Wednesday, 31 December 2025

ब्राह्मण ने हनुमान की सारी शक्तियां क्यों मांगी Sankat Mochan Mahabali Hanuman 312 Pen Bhakti

[संगीत] कहिए यह केसरी नंदन हनुमान क्या सेवा कर सकता है आपकी मुझे तुमसे दान चाहिए नहीं हनुमान तुम्हारी समस्त वरदानी शक्तियों का मैं प्रवर मेरी शक्तियों से आपका क्या प्रयोजन सिद्ध होगा कौन है आप मेरा कार्य करते समय आप धर्म और अधर्म के चक्कर में नहीं उलझ ब्राह्मण अपना परिचय देगा तभी उसे दान प्राप्त होगा दान देना है तो अपनी समस्त वदानी शक्तियों का सदैव के लिए मुझे दान दे दो अन्यथा लौटा दो उस ब्राह्मण को नारायण नारायण यदि रावण का कपट सफल हुआ और हनुमान ने इस पाखंडी ब्राह्मण को अपनी शक्तियां दान कर दी तो घोर अनर्थ हो जाएगा नारायण नारायण ये अन्याय है वाली को उसके दो वरदान के साथ हनुमान द्वारा उसकी माता को दिया गया वचन वि रक्षित कर रहा है ऐसे में अपनी वरदानी शक्तियों से वंचित हनुमान यह युद्ध कैसे कर पाएगा रावण के इस कुटिल षड्यंत्र के परिणाम स्वरूप हनुमान का जीवन संकट में पड़ सकता है इस समय मुझे हनुमान की सहायता करनी ही होगी मैं इस कुशा को तुम्हें सौंपते हुए दान की पवित्र प्रक्रिया प्रारंभ करता हूं हनुमान अपनी समस्त वरदानी शक्तियां मुझे दे दो हनुमान मात्र एक दिवस के [संगीत] लिए अरे यह मेरी जीवा को क्या हुआ सदैव के स्थान पर मात्र एक दिन के लिए इसकी शक्तिया मांगी मैंने माता सरस्वती की जय हो आपने उस पाखंडी ब्राह्मण की बुद्धि को प्रभावित कर खोर अनर्थ होने से बचा लिया नारायण नारायण यह क्या मांग रहे हैं आप ऋषिवर क्या आपको ज्ञात नहीं हनुमान का युद्ध बाली के साथ शक्तियों से वंचित निर्बल युद्ध भूमि में महा बलशाली वाली का सामना कैसे कर पाएगा मेरा पुत्र हनुमान प्रतीत हो रहा है आपको स्वयं हनुमान से दान लेने में तनिक संकोच हो रहा [संगीत] है आप यह कृत्य स्वेच्छा से नहीं कर रहे हैं अवश्य वाली भैया या फिर उनके सहयोगी ने आपको बाध्य किया है तुम्हें कुछ भी प्रतीत हो हनुमान अपने वचन को पूर्ण करो तुम्हें दान देना है तो दो अन्यथा स्पष्ट मना कर दो मैंने दान प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है अब दान संकल्प पूर्ण करने का दायित्व तुम्हारा है हनुमान युद्ध से पूर्व आपने इस शक्तियां मांगकर दान मर्यादा को भंग किया है अर्थात हनुमान आपको दान देने के दायित्व से निवृत है आश्चर्य आश्चर्य है मुझे आपके इस दान धर्म के नवीन व्याख्या पर महाराज केसरी जी ब्राह्मण का इतना अपमान अपने वचन का तिरस्कार कर रहे हैं सुमेरू के युवराज हनुमान वचन देने के उपरांत दान रहित रिक्त हाथ लौटा रहे हैं इस ब्राह्मण को महारानी प्रणाम महारानी प्रणाम किष्किंदा महारानी एक ब्राह्मण ऋषि ने युवराज हनुमान की समस्त वरदानी शक्तियों को दान में मांग लिया है क्या हनुमान के भाव से परिचित हूं मैं उस ब्राह्मण की इच्छा अवश्य पूर्ण करेगा अपनी समस्त शक्तिया उसे प्रदान [संगीत] करते [संगीत] रुक जाइए वि [संगीत] प्रवर मैं दान का संकल्प पूर्ण करने के लिए प्रस्तुत हूं विप्र व जी यह क्या कह रहे हो पुत्र हनुमान ऐसा मत करो पुत्र यह अवश्य वाली की कोई चाल [संगीत] है पिताश्री मैं दान धर्म की मर्यादा को भंग नहीं कर सकता अपने पास है ब्राह्मण को त नहीं लौटा सकता मैं पिताश्री आप ही कहते हैं जो धर्म का अनुसरण करते हैं उनका कोई अहित नहीं [संगीत] होता हनुमान निडर होकर अपने धर्म का पालन करेगा [संगीत] वि प्रवर आपकी इच्छा अनुसार आज के श्री नंदन [संगीत] हनुमान मैं आज आपको एक दिवस के लिए अपनी समस्त वरदानी शक्तियां दान करता हूं दान करता हूं करता अपनी समस्त मदानी शक्तिया दान करता हूं दान करता [संगीत] मैं देवराज इंद्र तुम्हें वरदान देता हूं आज से किसी भी वज्र का कोई भी प्रभाव तुम पर नहीं पड़ेगा तुम्हे वरदान देता हूं कि तुम सदैव मेरे वरुण पाश और जल से सुरक्षित रहोगे नदी समुद्र या कोई भी जल तत्व तुम्हें किसी प्रकार से क्षति नहीं पहुंचाएंगे [संगीत] मैं अग्निदेव तुम्हें वरदान देता हूं कि कितनी भी भीषण अग्नि हो उसकी ज्वाला तुम्हें किसी भी प्रकार से हानि नहीं पहुंचाएगी मुझ धना अध्यक्ष कुबेर का वरदान तुम कभी भी युद्ध में विषाद नहीं रहोगे तुम कभी भी विचलित नहीं होगे युद्ध में कभी भी आसुरी शक्तियों से तुम्हारी पराजय नहीं होगी मेरे दंड से भी तुम सुरक्षित रहोगे तुम्हें वरदान देता हूं तुम इच्छाधारी हो जब जैसा रूप धारण करना चाहोगे तुम कर [संगीत] सकोगे मैं तुम्हें चिरंजीवी होने का वरदान देता हूं मेरे भी अस्त्र शस्त्र से तुम्हें कभी कोई क्षति नहीं होगी दहिक देविक और भौतिक तीनों ताप से तुम्हे मुक्त करता हूं दन धर्म का कर मान हनुमत करते शक्ति का दान हनुमत शक्ति का है सागर विप्र भरत है अपने का अब शक्ति विहीन होकर बलशाली वाली से कैसे युद्ध करेगा मेरा पुत्र आ आ हनुमान मेरे [प्रशंसा] पुत्र अपनी शक्तियां प्रदान करके तुमने उचित नहीं किया पुत्र किष्किंदा महारानी जी को वचन दे दिया हनुमान तुम मुझे वचन दो कि तुम हमेशा सुग्रीव की रक्षा तो करोगे ही किंतु तुम्हारे और वाली के मध्य कभी युद्ध की स्थिति बनी तो तुम उसका वद नहीं करोगे महारानी मां मैं आपको वचन देता हूं कि आपने जैसा कहा है वैसा ही होगा इंद्रदेव की शक्ति वाला कंठ हार बाली को लौटा दिया और [संगीत] हम और आज आज अपनी समस्त शक्तिया एक ब्राह्मण को दान कर दी यह कैसा भोलापन है पुत्र आप कैसे युद्ध करोगे बाली [संगीत] से [संगीत] मां मां मैं विपरीत परिस्थितियों में होकर धर्म के मार्ग को नहीं छोड़ सकता था यह मुझे आपसे और पिताश्री के आचरण से सीख प्राप्त हुई है मां मैं भयभीत होकर धर्म की मर्यादा का व्यवहार नहीं छोड़ सकता था ठीक है तो अब तुम पुत्र धर्म निभाओ तुम युद्ध नहीं करोगे मां मैंने वचन दिया है मेरी कथनी और मेरी करनी मैं भेद नहीं कर सकता चचन को रखने के लिए मैं उस युद्ध भूमि में जाने के लिए बेवश हूं मां पुत्र पुत्र हनुमान मैं भी य नहीं चाहता कि तुम वाली के छल से अपने बल खोकर उससे युद्ध करो पिताश्री आप मुझे मत रोकिए मैं मात्र अपनी वरदानी शक्तियों से वंचित हूं आप दोनों का आशीर्वाद तो है मेरे [संगीत] साथ मां पिताश्री आप मुझे आशीर्वाद दीजिए कि मेरे माध्यम से इस युद्ध में धर्म की ही विजय [संगीत] हो [संगीत] प्रतीत होता है जैसे मेरी माता श्री को गलानी सता रही है कहीं उस मर्कट से सहानुभूति तो नहीं हो रही है महारानी अब तो आपको अत्यंत आनंद का अनुभव हो रहा होगा अब तो आपके वचन से बाधित हनुमान की सारी शक्तियां भी चली गई अब आपके पुत्र वाली को हनुमान से कोई भय नहीं अभी भी समय है हनुमान को अपने वचन से मुक्त कर दो आप न्याय परता और उदारता का परिचय दे सकती हैं आप सत्य कह रहे हैं स्वामी मुझे अभी इसी क्ण हनुमान को अपने वचन से मुक्त कर देना चाहिए कहां जा रही है माता श्री उस मर्कट के पास नहीं नहीं ऐसा अनर्थ मत करिए आप शीघ्र ही आपके मातृत्व की विजय होने वाली है आपका पुत्र महानतम वाली अवश्य आज युद्ध में उस मर्कट को परास्त कर देगा छोड़ दो मुझे वाली तुम मेरे पुत्र कहलाने योग्य नहीं हो योग्य हूं अथवा अयोग्य हूं तो आपका पुत्र ना मेरे प्रति आपका क्रोध मेरे लिए अधा स्नेह का प्रमाण है आप मेरी मां है यह कैसे भुला सकती हैं [संगीत] आप और यदि आप भुलाना चाहेंगी तो भी आपका पुत्र आपको यह अवसर नहीं देगा आपको सौगंध है मेरे मस्तक की आप उस हनुमान मर्कट को अपने वचन से मुक्त नहीं [संगीत] करेंगी मुझे ज्ञात है आप ये प्रतिज्ञा कभी नहीं तोड़ेंगे [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] एक दिवस ही सही तुम्हारी वरदानी शक्तियां तो गई मर्कट अब देखता हूं कब तक युद्ध भूमि में खड़े रहते हो हनुमान के पास वरदानी शक्तिया नहीं है तो क्या हुआ माता श्री और पिता श्री का आशीर्वाद तो है उसके [संगीत] साथ

No comments:

Post a Comment

ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...