Wednesday, 31 December 2025

बल्लाल ने पिता की आज्ञा का पालन कैसे किया Vighnaharta Ganesh Episode 755 Pen Bhakti

कोमल हृदय की कोमलता में दया का भाव तो स्वाभाविक है और वो भी एक अबोध बालक कीट की रक्षा भी की और साथ ही अनजाने में ही जल चढ़ाकर अर्थ गणपति का आशीष भी बालिया उस अबोध बालक को सांसारिक ज्ञान तो मिल रहा था किंतु उसके कोमल हृदय को अध्यात्म का ज्ञान कहां था पर वह झिंगुर कीट की रक्षा करते करते अनजाने में उस पेड़ की जड़ में वास करने वाले प्रभु महा गनाधिपति की प्रतिदिन उपासना करने लगा लगता है कल उचित प्रकार से भोजन नहीं किया इसलिए अभी भी पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं हुए हो लो यह दुर्बा और जल तुम्हारे लिए रख दिए मैंने मां कहती है भोजन और जल ग्रहण करना कदापि नहीं भूलना [संगीत] चाहिए नमस्ते ब्रह्म रूपाय विष्णु रूप नम नमस्ते रुद्र रूपाय कर रूपाय नमः विश्व य मां का बनाया लड्डू है यह भी खा लेना माने भोजन के लिए दिया था किंतु भोजन बाट कर खाना अच्छा होता है तो मैं य तुम्हारे साथ बाट रहा हूं [संगीत] गणेश [संगीत] भ देख मां के बनाए लड्डू से तुम्हारी सेहत कैसे निखर गई अब तुम छलांग लगा सकते हो लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि तुम यहां वहां घूमने लगो भोजन की चिंता मत करना मैं तुम्हें प्रतिदिन दुर्बा जल और अपने भोजन में से कुछ देता रहूंगा यह भी खा लेना अपना ध्यान रखना [संगीत] फिर एक दिन वह कीट वहां से चला भी गया किंतु बल्लाल बालक ने वहां दुर्वा और जल रखना नहीं [संगीत] छोड़ा वह तो आज भी यहां दिखाई नहीं दे रहा किंतु उसे पता तो है कि मैं उसके लिए प्रतिदिन भोजन रखता हूं वो अवश्य [संगीत] आएगा [संगीत] ईश्वर का आशीर्वाद व्यक्ति को किस अच्छे कार्य से मिल जाए कौन उसका माध्यम बन जाए कहना सरल नहीं है उचित कहा आपने प्रिय आशीर्वाद स्वरूप बल्लाल को एक नया जीवन मिलने वाला था किंतु वर्तमान में वह अपने बाल्यावस्था के आनंद को खो रहा था युवाओं का जीवन जी रहा था जो उसने नहीं उस के पिता ने निर्धारित किया था उठो पुत्र [संगीत] उठो पकड़ [संगीत] पक पुत्र बल्लाल वहां पर क्यों रुके हो इधर आओ जी पिताजी आज से दोपहर में विश्राम करना बंद करो पुत्र जो आलसी होते हैं जिन्ह ना कुछ सीखना होता है ना कुछ करना होता है वह ऐसा करते हैं आज दोपहर से तुम मेरे साथ दुकान पर चलोगे और मैं तुम्हें व्यापार सिखाऊ परंतु नहीं वो मात्रिक बालक नहीं है जो साधारण खेल खेलने में अपना समय व्यर्थ करे मैंने उचित कहा ना पुत्र हां पिताजी चल चलो ना बल्लाल हमारे साथ खेलो ना नहीं तुम लोग खेलो मुझे पिताजी के साथ दुकान जाना है [संगीत] चलो आओ प [संगीत] बैठ तुम्हारे मुख से पहले निकले उससे पहले से मैं तुम्हे व्यापार का ज्ञान देता आ रहा हूं अब मैं तुम्हें स्मरण कराता हूं देखो इस प्रकार मैं किसी भी वस्तु को तोलता हूं ध्यान से [संगीत] देखना अब स्वयं प्रयास [संगीत] करो [संगीत] अरे धीरे यह समान हो गया है पहले वजन बढ़ाना पड़ेगा हां अब [संगीत] डाल जिस दंड से बालक गिली डंडा खेलते हैं उसी दंड से बल्लाल अपने पिता की दुकान पर भार तौलने का अभ्यास कर रहा था इसी प्रकार बल्लाल अब प्रतिदिन अपने पिता के साथ दुकान पर आता था और फिर कुछ कुछ ही दिनों बाद पिताश्री अरे आओ ये है मेरा पुत्र बल्लाद ये गणित विद्या के विख्यात गुरु है इन् प्रणाम करो पुत्र प्रणाम गुरुजी संध्याकाल का समय तो तुम्हारे पास होता है तो आज संध्या से गुरुवर तुम्हें गणित सिखाएंगे अब गणित भी बल्लाल की दिनचर्या का भाग बन गया था किंतु कल्याण को इतने में संतोष नहीं हुआ उसने बल्लाल पर दो अन्य पाठ का बोझ भी डाल [संगीत] दिया पिता की महत्वाकांक्षा के कारण उस बालक का बचपन दबता जा रहा था किंतु बालक का बालपन तो स्वाभाविक है यह जानने के लिए एक छोटी सी घटना पर्याप्त है वो मात्र एक बालक नहीं है जो साधारण खेल खेलने में अपना समय व्यर्थ करे जो भी है मैं तो नहीं खेल सकता पिताजी ने मना जो किया [संगीत] है यह तो गेंद है वस्त्रों से बनी हुई बल्लाल देखते ही मत रहो जाओ गेंद को और फेंको हमारी [संगीत] ओर जाओ ना बल्लाल फेंको ना बड़ी विचित्र है ये गेंद हां हां बलाल भल्लाल देखते मत रहो उठाओ गेंद को और फेंको हमारी ओर हा हा मलाल उठाओगे े को हमारी ओर हा हा मलाल उठाओगे े को हमारी [संगीत] ओर क्या कर रहे हो ऐसे क्या देख रहे हो गेन जीवन में पहली बार देखी है क्या हां पहली बार देखी है इसने आज तक गेंद ही नहीं देखी तो खेला कैसे होगा इसने चलो अब तो देख ली ना तो फेंको हमारी ओर ये क्या तुह तो गेंद फेंकने भी नहीं आती रुको रुको रुको देखो ऐसे पकड़ो और थोड़ा बल लगा के ऐसे फ फेंको अच्छा ठीक [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हैर से नहीं फेंक पाया देखो ये तो फेंक ही नहीं सका चलो फेका मत स्वयम आके हमें दे दो हां वहां भीतर आने से तुम्हारे पिताजी ने रोक रखा है इसलिए तुम ही आ जाओ ना यह [संगीत] लो हां हां समझ गया जब इसे उछाल के पकड़ोगे तो खेलने का मन करेगा ही ना और आनंद भी बहुत बताएगा हां हां और इससे हाथों की सिकाई भी हो जाती है गेंद पकड़ने से अच्छा हां हां बल्लाल अब तुम आ ही गए हो तो खेल भी लो क्योंकि आज तुम्हारे कोई गुरु नहीं आएंगे निकट का बांध जो टूट गया है और मार्ग भी बंद है किंतु मुझे तो गेमस फेंकने ही नहीं आती तो मैं कैसे खेलूं तुम चिंता छोड़ दो वो हम तु में चुटकी में सिखा देंगे तब ठीक है चलो चलो बल्लाल भी खेलेगा बहुत आनंद आएगा चलो चलो चलो हां ये ये इसे ऐसे पकड़ते हैं और ऐसे पीछे लेके जाने के बाद ऐसे फेंकते हैं लो अब तुम प्रयास करो चले जाओ और फेंको ठीक है ये [प्रशंसा] [हंसी] [संगीत] किस मां को अपने बच्चे की खिलखिला हट नहीं भागी बल्लाल पहली बार इतना खिलखिला कर हंस रहा है पर बालक और खेल का संबंध तो पुष्प और उसकी सुगंध के जैसा होता है मैं कह रहा हूं ना खेलने कूदने में पालक का कोई लाभ नहीं होता समय व्यर्थ होता है बस किंतु मैं तो अपने पुत्र को बांध कर नहीं रखूंगा भाई वह तो खेलेगा भी और कूदे भी और भूख भी अधिक लगेगी तो अब से चावल थोड़ा अधिक ही दिया करो कल्याण भैया अरे थोड़ा और डाल दो बांध कर मैं भी नहीं रखता अपने पुत्र को लेकिन खेलकूद में रुचि नहीं है उसकी पढ़ने में मन लगता है उसका खेलने के आनंद का अनुभव अभी उसे हुआ ही कहां है इतनी छोटी आयु में तुमने उसे गुरुकुल भेज दिया पढ़ाई में व्यस्त कर दिया हां क्योंकि छोटी आयु में सब सीख लेगा तो समय से पहले सफल भी होगा इसलिए मुझे बुद्धि मत दो मेरे पुत्र की रुचि ज्ञात है मुझे ठीक है ठीक है चलता हूं इसके बालक खेलकर शारीरिक बल का प्रयोग करते हैं इसीलिए उन्हें भूख लगती है तो मेरा पुत्र मानसिक कार्य करता है उसमें भी तो ऊर्जा लगती है किंतु मैं तो उसे कुछ अतिरिक्त भोजन नहीं देता देना चाहिए अवश्य देना चाहिए चलो इस भोला दस ने अनजाने में ही सही एक भली बात तो [संगीत] कही क्यों पुत्र बल्लाल आज बहुत प्रसन्ना लग रहे हो हां पिताजी वो आज पहली बार में खेल स्वामी यह बादाम लो बल्लाल के लिए प्रतिदिन भिगो कर खिलाना इसे जी स्वामी खिला दूंगी परंतु अचानक बादाम खिलाने का विचार क्यों आया आपके मन में इंदुमती क्योंकि खेलकूद में नहीं हमारा पुत्र बुद्धि के कार्य में अपनी ऊर्जा का प्रयोग करता है ना और बादाम बुद्धि के लिए अच्छा होता है पुत्र मुझे तुम पर बड़ा गर्व है बस अब ऐसे ही शिक्षा प्राप्त करते रहना अपना ध्यान खेलकूद में कभी भटकने मत देना बता रहा हूं उसका कोई लाभ नहीं समझे देखो मैंने तो तुम्हें बोलने ही नहीं दिया तुम कह रहे थे आज तुम बहुत प्रसन्न हो क्योंकि यह तो बड़ी दुविधा है मैंने सत्य कहा तो पिताजी मुझे कभी क्षमा नहीं करेंगे और असत्य कहा तो मैं स्वयं को क्षमा नहीं कर सकूंगा पिताजी वो प्रसन्न है क्योंकि मैंने उसे बता दिया है मार्ग भी ठीक हो गया है और कल से गुरुजी भी आने लगेंगे अच्छा यह तो बहुत अच्छा हुआ अन्यथा कितना समय व्यर्थ हो जाता पुत्र बल्लाल [संगीत] का प्रणाम गुरु [संगीत] जी बल्लाल आज तुम खेलने नहीं आओगे क्या हां गुरुजी भी तो चले गए आ जाओ आ जाओ कुछ नहीं होगा थोड़ा खेल के पढ़ाई करोगे तो वो भी अच्छी होगी हां आओ आ जाओ खेलते हैंते आ जाओ आ [संगीत] जाओ जाओ पुत्र धन्यवाद मां ये मुझे कुछ समय के लिए तो उसे अपने बचपन का अनुभव करने की छूट होनी ही चाहिए जहां रुचि हों पर रोक हो वहां तो व्यक्ति अवश्य जाता है बल्लाल अब भोर में और शीघ्र उठकर सभी कार्य करने जिससे वह कुछ समय खेल भी सके किंतु शीघ्र कल्याण को यह पता लगने वाला था भोला दस कैसे हो खेलकूद कैसा चल रहा है तुम्हारे पुत्र का भाई मेरा पुत्र तो खेलकूद में बहुत अच्छा है और चिंता मत करो तुम्हारा भी हो जाएगा बच्चे तो खेलना सीख ही जाते हैं उन्हे आनंद जो आता है रगल बातें मत करो किसी और को देखा होगा मेरा पुत्र और खेलकूद ना ना असंभव वो तो गुरुजी का दिया हुआ अभ्यास कर रहा होगा अभी-अभी देख कर आ रहा हूं कल्याण भैया वहां अन्य बालकों के साथ आपका पुत्र भी खेल रहा था ये कैसे हो सकता है उसे तो स्वयं खेलना अच्छा नहीं लगता ये क्या कह रहे हो कल्याण भैया कौन बालक होगा भला जिसे खेलना अच्छा नहीं लगता अब नहीं खेलेगा तो कब खेलेगा व्यर्थ में ऊर्जा खपाने का क्या लाभ लादास मुझे ज्ञान मत दो ें तुम्हारे पुत्र को खेलने देना है खेलने दो मैं अपने पुत्र को पढ़ाऊंगा उसे समर्थ बनाऊंगा और बहुत आगे बढ़ाऊ तुम उसे पढ़ा नहीं रहे हो उसे बांध रहे हो अपने बल पर व्यापार खड़ा किया है मैंने खेलकूद से नहीं परिश्रम से और मेरा पुत्र भी वैसा ही [संगीत] करेगा सत्य कड़वा होता है कल्याण भैया उसका सामना करना नहीं सीखा तुमने खैर मुझे मेरा सामान तो दे दो अभी मेरी झपकी का समय है बाद में आना ठीक [संगीत] है अरे कल्याण भैया अपने पुत्र को समझाते क्यों नहीं हो अरे उसे खेलना है तो दिन भर खेले परंतु हमारे पुत्र को क्यों बिगड़ता है अनुशासन का शासन भूल गए क्या अरे कुछ अपने पुत्र को भी सिखा देते उससे सीखकर हमारे पुत्र बिगड़ रहे है बहुत गर्व था ना तुम्हें उस पर अब देखो कैसे अपने साथ दूसरे बालकों को भी डुबो रहा है कैसे अपना समय व्यर्थ कर रहा है और उनसे भी करवा रहा है क्यों कल्याण भैया अब तो तुम्हारा घमन टूट गया होगा ना जवाब दीजिए आप मेरे पट पीछ से कुछ और तो नहीं हो रहा े स्वयं जाकर देखना [संगीत] होगा क्या हो गया आज दुकान पर बंद क्यों कर दी अरे आवश्यक कार्य है थोड़ी देर बाद आना और अपना सामान लेकर जा लो भाई देखो आज कल्याण भाई ने पहली बार अपना अनुशासन तोड़ा है दिन में ही दुकान बंद कर दी बहुत आनंद आया मित्रों किंतु अब मुझे जाना होगा गुरु जी का दिया कार्य जो करना है कुछ समय और रुक जाओ ना बल्लाल हा अब तो खेलने में भी कितने कुशल हो गए हो तुम हां कितना आनंद आ रहा है ु जाला अच्छा अच्छा ठीक है किंतु बस एक [संगीत] [संगीत] बार मुझे ज्ञात था वो यहां हो ही नहीं सकता वो अवश्य घर पर पढ़ाई कर रहा [संगीत] होगा हां समझ गया सब ईर्षा करते हैं मुझसे इसीलिए ऐसी बातें कहते [संगीत] हैं किंतु इसके मस्तक पर इतना स्वेद क्यों है पिताजी को कोई संदेह तो नहीं हो [संगीत] गया तुम पढ़ो बेटा गर्मी हो रही है मैं पंखा चल देता हूं किंतु पिताजी मैंने कार्य पूर्ण कर लिया पूर्ण हो गया तो अच्छा है अब मैं तुम्हें एक नया पाठ सिखाता हूं क्या पाठ पिताजी व्यापारी होने के नाते तुम्हें अपनी बात दूसरों से मनवाना आना चाहिए ऐसा क्या करना चाहिए कि तुम्हारी बात कोई भी ना [संगीत] टाले आओ [संगीत] व्यापार में कोई तुमसे असत्य कहे अपनी बात ना रखे तुम्हारा ऋण ना चुका है धन ना लौटाए तो उसमें भय जगाना आवश्यक होता है मैं आज तुम्ह दिखाऊंगा व किया कैसे जाता है च किसी को बल दिखाकर भयभीत करना तो वो करते हैं जो स्वयं दुर्बल होते हैं वो भी अपने पुत्र के सामने ऐसा कार्य कर करना इससे तो पुत्र के मन में सम्मान नहीं भय का भाव जाग जाएगा भय स्वतंत्रता छीन ले किसी को भी यंत्र वत बना देता है ऐसा ही हुआ बल्लाल के [संगीत] साथ [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] अब तो उसका जीवन और भी नियमित हो गया दिनचर्या का पालन करना ही उसका जीवन बन गया किंतु दिन का एक भाग ऐसा भी था जो भय से मुक्त था जब वो खिलखिला [संगीत] था स्वामी तो फिर प्रभु कब उस बालक की सुन उसे उसका बचपन लौटाने वाले थे समय आने पर ही सब होता है देवी ना उससे पहले ना उसके बाद और अब वह समय आ गया था जब बल्लाल प्रभु महा गनाधिपति के सामने आने वाला [संगीत] था क्या हुआ आज तुम गुरुकुल से श्री कल लट आए हा और आजकल हमारी और तुम देखते तक नहीं मित्रों को अपने भूल गए क्या क्या हुआ हमसे कुछ भूल हो गया है क्या या फिर हमने कुछ कह दिया नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है त फिर आओ ना खेलो ना हमारे साथ नहीं नहीं नहीं मैं नहीं खेल सकता पता था हमें कि तुम मना ही करोग लो ना खेलो ना नहीं मैं नहीं खेलूंगा खेलो खेलो खेलो [संगीत] खेलो कल्याण तो कहता था कि इसे खेलना अच्छा ही नहीं लगता परंतु इसे देखकर तो ऐसा नहीं लग [संगीत] रहा और भोला जी आज क्या दू कुछ चाहिए नहीं अपना बकाया चुकाने आया हूं तुम्हारा भी कुछ बकाया है जो मुझे चुकाना है क्या मेरा क्या बकाया हो सकता है भला तुमने असत्य कहा था ना मेरे पुत्र को लेकर कि वो खेल रहा है असत्य मैंने कहा था या आपने मान लिया है सत्य तो यह है कल्याण जी कि वह प्रतिदिन खेलता है और अभी अभी मैं उसे खेलता देख कर आ रहा हूं और इसमें बुरा ही क्या है अगर बच्चे नहीं खेलेंगे तो क्या हम खेलेंगे नहीं नहीं वो तो पढ़ रहा होगा क्यों ना अभी चलकर देख ले उचित है ठीक है [संगीत] [प्रशंसा] चलिए चलो [संगीत] चलो ये देखो कल्याण जीलाल पिताजी [संगीत] बलाल तो पिता के भैसे काप उठा [संगीत] [संगीत] है [संगीत] [संगीत] [संगीत] बलाल बल्लाल मेरे पुत्र बल्लाल मेरे पुत्र बल्लाल बल्लाल बल्लाल मेरे पुत्र बल्लाल बल्लाल पुत्र उठो पुत्र क्या हुआ तुम्ह बल्लाल देखो तो सही क्या हुआ मेरे पुत्र को भल्लाल स्वामी देखिए क्या हुआ बल्लाल उठो बल्लाल तुम्ह कुछ नहीं हो सकता बल्लाल उठो मेरे क्रोध ने क्या करवा दिया बल्लाल स्वामी बल्लाल उठो मेरा हृदय फटा जा रहा है आप ऐसे खड़े मत रहिए जाइए भैस को बुला के आए भल्लाल बल्लाल उठो मेरे पुत्र भल्लाल भल्लाल पुत्र [संगीत] बल्लाल [संगीत] उ [संगीत] इसकी तो सास रुक चुकी है अब वैद को बुलाने से कोई लाभ नहीं होगा बल्लाल मेरे पुत्र तुम मुझे छोड़ के नहीं जा सकते बल्लाल मेरे पुत्र स्वामी [संगीत] बला समय एवं आयु के अनुसार कार्यों में संतुलन बनाना जीवन में सफलता पाने के लिए आवश्यक है

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