[संगीत] नंदी जी तो महा वेग से पृथ्वी की ओर बढ़ रहे हैं यदि यह पृथ्वी से टकरा गए तो सृष्टि का अंत निश्चित है मुझे अलम किसी भी प्रकार से नंदी जी को रोकना होगा नंदी जी के मार्ग में आने से स्वयं हनुमान के जीवन को क्षति पहुंच सकती है महाराज किसी को कोई क्षति नहीं पहुंची सभी के प्राण सुरक्षित है जी महाराज काका केसरी हनुमान ने सुमेरू को इस घोर संकट से बचाकर चमत्कार कर दिया धन्य है मित्र हनुमान हनुमान ने हम सबकी सुरक्षा तो कर दी किंतु मेरा हृदय मेरे लाल की सुरक्षा के लिए विचलित है मुझे प्रति हो रहा है जैसे किसी घोर विपदा ने उसे घेर लिया है अन्यथा वह अपनी मां से मिलने अवश्य आता हनुमान तो संकट मोचन है माता अंजना हर विपदा का निदान सहजता से करना उन्हें आता है आप मित्र हनुमान की चिंता मत करिए वह अवश्य ही किसी जगत कल्याण का कार्य कर रहे होंगे वो शीघ्र ही यहां आते [संगीत] होंगे [संगीत] हमारा संचय सही निकला हनुमान अपने प्राणों की चिंता कि पृथ्वी की रक्षा करने के लिए स्वयं नंदी जी के मार्ग स्थ हो परंतु नंदी जी में समाहित भगवान महादेव के शक्ति के वेग को इस प्रकार थामने का प्रयत्न करना तो हनुमान के लिए भी संभव नहीं हे महेश्वर हे रुद्र रुद्रा हनुमान की रक्षा तो केवल आप ही कर सकते हे प्रभु रक्षा [संगीत] की कुदृष्टि उतारने से कुछ नहीं होगा महारानी अंजना बड़ा संकट आने वाला है आपके पुत्र पर ब उपाय करना हो मुझे ज्ञात है कि हनुमान कठिनाइयों से संघर्ष कर उन पर विजय प्राप्त कर सकता है किंतु मैं भयभीत हूं मेरा हृदय उसकी सुरक्षा के लिए विचलित है गौरी की गैया ने मुझे सचेत किया था कि हनुमान पर कोई बड़ी विपदा आने वाली [प्रशंसा] [संगीत] है [संगीत] [संगीत] आ ये भयानक ध्वनि कैसी और ये पृथ्वी पर उत्पन्न कंपन क्या था ऐसा प्रतीत हुआ पृथ्वी अपनी धुरी से उतर गई है जैसे सृष्टि का संतुलन बिगड़ गया हो यह अवश्य ही किसी बड़े अनिष्ट का संकेत है ये पृथ्वी को क्या हुआ ऐसा भूकंप कैसे उत्पन्न हो गया कि महानतम वाली गिरते गिरते बचा देवता गण वही हुआ जिसका हमें भय था हनुमान सुरक्षित है या नहीं इसी क्षण का विचार करते ईश्वर ने अपनी चिंता व्यक्त की थी उन्हें ज्ञात था कि यह घटना घटित होगी हनुमान विवश होकर नंदी जी के महावेद के मार्ग में स्थित होगा परंतु क्या हनुमान इस आघात के प्रभाव को सह पाएगा हनुमान तो अचत होकर नीचे गिर [संगीत] रहे मेरा हनुमान कहां है अभी तक आया क्यों नहीं मुझे बहुत चिंता हो रही है कहीं उसके साथ कोई अनिश नहीं हो गया हनुमान हनुमान मेरा हनुमान मेरा हनुमान आकाश से गिर रहा है वो मुझे सुन क्यों नहीं पा रहा है हनुमान हनुमान अचत होकर गिर रहे हैं ह क्या क्या हो राज हनुमान को हनुमान हनुमान हनुमान हनुमान मेरे क्या हो मेरे पुत्र को उठाइए इसे हनुमान हनुमान पुत्र हनुमान नेत्र खोलो पुत्र देखो तुम्हारी मां तुम्हें पुकार रही है हनुमान तुम सारे संसार के संकट हते हो सबकी इच्छा पूर्ण करते हो अपनी मां की भी व्यथा दूर कर दो नेत्र खोल दो पुत्र नेत्र खोल [प्रशंसा] हनुमान अचेत है मेरा पुत्र नेत्र नहीं खोल रहा क्या किसी के पास इसका उपचार नहीं है हम सबकी सेवा करता है हनुमान कोई भी स्वस नहीं कर सकता महाराज मुझे मेरा पुत्र स्वस्थ और सकुशल चाहिए शक्र देखो ना तुम्हारा मित्र हनुमान मेरी पुकार सुन भी नहीं पा रहा मा से बोलिए ना इसे बोली अपने नेत्र खोले अंजना हो जाएगा रे रखो हे ईश्वर मेरे पुत्र को ठीक कर दीजिए मेरे पुत्र को लौटा दीजिए [संगीत] ईश्वर नहीं कुछ नहीं होगा मेरे पुत्र को संकट मोचन है कोई भी संकट इसे परास्त नहीं कर सकता शीघ्र स्वस्थ हो जाएगा मेरा हनुमान हनुमान देखो तुम्हारे मित्र तुम्ह बुला रहे हैं हा हनुमान अपने नेत्र खोलो और हमारे साथ क्रीड़ा करने के लिए चलो मित्र तुम्हारे सरल परिहास के लिए लहित है हम उ अरे वाह मर्कट ने तो मेरा कार्य सरल बना दिया स्वयं गिरकर अचेत हो गया है अब तुम सब करो विलाप परंतु यह मर्कट अब कभी भी जागृत नहीं हो पाएगा और यदि ऐसी कोई संभावना होगी तो मानत भाली उसे भी निष्फल कर देगा [संगीत] अपने मित्र खोलो मित्र नहीं होगा मेरे पुत्र को कुछ नहीं होगा मैंने देवी मां का पुत्र जीवी का व्रत रखा है देवी मां हनुमान की रक्षा करेगी मेरा विश्वास खंडित नहीं होगा देखना देखना अभी हनुमान अपने नेत्र खोलेगा अपनी भोली वाणी से मुझे पुकारेगा मां मां मारुती तनिक सा छुप गया और आप रोने लगी हे देवी मां मेरे पुत्र का जीवन आपके हाथों में है मेरी आस्था की लाज रखिए बा अन्यथा कोई भी मां अपनी संतान के लिए कभी व्रत नहीं रती कोई भी मां अपनी संतान के कभी वत नहीं [संगीत] रभी प्रणाम प्रभु प्रणाम माता यह कैसा अनर्थ हो गया प्रभु मैंने अपने महा वेग से सुमेरू को तो संकट से बचा लिया किंतु मुझे रोकने के लिए मेरे मार्ग में आकर हनुमान को क्षति पहुंची है महादेव हनुमान अचेत हो गए हैं निरंतर सबका भला करने वाले हनुमान को इस अवस्था में देख पाना मेरे लिए संभव नहीं है उन्हे पुन चेतन कर दीजिए प्रभु हे प्रभु हे माता हनुमान की रक्षा कीजिए नंदी जी मैं स्वयं हनुमान को लेकर चिंतित हूं आपसे टकरा स्वयं महादेव की शक्तियों से टकराने के समान उससे बचाव अत्यंत कठिन है परंतु हनुमान की प्राण रक्षा अभी भी हो सकती है क्योंकि उसकी माता अंजना पुत्र जीवी का व्रत रखा हे माता कृपा कीजिए आप ही बाल हनुमान की रक्षा कीजिए हनुमान की रक्षा उसकी माता ही कर सकती किंतु समय रहते उन्हें उसका उपाय करना उनका व्रत अभी पूर्ण नहीं हुआ है व्रत का अंतिम चरण अभी शेष है आप तो अपनी संतान की पीड़ा समझ सकती ह मेरी सहायता कीजिए मां मेरे पुत्र को मुझे लौटा जीवित पुत्रिका व्रत जो अश्विन मास की सप्तमी से लेकर नवमी तक किया जाता है अष्टमी के दिन महा निर्जला व्रत रखकर नवमी को पारण किया जाता है नवनी के साग के साथ नाचनी के प्रसाद खाकर और अपने पुत्र को खिलाकर व्रत पूर्ण करते हैं मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई संभव है उसी का परिणाम मेरे पुत्र को झेलना पड़ रहा गौरी ने मुझसे कहा था कि देवी के व्रत का चढ़ाया हुआ नोनी का साग स्वयं ग्रहण करने के पश्चात हनुमान को भी खिलाना परंतु वो हो नहीं पाया मुझे वो साग वो व्रत का प्रसाद हनुमान को खिलाना होगा तभी मेरा व्रत पूर्ण होगा और और देवी मां के आशीर्वाद से मेरा पुत्र सकुशल मेरे पास रहेगा मुझे अभी उसे ये प्रसाद खिलाना हो हम देवी मां के प्रसाद से इस मर्कट की रक्षा हो सकती है परंतु महानतम वाली देवी मां का प्रसाद इस मर्कट के मुख तक कभी नहीं पहुंचने देगा वहां उस ओर कुछ आहट हुई थी मुझे ऐसा प्रतीत हुआ जैसे वाली भैया वहां है हनुमान का जितना
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
-
[संगीत] किंतु मेरे परिवार पर से किस पर संकट आने वाला है ऋषिवर बताइए ना ऋषिवर संकट किस पर होगा यह सोचने के स्थान पर तुम्हें यह सोचना चाहि...
No comments:
Post a Comment