[संगीत] [संगीत] बड़ा ही अद्भुत है यह काल स्तंभ पुत्र हनुमान मां पुत्री अंजना यह तो तुम्हें भी ज्ञात था कि अनिमेश व्रत में निरंतर सूर्यदेव प्र दृष्टि टिकाए रखने से मनुष्य जीवन भर के लिए दृष्टिहीन हो सकता है [संगीत] हनुमान को इस परीक्षा के कारण समस्त वदानी शक्तियों को त्याग करना पड़ा था किंतु तुमने कठोर संयम के साथ इस व्रत का पालन किया उसी ने हनुमान को बल प्रदान किया और वह संकट से मुक्त हो पाए मेरा व्रत सफल रहा मेरा पुत्र संकट से मुक्त हो गया [संगीत] पुत्री तुम्हारे नेत्र तो चले गए आप क्यों विलाप कर रही है मां मेरे नेत्रों की ज्योति चली गई तो क्या हुआ माता-पिता के नेत्रों की ज्योति तो उनकी संतान ही होती है मेरा पुत्र जब आएगा ना तो उसकी दृष्टि से मैं पूर्ण संसार [संगीत] देखूंगी ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान पूर्ण हो गया माता का व्रत संकट मुक्त हुए हनुमत सुखी रहे उनकी संतान माता करती है बलिदान खोई नेत्रों की ज्योति तब भी है सुख अनुभूति पुत्र जीवन रहे सुरक्षित रहती माता सदा समर्पित ये गांधा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महा पुत्री अंजना आज तुमने यह सिद्ध कर दिया कि एक मां अपने पुत्र की कुशलता के लिए कुछ भी कर सकती है मां ऐसी ही होती है ऋषिवर मैंने तो केवल अपना कर्तव्य निभाया है माता-पिता के नेत्रों की दृष्टि उनकी संतान होती [संगीत] है [संगीत] [संगीत] हम [संगीत] प्रणाम गुरु माता आयुष्मान भव पुत्र हनुमान तुम यहां एकांत में क्या कर रहे हो तुम्हारे काल स्तंभ को इस तरह निहारने से प्रात शीघ्र नहीं हो जाएगी पुत्र आप उचित ही कह रहे हैं गुरु माता [संगीत] हनुमान क्या हुआ पुत्र तुम इतने उदास दिखाई दे रहे हो कोई विशेष बात है क्या पुत्र गुरु माता ना जाने क्यों मुझे व्याकुलता सी हो रही है मुझे हर ओर मां ही मां दिखाई दे रही है ना जाने आज क्यों मां की इतनी चिंता हो रही है किंतु मैं अपनी शिक्षा पूर्ण किए बिना उनके पास नहीं जा सकता ऋषिवर अंजना की दृष्टि वापस लाने का कोई तो उपाय होगा कोई उपचार महाराज केसरी अनिमेश जैसे कठोर ब्रत से नष्ट हुई दृष्टि को वापस लाने का उपचार कदाचित असंभव है सेनापति कहीं तो किसी के पास होगा इसका उपचार जाइए राज्य भर से आसपास के पड़ोसी राज्यों से योग वैद को ढूंढ कर लाइए शीघ्र जाइए अवश्य महाराज अब हमें आज्ञा दे ऋषिवर आप सबका कल्याण चलो अंजना चलो हनुमान तुम चिंता छोड़कर अपनी शिक्षा पर ध्यान दो और तुम्हारी माता भी तो यही चाहती है ना कि तुम अपनी शिक्षा पूर्ण करके उनके पास लौटो हां गुरु माता मुझे आशंका हो रही है कि इतने अल्प समय में मेरी शिक्षा पूर्ण हो भी पाएगी या नहीं हनुमान की आशंका सत्य है देवी संज्ञा प्रणाम शिक्षा प्रदान करने के लिए समय बेहद ही अल्प शेष है मैं भी समय के नियम से बंधा हूं संध्याकाल के पश्चात और प्रातकाल के पूर्व मैं तुम्हें शिक्षा नहीं दे [प्रशंसा] सकता अन्यथा काल कुम क्षेत्र से लौटते ही मैं तुम्हारी शिक्षा आरंभ कर देता कोई बात नहीं गुरुदेव मैं शीघ्र से शीघ्र आपके द्वारा दिए गए ज्ञान को आत्मसात करने का प्रयास करूंगा मुझे तुम पर विश्वास है हनुमान कि तुम शीघ्र अपनी शिक्षा पूर्ण कर लोगे बस अब कोई अन्य बाधा ना आए उस वानर बालक की शिक्षा को रोकने के लिए एक मात्र यही उपाय है अश्व सहित सूर्य देव के रथ की चोरी सत्य कह रहे हैं लंकेश सूर्यदेव का रथ नहीं होगा तो सूर्योदय नहीं होगा और प्रात काल से साइन काल तक शिक्षा प्रदान करने के नियम से बंधे सूर्यदेव शिक्षा ही नहीं दे पाएंगे और इस कार्य में आपको पातालियो गी हनुमान की शिक्षा रोकने के लिए मैं किसी की भी सहायता करने के लिए प्रस्तुत हूं मेरे पुत्र के साथ हुए अन्याय का प्रतिशोध लेने के लिए यही एक सर्वोत्तम उपाय है सूर्यदेव के रथ और घोड़ों के स्थान के बारे में बताऊंगा और वह देव मंत्र भी दूंगा उन्हें अपने मंत्रों के साथ प्रयोग करके वह सूर्यदेव के अश्व पर भी नियंत्रण कर लेगी तो फिर इस शुभ कार्य में विलंब कैसा आज ही इस कार्य को संपन्न करते [संगीत] [संगीत] हैं [संगीत] [संगीत] ब क्या हुआ तराज आप चुप क्यों [संगीत] है आप कुछ बोलते क्यों नहीं नहीं क्या आप अंजना के नेत्र की ज्योति वापस ला [संगीत] सकेंगे आप सब तो महान विद्वान वैद है क्या अनिमेश व्रत के द्वारा गई हुई नेत्र की ज्योति वापस लाने का कोई उपचार नहीं है आपके पास क्षमा कीजिए मा अनिवेश व्रत के समय सूर्य के महाते से गई हुई दृष्टि को हम वापस नहीं ला सकते इसका उपचार असंभव है हमें आज्ञा दीजिए स्वामी स्वामी कहां है आप मैं यही हूं [संगीत] प्रिय स्वामी मैं यही हूं तुम्हारे पास स्वामी मैं जानती हूं कि आप और सब मेरे लिए बहुत दुखी हैं किंतु दुखी होने की कोई आवश्यकता नहीं मुझे तो सबसे अधिक सुख का आभास हो रहा है सुख का [संगीत] आभास मेरा मन बहलाने के लिए कह रही [संगीत] हो नेत्रों की ज्योति जाने से सारा जीवन अंधकारमय हो जाता है तुम्हारे दुख तुम्हारी पीड़ा की कल्पना का आभास है मुझे स्वामी जब देख सकती थी तो सदा कुछ ना कुछ देखकर मन यहां वहां भटकता रहता था किंतु अब मैं मात्र आपको और हनुमान को ही देखती हूं आप दोनों में ही मेरा मन लगा रहता है सच मानिए स्वामी मुझे तनिक भी दुख नहीं हो रहा है [संगीत] ना जाने हनुमान पर क्या बीतेगी जब व तुम्हें इस अवस्था में [संगीत] देखेगा आपको देखने का बहुत मन हो रहा है मां कैसी है आप जाओ पुत्र अपने गुरुदेव के पास जाओ अपने जीवन की प्राप्त कर अपनी शिक्षा दीक्षा पूर्ण कर कर मैं तुम्हारी प्रतीक्षा [संगीत] करू अपनी मां का स्मरण रख जब भी मेरा मन तुम्हारे मुख चंद्र को देखने के लिए व्याकुल होगा मैं आकाश में स्थित इस चंद्र को देख [संगीत] मां मेरी शिक्षा पूर्ण होने में बस चार दिन ही शेष है जब मेरी शिक्षा पूर्ण हो जाएगी तो मैं सीधे आपके पास आ जाऊंगा एक पल भी नहीं रुकूंगा सीधे आपके पास आऊंगा मां मैं पूरे मनोयोग से अपनी शिक्षा पूर्ण करूंगा बस कोई अन्य बाधा ना [संगीत] आए इतनी रात्रि को कौन हो सकता है हम दिव्य अश्व अति सुंदर लग रहे हो तुम सब किंतु मुझे बड़ा दुख है क्योंकि तुम सबकी बलि देनी होगी मुझे यहां से ले जाऊंगी मैं तुम [संगीत] सबको तुम सबके नाम गायत्री बहती उनी जगती टुप अनुष्टुप पंक्ति तुम सूर्य देव के सात [संगीत] अश देव की साथ किने जगत को आलोकित करने वाला प्रकाश अब तुम सब शक्ति बनोगे लंकेश [संगीत] की शांत अश्म [संगीत] शांत अधिक मत उछल अश्व शीघ्र ही तुम मेरे और वरुण देव के बताए हुए मंत्रों में बंद कर मेरे नियंत्रण में होगे कौन है वहां कौन है वहां प्रणाम गुरु माता क्या हुआ पुत्र तुम अभी तक विश्राम के लिए नहीं गए मुझे निंद्रा ही नहीं आ रही थी किंतु आप यहां इस समय क्या कर रही हैं मैं तो यहां अशु की देखभाल के लिए आई थी किंतु तुम यहां कैसे आ गए वह मुझे इतनी रात्रि को किसी की ध्वनि सुनाई दी थी तो मुझे शंका हुई तो मैं चला आया मेरे अतिरिक्त अन्य कौन यहां आ सकता है तुम्हारी सजगता यह सिद्ध करती है कि तुम कितने अच्छे शिष्य हो और यही सजगता तुम्हारे भावी जीवन में काम आएगी किंतु अब जाकर तुम विश्राम करो तभी प्रातः काल में तुम शिक्षा के लिए पूर्ण ऊर्जा और स्फूर्ति के साथ प्रस्तुत हो पाओगे उचित है गुरु माता [संगीत] [संगीत] प्रणाम [संगीत] ओ मनस्त मान आयुषी मान मानो अव मानोरा रुद्र भामन र विमत सदम हवामहे ॐ अस्त पट अब वरुण देव का दिया गया मंत्र और इसके बाद य सभी अश्व मेरे वश में होंगे गुरु माता के होते हुए भी समस्त अश्व इतने व्याकुल और अशांत क्यों है देखता हूं पुनः ये क्या क्या हो रहा है वहां कौन है आप यहां क्या कर रही है [संगीत] ये क्या किसी ने गुरु माता का र्म भेज बनाकर ल से गुरुदेव का रक्ष चुरा लिया है कौन हो सकता है यह मुझे पता लगाना ही होगा
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