Sunday, 28 December 2025

दुर्योधन युद्ध में चिंतित क्यों था Shaleen Bhanot Suryaputra Karn Episode 238 Pen Bhakti

[संगीत] धारा हो या वेगवुड रो से लड़ना होता है धारा से टकराना होता है यदि तैरना सीखना है तो डूबने के भय से उभरना होता है यही जीवन है ठीक इसी धारा नदी महासागर की भाति हमारे जीवन में हमारे समक्ष संघर्ष आकर खड़ा हो जाता है फिर हम सोचने लगते हैं कि इससे पार कैसे पाए हम सोचते हैं कि यह स्वयं समाप्त हो जाए परंतु संघर्ष या संकट स्वयं समाप्त नहीं होते उन्हें समाप्त करने के लिए उनसे जूझना पड़ता है इसलिए संघर्ष से बचना श्रेयस्कर नहीं जीवन में आगे बढ़ने के लिए आपको संघर्ष का सामना करना होगा आपके मौन रहने से संघर्ष हटे या ना हटे परंतु आपका विकास अवश्य अ वृद्ध हो जाएगा यहां द्वंद के पालन हेतु अपनों के साथ ही द्वंद करना पड़ रहा है मुझे तुम पर गर्व है कि तुम परम निष्ठा और साहस से अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हो किंतु यह मेरा दुर्भाग्य है कि तुम मेरे साथ नहीं मेरे विरुद्ध हो और इसी कारण आपके प्रहार को रोकना मेरा कर्तव्य बन जाता है प्र पिता [संगीत] पुत्री उत्तर मैं तुम्हें वचन देता हूं कि जब तक रणभूमि में यह गंगापुत्र खड़ा रहेगा तब तक तुम्हारा सौभाग्य और तुम्हारा सुहाग दोनों पर कोई आंच नहीं आएगी स्नेह और प्रेम के अतिरिक्त तुम्हें देने के लिए मेरे पास कुछ भी नहीं और इसके चलते मैंने तुम्हारी अर्धांगिनी उत्तरा को वचन दिया था कि जब तक मैं युद्ध भूमि में हूं तुम्हारे प्राण को संकट में नहीं आने [संगीत] दूंगा य क्या कह रहे पिता य युद्ध है और य हमारा शत्रु इसकी रक्षा नहीं करनी है आपको इसका कर है मुझे भली भाति स्मरण है दुर्योधन कि मुझे क्या करना है और क्या नहीं तुम्हारी ओर से युद्ध करना मेरा कर्तव्य है परंतु किसका वध करना है और किसका नहीं यह मेरा निजी अधिकार है [संगीत] पिता यदि आप इसी प्रकार पांडवों के मोह और वचनों से बने रहेंगे तो हम ये युद्ध हार जाएंगे पिता मा और यदि ऐसा हुआ तो उसके दोषी केवल आप और आपके यह वचन होंगे मेरे सामने से चले जाओ पुत्र क्षमा कीजिए प्र पिता मा जिस प्रकार मेरे प्रति आपका प्रेम भाव आपको मुझ पर आक्रमण करने से रोक रहा है उसी प्रकार मेरे परिवार के प्रति यह मेरा कर्तव्य है कि मैं आपको आगे बढ़ने ना दूं मैं तुमको क्षति नहीं पहुंचा सकता पुत्र परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि मैं आगे नहीं बढ़ सकता सर्थी साधू पुत्र किंतु अगली बार मत चूकना प्र पिता मा या तो द्वंद कीजिए या समर्पण कीजिए बस करो [संगीत] [संगीत] पुत्र [संगीत] अभी [संगीत] मंद अभी [संगीत] मंद अभी मंद मुझे रोक पाना भी सरल नहीं है पिता उत्तम अभिमन्यु अति [संगीत] उत्तम तारी ये क्या कर रहे हैं उन्हें अभिमन्यु पर प्रहार करना चाहिए था नहीं महाराज जिस प्रकार से महामहिम भीष्म हमारी कौरव सेना के साथ युद्ध में भाग लेने के लिए वचनबद्ध है उसी प्रकार से उत्तरा को दिए वचन से भी बंधे हुए हैं महाराज किंतु इस प्रकार क्या इस प्रकार युद्ध के मध्य में ऐसा करना उचित है यदि ऐसा ही चलता रहा तो पांडव ये युद्ध जीत जाएंगे सबसे महत्त्वपूर्ण सूचना भी यही है युवराज दुर्योधन सुरक्षित है [संगीत] महाराज और राजकुमार अर्जुन उनकी ओर बढ़ रहे हैं [संगीत] [संगीत] महाराज [संगीत] राजकुमार अर्जुन और युवराज दुर्योधन के रथ के पताका के मध्य कोई भी नहीं है महाराज ईश्वर ईश्वर मेरे पुत्र की रक्षा [संगीत] करना [संगीत] इसीलिए इसलिए मैं पिता मा के स्थान पर कण को चुन रहा था मामाश्री इसीलिए मित्र कण इनके फती पक्षी जोति तो नहीं लड़ता इनसे नहीं होगा मामा हमारे और बाकी महारथ कहा है [संगीत] आज यहां मित्र कण होता तो ऐसी परिस्थिति कभी उत्पन्न नहीं होती अब कड़ नहीं है तो कौन रोकेगा ऐसे [संगीत] [संगीत] कौन [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] मेरे मार्ग से हट जाओ रि आप भूल रहे हैं महारथी मैं उस वीर का अंश हूं जिसका रोम रोम आपको परास्त करने में सक्षम [संगीत] है हम यहां युद्ध करने आए और मैं अपने पिता को यह वचन देकर आया रण भूमि में मैं उनकी कमी की अनुभूति किसी को नहीं होने दूंगा मेरे माग से हट जाओ न मैं तुम पर प्रहार नहीं करना चाहता और ऐसा करने के लिए मुझे विवश मत करो आप द्वंद कम और बातें अधिक करते हैं पार्थ यदि तुम इस युद्ध को आज ही समाप्त करना चाहते हो तो एक बात का स्मरण रखना सूर्यास्त होने में बस कुछ ही समय शेष रह गया अपने सामने खड़ी बाधा पर प्रहार करो पाक यह मेरी अंतिम चेतावनी है न हट जाओ मेरे माग से चेतावनी देने में समय व्यर्थ मत कीजिए दंद कीजिए [संगीत] धनंजय [संगीत] प्रेंट कल्याण हो [संगीत] पुत्र तुम्हारा पुत्र तुम्हारे ही भाति कुशल योद्धा है [संगीत] क मित्र कण आज तुम्हारा पुत्र वो कता है जिस पर तुम्हें गर्व [संगीत] होगा शीघ्रता करो पार्थ सूर्यास्त में बस कुछ ही समय शेष है [संगीत] शीघ्रता करो पार सूर्यास्त में बस कुछ ही समय शेष है [संगीत] पर्वता स्त्र है पुत्र मुटिका स्त्र का प्रयोग [संगीत] करो सूर्यस्त होने वाला है व को कैसे [संगीत] जीते चड़ और मामा श्री सूर्यास्त होते ही इन पांडवों का विजय का स्वप्न भी अस्त हो जाएगा क्या होगा यदि तुम अपनी इस मूर्खता को एक ल में परिवर्तित कर दोगे तो क्या हो जाएगा वज्र व्यू की विशेषता क्या है दुर्योधन प्रहार केवल प्रहार परंतु रक्षा में असम जरा देखो दुर्योधन सभी योद्धा अपने राजाओं के साथ आक्रमण में है बिना किसी रक्षा नीति के हम इसका लाभ उठा सकते हैं दुर्योधन क्या होगा यदि तुम धर्मराज युधिष्ठिर को बंदी बना लो तो यदि पांडवों के जेष्ठ भ्राता युधिष्ठिर को हमने बंदी बना लिया दुर्योधन तो हमारी विजय निश्चित साम दाम दंड भेद अमाम विजयम निश्चित अमाम विजयम निश्चित दुर्योधन आपका विचार उत्तम है मामा [संगीत] [प्रशंसा] श्री असमान अस्त्रों के साथ द्वंद करना नियमों के विरुद्ध है धर्मराज स्मरण है ना आपको मामा श्री सामने आकर द्वंद कीजिए कायरो के भाती नहीं यद उसके लिए मैं हूं ना मैं उपस्थित हूं यदि तुम य चाहते हो तो मैं तत्पर हूं बान परंतु स्मरण रखना तुम्हें परास्त करने का अर्थ यह है कि इस युद्ध पर पहली विजय हुई और इसकी विपरीत परिस्थिति का भी यही परिणाम होगा रा दुर्योधन अवश्य [संगीत] [संगीत] न्या नाम अधिकार नाम रामम [संगीत] राज साधु पुत्र [संगीत] साधु [संगीत] आशा है इस युद्ध के पश्चात तुम जैसा योग्य और वीर राजा हस्तिनापुर को [संगीत] मिलेगा अरे अरे अरे सदेव कहां चलती है शुभ कार्य करने जा रहे हो ना मामा श्री का आशीर्वाद नहीं लोगे आओ प्रणाम [संगीत] करो षड्यंत्र रचते समय आपकी तलवार जैसे जीप तो बहुत चलती है मगर आज आपकी तलवार कैसे फिसर रही है मामा श्री नहीं दुर्योधन वो क्या है ना सहदेव हर वस्तु अपने समय से चलती [हंसी] [संगीत] है सावधान पुत्र अब तो पड़ [संगीत] आएंगे प्र [संगीत] सेन [संगीत] [संगीत] कोई जाकर उस पताका को ले आओ धन मेरे साथ युद्ध में व्यस [संगीत] जाओ सब केवल तेरी अंतिम सीके सुनेंगे अंतिम [संगीत] की अरे कोई रोको उस बालक को [संगीत] भारत

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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