हरता श्री गणेशा श्री गणेशा [संगीत] श्री ये ये स्वर सुना आप लोग ने हां ऐसा प्रतीत हुआ जैसे कोई स्त्री मधुर स्वर में गा रही हो किंतु यहां इस सागर के मध्य में यहां कोई स्त्री कैसे हो सकती है वो वो देखो [संगीत] वहां हम इस मार्ग से अनेकों बार आए हैं गए हैं अपने व्यापार के लिए लेकिन इससे पूर्व हमने यह द्वीप देखा नहीं यहां पर तना हरा भरा सुंदर और आकर्षक द्वीप है मार्ग नहीं है कदाचित हमें यहां रुकना चाहिए लेकिन जो आज तक नहीं था वह अचानक उत्पन्न हो गया उसके निकट जाना हमें उचित नहीं लग रहा अरे इसमें उचित अनुचित क्या है कदाचित हमें वहां से हमारी तृष्णा बुझाने के लिए मीठा जल ही प्राप्त हो जाए चलो इस द्वीप पर चलते हैं कितनी सुंदर स्त्री है यह जितना सुंदर स्वर उतना ही सुंदर रूप भी सुनिए अरे यह तो द्वीप के भीतर चली गई शीघ्रता करो शीघ्रता से द्वीप तक पहुंचते हैं [संगीत] [संगीत] अरे वोह देखिए वो जा रही वो सुंदरी सुनिए अरे सुनिए अरे रुकिए हम आपको कोई क्ति नहीं पहुंचाएंगे [संगीत] हम वन के इतने भीतर चले आए हैं कि वह सुंदरी भी अदृश्य हो गई है ंद भी उत्पन्न होती जा रही है अंधेरा बढ़ता जा रहा है हमें वापस नौका पर लौट जाना चाहिए हा चलिए हमें जाने दो छोड़ जाने जाने अतिथियों का स्वागत किए बिना जाने दू यह उचित नहीं है हमारे दई में आपका स्वागत [संगीत] हैलो आगे छोड़ दीजिए हम मैं मैं आपका आभारी हूं आप लोगों ने इस उजाड़ वन को हरे भरे वन में परिवर्तित कर दिया यहां चारों और जल ही जल है नीर ही नीर मछलिया ही मछलियां मनुष्य और मनुष्य की जात दूर दूर तक देखने सुने को नहीं मिलता आशा है आपका पड़ाव यहां पर सुख कर रहा होगा सुख कर तो अवश्य होगा किंतु हमारे लिए धन्यवाद प्रिय तुमने तुमने इनकी उपस्थिति कहा के मेरी शुधा और बढ़ा दी अब नियंत्रण नहीं होता आपने दारुक और दारुका को ऋषि र्व के शाप से बचने का मार्ग सुझाया देवताओं के प्रचंड क्रोध से उनकी रक्षा की किंतु वह तो फिर भी नहीं सुधरे वह तो पुनः दुराचार में लिप्त हो गए इन असुरों का तो स्वभाव ही ऐसा है गणेश व कभी नहीं सुधर सकते असुर देवता मनुष्य अथवा अन्य कोई भी जीव क्यों ना हो मैं उसे सुधरने का एक अवसर अवश्य प्रदान करती हूं अन्याय नहीं करती हूं मैं व्यक्ति की प्रवृति कैसी भी हो उसे सनमार्ग पर चलने का एक अवसर अवश्य प्रदान करती हूं मैं माता मेरे मन में एक प्रश्न उत्पन्न हुआ है मुझे तेरा प्रश्न अवश्य ज्ञात है किंतु उस प्रश्न का उत्तर मैं नहीं वरुण देव देंगे पूछ अपना प्रश्न वरुण देव दारुका अपना वन सागर में ले गई जो आपका स्थान है तो आप तो दारुका को वही बंदी बना सकते थे उस वन पर आप अपना अधिकार कर सकते थे तो फिर आपने ऐसा क्यों नहीं किया आपका प्रश्न सर्वथा उचित है प्रथम पू श्री गणेश हुआ यह [संगीत] के क्या हुआ वर देव क्या आपने उन्हें देखा कहां है वोह आइए मेरे साथ [संगीत] इंद्रदेव [संगीत] [संगीत] [संगीत] यह देवता लोग शांति से बैठने वाले नहीं है यह पुनः वापस आ गए पर अब यह हमारा कुछ नहीं बिगाड़ [संगीत] पाएंगे [संगीत] ये यह क्या हुआ अभी तो दारुका का वन यही था क्षण भर में यह कहां लुप्त हो गया एक संपूर्ण द्वीप अचानक दृष्टि से ओझल हो गया मां वह दीप अदृश्य हो गया क्योंकि आपने दारुका को वरदान दिया था कि वह अपने वन को अपनी इच्छा अनुसार कहीं भी ले जा सकती [प्रशंसा] है मैं बार-बार उस वन को ढूंढता हम वहां पहुंचते और जैसे ही हम उन पर आक्रमण करने वाले होते तो वो अदृश्य हो जाता कभी-कभी तो वो असुर जल के भीतर जाकर छिप जाते थे अनेकों वर्षों तक असुरों ने सागर पर अपना प्रभाव स्थापित किया सागर के जीवों के साथ-साथ उस पर यात्रा करने वाले यात्रियों को भी वह कष्ट पहुंचाते थे व्यापारियों को बंदी बनाते थे और उनसे अपनी सेवा करवाकर स्वयं सुख से रहने लगे निरंतर कठोर श्रम कर जब वो बंदी मृत्यु प्राप्त करते थे तो असुर अन्य व्यापारियों का आखेट कर उन्हें बंदी बना लेते [संगीत] थे माता अर्थात उन असुरों के कारण स्थिति बिगड़ती ही जा रही थी पृथ्वी पर वह ऋषियों को तारना देते थे और सागर में निर्दोष व्यापारियों को और हम इस संकट को दूर करने में [संगीत] असमर्थ अपने हृदय को और कठोर कर लो क्योंकि स्थिति तो और भी बिगड़ने वाली थी किंतु मां इससे बुरा क्या हो सकता था ऐसा क्या किया दारुक और दारुका [संगीत] ने उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को बंदी बना लिया जिसे उन्ह बंदी नहीं बनाना चाहिए था क्या उत्तम उत्तम आनंद है दारू का ये उत्तम मांस और उत्तम दास पृथ्वीलोक में भी इतना आनंद नहीं था दारू का इनको इनको ले जाओ इनको बंदी बनाओ यय भोजन के लिए बाद में प्रस्तुत करना इनको खाएंगे ले जाओ चलो असुर श्रेष्ठ का आदेश नहीं सुना चलो उठो चलो हमारे साथ ए रुको अरे तुम नहीं अरे उसे बोलो वो मनुष्य क्या ब रहा था इधर आ उसे चलो असुर श्रेष्ठ तुमसे कुछ पूछना चाहते चलो आगे बढ़ो क्या बढ बड़ र ओम नमः शिवाय अरे ऊंचा बोलो ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः [प्रशंसा] [संगीत] शिवाय माता कौन था [संगीत] व्यापारी महादेव का प्रिय भक्त सुप्रिया सुप्रिया जिसके कारण महादेव और देवी आदि शक्ति के मध्य द्वंद की स्थिति उत्पन्न हो गई आपकी और पिता श्री की के मध्य द्वंद जब मां मोशिका सुर के विरुद्ध मां उत्पन्न हुई थी तब सृष्टि पर विनाश का कारण उत्पन्न हुआ था यह स्मरण है मुझे क्या पुनः वैसा ही हुआ है [संगीत] माता सच्चे भक्त की निर्मल भक्ति की अपार शक्ति को कम मत आकना गणेश संतान के दुख को देखकर जैसे माता-पिता द्रवित होते हैं सेसे ही निष्ठावान भक्त का दुख हमें भी द्रवित करता है गणेश तब भगवान नहीं अभी तो भक्त के माता पिता के रूप में परिणाम की चिंता किए बिना सब कुछ छोड़कर हम उसकी रक्षा के लिए प्रस्तुत होते हैं गणेश किंतु माता यह द्वंद आवश्यक हुआ ही क्यों क्या कारण था माता आदिशक्ति और पिताश्री के मध्य द्वंद [प्रशंसा] कम ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय क्या बोला ओम नमः [संगीत] शिवाय तुम्हें ज्ञात है क्या मैं कौन हूं मैं मैं सर्व शक्तिशाली असुर श्रेष्ठ दारुक हूं मैं तुम दारुक के वन में हो य य य जीवन और मृत्यु का निर्णय मैं करता हूं इसलिए ओम नम शिवाय मत बोलो बोलो ओम दारुका नमः ओम नमः शिवाय यह इसे जितना शीघ्र समझ में आ जाए उतना ही उचित है ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय जब कष्ट भोगे का ये शिव भा तो स्वयं सुधर जाएगा ये ऐसे नहीं मानेगा इसके कंधे में ये मोटे-मोटे दरख्त रखो इसे लेकर जाओ और चलाते हुए नहीं घसीटते हुए लेके जाना जब इसके कंधों से खून टपके का इसके पैलों में छाले पड़ेंगे तब ये कहेगा ओम दारू खाए नमः डर गए डर गए बोलो बोलो बोलो ओम ार नम बोलो बोलो ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय अरे अपने प्राण ब जानते नहीं तुम कौन जानता हूं भली भाती जानता हूं कि तुम कौन हो समुंदर पर यात्रा करने वाले व्यापारियों को आतंकित करते हो तुम बस इतना ही साहस है तुम में दारुक तुम हमारी स्वतंत्रता तो छीन सकते हो किंतु हमारी भक्ति नहीं मैं इसके प्राण हर लूंगा मैं मैं जीवित नहीं छोडूंगा इसे यह दुष्ट अपने प्राण गवाए नहीं संगा इसका दुष्ट सास नहीं सगे मेरे द्वारा मेरे भगवान का नाम का जाप करना तुम्हें दुस्साहस लग रहा है फिर अपनी पत्नी को कैसे सहन करते हो तुम क्या वो आदि शक्ति की भक्त नहीं क्या वो उनके नाम का जाप नहीं करती यह ूर्त शिवभक्त तो मेरी भक्ति पर प्रश्न उठाकर स्वामी को उत्तेजित करने का प्रयास कर रहा है इसे रोकना होगा मुझे इस उदंड शिव भक्त को इसके जेवा पर नियंत्रण रखना सिखाना होगा मुझे मुझसे मुझसे अपनी तुलना कर रहे हो मेरी भक्ति के फल स्वरूप स्वयं माता आदिशक्ति ने हमें वचन दिया है कि वह मेरे सम समस्त असुर समुदाय की रक्षा करेंगी मेरी माता के प्रति भक्ति के लेश मात्र भी नहीं हो तुम अगर ऐसा होता तो स्वयं महादेव प्रकट होते तुम्हारी रक्षा करने के लिए आज जहां तुम बंदी बने खड़े हो जहां तुम्हारे जीवन और मृत्यु का निर्णय हमारे हाथों में है और यह वन मैंने माता की भक्ति से अर्जित किया है और यह मेरे और मेरे स्वामी की भक्ति की अपार शक्ति का आधार है क्योंकि मां आदि शक्ति ही मेरी रक्षक है और तुम मेरे अनुसार एक मूर्ख व्यापारी हो कोई भक्त नहीं यदि महादेव तुम्हारी भक्ति का मान रखते तो स्वयं यहां पर प्रकट होते किंतु कहां है वो हमें तो नहीं दिखाई दे रहे और तुम मेरे स्वामी के समक्ष भेड़ियों में जकड़े हुए दीन हीन अवस्था में एक निर्बल असहाय बंदी [संगीत] हो ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ये ऐसे नहीं मानेगा इसकी आत्मा में समाहित ये शिव भक्ति नम शिवाय इसके रक्त की एक एक बूंद से निकालू मैं त निरंतर जारी रख ये ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नम शिवाय जारी रख मैं देखता हूं तेरा शिव कहां से प्रकट होता है ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय विदत र्जा कहां से कहां से ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय आकृति क्या कैसी हैय क्या है ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ये अचानक संपूर्ण वातावरण इतना भयंकर रूप क्यों ले रहा है ओम नमः शिवाय अरे ये भूकंप बन कैसा है पीछे हटो पीछे ह अप रक्षा [संगीत] [संगीत] करो पिता श्री अपने भक्ति की रक्षा के लिए प्रस्तुत हो गए तब मुझे भी ऐसा ही प्रतीत हुआ रे किंतु नहीं उन्होंने तो स्थिति और भी बिकट कर दी किंतु वहां पिता श्री के आने से स्थिति बिगड़ कैसे गई माता क्योंकि इससे महादेव और आदि शक्ति के मध्य एक तनाव पूर्ण और भयंकर युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो गई थी गणेश [संगीत] [संगीत] विकट और विपरीत परिस्थिति में भी जो अपने इष्ट और भगवान को नहीं भूलते वही सच्चे भक्त कहलाते हैं और भगवान भी अपने भक्त का
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[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
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