवाय नमः ओम ब्रह्म देवाय नमः ओम ब्रह्म देवा नमः ओम ब्रह्म देवाय नमः ओम ब्रह्म देवाय [संगीत] नमः ओम ब्रह्म देवाय नमः ओम ब्रम कौन अनर्थ हैय री तपस्या भंग कर दी अमृत प्राप्ति का मेरा मनोरथ पूर्ण नहीं हुआ कौन है वो आगा जिसने लंकाधिपति दशान रावण को चुनौती दी है नेय दु साहस किया है जिसने शिखर के पर्वत को तोड़कर मेरे तप में वधार डाला है जिसने मेरे हवन कुंड को सागर के अटल जल में गिराकर उसने प्रदत अग्नि को शांत कर दिया वो जो भी हो उसने बहुत बड़ी भूल की है [प्रशंसा] [संगीत] हनुमान आ रहा हूं मैं तुझे परास्त कर तेरा संहार करने आश्चर्य है ये तो कोई महान योद्धा नहीं एक एक साधारण वानर एक और दुष्ट वानर इस आदम वानर के जीवन लीला का अंत समीप है इसे मृत्यु दंड में स्वयं [संगीत] दूंगा अपने इश्क को स्मरण कर ले वानर क्योंकि कुछ ही क्षणों में तेरा वध होने वाला है रा है हम पुष्पक [संगीत] यह तो बड़े ही सुखद समाचार है कि आप दोनों की शत्रुता समाप्त हो गई किंतु यह सब हुआ कैसे इसके कारण भी आप है [संगीत] हनुमान आपने मुझे उचित मार्ग दिखाया जिस पर मैं आज भी अग्रसर हूं इसी कारण मैंने मेघसर को बंदी बना लिया यदि मैं ऐसा नहीं करता तो गरुड़ और नागों के बीच घमासान युद्ध हो जाता [संगीत] मेघसर मेघसर जो किसी भी क्षण कहीं से भी अकस्मात प्रकट हो जाता जब भी अपने विकराल सर्प रूप में आता तो उसके समक्ष पर्वत भी छोटा प्रतीत होता जी जंतुओ को उसके आने की भनक लगती और वे अपने आप को रक्षित कर पाते इससे पूर्व ही वो दुष्ट अपने केवल एक स्वास्थ मात्र से उनका शिकार कर लेता मेघसर की विषक से ना केवल जीव जंतु मर रहे थे अभी तो नदी व सरोवर भी पूरी तरह से विषाक्त होते जा रहे थे इसीलिए उस पशु पक्षी संघार मेघसर को रोकना आवश्यक हो गया था मेघसर को पकड़ना अत्यंत कठिन था किंतु मैंने अन्य नागों की सहायता से उसे पकड़कर बंदी बना लिया पंच फन ने मेघसर को बंदी बनाकर हम पक्षियों की रक्षा की है हम पर उपकार किया है तभी हमने निश्चय किया है कि ऐसी शत्रुता का कोई लाभ नहीं इससे अधिक प्रसन्नता की बात तो और हो ही नहीं सकती आप दोनों की मित्रता सदैव बनी रहे हनुमान चलो ना कितना मधुर संगीत है हां आओ ना चलो उधर तुम भी एक गीत सुनाओ ना मित्रों मैं मृत्यु लोग जाकर मृत्यु पर विजय पा सकता हूं किंतु गीत गाना नहीं नहीं आप बात बनाकर नहीं बचोगे चलो शीघ्र चलो और गीत सुनाओ सब लोग कितनी उत्सुकता से तुम्हारी ओर देख रहे [संगीत] हैं सुनाओ ना सुनाओ ना हनुमान गाओ हनुमान तो ठीक है मैं आप सबको एक ही सुना ही देता [संगीत] हूं कहां गया वो वानर आ रहा हूं मैं हनुमान तुम्हारे समक्ष अपनी वरदानी शक्ति से तुम्हारा अभिमान [संगीत] तोड़ने डिमक डिमक डिम डिमक डिमक डिम डिमक डिमक डिम शंकराय जयती जयती जय जयती जयती जय जटाधराय ओम गंगा [संगीत] धराय डिमक डिमक डिम डिमक डिमक डिम डिमक डिमक डिम शंकराय जयती जयती जय जयति जयति जय जटाधराय ओम गंगा धराय नमः शिवाय नमः शिवाय नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नमो देवाय नमो देवाय नमो देवाय ओम नमो [संगीत] [संगीत] देवाय [संगीत] नननन ननन ननन नागेश्वरा जयती जयती जय जयती जयती जय शूल धराय ओ विश्वम धराय नमः शिवाय नमः शिवाय नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओ ओ ओ [संगीत] ओ य मेरा पुष्पक विमान कैसे रुक गया ओ त्रयंबकम यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम रुक बंधना मृत्य मुक्षीय मामता नमः शिवाय नमः शिवाय नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नमो देवाय नमो देवाय नमो देवाय न देवाय नमः शिवाय नमः शिवाय नमः शिवाय ओ नमः [संगीत] [संगीत] शिवाय आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद [संगीत] यह क्या हनुमान अपने गीत में इतना बह गया था कि हनुमान को ध्यान ही नहीं रहा कि संध्या बंदन का समय हो गया [प्रशंसा] [संगीत] है संध्या की वेला हो गई संध्या वंदन का समय हो गया है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] हो [संगीत] [संगीत] [संगीत] रोक ट वानर तू वही वही मूर्ख ना जिसने दशानन रावण की तपस्या में बधाई डालने का दु साहस किया है तुम जो भी हो मेरा समय व्यर्थ ना करो अन्यथा कठोर दंड के भागी बन बाली अभी संध्या बंधन के लिए जा रहा है तू तू मुझे डंड देगा तू जानता भी है कि मैं कौन हूं नहीं जानता और ना जानना चाहता हूं और मुझे उससे कोई अंतर भी नहीं पड़ता [संगीत] [संगीत] न उस मर कट से पूर्व ही इस मूर्ख पर अपनी वरदानी शक्ति के परीक्षण का अवसर मिला है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...