Wednesday, 31 December 2025

भगवान परशुराम के क्रोध का कारण क्या था Sankat Mochan Mahabali Hanuman 354 Pen Bhakti

[संगीत] पुत्र सत्ता और शक्ति का मद जब शीष पर चढ़ जाता है तब मनुष्य न्याय अन्याय के भेद को भूल जाता है और अपनी इच्छा पूर्ति के लिए वह आसुरी वृत्ति तक अपना लेता है और यह भी विचार नहीं करता कि कभी भी स्थाई नहीं होती मद मनुष्य को पतन के मार्ग पर ले जाता है माता कार्तवीनते से मदान कार्तवीं द अग्नि के पुत्रों एवं जनद अग्नि का वध करने की आज्ञा अपने सैनिकों एवं पुत्रों को दे दी यह तो बड़ा ही अनर्थ हो गया माता हां पुत्र विनाश काले विपरीत बुद्धि जब तक ऋषि जन्म दग ने कुछ कर पाते कार्तवीं सैनिकों ने देवी रेणुका के समक्ष ही ऋषि जन द अग्नि एवं उनके पुत्रों का वध कर दिया और कामधेनु गाय को बलपूर्वक खींच कर ले गए देवी रेणुका अपने पति एवं पुत्रों के शव देखकर आर्त नाद हो उठी और पुकार उठी अपने पांचवें पुत्र परशुराम को [संगीत] माता यह क्या हो गया यह मा विनाश जैसे कोई भूचाल आया हो दिव्य गो काम धनु भी नहीं है [संगीत] [संगीत] पुत्र मता [संगीत] [संगीत] रेना कातिवीर अर्जुन मैं जमद गनी पुत्र परशुराम शपथ लेता हूं मैं अपने पिता की इस निर्ज दे की तुम्हारे वंश का समूल नाश करूंगा मैं जितने आघात तुमने मेरे पिता और भाइयों की देह पर किए हैं उतनी बार मैं तुम जैसे अभिमानी और अत्याचारी राजाओं का सहार करूंगा इस रा से रक्त कर दूंगा मैं क्षत्रियों के रह से पूर्ण पृथ्वी को और इसका आरंभ होगा तुम्हारे विनाश से कार्ति वीर [प्रशंसा] [संगीत] अर्जन [संगीत] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] यह क्या हो रहा है अकस्मात ये भूकंप सट अभिमानी कार्थ वर अर्जुन निकल कर आओ अपने राज महल से बाहर निरी और निहत ऋषियों का वध करने वाले क्रूर कार्थ बर मैं परशुराम आज तुम्हारे वंश का समूल नाच करूंगा [संगीत] कातिवीर अजु किसकी ललकार है [संगीत] ये दुष्ट ऋषि पुत्र तुम्हारा इतना दुसा कि सहस्त्रार्जुन कातिवीर के भवन में आकर सहस्त्रार्जुन को ललकार रहे हो अवश्य ही तुम्हारी मृत्यु तुम्हें यहां खींच लाई है दुर्बुद्धि कार्थ मृत्यु तो तुम्ह खाच लाई थी मेरे पिता श्री के आश्रम पर जहां तुमने रक्तपात की निर्मम क्रीड़ा की काम धनु ग के लिए तुमने मेरे पिता श्री और भ्राता का वध कर दिया यदि वो मुझे ना रोकते तो उनका वध ना होता ऋषि पुत्र इस राज्य में जो भी है वो मेरी संपत्ति है मैं यहां का राजा हूं कामधेनु भी मेरी थी मैंने उसे छीन लिया मेरे पिता श्री और भराओ का जीवन भी तुम्हारी संपत्ति थी इसीलिए छीन लिया तुमने उनका जीवन नहीं का कि वेर मूल्य चुकाना होगा तुम्हे रक्त से रक्त का और यह मूल्य चुकाए तुम्हारा सारा वंश ऋषि पुत्र बहुत बढ़ चढ़कर बोल रहा समाप्त कर दो इसे और पहुंचा दो इसे इसके पिता और बताओ के [संगीत] [प्रशंसा] पास मेरा [संगीत] पुत्र मूल्य चुकाना होगा तुम्हें मेरे पिता के रक्त का मेरे पुत्रों का वध किया तुमने ऋषि पुत्र मैं तुम्हें ऐसी मृत्यु दूंगा कि मृत्यु भी काप उठेगी तो उठेगी तुम्हारी आत्मा कातिर मेरा सामना करोगे तुम तुच्छ ऋषि पुत्र शास्त्र बाहु हूं मैं सहस्त्रार्जुन कार्ति वीर्य देखो मेरी सहस्त्र भुजाएं क्षण भर में मसल के रख देंगी तुम्ह गरजने वाले में बरस्त नहीं है कार री सहस्त्र बुझाए लता वल्लयो की तरह काट कर रख देगा मेरा पर्सों आओ दिखाओ अपनी सहस्त्र भुजाओ का [प्रशंसा] [संगीत] बल मेरी यह गदा तुम्हारे शीष के टुकड़े टुकड़े कर देंगी ऋषि पुत्र [प्रशंसा] [संगीत] [हंसी] क्या [संगीत] [संगीत] [संगीत] [हंसी] [संगीत] [संगीत] ना नाश होगा इसी प्रकार समस्त अत्याचारी राजाओं [संगीत] का [संगीत] ओम जाम विम महावीराय महा तत्वा धीमहि तन्नो परशुराम प्रचोदयात तन्नो परशुराम प्रचोदयात ओम जाम्या विद्महे महावीराय महा तत्वा धीमहि तन्नो परशुराम प्रचोदयात तन्नो परशुराम प्रचोदयात [संगीत] कार्तवीं से विहीन किया और इस प्रकार प्रभु परशुराम ने संपूर्ण पृथ्वी से अत्याचार को समाप्त किया सत्य है माता ऐसे ही अत्याचार का अंत करने के लिए प्रभु श्री हरि अवतार धारण करते हैं तो देखा कितने उग्र क्रोधी एवं बलवान थे प्रभु परशुराम और किस प्रकार धरती को पाप के बोध से मुक्ति दिलाई प्रभु परशुराम ने अब बताओ हनुमान इस अवतार कथा से तुमने क्या सीखा यही की माता कि राजा प्रजा का स्वामी नहीं सेवक होता है राजा का प्रथम कर्तव्य होता है कि वह अपनी प्रजा की आवश्यकताओं को जानकर उनकी पूर्ति करें ना कि प्रजा एवं उनकी वस्तुओं से स्वार्थ सिद्धि करें और यदि कोई ऐसा करता है उसे अपनी करनी का फल भोगना ही होता है तो हनुमान तुम्हारे भी कर्तव्य निभाने का समय आ गया [प्रशंसा] है माता मैं आपके कथन का आशय नहीं समझ पाया पुत्र जब मैं तुम्हें प्रभु श्री हरि के सातव अवतार के बारे में बताऊंगी तुम शीघ्र ही मेरे कथन का आशय समझ जाओगे हनुमान प्रभु विष्णु जी का सातवां अवतार जन्म ले चुका है पृथ्वी पर प्रभु का सातवा अवतार माता शीघ्र बताइए ना कौन थे वे प्रभु शीघ्र बताइए ना माता उन प्रभु के बारे में हां हा हनुमान बताती हूं प्रभु श्री नारायण का सप्तम अवतार है प्रभु श्री राम अवतार राम राम प्रभु श्री राम राम [संगीत] राम [संगीत] राम राम [संगीत] राम यह नाम तो जैसे हनुमान के हृदय पर अंकित है माता ऐसा क्यों प्रतीत हो रहा है हनुमान को जैसे राम नाम जन्म जन्मांतर से उससे संबंधित है माता राम राम राम हरि नाम भजने से जो सुख प्रहलाद जी को प्राप्त हुआ था वही सुख प्रभु श्री राम नाम के स्मरण एवं उच्चारण से हनुमान को उसी सुख का अनुभव हो रहा है राम राम मुझे ज्ञात है पुत्र प्रभु राम से अपनी भेट की स्मृति तुम भूल चुके हो परंतु प्रभु मिलन का दिव्य अनुभव उससे उत्पन्न भक्ति की उमंग कोई कैसे भूल सकता है तुम्हारे हृदय के कण कण में व्याप्त है वह माता हनुमान को बताइए ना राम नाम के प्रति ऐसा अमित आकर्षण क्यों है हनुमान को राम राम ऐसा प्रतीत होता है हनुमान के हृदय से भक्ति की निर्मल धारा फूट पड़ी हो जो अश्रु बनकर उसके नेत्रों से प्रवाहित हो रही हो पुत्र प्रभु श्री राम की से उनकी भक्ति ही तुम्हारी नियति है संभव है इसीलिए तुम प्रभु राम नाम से इतने प्रभावित हो आपके वचन अत्यंत सुखदायक है माता प्रभु श्री राम की सेवा का अवसर पाकर हनुमान का जीवन भी धन्य हो जाएगा परंतु माता हनुमान जैसे साधारण वानर बालक प्रभु श्री राम की सहायता कैसे करें पुत्र प्रभु की लीला के रहस्य समय आने पर ही ज्ञात होते हैं पुत्र हनुमान प्रभु विष्णु जी ने परशुराम अवतार लेकर अत्याचारी राजाओं के साथ पृथ्वी से कु विचार और कुकर्म भी मिटा दिए परंतु जैसे जैसे त्रेता युग में और समय व्यतीत हुआ मनुष्य जाति पुनः अधर्म और दुराचार में लिप्त होने लगी अधर्म माता पुत्र संसार में स्वार्थ काम क्रोध मोह मद जैसे निकृष्ट भावनाओं का प्रभाव छा गया जिनसे प्रभावित होकर मनुष्य अनेक कुकृत्य करने लगे जैसे धर्म की अवमानना असत्य वचन बोलना पराय स्त्री एवं पराय धन का हरण करना ऋषि मुनियों पर अत्याचार अनुष्ठान का पालन ना करना और ऐसे दुष्कर्म को बढ़ावा देने वाले दुष्ट हैं असुर सम्राट रावण और उन के भाई कुंभकरण अर्थात अपने द्वितीय जन्म में श्रापित जय और विजय ओ माता इसका अर्थ है उन चार ऋषि कुमारों के श्राप से प्रभावित होकर व दोनों इस जन्म में भी प्रभु श्री हरि के परम शत्रु बने हां पुत्र प्रभु के शत्रु अर्थात वो दोनों मानवता एवं मर्यादा के भी शत्रु है पुलस के पुत्र होने के कारण रावण को ज्ञान प्राप्ति में अत्यधिक रुचि है परंतु उसकी माता केक्सी राक्षसी कुल से है इसीलिए उसमें आसुरी वृत्तियों की अधिकता है अपने कुत्सित वृत्तियों से प्रेरित होकर वह अपने कु कर्मों से पृथ्वी वासियों और देवताओं को भी निरंतर प्रताड़ित करता है उस दुष्ट पापी रावण का संघार करने के लिए प्रभु विष्णु जी को अवतार लेना ही था प्रभु श्रीरा के रूप में परंतु धीरज रखो पुत्र मैं तुम्हें सब विस्तार से बताऊंगी अयोध्या के रघुवंशी राजा दशरथ पुत्र सुख से वंचित होने के कारण अत्यंत दुखी थे इस यज्ञ के भव्य आयोजन में समस्त देवता भी आमंत्रित [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] थे [संगीत] हे प्रभु ब्रह्मदेव दुष्ट रावण अपनी समस्त सीमाए लांग चुका शीघ्र उसका अंत नहीं किया तो देवराज आप निश्चिंत रही आपको चिंता मुक्त करने के लिए स्वयं प्रभु री हरि विष्णु नर अवतार धारण करने [संगीत] वाले प्रणाम [संगीत] ब्रह्मदेव देवेंद्र प्रभु ब्रह्मा जी से प्राप्त वरदान के अनुसार दुश रावण का अंत मात्र कोई नर या वानर ही कर सकता है इसीलिए महाराज दशरथ के इस यज्ञ के पूर्ण होने पर मैं उनके जेष्ठ पुत्र के रूप में जन्म लूंगा और दुष्ट रावण का संहार [संगीत] [संगीत] करूंगा [संगीत] [संगीत] महा प्रतापी महाराज दशरथ मैं प्रजापत्य पुरुष आपको यह आशीष देता हूं कि पुत्रों की प्राप्ति की आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी देवताओं द्वारा बनाई गई इस दिव्य खीर के प्रसाद को अपनी पत्नियों में बांट दीजिए उनके इस दिव्य खीर के प्रसाद के ग्रहण कर लेने से शीघ्र आपके राज प्रसाद में पुत्रों की किलकारियां गूंज उठेंगी [संगीत] ज्ञान व्यक्ति को संपूर्ण और समर्थ बनाता है और उचित मार्ग की ओर अग्रसर करता है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...