स्वा अपने लिए नहीं तो अपने पुत्र के लिए एक बार देवी मंसा की पूजा कर लीजिए [संगीत] ना सोचिए मत स्वामी सोचिए मत आप देवी मंसा की पूजा कीजिए अन्यथा अपने पुत्र के साथ-साथ आपकी पत्नी भी अपने प्राण त्याग [संगीत] देगी क्या वो आप अपने हट और अहंकार का त्याग [हंसी] करेगा देवी मंसा अंतता आप विजय हो ही [संगीत] गई सत्य है आप विजय हुई देवी मंसा [संगीत] [संगीत] नहीं चंद्रधर नहीं बदना है ना ही उसने अपने हट का त्याग किया है और ना ही अपने अहंकार का परंतु मैं नहीं हारा मेरी भक्ति नहीं हारी आप विजय हुई मेरे पुत्र को छीनने में विजय हुई आप किंतु मेरे विश्वास की पराजय नहीं हुई वो तो तभी होगी ना जब मैं आपको देवी रूप में स्वीकार कर आपकी पूजा करूंगा जो कभी नहीं होगा क्योंकि मेरे तो एक ही प्रभु है एक ही आराध्य है मेरे प्रभु महादेव और उनके सिवा और कोई नहीं और यदि उनका कोई सच्चा बाप है तो वो मैं हूं चंद्रधर चंद्रधर [संगीत] जिसे अपने परिवार से प्रेम नहीं वह ईश्वर से क्या प्रेम करेगा और कैसे उनकी भक्ति करेगा वह स्वयं को कैसे भगवान का सबसे बड़ा भक्त बुला सकता है और मेरे प्रभु अवश्य अपने महानतम भक्त की परीक्षा ले रहे हैं यदि मैं अपने पुत्र का अंतिम संस्कार भी कर दू मेरे शिवशंभू उसे अवश्य लौटा आएंगे अवश्य लौटाए ऐसा अटूट विश्वास है मुझे मेरी भक्ति की शक्ति [संगीत] में पुत्र लखेंद्र के अंतिम संस्कार की तैयारी कीज व्यर्थ था वो सब जो मैंने किया चंद्रधर को मैंने समझाया अनुरोध किया पीड़ा दी उसे सब कुछ छीन लिया [संगीत] उसका किंतु उससे उसे क्या प्राप्त हुआ ना मुझे देवी पद प्राप्त हुआ और ना पुत्री बेहुला को वो [संगीत] सुख जिसके वो योग्य है सत्य तो यह है वो [संगीत] बेहुला जिसको मुझ पर विश्वास था मैंने उसका विश्वास भंग किया है उसके विवाह के प्रथम रात्रि पर प्रथम रात्रि पर मैंने मुझसे उसका पति छीन लिया उसका सुहाग छीन लिया क्यों किया मैंने ये सब क्यों किया अनुज [संगीत] कर तू भी बताओ अनुज गणेश मैंने ऐसा क्यों किया माता का आप ही बताइए मैंने ऐसा क्यों किया देवी पद पाने के लिए ना देवी ब बनना ही नहीं चाहती थी माता नहीं चाहती थ मैं देवी बना मैं तो केवल अपने माता पिता और अपने परिवार का स्नेह पाना चाहती थी पिता श्री महादेव ने मुझे मुझे देवी पद प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया क्यों किया उन्होने ऐसा क्यों किया उन्होने ऐसा अब मुझे विश्वास हो गया है माता कि देवी पं के अधिकारी मैं नहीं देवी रूप में मेरी पूजा होनी ही नहीं चाहिए दीदी मनसा आप सही नहीं समझ रही है थो धीरज रखिए के ग में है उ बला की जन्म कुंडली मैंने देखी है असाधारण है व अवश्य ऐसा कुछ करेंगी जो संसार के लिए उदाहरण बनेगा असाधारण है व जो पत्थर की मूरत बनी बैठी है जिसकी इस दशा का उत्तर दायित्व मेरा है जो मुझसे ग्रीना ही करती होगी वो क्या कुछ करेगी अनुज गणेश बहुत हुआ अनुज गणेश कहना सुनना करना अब कोई कुछ भी कहे कुछ भी करे मैं कुछ भी नहीं करूंगी नहीं बनना मुझे कोई देवी नहीं करवानी मुझे अपनी पूजा अब तो यही उचित है कि मैं अनंत काल के लिए ध्यान में ही चली जाओ नहीं गणेश मुझे रोकने का प्रयास मत करना और ध्यान रहे मेरे ध्यान में कोई बाधा मैं स्वीकार नहीं [संगीत] करूंगी दीदी मुझे विश्वास है बिहुला अवश्य कुछ करेंगी संसार को देवी मनसा के आशीष की आवश्यकता है क्या पार्वती नंदन अब क्या करेगी वह जो उन्हें करना चाहिए किंतु उसके पहले मुझे वह करना है जो मुझे करना चाहिए गजानंद महाराज कोई कुछ कहता क्यों नहीं अपने गजानंद महाराज को दे मैं य हूं साहा जी महाराजन महाराज मेरी पुत्री आपने तो कहा था उनके पति के साथ वही हुआ जो उनके भाग्य में लिखा थातु व होगा में लिखा है अखंड सौभाग्य है उनके भाग्य में जिसके लिए वह कुछ ऐसा करेंगी जो आश्चर्यजनक होगा अविश्वसनीय होगा कठिनाई मनुष्य से वह कराती है जिसकी वह स्वयं कल्पना भी नहीं कर पाता अब जीवन के इस पड़ाव से आपकी पुत्री के महान और पूजनीय बनने की यात्रा आरंभ होगी देव बस वो जो करेंगी उसमें आपको उनका सहयोग करना [संगीत] [संगीत] होगा [प्रशंसा] [संगीत] अपना भाग्य स्वीकार करो पुत्री यह सारा श्रृंगार तुम्ह शोभा नहीं देता [संगीत] अब देवी मनसा का यह आशीर्वाद अपने हाथों में धारण कीजिए अपने श्वसुर जी की आस्था ही नहीं आप अपने पति का भाग्य भी बदल सकेंगी नहीं ये [संगीत] नहीं पुत्री ये क्या दशा हो गई है मेरी पुत्री की इनके भाग्य में तो पति धर्म परायण लिखा है मन करता है तुम्हारे श्रृंगार के लिए सुंदर पुष्प चुन चुन कर लाता रहू और हर दिन अपने हाथों से तुम्हारे केश सजाओ पुत्री तुम्हारे पति की मृत्यु हो चुकी है नहीं अब झूठ बोल रही है उन्हे कुछ नहीं हुआ चंद्रधर अर्थी तैयार हो चुकी [संगीत] है नहीं मैं कहीं नहीं ले जाने दूंगी इन्ह पुत्री मैं तुम्हारी अपार पीड़ा को समझ सकती हूं जिसके हाथों की मेहंदी का रंग ना उतरा लगन की हल्दी का रंग ना छूटा हो उसके हृदय की व्यथा क्या होगी उसे कैसा लग रहा होगा परंतु पुत्री जो भाग्य जो नेती है उसे स्वीकार करना होगा तुम सुहागन नहीं हो तुम्हे ये श्रंगार त्यागना होगा रे भाग्य में अखंड सौभाग्य है और मुझे वही स्वीकार [संगीत] है मैं इन्ह कहीं नहीं ले जाने दूंगी कहीं नहीं पुत्री हम अब लखेंद्र को यहां नहीं रख सकते उसे लेकर जाना होगा अंतिम संस्कार के [संगीत] लिए मित्र ये तुम क्या कह रहे हो क्या तुम्ह स्मरण नहीं तुमने ही तो कहा था कि तुम्हारे पुत्र को कुछ नहीं होगा और आप उसके अंतिम संस्कार की बात कर रहे हो मुझे क्या है मित्र साहब कि मैंने क्या कहा था पर जो अमर है वो वो तो आत्मा है जिसकी कभी मृत्यु नहीं होती इस पार्थिव शरीर को तो उसका सम्मान देना होगा ना मित्र अंतिम संस्कार करना होगा ना मित्र किंतु उसके लिए तो उचित विधि विधान का पालन भी तो करना चाहिए सर्प दंश से जिनकी मृत्यु होती है उन्हें लेकर यह मान्यता है उनके देह को अग्नि को नहीं सौपा जाता केले के खंभे के नाव पर बांधकर नदी के जल में बहा दिया जाता है यदि उनके भाग्य में और जीवन होता है तो जब उनकी देह जल पर होती है तो कोई सिद्ध पुरुष या देवी ऐसे शब को देखकर पुनर्जीवित कर देते हैं और मुझे विश्वास है मेरी पुत्री बहुला के भाग्य में अखंड सौभाग्य [संगीत] जब तक आस है तब तक श्वास है अपनी आशा को कदापि नहीं त्यागना चाहिए भले ही कुछ भी हो [संगीत] जाए आइए प्रसाद ग्रहण कीजिए क्या मेरे प्रभु महादेव फिर इस रूप में मेरी सहायता करने आए हैं सत्य कहा गजानन महाराज ने आस है तो शवास है उचित है मैं अपना विश्वास भंग नहीं होने दूंगा इस आस से अपने पुत्र को विदा करूंगा कि वह जीवित होकर फिर से हमारे पास लौट आए [संगीत] पिताजी मैं भी जाऊंगी इनके [संगीत] साथ नहीं पुत्री तुम्हारा जाना उचित नहीं होगा मां यदि देवी सुमति अपने पति को स्वयं से विलग होने से रोक सकती थी सूर्यदेव से ये प्रार्थना करती हूं मेरे पति के प्राणों की रक्षा के लिए आज उदित ही ना हूं देवी सावित्री जी स्वयं यमराज के पीछे चली गई जिससे वह अपने पति के साथ रह सके तो मैं अपने पति के साथ क्यों नहीं जा सकती इसमें क्या अनुचित है मुझे उनके साथ जाने की अनुमति दीजिए मां अनुमति दीजिए पिताजी चोट पत्नी को लगे या पति को पीड़ा तो दोनों को ही होती है और तुम्हें कष्ट होता हुआ मैं कैसे देख सकता हूं कुछ नहीं होगा तुम्हें वैद जी मेरी सहायता करिए वैद जी क्योंकि मुझे ज्ञात है मैं किसी दुर्भाग्य का सामना करती तो मेरे पति मेरा साथ कभी नहीं छोड़ते क्षमा करो पुत्री किंतु जो तुम चाहती हूं मैं मैं उसकी अनुमति नहीं दे सकता क्यों अनुमति नहीं दे सकते पिताजी सात भेरों के साथ साथ सात वचन भी लिए हैं उनमें से एक वचन है सुख हो या दुख दोनों ही परिस्थितियों में एक दूसरे का साथ देना पिताजी यह मेरा कर्तव्य है और इस कर्तव्य को निभाने से मुझे वंचित मत कीजिए अनुमति दे दीजिए अपने पति के प्रति निष्ठा का ऐसा अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करेंगी आपकी पुत्री जिससे आने वाले समय में बिहुला नाम का एक उत्सव मनाया जाएगा क्यों चंद्रधर उसने भी कहा ना य उसका कर्तव्य है उसे निभाने दो उसम बाधा मत बनो मित्र मुझे मेरी पुत्री पर अटूट विश्वास है जो करेगी उचित करेगी उसे आज्ञा दे [संगीत] दो [संगीत] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] च जाओ पुत्री महादेव तुम्हारी रक्षा कर अब चिंता मत कीजिए पिताजी मैं प्रण लेती हूं कि अपने पति को जीवित कराकर आप लोगों के पास वापस लेकर [संगीत] [संगीत] आऊी कल्याण हो बला प्रण पूर्ण हो आपका स्मरण रखिएगा पहली बार भेंट करते समय मैंने क्या कहा था आपको देवी मां पर अपने विश्वास को अडिग रखिएगा सदा आपका भला [संगीत] होगा हे मा मंसा देवी मुझे शक्ति प्रदान कीजिए हे मा मंसा मुझे शक्ति प्रदान कीजिए हे मा हे मा हे मा महादेव का नहीं देवी का नाम ले रही है पुत्री [संगीत] ल व्यक्ति के निश्चय में इतनी शक्ति होती है कि वह सब कुछ बदल सकता है
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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
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