[संगीत] महाभारत क्यों कन्हैया नींद नहीं आ रही है क्या किस चिंता ने घेर रखा है दाऊ मुझे चिंता सता रही है कि हस्तिनापुर में न जाने लोगों पर क्या बीत रही होगी वही बीत रही होगी जो हर युद्ध के पश्चात लोगों पर बीती है भूकंप आकर चला जाए तो क्या रह जाता है वही टूटी हुई छतें गिरी हुई दीवारें उजड़े हुए घर अश्रु बहाते हुए नेत्र और सिसकते हुए [संगीत] अधर किंतु यह सब कितना भयानक होता है ना ताओ इस युद्ध से भी अधिक भयानक जो स्थिति का कारण होता है और यह युद्ध कोई साधारण युद्ध नहीं था यह तो महाभारत का युद्ध था और इस महाभारत के युद्ध का कारण अधर्म था दाऊ और इस अधर्म का कारण तुम हो कन्हैया मैं भला मैं किस प्रकार अधर्म का कारण हो सकता हूं दाऊ अपने मन से पूछो कन्हैया ना तुम पांडवों के साथ होते और ना ही यह अनर्थ होता कदाचित आप ठीक कह रहे हैं दाऊ के अधर्म की जड़ मैं ही हूं धर्म की की जड़ तो कुल श्रेष्ठ भीष्म पितामह की वो प्रतिज्ञा थी जिसने उन्हें राष्ट्र के प्रति नहीं सिंहासन के प्रति निष्ठा बद्ध कर दिया था चाहे उस पर कोई महा पापी ही क्यों ना बैठा हो अधर्म की जड़ तो मैं ही हूं क्योंकि धर्म की जड़ तो कदाचित ताया श्री के उन पुत्रों में निहित थी जिसने उनसे भले बुरे की पहचान भी छीन ली थी अधर्म की जड़ मैं ही हूं क्योंकि धर्म का विशाल वृक्ष तो मामा शकुनी के उन पासों के सहारे खड़ा रहता है जिसका रहस्य केवल आप ही जानते हैं दाऊद धर्म की जड़ तो लक्ष गृह की उस राख में कहीं दबी पड़ी है जिसमें पांडवों को भस्म कर देने की योजना बनाई गई थी मैं बड़ा अधर्मी हूं दाऊ बड़ा अधर्मी हूं कि मैंने भरी सभा में एक अबला नारी को नग्नता से बचा लिया था क्योंकि उस सभा में उसका चीर हरण करने वाले सब के सब धर्म के रक्षक थे है ना दाऊ मैं मानता हूं कि कौरव ने कई अनुचित कार्य किए उन्होंने कई बार अपनी नीचता का प्रमाण भी दिया किंतु इसके उत्तर में तुमने क्या किया क्या तुम भी अपने स्तर से नीचे नहीं गिरे क्या तुमने भी छल कपट दाम दंड से काम नहीं लिया यदि कोई कीचड़ में खड़ा होकर आप पर पत्थर फेंक रहा हो तो उसे रोकने के लिए कीचड़ में जाना ही पड़ता है दा क्योंकि यदि कीचड़ में खड़े होकर पत्थर फेंकने वाले को यह विश्वास हो जाए कि कोई उजले और साफ वस्त्रों वाला कीचड़ की वजह से उसके पास नहीं आ सकता तो फिर वह पत्थर फेंकता ही रहेगा और जिस छल कपट दाम दंड भेद की आप बात कर रहे हैं दाऊ उसका प्रारंभ तो द्यूत क्रीड़ा और लाक्षा आपको याद है ना दाऊ तुम वो तो कर सकते थे जो मैंने किया और आपने क्या किया दाऊ तुम भली भांति जानते हो कन्हैया कि मैंने क्या किया मैंने निर्णय किया कि मैं इस युद्ध में किसी भी पक्ष का साथ नहीं दूंगा आप बधाई के पात्र है दाऊ आपने तो असंभव को भी संभव बना दिया मैं समझाने कृष्ण तुम क्या कह रहे हो दाऊ मैं यह कह रहा हूं कि जब युद्ध में एक पक्ष धर्म पर हो और दूसरा अधर्म पर तो उससे दूर रहना या अलग रहना अपने उत्तर दायित्व से मुंह मोड़ लेने के समान होता है आप तो धन्य है दाऊ कि आपने किसी भी पक्ष का साथ ना देने का निर्णय करके अपने दायित्व से बचने का बहाना ढूंढ लिया पर मैं ऐसा तो नहीं कर सकता था ना दाऊ क्योंकि मैंने तो धर्म की रक्षा के लिए ही धरती पर जन्म लिया है ना फिर भला मैं उससे कैसे दूर रह सकता था अब आप ही बताइए ना दाऊ कि क्या मैं भी आप ही की बाती धर्म की रक्षा से मुंह मोड़ लेती तर्क और विवेक में भला तुमसे कोई जीत सकता है कन्हैया दाऊ बात तर्क और विवेक की नहीं है बात जीतने और हारने की भी नहीं है दा बात केवल इतनी सी है [संगीत] दाऊ के प्रश्न जिस भाषा में पूछा जाए यदि उसका उत्तर उसी भाषा में ना दिया जाए तो प्रश्न पूछने वाले के लिए उत्तर समझना कठिन हो जाता है कौरव जिस भाषा का प्रयोग कर रहे थे वह छल और कपट की भाषा थी द यदि उसका उत्तर उसी भाषा में ना दिया जाता तो उनका अभिमान उसे समझने से इंकार कर [संगीत] देता दाऊ यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं प्रस्थान करूं क्यों तुम कहां जा रहे हो हस्तिनापुर कदाचित हस्तिनापुर को इस समय मेरी आवश्यकता है [संगीत] दाऊ आभार महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]
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