Wednesday, 31 December 2025

महागणपति ने महर्षि वेद व्यास को आशीर्वाद दिया Malkhan Uzair Basar Vighnaharta Ganesh Episode 623

पुत्र एक मां की ममता को इन सबसे तृप्ति नहीं मिलती उसे तो तभी मिलती है जब उसका पुत्र उसके निकट हो उसकी आंचल के छाव में हो उसकी दृष्टि के सामने हो पुत्र मैं तुम्हे यहां छोड़कर नहीं जा सकती पुत्र देवी पार्वती पुत्र कार्ति यहां अकेला कहां रहेगा पुत्र इस स्थिति का समाधान तो तुम दोनों ने ही सुझा दिया पुत्र कार्तिके तुमने अर्जुन वृक्ष के पत्रों और मलिका पुष्पों के साथ मेरी इतनी श्रेष्ठ पूजा की है इसलिए मैं अपने 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक की रूप में यही स्थापित होगा और तुम्हारी माता अपनी शक्ति स्वरूप स्वरूप देवी ब्रम लंबा के रूप में यहां स्थापित रहेंगी जो उनके 18 मुख्य शक्ति पीठों में से एक होगा यहां हमारी पूजा मलिक अर्जुन के रूप में और तुम्हारे कथन के अनुसार इस स्थान को दक्षिण पीठ कहा जाएगा महादेव जहां आपका वास वही नंदी का निवास इसलिए प्रभु मुझे कैलाश की भारती एक शक्तिशाली पर्वत के रूप में यहां स्थित होकर आपकी सेवा करने का अवसर प्रदान कीजिए धन्यवाद प्रभु [संगीत] [संगीत] सा [संगीत] मा पिता श्री यहां मल्लिकार्जुन रूप में स्थित होने के लिए आप दोनों का बहुत बहुत धन्यवाद भविष्य में यहां एक महान विशाल मंदिर की स्थापना होगी और यहां के भक्तों को आप दोनों की कृपा से आपके भारती दर्शनों का सुख प्राप्त होगा और यह स्थान सदा सदा के लिए दक्षिण कैलाश के नाम से जाना जाएगा और मैं यहां सदा आप की पूजा करता [संगीत] रहूंगा आइए देवी अब कैलाश चलने का समय हो गया है नहीं स्वामी कार्तिक को यहां अकेला छोड़कर जाना मेरे मन को कदापि स्वीकार नहीं किंतु प्रिय जब हमारे ज्योतिर्लिंग और शक्ति पीठ के रूप में हमारी शक्तियां यहां है तो वह हमसे दूर कहां है मैं समझती हूं स्वामी और मैं यह भी समझती हूं कि उसका एक बड़ा लक्ष्य है और उसको उसका कर्तव्य यही रहकर पूर्ण करना है इसीलिए वो कैलाश नहीं लौट सकता क तो मैं तो यहां रह सकती हूं ना स्वामी यदि आप कैलाश जाने की इच्छुक है तो जाइए कि तु मैं कार्तिके को यहां अकेला छोड़कर कदापि नहीं जाऊंगी अब मैं पार्वती को कैलाश लौटने के लिए कैसे तैयार [संगीत] करूं शाही की इन अंतिम बूंदों से आप कुछ ही शब्दों का लेखन कर सकेंगे गणेश [संगीत] जी इसके लिए तो माता भूमि देवी से ही प्रार्थना करनी होगी ताकि वो वचन अनुसार हमें और स्याही प्रदान करें [संगीत] हे माता भूदेवी हम सभी आपकी प्रार्थना करते हैं कृपया प्रकट होकर और भी स्याही प्रदान करने की कृपा [संगीत] करें [संगीत] अभिमन्यु का शरीर चक्र की प्रभा से उज्जवल तथा धूल राशि से सुशोभित था उसके हाथ में तेजोमय उज्जवल चक्र प्रकाशित हो रहा था उससे उसकी बड़ी शोभा हो रही थी उस रण क्षेत्र में चक्र धारण द्वारा भगवान श्री कृष्ण का अनुकरण करता हुआ अभिमन्यु क्षण भर के लिए बड़ा भयंकर प्रतीत होने लगा था कौरवों से घिरा हुआ अकेला अभिमन्यु होते हुए हिम्मत नहीं [संगीत] हारा एक बार लेखन आरंभ करने पर आप अपनी रचना का वाचन नहीं रोक सकते क्योंकि यदि ऐसा हुआ तो मैं लिखना रोक दूंगा थक गया हूं मैं अब आगे कैसे बोल पाऊंगा कुरुक्षेत्र का व युद्ध जिसमें अभिमन्यु ने महा पराक्रमी योद्धा की तरह युद्ध किया गजानंद ने जो अवस्था नियत की उसके पूर्ण होने में ही इस महाकाव्य की पूर्णता निर्भर है प्रिय आप समझने का प्रयास कीजिए क्या समझू स्वामी आप तो यही कहेंगे ना कि शक्ति पीर और ज्योतिर्लिंग की स्थापना से हम अपने पुत्र के निकट ही है और फिर मैं कैलाश क्यों नहीं लौटना चाहती हम इस रूप में उसके निकट तो रहेंगे किंतु वो फिर भी अकेला रहेगा वो अपने मन की बात किसके साथ बांटे का स्वामी जैसे हम दोनों एक दूसरे के साथ है उसके साथ कौन है प्रिय आपने ही व्यथा रखी और आपने ही उसका समाधान भी बता दिया समाधान कैसा समाधान हम दोनों को एक दूसरे का साथ प्राप्त है किंतु उसे किसका का साथ प्राप्त है यही मुख्य समस्या है ना उसी का समाधान करना है ना [संगीत] हमें अर्थात पुत्र कार्तिक का विवाह होना चाहिए आपने सर्वथा उचित कहा स्वामी फिर मैं आपके साथ कैलाश में चिंता रहित रहूंगी और कार्तिकेय और गणेश भी दोनों ही अकेले नहीं रहेंगे और यह तो उचित समय भी है हमें शीघ्र कैलाश लौटकर अ शीघ्र उसके लिए कन्या ढूंढनी चाहिए कार्तिकी के विवाह के सुझाव ने आपका निर्णय एक पल में बदल दिया देवी हां स्वामी क्योंकि आपका सुझा मेरे निर्णय से कहीं उत्तम [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] है [संगीत] [संगीत] फिर तो समस्त भोपाल के स्वामी वीर राजा दुर्योधन के धराशाई होने पर वहां बिजली की गड़गड़ाहट के साथ प्रचंड वायु चलने लगी धोली की वर्षा होने लगी वृक्ष वन एवं पर्वतों सहित सारी पृथ्वी कांपने [संगीत] लगी [संगीत] क्या हुआ मा अब हमें जाना होगा पुत्र किंतु तुम तनिक पर चिंता मत करो मैं तुम्हें कभी भी अकेला नहीं रहने दूंगी ज्योतिर्लिंग और शक्ति पीठ के साथ मैं स्वयं भी प्रत्येक पूर्णिमा पर अपने प्रत्यक्ष दर्शन प्रदान करूंगी और मैं प्रत्येक अमावस्या के [प्रशंसा] दिन आप दोनों को अपने माता पिता के रूप में पाकर मैं धन्य हो गया मैं किन शब्दों में आप दोनों को धन्यवाद करू कृपा कर मेरा नमन स्वीकार [संगीत] करें [संगीत] [प्रशंसा] प्रभु ने तो अपनी लिखनी रख [संगीत] दी प्रभु बजान आप उठ क्यों गए मैंने कहा था ना ऋषिवर जैसे ही आप बोलना समाप्त करेंगे मैं लेखन रोक दूंगा उचित है प्रभु क्षमा करें आपको दिए हुए वचन का मैं मान नहीं रख पाया किंतु कोई तो उपाय होगा कि आप आगे लिख सके अन्यथा यह महाकाव्य पूर्ण नहीं हो पाएगा प्रभु इसे पूर्ण करने में मेरी सहायता कीजिए प्रभु अब तो केवल एक ही खंड शेष है नहीं ऋषिवर नहीं ऋषिवर नहीं [प्रशंसा] ऋषिवर प्रभु अंतरध्यान हो गए अर्थात भारत में धर्म की महागाथा अधूरी रह गई इस प्रकार भविष्य में जीवों का मार्गदर्शन कैसे संभव इतना महत्त्वपूर्ण ग्रंथ अधूरा रह जाए यह तो उन्हे भी स्वीकार नहीं होगा तो नियति क्या है क्षमा करें प्रभु मैं अपना कर्तव्य अधूरा नहीं छोड़ सकता मुझे तो इस कार्य को पूर्ण करने का प्रयास करना ही [संगीत] होगा किंतु ऋषिवर बिना गजानन के ये कार्य कैसे करेंगे [संगीत] यह क्या इसका लेखन तो पूर्व में ही हो चुका है प्रभु ने मेरे बिना बोले ही इसे पूर्ण कर दिया संपूर्ण काव्य लिख दिया अद्भुत है आपकी लीला [संगीत] गजानन प्रभु आप तो बुद्धि के देवता है आपको समझने में कैसे से भूल कर दी मैंने जो श्लोक मेरे मुख से निकल रहे थे वो आपकी ही कृपा थी और जो मेरे मन में थे वो आप ही की कृपा के परिणाम थे जो मैं उत्पन्न कर रहा था व स्वयं आप ही तो करा रहे थे प्रभु अब मैं यह सत्य समझ गया हूं मुझे अपने ब्रह्म स्वरूप अर्थात महा ज्ञानेश्वर रूप में दर्शन देने की कृपा कीजिए दर्शन देने की कृपा कीजिए प्रभु कर्ष भने की कृपा [संगीत] कीजिए प्रभु [संगीत] प्रभु प्रणाम प्रभु [संगीत] [संगीत] हे ऋषि वैदिक साहित्य श्रेष्ठ है किंतु आने वाले युग कलयुग को ध्यान में रखकर आपने इसे सरल बना दिया इसलिए आपका यह महाकाव्य महाभारत कहलाएगा [संगीत] आपकी यह रचना मानव जाति के लिए मार्गदर्शक का कार्य करेगी धन्यवाद है ज्ञान बुद्धि और श्रुति के ईश्वर कि आपने मुझे और मेरी इस रचना को शुभाशीष [संगीत] दिया ऋषिवर मैं अपना कार्य संपन्न कर चुका तो क्या अ मुझे प्रस्थान करने की आज्ञा है अवश्य प्रभु प्रणाम ऋषिवर शीघ्रता कीजिए मुक जी अब जाकर निश्चिंता से मां के हाथों बने पकवान [संगीत] खाऊंगा देवी यहां नवीन दिव्य ऊर्जा संकेत दे रही है कि गणेश भी अपना कार्य पूर्ण कर शीघ्र लौटने वाला है बहुत सारे कार्य करने शीघ्रता तो हमें भी करनी होगी शीघ्र अपने पुत्र के लिए उचित कन्या ढूंढनी होगी हमें मैं जाकर विवाह उत्सव की तैयारियां करती [संगीत] [प्रशंसा] हूं गणेश जी का विवाह गणेश जी के लौटने पर सर्वप्रथम यह शुभ समाचार मैं ही उन्हें [संगीत] दूंगा [संगीत] नंदी जी गणेश [संगीत] जी प्रणाम गणेश जी आप उचित समय पर पधारे हैं मुझे आपको एक सूचना देनी है सूचना अच्छी होनी चाहिए नंदी जी यह मत कहिए कि भोजन समाप्त हो गया क्योंकि आपकी पोटली में से उसकी सुगंध मुझ तक पहुंच रही है यह कोई परिहास नहीं है प्रभु वास्तव में बहुत ब सूचना है पहले भोजन फिर सूचना नंदी जी प्रभु सुनिए तो अब अब कहां जा रहे हैं प्रभु सुन तो लीजिए यह सूचना सुनकर आप आनंदित होकर उछल पड़ेंगे अच्छा तो सुनाइए नंदी जी आपका विवाह होने वाला है माता और प्रभु आपके लिए उचित कन्या ढूंढ रहे [संगीत] हैं [संगीत] प्रभु मेरा विवाह यह क्या कह रहे हैं नंदी जी अवश्य आपसे कोई भूल हुई है आपने ठीक से नहीं सुना होगा नहीं नहीं प्रभु मैंने ठीक से सुना भी कहा भी और ना ही कोई भूल हुई है मुझसे यह तो शुभ समाचार है प्रथम पूज्य मैं मैं समझता हूं प्रभु इस शुभ समाचार को सुनकर तो किसी के भी मन लड्डू फूट इसीलिए तो कहता हूं कि अब मोदक खाने का नहीं अभी तू अभी तू खिलाने का समय है गणेश जी अब आप आप अपने मन में फूटते हुए मोद कों को समेट तब तक मैं जाकर अन्य लोगों का इस शुभ समाचार से मुंह मीठा करवाता [संगीत] हूं ओहो प्रथम पूज्य गणेश जी प्रथम आप ही शुभ समाचार के साथ अपना मुंह मीठा कीजिए फिर क्या जाने अवसर मिले ना मिले क्योंकि विवाह के पश्चात तो आपको वही खाना पड़ेगा जो आपकी पत्नी खिलाएगी आज्ञा दीजिए प्रभु मैं आता हूं प्रणाम क्या विवाह के उपरांत मैं अपनी इच्छा से भोजन भी नहीं कर पाऊंगा विवाह हुआ और स्वतंत्रता समाप्त प्रभु प्रभु प्रभु सुनिए तो वो देखिए प्रभु वहां आपकी होने वाली पत्नी क्या कहां है मेरी पत्नी मेरा अर्थ था विवाह के उपरांत वही तो होंगी ना वो प्रभु षक जी अनर्गल प्रलाप बंद कीजिए विवाह यह तो बहुत बड़ी समस्या है आज प्रथम बार मुझे किसी समस्या का हल नहीं सूझ रहा मैं तो उलझ गया हूं मैंने तो पहले ही कहा था प्रभु क्या क्या कहा था कि मत कीजिए क्या क्या नहीं करू यही महान कार्य बालक है किंतु बालको वाला कोई कार्य तो आप करते नहीं संपूर्ण संसार की समस्याएं हल करते हैं तो फिर सब आपको विवाह के योग समझेंगे ना ऐसा कौन सा महान कार्य कर दिया मैंने मूषक जी कि मां और पिता श्री मेरा विवाह करने पर तुल गए क्या नहीं किया है प्रभु आपने सब कुछ आप ही ने तो किया है दुष्ट असुरों का अंत और देवताओं की सहायता और तो और संसार के महानतम ग्रंथ महाभारत का लेखन तो अब आप ही बताइए आपको बालक कौन कहेगा भला जो हुआ सो हुआ किंतु अब क्या करूं उसका कोई सुझाव है हां हां क्यों नहीं प्रभु मेरी बुद्धि के पास तो सुझाव ही सुझाव है किंतु आपके लिए जो सर्वथा उचित है वो यह बताना और जताना कि आप एक नन्हे बालक है नन्हा बालक आपको अपने व्यवहार से यह दिखाना होगा कि आप अभी भी एक बालक है तभी तो आपका विवाह टल सकता है प्रभु उचित है किंतु मुझे उसके लिए करना क्या होगा बताऊंगा किंतु सर्वप्रथम आप वचन दीजिए कि जो कुछ भी मैं कहूंगा वो आप अवश्य करेंगे करूंगा सब कुछ करूंगा तो फिर आरंभ करते हैं नटखट बालक ब अभियान जिसका प्रथम कार्य होगा उत्पाती [संगीत] बनो सकारात्मक कार्य के लिए की गई स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से सदैव उत्तम फल की प्राप्ति होती है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...