Wednesday, 31 December 2025

भस्म से हनुमान ने अयोध्या की रक्षा की Nirbhay Wadhwa Mahabali Hanuman Episode 216 Pen Bhakti

[संगीत] क्षमा करें माता मैंने ही इन्हे भोजन ग्रहण करने का आग्रह किया था इसमें इनकी कोई भूल नहीं है किंतु राम यदि तुमने किया भी था तो इन सबको समझना चाहिए कि यह सब राज नियम के विरुद्ध है सेवक और शासक है तो मनुष्य ही ना इनका जन्म राज परिवार में नहीं हुआ उससे इनका मान सम्मान तो नहीं घट जाता है ना यदि हमारे सेवक भूखे रहे तो हमारा भी कोई अधिकार नहीं है भोजन करने का का कर्तव्य है कि अपने प्रजा की देखभाल करें उनकी सुख सुविधा का ध्यान रखें किंतु राम यह सब सेवक है क्षमा करें माता अधि का अर्थ तुच्छ नहीं होता जितना मान सम्मान हमें मिलता है उतना ही मान समान इन्ह भी मिलना चाहिए और किसी को मान सम्मान देने से हमारा मान सम्मान नहीं घट जाता है [संगीत] माता महारानी कैकई अब इस बालक से भी सीख मिलने लगी आपको अब तो संभल जाइए अन्यथा इन सेविकाओं और आप में कोई अंतर नहीं करेगा यह राम राम पुत्र तुम्हारी सहृदयता और निस्वार्थ प्रेम अद्वित [संगीत] है भयभीत मत हो बैठ जाओ और प्रेम से भोजन ग्रहण करो क्या हुआ मैंने कहा ना भय भत मत हो बैठो [प्रशंसा] [संगीत] बैठो मैं लड्डू परोस देता हूं [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] अच्छा ये क्या हमने तो सोचा था हम बड़ी सहजता से सुमेरू पर आतंक मचा देंगे किंतु यहां तो प्रवाल पर्वत की पवित्र बूटी का रस छिड़का हुआ [प्रशंसा] है अब हम कैसे कैसे सुमेरू वासियों के देह में प्रवेश करेंगे किंतु समय कम है हमारे पास हमें शीघ्र ही कुछ करना होगा मित्र जब से युवराज हनुमान सुमेरू से गए हैं तब से महारानी अंजना ही नहीं पूरा सुमेरो ही उदास हो गया है तुम सत बोल रहे हो युवराज के मित्र भी उदास से रहते हैं जैसे सारी कड़ाए ही भूल गए [संगीत] हो हम भले इनकी देह में प्रवेश ना कर सके बुद्धि तो भ्रष्ट कर सकते हैं इनका माथा फिला तो सकते हैं किंतु एक बात है हनुमान के जाने से यहां पर शांति भी है अन्यथा कभी राक्षसों का आक्रमण कभी किसी नाक का आतंक तुम कहना क्या चाहते हो यह सब हमारे युवराज के कारण होता है हमारे युवराज तो ऐसे ही है युवराज के बारे में कुछ मत कहना नहीं तो तुम क्या कर लोगे यही करना है हमें यही करना है इन समस्त सुमेरू वासियों के मन को दूषित करना [संगीत] है एक बार इनका मन मस्तिष्क दूषित हो गया तो कैसी मित्रता कैसा प्रेम अराजकता हो जाएगी चारों ओ अत्याचारी हो जाएंगे सब राजन यज्ञ की सभी मत्रित की हुई पवित्र भस्म कोन सेवको के द्वारा राज भवन के चारों ओर खरवा देने से पिशाच आदि बुरी शक्तियां जो कहीं भी छुपकर बैठी हो सब भाग जाएंगी इस भस्म को पूरे नगर में चड़क दीजिए अवश्य गुरुदेव ऐसा ही होगा सुमन जी महाराज आप और सेवको रक्षकों को इस पवित्र भस्म वर्षा के कार्य में नियुक्त करा दीजिए जी संपूर्ण अयोध्या में इस पवित्र भस्म अत्यंत आवश्यक है जितनी शीघ्र हमें उन पिशा से मुक्ति मिलेगी उतना हम सबके लिए अच्छा [संगीत] होगा दो बार आक्रमण कर चुके हो प्रथम यज्ञ भंग करने का प्रयास किया और द्वितीय राज भवन के कक्ष से राम के अपन करने का प्रयास किया सुमन जी शीघ्र जाइए आप जो म मैं भी इस कार्य में सहायता करूंगा अब मैं राम भैया को दिखा दूंगा कि मैं हनुमान से भी अच्छा कार्य कर सकता हूं [संगीत] प्रणाम पिता प्रणाम गुरुदेव आयुष्मान भव गुरुदेव पिताश्री हम भी इस भस्म वर्षा के कार्य में सहयोग करना चाहते हैं अयोध्या की सुरक्षा के लिए हम भी योगदान करना चाहते [संगीत] हैं पुत्र लक्ष्मण मुझे अत्यंत प्रसन्नता है कि तुमने स्वयं इस कार्य में भाग लेने की इच्छा प्रकट की है जब राज परिवार के सदस्य ऐसे जनित कार्य में भाग लेते हैं तो उत्साह और भी बढ़ जाता है और वसे भी इस के लिए थ क इस पवित्र भस्म को एक दिन के पूर्व हमें संपूर्ण अयोध्या में छिड़काव करना [संगीत] है पिशाच से मेरे प्रभु और अयोध्या की सुरक्षा के लिए यह कार्य शीघ्र ही पूर्ण करना है क्षमा करें गुरुदेव महाराज आप मुझे आज्ञा दें मैं यह कार्य शीघ्र से शीघ्र पूर्ण कर सकता हूं मैं उड़कर यह पवित्र भस्म छिड़क सकता हूं और उड़कर भस्म छिड़कने से कम समय में यह कार्य पूर्ण हो जाएगा और इन सबको श्रम करने की आवश्यकता भी नहीं होगी हनुमान यदि तुम ऐसा करते हो तो इससे हम सबकी सहायता हो जाएगी पिशाच के संकट से जितना शीघ्र मुक्ति मिल जाए नगर के लिए उतना ही अच्छा है किंतु पुत्र तुम अयोध्या के अतिथि हो और अतिथि से कार्य करवाना अनुचित होगा किंतु गुरुदेव अतिथि पराय नहीं होते वो भी स्वजन ही होते हैं यदि कोई अपना स्वजन संकट में पड़ जाए और हम किसी की सहायता ना करें वह तो स्वार्थी ही हुआ ना [संगीत] गुरुदेव आप मुझे आज्ञा दे धन्य हो हनुमान तुम धन्य हो तुम्हारे माता-पिता ने उत्तम संस्कार दिए हैं मेरी आज्ञा है शीघ्र यह कार्य पूर्ण करो इस भस्म के छिड़का से पिशा जादी जहां कहीं भी छुपे बैठे होंगे उन्हें भागना ही [प्रशंसा] पड़ेगा हनुमान तुम धन्यवाद के पात्र हो किंतु पुत्र तुम अकेले इस कार्य को कैसे कर पाओ क्योंकि पवित्र भस्म की मात्रा बहुत अधिक है तुम एक साथ इसे नहीं ले जा सकते हो तुम अपने साथ इन सेवको को भी ले जाओ जो आपकी सहायता करेंगे आप उसकी चिंता ना महाराज मैं कम से कम समय में यह कार्य भली भाति पूर्ण कर लूंगा बस आप मुझे आज्ञा [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] दे जैसी तुम्हारी इच्छा अनुमान मेरी आज्ञा है तुम्ह प्रणाम [संगीत] महाराज [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] ता [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हमें ज्ञात नहीं था हनुमान तो विशेष शक्ति से युक्त [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] महाबली हनुमान की जय महाबली हनुमान की जय महाबली हनुमान की महाबली हनुमान की महाबली हनुमान [प्रशंसा] [संगीत] की हनुमान का यह घमंड अच्छा नहीं है सदैव दिखावा करने लगता [संगीत] है रखो ये व्यर्थ का सामान अपने पास हमें नहीं चाहिए पुराना सामान बिक्री करते हो ये अनुचित है मुखन जी जब आपको नहीं चाहिए था तो आपने क्रय क्यों [संगीत] किया सबकी बुद्धि कर देंगे भ्रष्ट हो जाएंगे सारे नष्ट अवश्य महाराज केसरी से मैं कहूंगा आपके इस अनुचित व्यवहार के बारे में महाराज केसरी क्या करेंगे अरे कैसे राजा है वो अपने पुत्र तक को दे दिया उन्होंने अपरिचित वेद्य को रखो ये सारा सामान अपने पास तूने मेरा सामान तोड़ा हमसे भिड़ो ग तुम्हारा यह साहस ो तुम्हारा ये साहस लड़ो लड़ो सुमेरू वासियों लड़ो [संगीत] मरो आधा कार्य तो मेरा पूरा हो ही गया है अब लक्ष सुमेरू का राज भवन बस सुमेरू का राज भवन और उसकी अंजने मा और यह सूचना पाते ही हनुमान एक क्षण भी नहीं रुकेगा अयोध्या में राम का जि लग तब अवतार करत विनय कर युगल प्रसार चकित चिव जनमन हर साते गिर समम बजरंगी हो जाते प्रभु की भूमि को करने पावन प्रतिपल प्रस्तुत अंजनि नंद न कार्य कठिन हो लघु या विशाल पल में करते केसरी लाल ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान पशुओं की देह में भी तो छुप सकते हैं पिशाच और पशु स्वयं की रक्षा नहीं कर सकते उनकी भी रक्षा हमें ही करनी [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] होगी यहां के बारे में तो सुना था पिशाच का गृह स्थान है [संगीत] यह यहां से तो अवश्य निकलेंगे [संगीत] पिशाच यहां पर तो कोई भी पशा नहीं है कहां चले गए [प्रशंसा] [संगीत] एकाएक हनुमान भैया आते ही होंगे अपना कार्य पूर्ण [संगीत] करके महाराज बहुत बड़ी समस्या आ गई है लगभग सारी सामग्री पिशाच के आक्रमण के कारण दूषित हो चुकी है अब यज्ञ कैसे [संगीत] होगा प्रणाम महाराज यह अच्छा नहीं हुआ राजन राज भवन और अयोध्या के लोगों की सुरक्षा का उपाय तो हमने कर दिया किंतु सामग्री ना होने से यज्ञ संपन्न कैसे होगा पचों का प्रभाव अयोध्या के आसपास बढ़ता ही जा रहा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] हनुमान भैया ने तो शीघ्र ही इतना बड़ा कार्य पूर्ण कर [संगीत] लिया [संगीत] प्रणाम गुरुदेव कल्याण हो प्रणाम महाराज महाराज मैंने संपूर्ण नगर में यह पवित्र भस्म छिड़क दिया है किंतु मुझे वहां कोई पिशाच नहीं दिखे आश्चर्य है अकस्मात सारे पिशा कहा चले गए हो सकता है व भाग गए हनुमान ने बुरी तरह परास्त किया था उ नहीं सुमंत जी पिशाच बहुत हठी होते हैं इतनी सहजता से किसी का पीछा नहीं छोड़ते और जब तक पिशाच राज समाप्त नहीं होगा तब तक उनके आतंक की संभावना बनी [संगीत] रहेगी किंतु गुरुदेव पवित्र भस्म के छिटका से हमने सबको सुरक्षित कर दिया हा राजन हनुमान के कारण यह कार्य इतनी शीघ्रता से संपन्न हो गया नगर सुरक्षित हो [संगीत] गया किंतु अब हम यज्ञ के बार हो यज्ञ सामग्री दूषित हो चुकी है सात समुंदर सात नदियों का जल इतने कम समय में कैसे आएगा बिना सामग्री य यज्ञ अपूर्ण ना रह जाए ना जाने क्या होने वाला है इस संकट से अब ईश्वर ही बचा सकते [संगीत] गुरुदेव यज्ञ में किसी प्रकार की रुकावट उत्पन्न नहीं होनी चाहिए मैं शीघ्र कुछ व्यवस्था करता हूं प्रणाम गु कल्याण हो सुन आइए यदि ये यज्ञ अपूर्ण रह गया तो बड़ा अनर्थ हो जाएगा प्रभु राम युवराज नहीं बन पाएंगे मैं ऐसा नहीं होने दूंगा किंतु मैं करूं क्या

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...