[संगीत] ये लीजिए ये आठ स्वर्ण मुद्राएं आप दोनों आपस में बांट लीजिए नहीं समान क्यों मैंने अधिक पूरिया दी है तो इन स्वर्ण मुद्राओं में मेरा भाग भी अधिक ही होगा चलिए ना मेरी रही ना आपकी इस विवाद का निर्णय माता पर छोड़ देते हैं गजा असुर द्वितीय को साथ और गणेश को मात्र एक स्वर्ण मुद्रा मिलनी चाहिए किंतु माता यह आपका कैसा निर्णय है गजा असुर द्वितीय मुझे तीन मुद्राएं देने के लिए तैयार थे और आप मुझे एक ही दे रही हैं हां पुत्र यही मेरी गणना है जिसे सृष्टि में कोई भी मनुष्य देवता या जीव समझ नहीं पाता किंतु मैं इसी के अनुसार जीवों के पाप और पुण्य की गिनती निर्धारित करती हूं ध्यान से सुनो गणेश की तीन कोरियों के नौ भाग हुए जिसमें से आठ भाग उसने स्वयं खाए और मात्र एक टुकड़ा उसने ऋषि पुलस को दिया और गजसुखदेसर [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] हरि ये तो धर्म उचित है मुझे मेरी स्वर्ण मुद्राओं का उचित भाग मिला किंतु तप का फल देने में ऐसे ही धर्म का पालन करेंगी ना देवी तुमने ऋषि पुलस से अधिक तप अवश्य किया है किंतु जिस प्रकार यहां तुमने दूसरों के साथ अपनी पूरियां बांटी वैसे तुमने अपने तप का प्रयोग दूसरों के उद्धार के लिए कहां किया है अपितु तुमने दूसरों को हानि पहुंचाई तुम्हारे विपरीत ऋषि पुलस ने अपनी तपो शक्ति का निस्वार्थ भाव से प्रयोग दूसरों के कष्टों को दूर करने के लिए इसीलिए उन्हें इसका पुरस्कार और तुम्हें अपने अपराधों का दंड तु मिलकर ही रहेगा आपने उचित कहा धर्म के अनुसार मुझे मेरी तपो शक्ति को संसार में बाटना था जिससे संसार का हित होता परंतु उसके विपरीत मैंने संसार का हित किया इसलिए मैं दंड का पात्र हूं [संगीत] किंतु समर्पण करना मेरे स्वभाव के विपरीत है इसलिए मैं अपना दंड युद्ध करके ही पाऊंगा वो क्या है ना हम असूर को कुछ भी बाटना कदा भी नहीं [संगीत] पाता यदि तुम जगत के कल्याण के लिए अपना कुछ नहीं बांट सकते तो तुम अपने कल्याण के लिए भी जगत से कोई अपेक्षा मत रखो बस बहुत हुआ बहुत उद्देश सुन चुका हूं मैं अब और नहीं सुनूंगा युद्ध करूंगा अपने तक को अपने कल्याण के लिए अपनी रक्षा के लिए प्रयोग करूंगा वही मेरा धर्म है और वही मेरा कर्म है जैसा बोगे वैसा ही पाओगे यही सृष्टि का नियम है तो फिर अब तुम भी अपनी मृत्यु के लिए तैयार हो जाओ मूर्ख अपनी तपो शक्ति को जागृत कर मैं उसे अपना कवच बनाऊंगा और फिर देखते हैं मेरा कप अधिक शक्तिशाली है या तुम्हारा [प्रशंसा] न्याय [संगीत] [संगीत] क्या हुआ र सफल हो गए ना तुम्हारे शस्त्र कुछ नहीं हुआ ना मुझे नहीं भेज सके ना मेरा कवच ताब नहीं शब मैं सबका सर्वनाश मैं इसका अंत करने की कोई युक्ति सोझी नहीं रही है अब तो मुझे प्रभु महा गधिचि [संगीत] हे प्रभु महा [संगीत] [संगीत] गधिचि ते रुद्र रूपाय करि रूपाय ते नमः विश्वरूप स्वरूपाय नमस्ते ब्रह्मचारी भक्त प्रिया देवाय नमस्तुभयम विनायक ओ सहित महा गणपत प्रणाम प्रभु महा गधिचि [संगीत] हे विघ्न हरता गणेश हे देवी गजा सुर द्वितीय की तपो शक्ति नहीं अपितु दिव्य संतुलन का ना होना है उसकी सुरक्षा का कारण संतुलन उग्रता और स्थिरता के मध्य क्योंकि उग्र होने पर बुद्धि स्थिर रहकर उचित उपाय नहीं सोच पाती और स्थिरता से प्राप्त होने वाली सुबुद्धि कभी-कभी कर्म पक्ष को शिथिल कर देती है हे देवी चंडी आप देवी आदि शक्ति का उग्र रूप है और गणेश स्थिरता के पर्याय आप दोनों को एक साथ आकर चंडी उग्र माता गणेश रूप में उग्रता और स्थिरता में संतुलन स्थापित करना होगा फिर इस गजा सुर द्वितीय का अंत कोई नहीं रोक [संगीत] सकेगा तपो शक्ति मेरी उससे बना कवच मेरा दृढ़ता मेरी कल मेरा अगा है विनाश के परे है तो मैं ही हूं सर्व शक्तिशाली सर्वो तो मैं अपना प्रतिशोध लेके रहूंगा पुत्र गणेश एक मा सबसे शांत सबसे स्थिर सबसे संतुष्ट सबसे पूर्ण तभी होती है जब उसकी प्रिय संतान उसकी गोद में होती है उसी प्रकार एक संतान भी तभी सर्वाधिक ऊर्जावान होती है जब उसे उसकी माता की गोद का आश्रय प्राप्त होता [संगीत] है दुर्ग दुर्गमा पहा दुर्ग ज्ञानदा दुर्ग दैत्य लोक तवान [संगीत] द दुर्गम दुर्ग मालो का दुर्ग मात्म स्वरूपिणी दुर्गमा प्रदा दुर्गम विद्या दुर्गमा शिता दुर्गम ज्ञान संथाना दुर्गम ज्ञान नी दुर्ग मोह दुर्ग म दुर्ग मा स्वरूप दुर्गमा सुर सह दुर्ग माधार दुर्ग माग दुर्गमता दुर्गम दुर्गम शवरी दुर्ग भीमा दुर्ग भामा दुर्ग भा दुर्ग दार दुर्ग भीमा दुर्ग भामा दुर्ग भा दुर्ग [संगीत] दार [संगीत] य भ ओम श्री गणेशाय नमः ओम गम प्रसाद नाय नमः ओम गंग गण पतय नमः ओम गजवक्र [संगीत] [संगीत] नमः [संगीत] जय जय जही तो मां और पुत्र श उ फिर भी कुछ नहीं होगा मुझे विनाश विनाश [संगीत] श रोज प्रवता माता शक्ति पुरी सर्व भूत ईश्वरी जय भूमा आही अनाद सर्व शक्ति [संगीत] [संगीत] सम यह माता की शक्ति और विनायक की बुद्धि का अद्भुत संयोग है [संगीत] ज [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] स मंगलंगल में शी सर्वा साथ के सर्व मंगल [संगीत] [संगीत] ओम श्री गणेशाय नमः ओ गम प्रसाद नाय नम मा आज आपने और गजानन श्री गणेश ने अपने जिस अद्भुत दिव्य लीला का प्रदर्शन किया है इससे य स्थल अति पावन होकर धाम बन गया है माता एव गणेश के इस रूप को माता कलो चडी विनय को रूप के नाम से जाना जाएगा एवं यह स्थान गजना धाम के नाम से प्रसिद्ध होगा गजना धाम की स्थापना गया क्षेत्र के निकट इसी पुल आश्रम के पास होग जहा माता च और विनायक की पूजा होगी आपके इस गज वेवरी या गौरी गणेश स्वरूप का ध्यान कर यहां आपकी पूजा करेगा उसे उसके सभी कष्टों से मुक्ति प्राप्त होगी कलो चंडी विनायक कीलो चंडी विनायक की कलो चंडी विनायक की देवी चंडी उग्र माता कलयुग में आप और विन हरता गणेश ही जगत के उ मंत्र का उच्चारण कर सृष्टि को अकाल से मुक्ति दिलाने के लिए माता का आवाहन किया था भविष्य में जो भी मां के इस रक्षा मंत्र का उच्चारण करेगा वह सभी प्राकृतिक आपदाओं और [संगीत] [संगीत] महामारिचयादी स्वधा [संगीत] नमोस्तुते करो चंडी विनायक की जय करो चंडी विनायक की जय करो चंडी विनायक की जय हे मां आज हमारी सहायता और समस्त सृष्टि की रक्षा करने के लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद अब बस एक आशीर्वाद और देने की कृपा कीजिए मां कि कल जो धर्म युद्ध आरंभ होने वाला है उसमें हमें सफलता [संगीत] प्राप्त विजय विजय [संगीत] विजय धन्यवाद मा प्रजापति महर्षि कश्यप से विजय भव का आशीर्वाद प्राप्त है मुझे मैं पराजित नहीं हो सकती मां आपका उपाय तो विफल हो गया हताहत हो गया गसर द अब कल के युद्ध में विजय होगी हमारी ही विजय [संगीत] होगी मेरे निर्णय अनुसार भानु कोपन को युद्ध के लिए [संगीत] तैयार मां सूर्योदय का समय हो रहा है अपने पुत्र को युद्ध के लिए तैयार होने में सहायता [संगीत] कीजिए मां आपको देखकर ऐसा लग रहा है जैसे कि आप मुझे लेकर चिंतित है किंतु यह चिंता व्यर्थ है दादी मां राज माता का मुझ पर और मेरे सामर्थ्य पर अटूट विश्वास है आप भी मुझ पर विश्वास कीजिए मैं विजय अवश्य होगा मैं तुम्हें समझा सकती तो अवश्य समझाती कि जिस महादेव पुत्र से तुम युद्ध करने जा रहे हो उनसे विजय प्राप्त करना असंभव समान है महादेव के पुत्र है [संगीत] वो मा त्रिदेव की शक्ति से युक्त मेरे दोनों दिव्यास्त्र ब्रह्मास्त्र और को मुझ पर गर्व हो पुत्र तुम्हे उन दादी मां की चिंता है जो तुम्हें इस भयंकर युद्ध में भेज रही है किंतु इस मां की नहीं जिसने तुम्हें जन्म दिया [संगीत] है पुत्र तुम्हारा इस युद्ध में जाना अनिवार्य है क्या हा है अनिवार्य उसका युद्ध में जाना असुर पुत्र है भानु कोपन तुम्हारे पिता के भाती देवता नहीं जो हमें निराश करेगा यह तो मेरा सौभाग्य है दादी मा कि आपने इस महान कार्य के लिए मुझे ही चुना शीघ्रता करो सूर्य की पहली किरण पढ़ने से पहले युद्धभूमि पहुंचना है [संगीत] [संगीत] इस प्रणाम प्रथम पूज्य गणेश जी मुझे स्वामी के लिए विजय व्रत आरंभ करने की अनुमति द प्रणाम प्रभु गौरी शंकर मुझे आशीष दे प्रणाम [संगीत] स्वामी [संगीत] कितना अद्भुत दृश्य कि प्रभु शिव और माता शक्ति के जुड़ाव के समान ही उनके चरणों में समर्पित पुष्प भी एक साथ जुड़ जाते [संगीत] हैं सर्वथा अतुलनीय प्रभु शिव और शक्ति की जोड़ी किंतु हम दोनों एक साथ कैसे दिखाई देंगे यह मोर पंख भ्राता ने आपके लिए ही छोड़ा था और मैं यह आशीष देता हूं कि यह एक दिव्य दर्पण में परिवर्तित हो जाएगा जिसमें आप अपने स्वामी को सदैव देख सकेंगी [प्रशंसा] [संगीत] भविष्य के उस शुभ दिन की एक झलक तो मैं इस दरप पर मैं देख ही सकती हूं प्रभु की वो दिव्य झलक जिस दिन उनका विवाह संपन्न [संगीत] [संगीत] होगा तोरे नैना मोरे नैना दोनों के है एक [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] नैना कौन किसके पदचाप है ये [संगीत] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] असुर सम्राट सुरा पद्मन की असुर सम्राट सुरा पदम की जय प्रभु सुब्रमण्यम काति के स्वामी की जय प्रभु सुब्रमण्य का के स्वामी की जय प्रभु सुजन का के स्वामी की जय प्रभु सुन का के स्वामी की जय [प्रशंसा] [प्रशंसा] देवताओं इसे कोई साधारण देवसर संग्राम समझने की भूल मत कर कि केवल र और अंबर कांप कर रह जाएंगे सुरास की मायावी असुरी सेना के नाद और पराक्रम से केवल सृष्टि नहीं संपूर्ण त्रिलोक का दहल ना तय है सुरास की मायावी माया में उलझ करर तुम सब के सब अनंत काल के लिए उसमें समा जाओगे स्मरण रखना देवताओ तुम्हारा सामना सुरास की सेना से उसी की माया नगरी महेंद्रपुरी में है बढ़ रहा है भानु गोपन अपने 16 सेनापतियों के साथ अब आकाश में छाई यह काली मा इन देवताओं के रक्त के प्रतिबिंब से लाल [प्रशंसा] होगी ओम सुब्रमण्यम कार्तिकेय स्वामी आरंभ हो रहा है धर्म और अधर्म का महायुद्ध आज जिसमें विजय धर्म की ही होगी प्रभु सुब्रमण्यम स्वामी की ही [संगीत] होगी अं विशेष दिन है आज जो सदा इतिहास के पृष्ठ पर अंकित रहेगा क्योंकि पूरे हृदय से धरा स्वागत करेगी अंबर से पुष्प वृष्टि होगी सृष्टि नए उत्साह से भरेगी त्रिलोक में सभी गर्व से भर जाएंगे क्योंकि युद्ध भूमि में आगमन हुआ है मेरे प्रभु सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी का जो आज अधर्म का सर्वनाश कर मद्र पुरी में धर्म की स्थापना [प्रशंसा] [प्रशंसा] करेंगे असुर सम्राट सुरा पन की असुर सम्राट सुरा पद्मन की असुर सम्राट सुरा पद्मन की ज असुर सम्राट सुरा पद्मन की जय असुर सम्राट सुरा पद्मन की असुर सम्राट सुरा पद्मन की [संगीत] जय [संगीत] प्रणाम परम ब्रह्म सुब्रमण्यम स्वामी प्रणाम देवी प्रणाम भूदेवी प्रभु आपने इस धर्म युद्ध का शंख नाप कर मेरी धरा से अधर्म को मुक्त करने का जो यह संकल्प लिया है उसके लिए मैं आपका हृदय से स्वागत करती हूं मैं भूदेवी आपका यह उपकार सदैव स्मरण [संगीत] रखूंगी [संगीत] [संगीत] को [प्रशंसा] इसका ऐसा आगमन जिसने महेंद्रपुरी तक को कंपित कर दिया 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