Sunday, 28 December 2025

द्रौपदी को अपने दुखों का दिन स्मरण हुआ Mahabharat Scene B R Chopra Pen Bhakti

[संगीत] महाभारत आंखें झुकाना इस समस्या का समाधान नहीं है पिता मैं आपके कुल द्रौपदी एक वस में लिपटी हुई ऋतु स्नान किए बिना इस भरी गुरु सभा में आपको प्रणाम करती हू और यह जानना चाहते हो कि आप मुझे आज क्या आशीर्वाद देंगे आप तो जेष्ठ गुरु है महावीर है श्रेष्ठ विद्वान है बताइए क्या आपने केवल गुरु सिंहासन की रक्षा का वाचन लिया था क्या गुरु मर्यादा का कोई महत्व नहीं है आप जैसे महापुरुष शर को से मुना श नहीं देता जो स्त्री पांच पाच पुरुषों के साथ रहती हो वो पत्नी नहीं व होती है और का मान क्या और अपमान क्या ये यहां नगन भी लाई जाती तब भी अनुचित ना होता बैठ जाओ मेरा मित्र बिल्कुल ठीक कह रहा है एक विष्य या दासी का मान क्या और अपमान क्या दुशासन मेरी इस दासी को नग ना कर दो देखूं तो सही कि जिस दासी को मैंने जीता है वो लगती कैसी है [हंसी] [हंसी] बहन मैं अपने इन केश को समझा रही थी भैया कि इनके वनवास के समाप्त होने के दिन आ गए इन सरपो ने मुझे 1 वर्ष जसा है भैया 13 वर्ष और 13 वर्षों का हर दिन शताब्दियों से बढा था इस अपमान का विष हम सबने पिया है कल्याणी हम सबने पिया है मुझे दुशासन की छाती का लहू मिल जाएगा ना मेरे वरन तो शासन की छाती का लहू अवश्य मिलेगा अवश्य मिलेगा तब मैं पांडव सेना के प्रधान सेनापति महारथ दृष्ट दम को सादर प्रणाम करती हूं दुशासन के रक्त से जब तक होना स्नान तब तक करती द्रौपदी महा प्रलय का ध्यान महा प्रलय का [संगीत] ध्यान आभार महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]

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