Wednesday, 31 December 2025

बाली ने सुग्रीव पर प्रहार क्यों किया था Nirbhay Sankat Mochan Mahabali Hanuman 357 Pen Bhakti

[संगीत] पुत्र हनुमान मेरे पुत्र सुग्रीव पर एक विकराल महा संकट छाया है उसे शीघ्र ही तुम्हारी सहायता की आवश्यकता है आप चिंता ना करें प्रभु मैं शीघ्र प्रस्थान करूंगा और भ्राता सुग्रीव के प्राणों पर कोई संकट नहीं आने दूंगा प्रणाम [संगीत] सूर्यदेव मंत्री जी आपका क्या विचार है सु स्मी बाली भैया अब जीवित [संगीत] है इतना सुखद आश्चर्य है भ्राता इतना सुखद आश्चर्य है वाली [संगीत] भैया [संगीत] विश्वास घाती मैंने तुम्हें उस कंदरा के समीप प्रतीक्षा करने के लिए कहा था परंतु पद लालच के वश में तुमने भ्रात द्रोह का नीज कृत किया है मेरी ही घात का प्रबंध करके मेरे ही सिंहासन पर विराजमान हो गए महाराज नहीं वाली भैया ऐसा नहीं है आप मेरा विश्वास की कहने सुनने को शेष क्या रह गया है प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती मैंने स्वयं अपने नेत्रों से तुमको सिंहासन पर बैठे हु देखा है नीच कपटी वाना अब मैं तुम्हें इस विश्वास घात का दंड [संगीत] दूंगा रुक जाइए महाराज रुक जाइए स्वामी बाली भैया कपटी लालची विश्वास घाती तुम जीवित रहने योग्य नहीं [संगीत] हो [संगीत] [संगीत] [संगीत] हनुमान प्रणाम वाली भैया इस मर्कट के समुख आने से मुझे भय का आभास क्यों हो रहा है हनुमान शत्रु तुम्हारा सामना करने के पूर्व असंख्य बार विचार करेगा और तुम्हारे समू खाने पर भया क्रांत हो जाएगा वाली भैया मेरा विश्वास कीजिए मैंने आपके साथ कोई द्रोह नहीं किया मैं एक वर्ष तक उस कंदरा के बाहर आपकी प्रतीक्षा करता रहा भैया मैंने जब आपके स्वर में चित्कार सुनी और उस कंधरा के मुख से बहती हुई रक्त की धारा को देखा तो मुझे आभास हुआ आभास हुआ तुम्हें आभास हुआ कि महानतम वाली परलोक सिधार गया इसीलिए तुम किष्किंदा लौटकर सर्वप्रथम राज सिंहासन पर विराजमान हो गए कपकी लालची नहीं वाली भैया तुम चले जाओ यहां से मेरे कार्य में हस्तक्षेप मत करो [संगीत] मरक [संगीत] सुग्रीव मेरे मार्ग से हट जाओ मरक बाली भैया रुक जाइए मैंने अपने गुरु सूर्यदेव को वचन दिया है कि मैं अपने भ्राता सुग्रीव के प्राणों की रक्षा करूंगा और अपने गुरु को दिए हुए वचन की मर्यादा मैं किसी भी मूल्य पर [संगीत] निभाऊंगा [संगीत] भता सुग्रीव आप शीघ्र प्रस्थान कीजिए ऋषिमुख पर्वत पहुंच आप यह तुम क्या कह रहे हो मरक सुग्रीव तुम कहीं नहीं जाओगे छोड़ो मुझे संकोच मत कीजिए भ्राता सुग्रीव शीघ्र प्रस्थान कीजिए आप मेरा सुझाव मानिए शीघ्रता कीजिए जाइए जाइए भ्राता सुग्रीव जाइए सुग्री प्रतीत होता है कि सुग्रीव से पहले मुझे तुम्हारा वद करना पड़ेगा [संगीत] [संगीत] मरक हनुमान शक्ति रूप में सदैव तुम्हारी पछ में स्थित रहूंगी स्मरण रखना पुत्र किसी भी ऋषि मुनि का श्राप मेरी शक्ति को प्रभावित नहीं कर [संगीत] सकता मुझे वाली भैया को युद्ध में उलझा कर रखना होगा जिससे भ्राता सुग्रीव को समय मिल जाए और वह सुरक्षित रिष्य मुख पर्वत पहुंच [संगीत] सके [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] वाली भैया की जितनी ख्याति सुनी थी वो तो उससे कहीं अधिक बलशाली [संगीत] है [संगीत] मैं तो यहां युद्ध में उझा हुआ जत नहीं कि भ्राता सुग्रीव विषम पर्वत पहुंचे की नहीं कदाचित उनको मेरी सहायता की आवश्यकता होगी मुझे यथाशीघ्र उनके पास जाना [संगीत] [संगीत] चाहिए रुक जाओ मर्कट सामना करो मेरा अन्यथा जहां जाओगे वही आकर वद करूंगा तुम्हारा और तुम्हारे भ्राता सुग्रीव का [संगीत] राता सुग्रीव इसी दिशा से रिष्य मुख पर्वत समीप पड़ेगा आप आगे बढ़ते जाइए सुग्रीव मैं तुम्हें बचकर जाने नहीं दूंगा [संगीत] सुग्रीव मैं तुम्हें बचकर जाने नहीं दूंगा वाली जोहत सुग्रीव चाहो तब कपीश ही प्राण बचा गिरी रिष्य पहुंचाए दत्त वचन गुरुवर को निभाए हनुमत अपने वचन के पालक वीर प्रतापी राम के साधक जय हो तुम्हारी श्री हनुमंत तुम्हरा सुमिरन पीर का [संगीत] अंतता सुग्रीव हमें शीघ्रता करनी होगी हम ष मुख पर्वत की सीमा पर पहुंचने ही [संगीत] [संगीत] [संगीत] मैं तुम्हें श्राप देता हूं यदि ऋ मुख पर्वत के परी में तुम्हारा एक पाव भी पड़ा तो तुम्हारा सर खंडित होकर शों टुकड़ों में बिखर जाएगा सुग्री परंतु ऐसा क्या था प्राण वल्लभ जो वाली को ऋषिमुख पर्वत पर जाने से रोक रहा था एक श्राप असुर मायावी दुरम से पूर्व उसके अति बलशाली भाई विकराल असुर दुंदुभी ने वाली को चुनौती देने की भूल की बल के अहंकार में दुंदुभी की मती भ्रष्ट हो चुकी थी और वह वाली को युद्ध के लिए ललकार के लिए आ पहुंचा वाली सदैव युद्ध के लिए तत्पर रहता था उसने अविलंब दुंदुभी की चुनौती स्वीकार कर ली युद्ध के आरंभ से पूर्व दुंदुभी ने एक अत्यंत भयंकर जंगली वृषभ का रूप धारण कर [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] लिया महानतम वाली को चुनौती देने का एक ही परिणाम संभव है मृत्यु अभी तो तुम आहत हुए हो वाली तुम्हें तुम्हारे काल के पास भेजेगा [संगीत] [संगीत] इस पशु का वध करने के उपरांत उसे यहां फेंक कर मेरे आश्रम को दूषित करने का अपरा किसने किया है कौन है [संगीत] व कं के द नरेश वाली तुमने मेरे मदन ऋषि के आश्रम को अपवित्र करने का अपराध किया है उसके दंड स्वरूप में तुम्ह श्रप देता हूं य मुख पर्वत के पर में एक पा भी पड़ा तो तुम्हारा सर खंडित होकर स टुकड़ों में बिखर जाएगा मैं समझ गई प्राण वल्लभ मतंग ऋषि के श्राप के कारण षय मुख पर्वत पर बाली का प्रवेश वर्जित था जिसके कारण वह एक मात्र ऐसा स्थान था जहां बाली सुग्रीव को कोई भी क्षति नहीं पहुंचा सकता था हा देवी और वाली वहां तक पहुंच पाए उसके पूर्व हनुमान और सुग्रीव ऋषिमुख पर्वत की सीमा में प्रविष्ट हो गए हताश वाली को रिक्त हाथ वहां से लौटने पर बाध्य होना पड़ा इस बीच हनुमान और सुग्रीव निरंतर चलते चलते कलात होकर पंपास पहुंच गए वहां उनकी भेंट रीच राज जामवंती से हुई जिनकी शरण में उन दोनों ने पंपा सुर में रहने का ही निश्चय किया और तभी हनुमान को एक असाधारण एवं अलौकिक आकर्षण का अनुभव [संगीत] हुआ [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ध धध [संगीत] [संगीत] ध रा [संगीत] राम [संगीत] राम [संगीत] राम [संगीत] राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम श्री राम श्री राम श्री राम श्री राम श्री राम श्री राम श्री राम श्री राम राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम [संगीत] राम [संगीत] राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम श्रीराम श्रीराम प्रभु श्री राम जय हनुमान प्रभु श्री राम जय हनुमान

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...