Wednesday, 31 December 2025

महागणपति ने बल्लाल को कौनसा वरदान दिया Vighnaharta Ganesh Episode 757 Pen Bhakti

[संगीत] कहां थे तुम अपने भय पर नियंत्रण पाना सीखो तुम फिर खेल रहे थे क्या नहीं नहीं पिताजी खेल नहीं रहा था मैं मेरा विश्वास कीजिए आज मैंने बहुत अच्छा काम किया है आप सुनेंगे तो प्रतिदिन करने के लिए कहेंगे आज पता है मैंने अभी मेरे पास समय नहीं है राज भवन से लौटूंगा तब तुम्हारे अच्छे कार्य के बारे में सुनूंगा राज भवन हां महाराज का बुलावा है मुझे और तुम्हारी मां हम दोनों को जाना होगा किंतु स्वामी यह अकेले कैसे रहेगा बल्लाल को भी साथ ले चलिए ना नहीं यह पढ़ाई छोड़कर कहीं नहीं जा सकता इसकी शिक्षा और व्यापार का एक दिन भी व्यर्थ नहीं होना चाहिए और इसके भोजन की चिंता मत करो लादास की पत्नी इसे नियमित रूप से भोजन करा देगी इसलिए पुत्र ध्यान से सुनो और में तो तुम्हें पढ़ाई पर ध्यान लगाना होगा किंतु दोपहर में दुकान खोलना अब तुम्हारा कर्तव्य है स्वामी यह अकेले कैसे कर पाएगा यह सब मेरा पुत्र है उस पर अविश्वास नहीं हो बचपन से इसे व्यापार करना सिखा रहा हूं मैं और पुत्र अपने इन्हीं कार्यों के साथ जिस अच्छे कार्य को लेकर तुम इतने प्रसन्न हो वह कार्य भी प्रतिदिन करते रह सकते हो तो क्या मुझे आज दुकान खोलने जाना होगा पिताजी कल से तुम पर बहुत कार्यभार होगा आज एक दिन का अवकाश ले सकते हो जो करना चाहते हो वो करो प्रभु गणेश जी ने आज ही मेरी प्रार्थना सुन ली अब मैं अपने मित्रों के साथ खेल सकता [संगीत] [संगीत] हूं मछ खेलेगा हमारे साथ उचित है तो हम लोग ही खेलते हैं क्या हुआ आप खेलने को नहीं कहोगे जब ना ही सुनना है तो पूछने का क्या लाभ तो ठीक है आज ना नहीं कहूंगा अब कहो ठीक है तुम खेल तो लोगे किंतु तुम्हारे पिताजी को किसी ने बता दिया तो नहीं कुछ नहीं होगा आज उन्होंने अनुमति दी है मैं जो चाहूं वो कर सकता हूं यह तो चमत्कार है यह तो बहुत बड़ा चमत्कार है यह तो मेरे गणेश जी का चमत्कार है गणेश कौन गणेश कहां मिले ये तुम्हे अब बताओ कैसे लग रहे हैं मेरे गणेश [संगीत] जी जैसे कोई अन्य पत्थर होता है वैसे ही तुम सबके लिए साधारण पत्थर हो सकते हैं किंतु हृदय से मान लो तो पत्थर में भी भगवान बस जाते हैं अब यही मेरे गणेश जी हैं मेरी पुकार सुनते हैं मेरे मन की बात जान जाते हैं और मेरी इच्छाएं भी पूरी करते हैं अच्छा जी क्या तुम्हारे गणेश जी सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं हां करते हैं ना जिसमें सबकी भलाई हो वो इच्छाएं श्रद्धा और भक्ति से मांग कर तो देखो श्रद्धा और भक्ति वो कैसे की जाती है बहुत सर है मैं सिखा दूंगा स्वामी तो क्या बल्लाल ने भक्ति के साथ अपने मित्रों को पूजा के विधि भी सिखाई पिता ने उसे सांसारिक ज्ञान से बांध रखा था किंतु जब उसकी भक्ति का बान टूटा तो उसने वेद उपनिषद भी पढ़े अपने भगवान श्री गणेश को जाना उनके मंत्रों से परिचित हुआ और इस ज्ञान को अपने मित्रों में भी बांटा उन सभी ने मिलकर उस प्रतिमा को आधार बनाकर एक मंदिर की स्थापना [संगीत] की ओम गण गणपत नमः ओम गण [संगीत] गणपते धीरे धीरे गुरुकुल में छात्र कम होने लगे और बल्लाल के मंदिर में बालकों की भीड़ बढ़ने लगी ग नम ओम गण गणपते नमः ओम गणपते [संगीत] नमः और फिर एक दिन यह अवश्य उस बल्लाल का किया धरा है जब से उसने गुरुकुल आना छोड़ दिया है अन्य सभी बालकों ने भी गुरुकुल आना बंद कर दिया [संगीत] है देखा प्रिय हमारे पुत्र ने घर कितना व्यवस्थित रखा हैने कहा था हमें उस पर विश्वास करना चाहिए और मुझे ज्ञात है दुकान को भी इतनी भली भाति संभाला होगा उसने अच्छा हुआ कल्याण भैया जो तुम आ गए अब सामान के लिए इधर उधर नहीं दौड़ना पड़ेगा अब आ गए हो तो दुकान तो खुलेगी ना तुम्हारी क्या क्या कहा तुमने रे पीछे एक दिन भी खुली नहीं मेरी दुकान बल्लाल आज तुम्हारी दुकान से भोग के लिए कुछ ले आए क्या किंतु दोपहर में दुकान खोलना अब तुम्हारा कर्तव्य है दुकान तो मैं भूल ही गया था पिताजी का आदेश था उसे खोलते रहना है अब क्या करूं क्या हुआ बल्लाल तुम ऐसे चिंतित क्यों हो गए तुम नहीं मित्र मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई है पिताजी ने कहा था कि प्रतिदिन दुकान खोलनी है लेकिन मैंने तो खोली नहीं मैं तो प्रभु भक्ति में रम गया दुकान खोलना ही भूल गया मैं उसने दुकान एक दिन भी नहीं खोली हां कल्याण भाई किंतु एक बालक से दुकान खुलने की आशा कर भी कैसे सकते हो तुम कर सकता हूं क्योंकि मेरा पुत्र साधारण नहीं असाधारण बालक [संगीत] है दोष उससे कैसे हो सकता है कोई बात नहीं वो दंड दूंगा एक ही बार में सदा के लिए सुधर जाए आने तो दो उसे गुरुकुल से जो गुरुकुल जाएगा वही तो वहां से यहां आएगा प्रणाम गुरुदेव आप क्या कह रहे हैं मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा मैं समझाता हूं सर्वप्रथम आपके पुत्र ने गुरुक लाना बंद कर दिया फिर उसने धीरे-धीरे सभी बालकों को गुरुकुल आने से रोक दिया पिताजी को ज्ञात होगा तो बहुत क्रोधित होंगे वह तो क्या हुआ गणेश जी है ना तुमने ही अपने ईश्वर प्रभु गणेश पर विश्वास करना सिखाया है हां तो तुम भी उसी सीख पर चलो हां किंतु ईश्वर उन्हीं का साथ देते हैं जो सही के साथ हो और पिताजी का आदेश ना मान कर मैंने अनुचित किया है मुझसे भूल हुई है तो बताओ गणेश जी ऐसे में मेरा साथ कैसे देंगे वो नहीं देंगे मेरा साथ अच्छा हुआ तुम लौट आए अब संभालो अपने पुत्र को हमारे बालकों को भी बिगाड़ रखा है उसने पता नहीं क्या सिखाया उसने हमारे बालकों को जो गुरुकुल छोड़कर चले गए हैं ऐसा थोड़ी ना होता है संभालो अपने बालको को दिया हमारे बालक को दिया माल माल ये सब क्या कह रहे हैं मेरे विश्वास का ऐसा बुरा परिणाम अरे उसे खेलना है तो दिन भर खेले परंतु हमारे पुत्र को क्यों बिगाड़ है ये तो जैसे मेरा बुरा स्वप्न सत्य हो रहा है ये कैसे संभव हुआ अरे कोई बताएगा मुझे बल्लाल है कहां और कहां होगा गुरुकुल के मार्ग पर अपने साथियों के साथ मिलकर उसने जो मंदिर बनाया है वही होगा अपनी टोली के [संगीत] साथ कल्याण भैया य क्या करने जा रहे हो पालक है भूल हो जाती है उसे समझा दो किंतु कठोर दंड ना दो हट जाओ मेरे मार्ग से कल्याण भैया कल्याण भैया कल्याण भैया तुम में से भोला सा मुख बनाकर क्षमा मांग लेना वो तो रे पिता है उन्हें दया आ जाएगी और वो तुम्हें क्षमा कर देंगे हां और तब भी ना माने तो उन्हें यह मंदिर दिखा देना यह देखकर व प्रसन्न हो जाएंगे और उनका क्रोध छूमंतर हो जाएगा हां यह उचित है मैं उन्हें यही ले आऊंगा उन्हें दिखाऊंगा कि मैं प्रभु की प्रतिमा कैसे लेकर आया फिर तुम सभी की सहायता से कैसे इसे स्थापित किया और कुछ ही दिनों में प्रभु गणेश के बारे में कैसे सब कुछ पढ़ लिया और तुम्हें भी सारे मंत्र सिखाए तब तो पिताजी को मानना होगा [संगीत] ना [संगीत] बड़ा गर्व था मुझे अपने पुत्र पर क्योंकि मैं मानता था वो सबसे होनहार है समझदार है बुद्धिमान है किंतु तुमने तो मेरे गर्व को मिट्टी में मिला दिया स्वयं तो बिगड़ ही गए दूसरे बालकों को भी बिगाड़ दिया स्वामी आप क्रोधित है आप उसे कुछ मत कहिए मुझे समझाने दीजिए बल्लाल को नहीं आज मेरे और इसके बीच कोई नहीं आएगा उसका परिणाम चाहे कुछ भी हो चाहे ये अचेत भी हो जाए यदि जो तुम कर रहे हो उसमें तुम्हें पूर्ण विश्वास है तो तुम कभी ऐसी उलझन में पड़ोगे ही नहीं और कभी पड़ भी गए तो स्वयं उससे निकलने का मार्ग ढूंढ लोगे पिताजी आज मुझे पहली बार भय नहीं लग रहा है क्योंकि मुझे विश्वास है जो मैंने किया वो बुरा नहीं है ये अच्छा कार्य है और आपने ही तो कहा था यदि मैं कुछ अच्छा करता हूं तो मैं उसे करते रह सकता हूं हा कहा था और यह भी कहा था पढ़ाई करना समय पर दुकान खोलना और तुमने क्या किया अपना सारा समय इसमें र्थ कर दिया पिताजी जो समय मैंने ईश्वर की भक्ति में बिताया वह व्यर्थ कैसे हो सकता है व्यर्थ कि है जिस आय में शिक्षा और व्यापार सीखना चाहिए आयु में भक्ति का राग अलप रहे हो तुम मूर्खता है ये पिताजी यदि यह मूर्खता है तो जो आप करने को कहते हैं उसम भला क्या समझदारी है समझदारी है शिक्षा से व्यापार सीखो व्यापार में सफल होगे तो बड़े व्यापारी बनोगे समृद्ध रहोगे तो सुखी जीवन होगा तुम्हारा हां पिताजी सुख तो आवश्यक है किंतु आप भौतिक में सुख भूते हैं मैं तो प्रभु की भक्ति में ही सुख पाता हूं बस इतना ही अंतर है आपके सुख में और मेरे बालक हो तुम ना समझो तुम्ह जत नहीं तुम्ह जीवन में क्या चाहिए किंतु आप ही तो कहते थे मैं अपनी आयु के दूसरे बालकों से अधिक समझदार हूं तो मेरी समझ तो मुझे ईश्वर की भक्ति की ओ भेज रही है व्यापार की ओर नहीं ने कुछ दिन अकेला क्या छोड़ दिया तुम्हा इतनी लंबी हो गई कि अपने पिता को उत्तर दे रहे हो बड़े हो गए हो पर इतने नहीं कि अपना भला बुरा समझ पाओ इसीलिए इस साधारण से पत्थर के पीछे अपना समय व्यर्थ कर रहे हो मुझे जो कहना है कह लीजिए पिताजी लेकिन मेरे ईश्वर का अपमान मत कीजिए यह मेरे ईश्वर है जो प्रतिमा मंदिर में स्थापित होती है हम उसे भगवान मानकर उनका सम्मान करते हैं आर्ग में पड़े हुए किसी पत्थर को उठाकर उसे भगवान नहीं मान लेते किंतु भगवान तो कड़कड़ में है तो इस पत्थर में भी है कैसे विश्वास करू क्या प्रमाण है इस पत्थर में भी भगवान में [संगीत] [प्रशंसा] में देखना अभी आएंगे मेरे प्रभु ओम गम गणपत नमः ओम गम गणपत नमः ओम गंग गणपते [संगीत] नमः क्या हुआ तुम्हारी प्रार्थना सुनी नहीं तुम्हारे भगवान ने चलो ठीक है मैं तुम्हें दो और अवसर देता हे प्रभु हे मेरे गणेश जी आइए ना यहां सभी को दर्शन देकर सभी को अपने होने का आभास कराने की कृपा कीजिए अन्यथा कोई मेरी बात का विश्वास नहीं करेगा ओम गन गणपते नमः ओम गण गणपते नमः ओम गण गणपते नम ओ ग गणपते नमः पुत्र यदि इस बार भी तुम असफल रहे तो तुम्हारे इस पत्थर को उठाकर मैं दूर दूंगा नहीं नहीं पिताजी ऐसा मत करना प्रभु मेरे पिता के हाथों यह पाप ना हो उसके लिए एक छोटा सा संकेत ही दे दीजिए इतनी सी कृपा कीजिए प्रभु इतनी सी कृपा कर [संगीत] [संगीत] [संगीत] दीजिए [संगीत] कुछ भी कर लो पुत्र किंतु यह साधारण पत्थर तुम्हें निराश ही करेगा [संगीत] तुमने स्तुति की बहुत अच्छा कागान किया इसकी मैं सराहना करता हूं किंतु जो समय तुमने व्यर्थ किया है अब उसका परिणाम भी देख लो पिताजी मेरा विश्वास कीजिए यही मेरे ईश्वर है और ऋषी मुदगल ने भी कहा था कि प्रभु का दर्शन हमारी इच्छा से नहीं उनकी इच्छा से होती है तो ईश्वर अपनी और अपने भक्तों की भी रक्षा करते होंगे चलो आज तुम्हारे ईश्वर की शक्ति भी देख लेते हैं नहीं पिताजी ऐसा मत कीजिए यही मेरे ईश्वर है नहीं पिताजी ऐसा मत कीजिए नहीं पिताजी नहीं पिताजी पिताजी आप चाहते तो मुझे दंड दे देते किंतु जो आपने मेरे प्रभु के साथ किया है वह अनुचि नहीं पाप है पाप मैं प्रभु से प्रार्थना करूंगा कि व आपको क्षमा कर दे तुम भी बचोगे नहीं पुत्र जो भूल तुमने की है व क्षमा योग्य नहीं इसका दंड तुम्हें भी अवश्य मिलेगा स्वामी स्वामी नहीं स्वामी मैंने कहा ना कोई बीच में नहीं [संगीत] आएगा कोई इसकी सहायता नहीं करेगा चार दिनों तक भूखा प्यासा पेड़ से बंधा रहेगा तब सत्य का जर होगा इस निकलो निकलो यहां [संगीत] से इंदुमती तुम भी यहां रुक नहीं सकती [संगीत] चलो भक्ति भाव से प्रभावित होकर ईश्वर भी भक्त से प्रेम करने पर विवश हो जाते हैं उन्हें अपने भक्त का कष्ट अपना ही कष्ट लगता है और फिर ऐसा ही हुआ प्रभु महा गनाधिपति अपने प्रति निष्ठावान भक्त का कष्ट नहीं देख [संगीत] [संगीत] सके अब आए हैं जब बुलाया था तब क्यों नहीं आए अच्छा तो तुमने पहचान लिया मुझे प्रभु भक्त तो अपने प्रभु को किसी भी रूप में पहचान लेता है और भगवान अपने भक्त को ऐसी अवस्था में कदा भी नहीं छोड़ सकते आप देखिए ना मेरी भक्ति तो टूटकर टुकड़ों में बिखर गई नहीं पुत्र तुम्हारी भक्ति सुरक्षित है कभ खंडित नहीं हो स दर्शन मेरा मय देवय देव ये प्रतिमा अनंत काल तक तुम्हारी अखंड भक्ति के रूप में ऐसे ही अखंड रहेगी कितना अच्छा होता ना यदि ये चमत्कार आप सब लोगों के सामने दिखाते हैं भगवान के दर्शन के लिए योग्य होना आवश्यक होता है पुत्र और यह योग्यता भक्ति और तप से ही प्राप्त होती है किंतु मैं तो एक छोटा सा बालक ही तो हूं मैंने ऐसा क्या किया है प्रभु जब से तुम गुरुकुल जा रहे हो तुम मेरी पूजा करते आ रहे हो हां किसी की सहायता करना भी मेरी पूजा ही है कीट की सहायता कर तुमने अनजाने में मेरे अर्क गणपति स्वरूप की पूजा की और पुण्य के भागी बने और जब सभी ज्ञान प्राप्त कर भौतिक सुख की इच्छा रखते हैं वहां तुम भक्ति का ज्ञान बांट रहे हो इसलिए तुम मेरे दर्शन के भागी बने हो तो मेरे पिता प्रभु क्या आप मेरे पुण्य के आधार पर उनके पाप को क्षमा कर देंगे यदि यही तुम्हारी इच्छा है तो ऐसा ही होगा किंतु पहले उन्हें अपनी भूल तो समझनी होगी स्वीकार करनी [संगीत] होगी कल्याण भैया मेरी बात सुनो अपने पुत्र के साथ इतने कठोर ना बनो रात्रि से वृक्ष से बंधा है जाओ उसे खोल दो पालकों को दंड भी दो तो ऐसा जो वो सह सके सामान के बदले मुद्रा दो और जाओ ज्ञान मत दो मुझे ठीक है जैसी तुम्हारी इच्छा तो मुझे दाल दे दो मैं [संगीत] चला तुम्हारा ध्यान कहां है कल्याण भैया मैंने दाल मांगी है चावल नहीं दाल ही तो है चावल है चावल ध्यान से देखो अपनी दृष्टि का उपचार कराओ भोला दस दाल ही तो है ये उपचार तुम अपनी दृष्टि का करवाओ कल्याण भैया सामने चावल है और तुम उसे दाल बोल रहे हो अरे दाल ही दिया है ना लो अब चूड़ा को उड़द और उड़द को चूड़ा मत बोल देना तुम लोग खेल खेल रहे हो मेरे साथ यह उड़द है और यह चूड़ा है तुम्हें हुआ क्या है कल्याण भैया सब उल्टा सीधा कर रहे हो लगता है तुम हम सभी के साथ खेल खेल रहे हो हां भाई इतना समय नहीं है हमारे पास कल्याण भैया अगर देना है तो दो नहीं देना है तो मत दो हम कहीं और से ले लेंगे [संगीत] ये क्या हो रहा है मेरी दुकान में कीट कहां से आ गए भेक दूंगा सब सब फेक दूंगा सब कल्याण भैया अरे अरे अरे कल्याण भैया ये क्या कर रहे हैं आप इस प्रकार अंदर को क्यों फेंक रहे हैं आप मूल्यवान हां ये तो सही कह रहे हैं इस सब सामान को क्यों फेंक रहा कि तो अभी तो मुझे इनमें कीट दिखाई दे रहे थे भाई जब समझ चूक जाती है ना तो ऐसा ही होता है अपने मणि जैसे पुत्र को तुमने वृक्ष से बांध रखा है सभी अच्छे सामान को ऐसे फेंक रहे हो हां यहां चूड़ा को उड़त बनाकर बेच रहे हैं और वहां संत जैसे अपने पुत्र को व्यापारी बनाना चाहते हैं ये तो बहुत बड़ी भूल हो गई मुझसे उसकी भक्ति को तुच्छ समझा मैंने सराना के स्थान पर दंड दिया अब तो मैं उससे क्षमा मांगने योग्य भी नहीं [संगीत] ओम गम गणपते नमः ओम गम गणपत नमः ओम गम गणपत नमः ओ ओ गन गणपत नमः ओम गन गणपत नमः ओ गन गणपत नमः ओम गन गणपत नमः ओम गन गणपत नमः ओम गन गणपत नमः ओम गन गणपत नमः हमारे प्रभु ने स्वयं तुम्हारी रक्षा की बस तुम मुझे क्षमा कर दो मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई पुत्र बहुत बड़ी भूल नहीं नहीं पिताजी मेरे सामने झुककर मुझसे क्षमा मांगकर मुझ पर दोष मत डालिए क्षमा मांगनी है तो प्रभु से मांगिए देखिए उनकी कृपा से प्रतिमा ने नवीन स्वरूप ले लिया मुझसे पाप हुआ है प्रभु मैं क्षमा का नहीं दंड का अधिकारी हूं मुझे दंड दीजिए प्रभु मुझे [संगीत] द महोदर इ ज्ञान ब्रह्म प्रकाशक [संगीत] मसर प्रणाम [संगीत] प्रभु नहीं मुझे आपके दर्शन नहीं प्रभु का दर्शन उनकी इच्छा और हमारे कर्मों के परिणाम स्वरूप ही मिलता है पिताजी रा पुत्र उचित कहता है कल्याण वो अपने अनुसार अपना जीवन साथ कर सकता है जिन ियो जिस स्वभाव और जिस पहचान के साथ तुम्हारे पुत्र का जन्म हुआ है उस पहचान को तुम नहीं बदल सकते ऐसा प्रयास करना अनुचित भी है और हानिकारक भी अपने पुत्र को स्वतंत्र रूप से अपने चरित्र और जीवन का निर्माण करने दो कल्याण तभी कल्याण होगा पिता का धर्म हो है संतान का उचित लालन पालन कर उसे योग्य बनाना ना कि अपनी इच्छा को उस पर ठोकना प्रभु एक पिता ही संतान के प्रति भूल कर सकता है किंतु परम पिता परमेश्वर नहीं आप केवल बल्लाल के ईश्वर नहीं हम सबके ईश्वर है मैं तुम्हारे पुत्र से बहुत प्रसन्न हूं उसे वरदान देना चाहता हूं कहो बल्लाल क्या चाहते हो तुम पुत्र मेरी तो बस एक ही इच्छा है प्रभु पूरे जगत में सभी मुझे आपके भक्त के रूप में जाने और मुझे आप मिल जाए तथास्तु पुत्र धन्यवाद प्रभु इस मंदिर में जहां मेरी प्रतिमा खंडित होकर पुन स्थापित वो भक्त बल्लाल की भक्ति की रू बनेगी और अनंत काल तक बल्लाल के ईश्वर बल्लालेश्वर की पूजा होगी प्रभु आपने अपने नाम से मेरा नाम जोड़ दिया इससे अधिक मुझे और कुछ नहीं चाहिए मैं धन्य हो गया प्रभु मैं धन्य हो [संगीत] गया प्रभु बल्लालेश्वर गणपति की जय प्रभु बल्लालेश्वर गणपति की जय प्रभु बल्लालेश्वर गणपति की [संगीत] जय प्रभु यह तो हमारा परम सौभाग्य है कि हम यहां आ और आपके साधारण किंतु तो दिव्य स्वरूप के दर्शन प्राप्त हुए मैं यहां सदैव अपने भक्त बल्लाल की भक्ति का स्वरूप बनकर साधारण रूप में स्थापित हू जिससे सभी को ये ज्ञात हो कि मैं अपने भक्तों से अभिन्न हूं यहां जो भी मेरी पूजा करेगा उसकी इच्छा अवश्य पूर्ण होगी आपकी भी किंतु अभी आपको अगले अष्टविनायक मंदिर चिंतामणि मंदिर की ओर प्रस्थान करना होगा [संगीत] [संगीत] अति सर्वत्र वजते ना अधिक बंधन ना अधिक छूट दोनों ही हानिकारक है बल्लालेश्वर की कथा में अधिक बंधन ना करने की सीख मिलती है वैसे ही चिंतामणि मंदिर की कथा से हमें ज्ञात होगा कि संतान को पूर्ण रूप से स्वतंत्र छोड़ देना उसे अपनी मनमानी करने देना उसके भविष्य के लिए हानिकारक होता [संगीत] [संगीत] है [संगीत] जो व्यक्ति भौतिक सुखों को त्याग कर प्रभु भक्ति को ही सर्वोपरि मानते हैं वे प्रभु की कृपा प्राप्त कर सदैव उनके प्रिय बने रहने का सौभाग्य पाते हैं

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