Wednesday, 31 December 2025

बाल हनुमान को माता से दूर क्यों होना पड़ा था NirbhayWadhwa MahabaliHanuman Episode 197 PenBhakti

[संगीत] [संगीत] [संगीत] आ परिहास कर रहे हैं आप संतान तो मां का अभिन्न अंग होती है एक मां अपनी संतान का दान कैसे कर [संगीत] सकते वैद्यराज आप मेरे पुत्र को स्वस्थ कर सकते हैं तो हम इसे स्वस्थ करने के लिए ही आए हैं किंतु आपको अपना वचन निभाना होगा [संगीत] मेरे पुत्र की दशा देख रहे हैं आप ऐसी स्थिति में एक मां अपने पुत्र को स्वयं से दूर कैसे कर सकती है पुत्र की कुशलता के लिए ही तो मां सब कुछ करती है शुल्क देने का वचन हमने अवश्य दिया था [संगीत] आपको उपचार का जो शुल्क चाहिए ले लीजिए वैधराज जी किंतु माता-पिता की पीड़ा को समझिए यदि आप हनुमान का उपचार कर सकते हैं तो यही कीजिए वचन दिया है आप अपने अब आज अपने ही वचन से विमुख हो रहे हैं एक मां की विव का लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं आप आप भी तो नारी है एक मां की पीड़ा समझ सकती है समझाइए वैद्यराज जी कोस बहुत हो गया अपमान हमारा वचन ना निभाने का परिणाम अनस कारी भी हो सकता है परिणाम चाहे जो भी हो मैं अपने पुत्र को स्वयं से दूर नहीं करूंगी वचन देना ही नहीं चाहिए यदि आप वचन निभा ही नहीं सकती [संगीत] [संगीत] परंतु मुझे जो निभाना है वो मैं निभा के ही [संगीत] रहूंगा सर्वनाश कर दूंगा अयोध्या का हाहाकार मचा दूंगा अयोध्या में हाहाकार मचाने के लिए तत्पर है यह मालवानो आगे बढ़ो रुक जाओ लंकेश गुरुदेव प्रणाम गुरुदेव प्रणाम गुरुवर अच्छा हुआ आप आ गए विजय का आशीर्वाद दीजिए लंकेश तुम विजय की ओर नहीं विनाश की ओर जा रहे हो विनाश पा अवश्य होगा गुरुदेव परंतु आपके शिष्य रावण का नहीं उस नर रूपी नारायण का कदाच तुम भूल रहे हो ऋषि अरण्य का श्राप क्या तुम्हें स्मरण नहीं है कि अयोध्या में पांव भी रखा तो श्राप के कारण तुम्हारा अंत हो जाएगा उित कह रहे हैं आप गुरुदेव परंतु उस नर रूपी नारायण का अंत भी तो अशक है रावण मैं दैत्य हूं दानवों और राक्षसों का गुरु इन सब की आशा भरी दृष्टि तुम पर टिकी हुई है दशान इसलिए तुम्हें कोई भी विवेक हीन कार्य करने से रोकना मेरा कर्तव्य है आपका कथन सत्य है गुरुदेव परंतु यदि तुम्हारे हाथों उस नारायण के अवतार की मृत्यु होगी तो वह अयोध्या में नहीं हो सकती यदि उसका वध करना है तो उसे विवश करना होगा कि वह लंका में आए तुम्हारे हाथों उसकी मृत्यु लंका की भूमि पर ही हो सकती है और कहीं नहीं यही विधि का विधान है [हंसी] लंकेश सत्य कह रहे हैं आप गुरुदेव मैं तो अभी से ही देख सकता हूं वो नर रूपी नारायण और उसका भाई मृत पड़े हुए हैं लंका की भूमि पर मैंने स्वयं उन्हें अपने इन्हीं हाथों से मृत्यु दी है ओम अगना स्वाहा स्वा स्वाहा स्वाहा स्वाहा अब जेष्ठ महारानी कौशल्या है जिससे आगे की विधि आरंभ की [संगीत] जाए [संगीत] आपको यज्ञ के लिए बुलाया जा रहा है जस्ट रानी जी तुम मुझे कौशल्या या रानी जी ही कहा करो जेष्ठ संबोधन में अपना पन सा नहीं लगता सुमित्रा किंतु आपके प्रति श्रद्धा और सम्मान मुझे आपका नाम लेने नहीं देगा तुम्हारे श्रद्धा भाव को मैं जानती हूं [संगीत] सुमित्रा ये कैकई अभी तक नहीं आई या क्या आरंभ होने वाला है आप पहुंच और यज्ञ विधि आरंभ कीजिए मैं मंत्रा से कहकर रानी कैकई को यज्ञ के आरंभ होने की सूचना [संगीत] दे [संगीत] जय लंकेश प्रणाम दैत्य गुरु त तुम्हे तो मैंने अयोध्या भेजा था क्या सचना लाए हो लंकेश अयोध्या में समस्त सूर्यवंशी रति यज्ञ कर रहे हैं उन्होंने शपथ ली है जब तक यज्ञ चलेगा तब तक कोई भी सूर्यवंशी अस्त्र शस्त्र नहीं उठाएगा यदि यह यज्ञ सफल हो गया तो राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र को युवराज पद की प्राप्ति हो जाएगी प्रसन्न कर दिया तुमने रावण को गुप्तचर शुभ संकेत है यह तो अब रावण से अयोध्या के सूर्यवंश हों और नर रूपी नारायण को कोई भी नहीं बचा सकता पिशाच राज शराज को भेजूंगा मैं अयोध्या में यज्ञ का विस्व करने के लिए दूर वंश का वध करने के लिए और फिर उस नर रूपी नारायण का अपहरण करके उसे यहां लंका में लाने के लिए राम [संगीत] राम राम राम राम [संगीत] नारायण अवतार की सूचना पाकर रावण ने अन्य बालकों का वध करना तो रुकवा दिया है किंतु अब वो अयोध्या पर आक्रमण करने के लिए अपने विशेष राक्षसों की सेना भेज रहा है हां महेश्वर अयोध्या में तो सबने निरुती यज्ञ के लिए नि शस्त्र रहने की शपथ ग्रहण कर ली है अब प्रभु श्री राम की रक्षा कौन करेगा आप सबकी चिंता निरर्थक नहीं इस स्थिति में प्रभु राम की रक्षा एक मात्र हनुमान ही कर सक [संगीत] राम ज रा रे [संगीत] धरेरा रे धरे [प्रशंसा] धरे महादेव बन गए हैं रुद्र करे रुद्रांश को वहन अंजनि का इकलौता लाल करता था जो मन को निहाल मां का जीवन धन हनुमान बिछड़े जैसे निक से प्राण मां के अश्रु हो रहे व हनुमत को बस राम से [संगीत] अर्थ सुनना सबका करना मन का मंत्र यही है मंथरा का महारानी कैकई यज्ञ में कितने अतिथि गण उपस्थित होंगे कुछ तो साथ श्रृंगार कर लीजिए हां रानी जी जेष्ठ रानी जी ने यह वस्त्र और आभूषण भेजे हैं आपके लिए आज के दिन के लिए ही तो उन्होंने विशेष रूप से आपके लिए बनवाए थे इन् करके आप बहुत सुंदर लगेंगी सुंदर दिख करर मैं क्या करू मेरा राम वो तो उदास और जब तक राम उदास है मेरा मन कैसे लगेगा साथ श्रंगार किंतु महारानी कई इस प्रकार वहा महाराज के सामने पुराने वस्त्रों में मैं ऐसी ही भली सेविकाओं यह सात श्रृंगार का सामान तुम सब ले जा किंतु मैं रानी जी को क्या उत्तर दूंगी उन्हे उत्तर मैं दे दू जाओ तुम [संगीत] सब महारानी कई कई सुनना सबका करना मन का महारानी कैकई आपसे बड़ी अभिनेत्री तो पूरे संसार में नहीं होगी लगता है भरत मुनि से नाट्यशास्त्र का प्रशिक्षण लिया है आपने मत तुम तो मेरे मन के मंत्र को भली भाति जान तभी तो मंत्रा नाम है तुम्हारा वो तो ठीक है महारानी कई कई किंतु तनिक सच सवर लेती महाराज देखेंगे तो क्या सोचेंगे देखिए जल दर्पण में आपका मुखड़ा कैसा लग रहा है ठीक ही है तुम्हारा [संगीत] अनुमान हमारे भलाई के लिए इस यज्ञ का रोकना आवश्यक है उस यज्ञ स्थल पर जाकर ही हम यह उपाय ढूंढेंगे कि यज्ञ भंग कसे किया हाथ मेरा अनुमान अभी भी कामिनी कुरंग नैना विलासिनी लग रही हू मंत्र महाराज के लिए मेरी इतनी सुंदरता भी पर्याप्त है चले चलो नमामी शमीन निर्वाण रूपम विभु व्यापकम ब्रद स्वरूपम निम निर्गुण निर्विकल्पम निहम चिता का शमा काश कासम भजेहम निराकार ओमकार मनम रियम गरा ज्ञान गोती तम शम कशम करणम महाकाल कालम कपालम गुणा गार संसार पारम म ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय न शिवाय नम शिवाय ओम नमः शिवाय नम शिवाय नवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय प्रियम शंकर सर्व नाथम भजामि प्रियम शंकर सर्व नाथम भजामि प्रियम शंकर सर्व नाथम भजामि प्रियम शंकर सर्व नाथम भजामि प्रियम शंकर सर्व नाथम भजामि प्रियम शंकर सर्व नाथम भजामि ओ नम शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव प्रयम शंकर सर्व नाथम भजामि प्रयम शंकर सर्व नाथम भजामि प्रयम शंकर सर्व नाथम भजामि प्रयम शंकर सर्व नाथम बजावे ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय हर मैं अपने पुत्र को नहीं ले जाने दूंगी इस स्नेह रीति का बड़ा पुण्य प्रताप मिलेगा जीवन मार्ग निष्क रहेगा सूर्यदेव की भाति कीर्ति प्रका विस्तार पाएगा सूर्यवंशी शिरोमणि कहलाएगा यह यज्ञ राम के युवराज बनने में अत्यंत आवश्यक [संगीत] है और यदि रीति यज्ञ में किसी भी प्रकार का विघ्न पड़ा और यह यज्ञ रुक गया तो राम कभी युवराज नहीं बन पाएंगे बड़ी होने का कब तक लाभ उठाती रहेंगी जेष्ठ रानी जी स् स्वाहा स्वाहा स्वाहा स्वाहा कैसे बैठी है महाराज के साथ सुनना सबका करना मन का मंत्र यही है मंथरा का आज वो जेष्ठ बनकर सबका लाभ उठा रही है कल उनका पुत्र लाभ उठाएगा भले ही कुछ पलों से ही सही किंतु जेष्ठ तो वो है ही सबसे कैसी बातें कर रही हो तुम मंत्रा इतना मत सोचा करो [संगीत] सुनना सबका करना मन का मंत्र यही है मंथना [प्रशंसा] [संगीत] का कोई मेरी बात सुनता नहीं किंतु मंथरा का मंत्र तो यही कहता है कि इस यज्ञ को रोकना ही होगा ना सबका कहना मन [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] का मेरे लल तुम्ह मैं किसी को अपने से दूर नहीं ले जाने दूंगी मैं जानती हूं तुम भी अपनी मां के बिना नहीं रह पाओगी कह दो कि मैं नहीं जाऊंगा अपनी मां को छोड़ नम शिवाय ओम नम शिवाय य ओ नम [संगीत] शिवाय कह दो इनसे कह दो कि तुम नहीं जाओग महारानी जी अपने वचन का पालन कीजिए जाने दीजिए हनुमान को हमारे कैसे जाने इसकी दशा तो देखी एक तो अबोध बालक ऊपर से व्याधि से इसे तो इतना भी ज्ञात नहीं कि ये सदैव के लिए हमसे दूर जा रहा वेदराज य कुछ दिनों के बाद तो तो सध के लिए हम भी अपने हनुमान के बिना नहीं रह पाए [संगीत] बस आप सब अपराध कर रहे हैं वचन तोड़ने का

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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