हता श्री गणेशा श्री गणेशा श्री ऐसा प्रतीत होता है कि जलंधर ने गरुड़ को अपनी किसी माया से प्रभा इसलिए उन्होंने अपना संतुलन खो दिया है नियंत्रण होगा विष्णु देव अवश्य होगा मेरे प्रिय बद श्रेष्ठ का तीनों लोकों पर स्वामी गरुड़ तो स्वामी भक्त फिर व पद भ्रष्ट कैसे हो गया क्योंकि जलंदर ने वशिता सिद्धि का प्रयोग किया है वशिता सिद्धि वो क्या है पिता श्री इस सिद्धि को प्राप्त कर सादा किसी भी जीव जंतु को अपने वश में करने की शक्ति प्राप्त करता है करोड़ को भी जलंधर ने इसी सिद्धि से अपने वश में कर लिया है पिताजी हमें नारायण की सहायता करने का कोई उपाय तो करना चाहिए पुत्र कार्तिके नारायण को कम मत आ को स्मरण रखो जलंदर ने गरुड़ को वश में किया है नारायण को नहीं उचित कहते हैं पिता [संगीत] श्री रूपाय विष्णवे शिवस हृदयम विष्णु विष्ण हृदयम [प्रशंसा] शिव मंगलम भगवान विष्णु कर मैं आपको इस माया से मुक्त करता हूं मंगलम पुंडरीकाक्ष मंगलायतन हरि मंगलम भगवान विष्णु मंगलम गरु मंगलम पुंडरीकाक्ष मंगलायतन [संगीत] हरी उस नारायण को तो ऐसी अंतरिक्ष यात्रा पर भेजा है मैंने जो वह कभी नहीं भूलेगा अब शिव को पराजित करने की बारी है मुझे क्षमा कीजिए प्रभु ज्ञात नहीं क्या हुआ था मुझे मेरी रक्षा करने के लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद प्रभु इसमें आपका कोई दोष नहीं है गरुड़ जी चलिए इस समस्या को मैं एक ही बार में समाप्त करता हूं जी प्रभु हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राधा हरे राधा रा राधा हरे रा हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष् कृष्णा हरे हरे [संगीत] क्या होगा नारायण के प्रहार का परिणाम आ [संगीत] [संगीत] नहीं प्रिय भल श्रेष्ठ कांत कभी नहीं हो सकता ये कदापि संभव नहीं है नारायण ने जालंधर के तन को अनेकों भागों में खंडित कर दिया और गरुड़ पर उसके सिद्धि प्रभाव को भी दूर कर दिया मुझे ऐसा प्रतीत नहीं होता कि संकट अभी पूर्ण रूप से टला है इंद्रदेव किंतु गणेश जी यह तो प्रत्यक्ष प्रमाण है उधर देखिए जलंधर का तन अनेकों भागों में खंडित होकर पृथ्वी पर पड़ा है संकट टल चुका है उसका उसका अंत हो चुका है किंतु गणेश जलंधर की मृत्यु तो पिताश्री के हाथों होनी है तो फिर यह कैसे संभव है असंभव है [प्रशंसा] यह गरुड़ जी अब समय आ गया है प्रस्थान कर करने का अब यहां रुकने की कोई आवश्यकता नहीं [संगीत] [संगीत] चलिए जलंधर का हाथ पुनः गतिमान कैसे हो रहा है जलंदर पुनः जीवित कैसे हो रहा है प्रिय बल श्रेष भगवान है मैं उनकी शक्ति हूं और उनकी शक्ति उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है इसलिए उन्हे कुछ नहीं हो सकता यह हो क्या रहा है जलंदर के खंड तंग अभी तक जीवित कैसे जलंधर का अंत पिता श्री के हाथों ही नियत है किंतु यह मामा जी को ज्ञात नहीं यदि जलंधर पुनर्जीवित हुआ तो मैं उसका वत पुनः करूंगा मुझे मामा जी को यह बताना ही होगा कि जालंधर का वत उनके द्वारा नियत नहीं अन्यथा वह बार-बार जलंधर का वध करते रहेंगे और वह दुष्ट पुनर्जीवित होता रहेगा मामा जी सुनिए गणेश तुम यहां मामा जी मैं आपको यह बताने आया हूं कि आप व्यर्थ प्रयास कर रहे हैं हां जालंधर पिता श्री की क्रोधाग्नि से उत्पन्न हुआ है इसीलिए पिता श्री के हाथों ही उनका ब संभव है इस अवस्था में तो हमें महादेव के पास ही चलना चाहिए तुम चलो मैं आता [संगीत] हूं भरो की बाती कहां भाग र नारायण देखो मैं अभी भी जीवित हूं और मैं तुम्हें भागने नहीं दूंगा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] नाराय ये तो गरुड़ को नीचे खीच रहा है अति की तो कोई सीमा ही नहीं छोड़ी इस दुष्ट ने जो अब य मामा जी के वाहन गरुड़ जी को भी आद करने का प्रयास कर रहा [संगीत] है प्रभु मेरे भ्राता को शति पहुंचाने का प्रयास कर रहा है यह दुष्ट क्या भागोगे नारायण तुम्हारे इसवान को प खीच के ले जाऊगा नारायण प्रभु जलंदर छोड़ दो गरुड़ जी को अन्यथा परिणाम अच्छा नहीं होगा यह तो कदाचित उससे विपरीत है जो मैंने जालंधर से कहा था अब उस मूर्ख के बचाव का कोई मात नहीं [संगीत] न के वार से मेरा अंत कदा भी नहीं हो सकता किंतु यदि मैं आ भी हुआ तो नारायण को उसके वाहन से मुक्ति दिलाने के सुनहरे अवसर को कवा बैठूंगा मैं जो भगवान सर्वश्री जलंदर कभी नहीं मिलेगा बस जालंधर अब तुम्हें रोकना ही होगा मुझे [संगीत] [प्रशंसा] प्रभु ओ नारा प्रणाम मां माता काली ये देवी कहां से उत्पन्न हो गई देवी महाकाली का क्रोध तो अत्यंत विनाशक होगा हा कमन क्यों आ रहा है मेरे [संगीत] हाथ शोक दुख निवार हे सव मंगल सारण हे च मारण त [संगीत] शार के बल शता नव मर्जनी ली है तू भी कपार टि का न न हो को भीन कर जय काली जय काली जय काली जय काली जय काली जय काली दुखियों के दुख हरति तू नाश पापों का करती तू जलोध कर ू जय काली जय काली जय काली जय गाली जय गाली जय [संगीत] ली ये ये माता काली रोक क्यों गई स्त रह गई है देवी मुझे [हंसी] देखकर चढ़ होगे पावस देवी के असमर्थ है आगे बढ़ने में मुझ पर वार करने में आओ काली मुझे सिफ समझने की भूल कर बैठी हो क्या कोई बात नहीं उसके लिए मैं तुम्हे शवा करता हूं किंतु देवी मा शिव नहीं उससे भी महान मा तम भगवान सर्वश्रेष्ठ चलर हूं [संगीत] मैं मेरे स्वामी जगतपिता महादेव से अपनी तुलना करने का दुस्साहस कैसे किया तुमने अहंकारी असुर आओ काली देख रहे हो शिव शरणागत बनने आ रही है तुम्हारी [संगीत] देवी शर्म नहीं कदाच आक्रमण करने आ रही है ये कोई बात नहीं आक्रमण कैसा भी हो तो मेरी होगी नाथ कोई भी स्त्री यह कदापि सहन नहीं करेगी कि कोई अन्य पुरुष उसके पति का स्थान लेने का प्रयास करे महादेव से अपनी तुलना कर देवी काली के प्रचंड क्रोध को जागृत किया है जालंधर ने स्वयं अपनी मृत्यु को ललकारा है क्योंकि यदि एक नारी सहनशील होती है तो अन्याय का संहार करने के लिए अपनी अपार शक्ति का संचार भी कर सकती है इसलिए देवी काली के द्वारा जलंधर का अंत अब निश्चित प्रतीत हो रहा है स्वामी आपकी ही क्रोधाग्नि से उत्पन्न हुआ है यह और स्वयं को आपसे भी बड़ा समझने की उद्दंडता कर रहा है इसका उचित दंड अवश्य प्राप्त होगा इसे मां आप जालंधर को दंड अवश्य दे सकती हैं किंतु उनका अंत तो पिता श्री के द्वारा ही संभव है उठिए बल शेष उठिए अपनी अपार शक्ति का प्रदर्शन कीजिए प्रमाणित कीजिए की आप वास्तविक भगवान है उठ उठूंगा आ [संगीत] बठ जलंधर भगवान सर्वश्रेष्ठ जालंधर पर वार करने की बहुत बड़ी भल कि है तुमने नारायण इस दुष्ट का वत तो मैं ही करूंगी आप इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे अत्यंत कपित है देवी काली इस समय उन्हें कुछ कहना उचित नहीं होगा उनका अपराधी है जलंधर जिसका दंड तो उसे प्राप्त होना ही चाहिए जैसी आपकी इच्छा [संगीत] देवी काले तुम्हारे स् रूप से आतंकित नहीं हूं मैं असाधारण से नहीं भगवान सर्वश्री चलर हूं मैं तुम नहीं मैं करूंगा तुम्हारा बक्शन अपने विशेष अस्त्र से तेरे इस पाप बुख से अब एक भी अनुचित शब्द का उच्चारण उचित नहीं है उदंड असुर अब तेरा अंत निश्चित है दुष्ट असुर तेरी मृत्यु तेरी प्रतीक्षा कर रही है मेरा नहीं मेरे मार्ग में बाधा बनने वाला अंत होगा [संगीत] आज कोई वद नहीं कर सकता मेरा कोई नहीं ये ये ये क्या है इनसे अपनी रक्षा कैसे करू तुम्हारे प्रत्येक बार का उपाय है मेरे पास देवी होगी तुम किंतु मुझसे अधिक शक्तिशाली नहीं मूर्ख जल धर दया निधान है न्याय प्रिय है महादेव तू उनके प्रति अपराध पर अपराध करता गया और वह तुझे क्षमा करते गए किंतु उनकी दया को उनकी दुर्बलता समझने की जो भूल तूने की है उसका उचित दंड मैं दूंगी तुझे तेरे साथ तेरी दुष्टता का भी अं करूंगी [संगीत] मैं माता काली के हाथों से भी दंड का भागी है य दुष्ट किंतु इनका अंत तो तभी होगा जब पिताश्री इनसे युद्ध करेंगे जलंधर के अंत का आरंभ है यह देवी काली का रोश उसे चीर के रख देगा प्रिय भ श्रेष्ठ का तो असंभव है क्योंकि मैं जीवित हूं फिर ये देवी उन्हें तारना कैसे दे रही है कोई भी हो कैसी भी शक्ति हो मुझे पराजित नहीं कर सकती ये क्या है मुझे अपने पाश में बांध दिया इसने चल अंदर अब तुझे खींचते हुए ले जाऊंगी महादेव के पास क्षमा याचना [संगीत] करने भगवान सबसे जलंदर का समान कर भी नहीं संग माता जो नियति द्वारा निर्धारित है वह तो होकर ही रहेगा उचित है बल श्रेष उचित पट सिखाइए [संगीत] इसे [संगीत] ले बस जलंधर और अफसर नहीं दूंगी तुझे देवी हो तो देवी बनी रहो मुझे चुनौती देने का शस मत करो जलंदर नहीं भगवान सर्वश्री जलंदर हूं [प्रशंसा] मैं [संगीत] ये मुझे [संगीत] देवी काली से उलझ करर जलंधर ने बहुत बड़ी भूल की है संसार की समस्त शक्ति की स्रोत स्वयं आदि शक्ति की रद्र रूप है वो उनसे किसी का पार पाना असंभव है माता ने भुजा हीन कर जलंधर को दंडित तो कर दिया किंतु मैं उस क्षण की प्रतीक्षा में हूं जब उनके अंत के साथ संसार इस संकट से मुक्त होगा उस दुष्ट जलंधर को आभास तो अवश्य हो गया होगा कि भगवान तो क्या वह तो उनके चरणों की धूल बनने के योग्य भी नहीं देवी काली उचित दन दे रही है जलंदर को अरे मेरी बुजा मेरी बुजा मेरी ही तन से विलक करती इसने दुश जलंधर अपनी इसी भुजा से नारायण पर वार करने का अपराध किया था तुमने तो लो तुम्हारी भुजा को तुम्हारे तन से विलक कर दिया है मैंने अपने अहंकार में सृष्टि के चक्र को विपरीत दिशा में घुमाकर सृष्टि में व्याप्त जीवन को डसना चाहते थे ना तुम तो अब जीवित ही लील जाऊंगी मैं तुम्हें आहार बनाऊंगी अपना आहार बनाऊंगी अपना आहार बनाऊंगी अपना आ [संगीत] [संगीत] मैं कुछ कर क निवा रहा हूं चलो युद्ध करना तो युद्ध करो मायानी ये क्या कर रही हो ित है छोड़ दो मुझे छोड़ दो [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] मुझे मु धन्य है देवी काली उन्होंने जलंधर के महा संकट का अंत कर [संगीत] दिया संकट अभी समाप्त नहीं हुआ मुझे शंका है व पुन उभरे [संगीत] का ये नहीं हो सकता मेरे प्रिय बल श्रेष उस देवी के उधर में कैसे समाल सकते हैं साधारण असर नहीं हूं मैं भगवान सर्वश्री जलंदर हूं मैं अंत संभव है मेरा मुझे रोकने का सामर्थ्य किसी में [संगीत] नहीं [संगीत] देखा वक्त हो गया आप भी गया भी ये ये तो माता काली के नियंत्रण से मुक्त हो गए उनके उधर से बाहर आ गया मुझे विश्वास था जानती थी मैं कि मेरे प्रिय बल श्रेष्ठ का कोई अहित नहीं कर सकता कोई भी नहीं ये कैसे संभव है माता बार-बार आघात कर इसका वध कर रही है और प्रत्येक बार यह पुनः जीवित हो उड़ता है क्या कारण हो सकता है इसके पीछे क्योंकि पिताश्री के अतिरिक्त कोई अन्य शक्ति जलंधर का वध नहीं कर सकती पिता श्री जलंधर आपकी ही क्रोधाग्नि से उत्पन्न हुआ है इसलिए आप और एकमात्र आप ही उसका अंत कर सकते हैं हां पिताश्री यही सत्य है एक मात्र आपके ही द्वारा जलंधर का अंत संभव है मेरी क्रोधाग्नि से उत्पन्न हुआ है तो मेरा क्रोध इसे दंडित करने का कारण बनेगा अब मेरे और जलंदर के मध्य कोई नहीं [संगीत] आएगा [संगीत] व्यक्ति के शक्तिशाली होने के बाद भी अहंकार का मत उसे सत्य समझने नहीं देता
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